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IMS BHU ने 100 से अधिक जन्मजात हृदय रोगियों का किया कैथेटर इलाज, मिली नई जिंदगी

IMS BHU ने 100 से अधिक जन्मजात हृदय रोगियों का किया कैथेटर इलाज, मिली नई जिंदगी
Sep 12, 2025, 10:45 AM
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Posted By Gaandiv


वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (IMS) इन दिनों देशभर में सुर्खियाँ बटोर रहा है. वजह है – कार्डियोलॉजी विभाग की ऐतिहासिक उपलब्धि,महज 10 महीनों में 100 से अधिक मरीजों का जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease – CHD) का इलाज कैथेटर-आधारित तकनीक से सफलतापूर्वक किया गया जिससे उनको नई जिंदगी मिली. खास बात यह है कि इनमें मरीजों की उम्र 12 दिन के नवजात शिशु से लेकर 65 वर्ष तक रही.


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दिल की धड़कनों से जुड़ी जंग


जन्मजात हृदय रोग (CHD) वह स्थिति है, जब बच्चे का हृदय जन्म के समय ही सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाता. यह समस्या भारत में हजारों बच्चों और बड़ों को प्रभावित करती है. अक्सर इसका पता समय पर नहीं चलता और लोग निमोनिया, सांस की तकलीफ़, बार-बार बीमार पड़ना या शरीर के नीला पड़ने जैसी समस्याओं से जूझते रहते हैं.

पहले इसका प्रमुख विकल्प ओपन-हार्ट सर्जरी हुआ करता था, जिसमें बड़ा चीरा, अधिक जोखिम, लंबे समय तक भर्ती रहना और भारी खर्च शामिल था. लेकिन IMS BHU ने यह साबित किया कि आधुनिक कैथेटर-आधारित तकनीक से अब यह इलाज आसान, सुरक्षित और किफायती बन गया है.


कैसे होती है यह प्रक्रिया ?


इस तकनीक में डॉक्टर मरीज के दिल तक एक पतली नली (कैथेटर) के जरिए पहुंचाते हैं और वहीं से हृदय की खराबी को ठीक कर देते हैं.


इसमें चीरा नहीं लगता, टांके नहीं लगते.


अधिकतर मरीज अगले ही दिन डिस्चार्ज हो जाते हैं.


संक्रमण का खतरा बेहद कम होता है.


और सबसे बड़ी बात – यह इलाज अब गरीब मरीजों के लिए भी उपलब्ध है, क्योंकि आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री कोष और प्रधानमंत्री कोष जैसी योजनाएं अधिकांश प्रक्रियाओं को कवर करती हैं.


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IMS BHU में अब नियमित होने वाले कैथेटर-आधारित उपचार


एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) डिवाइस क्लोजर


वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) क्लोजर


पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) डिवाइस क्लोजर एवं PDA स्टेंटिंग


बलून पल्मोनरी वाल्वोटोमी (BPV)


बलून एओर्टिक वाल्वोटोमी (BAV)


सुपीरियर वेना कावा (SVC) स्टेंटिंग


अन्य जटिल संरचनात्मक हस्तक्षेप


चिकित्सकों ने कहीं यह बात...


प्रो. विकास (विभागाध्यक्ष, कार्डियोलॉजी) -“ये प्रक्रियाएँ अब हमारे यहां नियमित रूप से हो रही हैं. सरकारी योजनाओं के अंतर्गत आने से हर वर्ग के मरीजों तक यह आधुनिक इलाज पहुंच रहा है. हमारी कोशिश है कि किसी भी मरीज को पैसों के अभाव में जीवन से समझौता न करना पड़े.”


डॉ. सिद्धार्थ - “जहाँ भी संभव हो, कैथेटर-आधारित उपचार को प्राथमिकता देनी चाहिए. यह आसान और सुरक्षित है. ओपन-हार्ट सर्जरी की तुलना में इसका लाभ अधिक है.”


डॉ. प्रतिभा - “जन्मजात हृदय रोग सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं. बहुत से वयस्क बिना निदान के जीते रहते हैं और बार-बार बीमार पड़ते हैं. हमारा संदेश है – ऐसे लक्षण दिखें तो समय पर जांच कराएं, क्योंकि सही समय पर किया गया इलाज पूरी ज़िंदगी बदल सकता है.”


