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बनारस में घुमंतू गिरोह के दो चोर गिरफ्तार, 1.52 लाख नकद समेत लाखों के जेवर बरामद

बनारस में घुमंतू गिरोह के दो चोर गिरफ्तार, 1.52 लाख नकद समेत लाखों के जेवर बरामद
Sep 12, 2025, 11:12 AM
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Posted By Monisha Rai

वाराणसीः गांव संग शहर में घूम-घूमकर बंद पड़े मकान या कम लोगों के रहने वाले आवास को निशाना बनाकर चोरी करने वाले घूमंतू गिरोह के दो शातिर चोरों को कपसेठी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. चोरों के पास 1.52 लाख नकदी समेत चोरी किए गए कई तरह के जेवरात संग दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं. बरामद जेवरात का मूल्य लगभग ढाई लाख रुपये आंका गया है.


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गोमती जोन के डीसीपी ने दी जानकारी


उक्त जानकारी गोमती जोन के डीसीपी आकाश पटेल ने शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में दी. उन्होंने बताया कि गिरफ्त में आए चोरों के कुछ साथियों के नाम पूछताछ में सामने आए हैं जिनकी तलाश सरगर्मी से की जा रही है. पकड़े गए चोर भदोही जनपद के मूल निवासी हैं जो स्थान बदल-बदल कर चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे.


इस तरह गिरफ्त में आए चोर


डीसीपी के अनुसार पिछले माह 29 अगस्त की रात कपसेठी के सरावां गांव में चोरों के गिरोह ने एक व्यक्ति के यहां सेंध लगाकर लाखों का सामान उड़ाया था जिसमें काफी नकदी भी थी. उस घटना के बाद मौके पर फारेसिंक टीम समेत डाग स्कायवड को बुलाया गया था. छानबीन में मिली जानकारी के आधार पर चोरों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया था. इस टीम को सुबह सूचना मिली कि उक्त चोरी की घटना में शामिल दो चोर बाहरी नाला पुलिया के पास अपने साथियों का इंतजार कर रहे हैं. तत्काल ही पुलिस टीम घेराबंदी कर मौके पर पहुंच इन दोनों को दबोच लिया.


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चोरी के बाद रुपयों का किया था बंदरबाट


पूछताछ में इन दोनों चोर ने स्वीकार कि उक्त चोरी की घटना को अंजाम इन्होंने दो अन्य साथियों संग अंजाम दिया था. चोरी के बाद मिले रूपयों में से 50 हजार इन्होंने दो साथियों को दे दिया था. इन्होंने बताया कि चोरी का माल इन्होंने छिपा रखा है जिसे पुलिस ने इनकी निशानदेही पर बरामद कर लिया. इन्होंन बताया कि वे वाराणसी, जौनपुर और आसपास के जिलों में चोरी की कई घटनाओं अंजाम दे चुके हैं.


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पुलिस की निगाह से बचने के लिए करते थे ये काम


चोरों के अनुसार वे चोरी की घटना को अंजाम देने के बाद मिले माल व रुपयों को किसी के घर में या किसी सुरक्षित स्थानों पर छिपा देते थे. इसके बाद वे सामान्य ढंग से रहते थे जिससे उनपर किसी को शक न हो. इसके अलावा अलग अलग जनपदों में घूमकर चोरी करने के बाद ⁠रेलवे स्टेशन और फुटपाथ पर डेरा डाल देते थे. वे मुख्य मार्ग से जाने सवारी वाहन में सफर नहींम करते थे. उन्हें डर रहता था वे सीसीटीवी कैमरा की नजर में आ सकते हैं या पहचाने जा सकते हैं. इसके अलावा वे मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं करते थे जिससे उनका लोकेशन किसी को मिल सके. इन चोरों के बताए जाने पर गिरोह के तीन सदस्यों को जौनपुर पुलिस गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है.

काशी विद्यापीठ की हॉकी टीम ने अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई
काशी विद्यापीठ की हॉकी टीम ने अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई
वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की हॉकी टीम ने अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी (पु.) प्रतियोगिता 2025-26 के लिए क्वालीफाई कर लिया. काशी विद्यापीठ की टीम ने सम्बलपुर विश्वविद्यालय, सम्बलपुर में आयोजित पूर्वी क्षेत्र अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी (पु.) प्रतियोगिता 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए उक्त प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने हेतु अर्हता प्राप्त की. अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी (पु.) प्रतियोगिता 22 से 28 जनवरी तक सम्बलपुर विश्वविद्यालय, सम्बलपुर में आयोजित है.हॉकी (पु.) टीम के मैनेजर प्रो. संजय कुमार सिंह एवं टीम कोच सतीश नारायण सिंह हैं.इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी , क्रीड़ा परिषद उपाध्यक्ष प्रो. ब्रजेश कुमार सिंह, क्रीड़ा परिषद सचिव डॉ. उर्जस्विता सिंह, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय, परीक्षा नियंत्रक दीप्ति मिश्रा, डॉ. राधेश्याम राय, कु. बीना, डॉ. अमरेन्द्र कुमार सिंह, राम लाल, ओंकार नाथ, अरिवन्द कुमार, संतोष कुमार आदि लोगों ने हर्ष व्यक्त करते हुए हॉकी (पु.) टीम को बधाई एवं शुभकामनायें दी. बी.ए. के छात्रों का छात्रवृत्ति बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन 18 जनवरी से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ मुख्य परिसर के बी.ए. प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों का छात्रवृत्ति के संदर्भ में बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन 18 जनवरी को होगा.वहीं, बी.ए. द्वितीय एवं तृतीय वर्ष का 19 जनवरी को आयोजित है. कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय ने बताया कि पूर्वाह्न 09:30 से अपराह्न 01 बजे तक छात्राओं का एवं अपराह्न 01:30 से शाम 05 बजे तक छात्रों का बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन मानविकी संकाय में होगा.ALSO READ : वाराणसी में आज बूथ पर मतदाता सूची पढ़ेंगे बीएलओ
मौनी अमावस्या कब है, जाने स्नान-दान का समय
मौनी अमावस्या कब है, जाने स्नान-दान का समय
Mauni Amavasya 2026: हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या या माघ अमावस्या का काफी महत्व होता है. हिंदू धर्म की पवित्र तिथियों में ये अमावस्या एक खास पर्व माना जाता है. इस दिन स्नान, दान, तर्पण, व्रत, मौन, साधना करने का विशेष महत्व है. इस पावन दिन पर श्रद्धालु संगम तट या फिर पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं और जरूरतमंदों में दान भी करने की परंपरा को निभाते हैं. पितृ तर्पण और मौन व्रत के लिए भी मौनी अमावस्या का दिन काफी श्रेष्ठ होता है.कब है मौनी अमावस्या बता दें, मौनी अमावस्या इस साल रविवार 18 जनवरी 2026 को पड़ रही है. हालांकि तिथि को लेकर भक्त काफी असमंजस में हैं कि मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है या 19 जनवरी को है. तिथि में कंफ्यूजन होने के कारण स्नान-दान के शुभ मुहूर्त में भी दुविधा है. इसलिए, माघ अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 जनवरी को देर रात 12 बजकर 3 मिनट से शुरू होगी और 19 जनवरी को देर रात 1 बजकर 21 तक रहेगी. 18 जनवरी उदयातिथि और पूरे दिन अमावस्या रहेगी. ऐसे में इसी तिथि पर मौनी अमावस्या मनाई जाएगी.मौनी अमावस्या पर स्नान-दान का समय कहा जाता है कि, मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रयाग के संगम समेत पवित्र नदियों में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. लोग तड़के सुबह से ही पवित्र नदियों के तट पर पहुंचकर स्नान करते हैं. मान्यता है कि, इस दिन किया गया स्नान पापों का नाश करता है और पुण्य में वृद्धि होती है. इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान का काफी महत्व बढ़ जाता है. इस बार तो मौनी अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. साथ ही इस दिन पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का शुभ संयोग भी रहेगा.इन तिथियों में स्नान के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त को सबसे उत्तम माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के लिए सुबह 05.27 से 06.21 मिनट तक का समय रहेगा. वहीं दोपहर में स्नान के लिए दोपहर 12.10 से 12.53 मिनट तक का समय है. स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें. इसके बाद पितरों को जल से तर्पण देकर आप अपनी क्षमतानुसार दान-दक्षिणा कर सकते हैं.Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि इन मान्यताओं की पुष्टि journalistcafenews किसी भी हाल में नहीं करता है. इसलिए किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
आखिर कैसे चकनाचूर हुई Salim-Javed की आईकॉनिक जोड़ी?
आखिर कैसे चकनाचूर हुई Salim-Javed की आईकॉनिक जोड़ी?
Salim-Javed: जावेद अख्तर और सलीम खान ने अलग होने से पहले 24 फिल्मों में साथ काम किया था, जिनमें से 22 हिट रही थी. जिनमें दीवार, शोले, डॉन और जंजीर जैसी फिल्में हिंदी सिनेमा को देने वाली मशहूर जोड़ी सलीम-जावेद पर प्राइम वीडियो ने डॉक्युसीरीज एंग्री यंग मेन रिलीज की है. इस सीरीज में सलीम-जावेद जोड़ी के सलीम खान और जावेद अख्तर से जुड़ी अनदेखी और अनकही बातों को पेश किया गया है. इस सुपरहिट जोड़ी ने एक साथ 24 फिल्मों की कहानी संग संवाद लिखे जो ब्लॉकबस्टर रही. लेकिन 21 जून 1981 को ये जोड़ी ऐसे टूटी मानों इन दोनों के बीच का एक गहरा रिश्ता चकनाचूर हो गया. वो जोड़ी जिसका कलम चलाना फिल्म के हिट होने की गारंटी थी.पल भर में कैसे बिखर गई बेस्ट जोड़ीये वहीं जोड़ी है जिसने विज्ञापन देकर शोले के हर सेंटर से एक करोड़ रुपये कमाने का दावा किया था, फिर फिल्म का ये आंकड़ा तीन करोड़ तक पहुंच गया. वो जोड़ी जिसने जंजीर के पोस्टर पर खुद ही एक पेंटर को पैसे देखकर सलीम जावेद का नाम लिखवा दिया था. वो जोड़ी जो एक समय फिल्म के हीरो से ज्यादा फिल्म लिखने की फीस ले रही थी. इस जोड़ी ने सिर्फ 18 दिन के अंदर ब्लॉकबस्टर फिल्म दीवार लिख डाली थी. इतनी खूबिया होने के बाद भी ये जोड़ी बिखर कर रह गई, जिसका कारण हर कोई जानना चाहता है.इसे लेकर एंग्री यंग मेन में एक प्रसिद्ध भारतीय कवि, गीतकार और पटकथा लेखक हैंजावेद अख्तर खुद बताते हैं कि जोड़ी कैसे टूटी. उन्होंने बताया कि करियर का बसंत जा रहा था. हमारे काम में थकान आ रही थी. कभी हम दोनों 24 में से 18 घंटे साथ रहते थे. लेकिन अब हमारे सर्कल अलग हो रहे थे. दोस्त अलग हो रहे थे. इस तरह मैंने अलग होने का फैसला लिया, इस पर सलीम खान ने कहा कि जावेद अलग होना चाहते थे. ऐसे में रोकने के कोई मायने नहीं थे. इस तरह 1981 में भारतीय सिनेमा के इतिहास की ये सबसे सफल जोड़ी अलग हो गई.सलीम और जावेद के अलग होने पर रो पड़ी स्क्रिप्टराइटिंग पर अफसोस सलीम और जावेद के अलग होने के बाद ये जोड़ी अकेले-अकेले स्क्रिप्टराइटिंग की दुनिया में कुछ भी यादगार नहीं कर सकी. हालांकि सलीम खान ने नाम जैसी फिल्म लिखी और जावेद अख्तर ने बेताब, मशाल और अर्जुन जैसी फिल्में. लेकिन सलीम-जावेद जैसा इतिहास ये दोहरा नहीं पाए. हालांकि सलीम-जावेद से अलग होने के बाद जावेद अख्तर ने गीतकार के तौर पर अपनी पहचान कायम कर ली. उनके सलीम खान से अलग होने की एक वजह उनका लिरिक्स की दुनिया की ओर रुझान भी बताया जाता है. लेकिन इस जोड़ी का अलग होना सिर्फ उनके फैन्स का नुकसान था बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी बहुत बड़ा आघात था.