संस्थान के नेतृत्व की प्रतिक्रिया


प्रो. एस. एन. संखवार, निदेशक, IMS BHU - “यह हमारे संस्थान के लिए गर्व का क्षण है. नवजात शिशुओं से लेकर बुज़ुर्ग मरीजों तक को लाभ पहुंचाना हमारे चिकित्सकों की निपुणता और समर्पण का प्रमाण है. अब वाराणसी में भी विश्वस्तरीय, न्यूनतम चीरे वाली तकनीक से हृदय रोग का इलाज संभव है.”


डॉ. के. के. गुप्ता, अधीक्षक, एसएसएच अस्पताल - “यह उपलब्धि केवल कार्डियोलॉजी ही नहीं, बल्कि एनेस्थीसिया और सभी सहयोगी विभागों के उत्कृष्ट टीमवर्क का नतीजा है. एसएसएच हमेशा से मरीज-केंद्रित देखभाल के लिए प्रतिबद्ध रहा है और यह सफलता उसी का उदाहरण है.”


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टीमवर्क की मिसाल


इस उपलब्धि के पीछे रही मजबूत टीम –


कार्डियोलॉजी विभाग: प्रो. विकास, डॉ. धर्मेंद्र जैन, डॉ. ओम शंकर, डॉ. उमेश, डॉ. सुयश, डॉ. सौमिक, डॉ. राजपाल और डॉ. प्रतिभा


एनेस्थीसिया विभाग: डॉ. ए. पी. सिंह, डॉ. संजीव और डॉ. प्रतिमा


वाराणसी बना हेल्थकेयर का हब


BHU का यह प्रयास न केवल पूर्वांचल, बल्कि पूरे उत्तर भारत के मरीजों के लिए जीवनदायिनी पहल है.अब मरीजों को महंगे इलाज के लिए महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा.

IMS BHU ने साबित कर दिया है कि वाराणसी केवल धार्मिक-सांस्कृतिक नगरी ही नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा का भी एक बड़ा केंद्र बन चुका है.

अमेरिका की हिरासत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो, ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिका की हिरासत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो, ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को आज गिरफ्तार कर लिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला में एक बड़ी कार्रवाई की है. इस ऑपरेशन में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को अपनी हिरासत में लेकर देश से बाहर निकाल दिया है. ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिया है. यह कार्रवाई अकेले नहीं, बल्कि अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर की गई है. ट्रंप के मुताबिक इस पूरे ऑपरेशन की सभी जानकारी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दी जाएगी. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका की डेल्टाफोर्स ने पकड़ा है.क्या चीन भागने वाले थे मादुरोवेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर लगातार डोनाल्ड ट्रंप दबाव बनाने के लिए कैरिबियन में बड़े पैमाने पर अपनी सेना तक तैनात कर रखी थी. जिसके चलते लगातार ड्रग्स वाली नाव पर हमले हो रहे थे. इन्हें देखकर मादुरो ने ये संकेत दिया था कि वह ड्रग तस्करी और तेल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार हैं. यहां तक की राष्ट्रपति मादुरो ने वेनेजुएला के सरकारी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका जहां चाहे और जब चाहे बातचीत कर सकता है, इसके लिए वो पुरी तरह से तैयार है, इस बयान से पहले उन्होंने बीते शुक्रवार को चीन विशेष दूत किउ शियाओची से वेनेजुएला की राजधानी कराकस में मुलाकात की थी. जिसे देख अटकलें लगाई जा रही हैं कि चीन को इस तरह के अटैक की खबर थी और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को देश से बाहर निकालने का ऑफर दिया गया. लेकिन चीन जाने से पहले ही उन्हें अमेरिका ने अपनी हिरासत में ले लिया.कराकस में सुनाई दिए जोरदार धमाके मादुरो के चीन भागने वाले दावे के कुछ ही घंटों पहले वेनेजुएला की राजधानी कराकस में जोरदार धमाके सुनाई देने लगे. जहां कई घंटों तक शहर के कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं. आसमान में लड़ाकू विमान उड़ते दिखे और कई जगहों पर काले धुएं के गुबार नजर आए. शहर के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक बड़े सैन्य अड्डे के आसपास बिजली गुल हो गई. लोग घबराकर सड़कों पर निकल आए और मोबाइल से वीडियो बनाने लगे. इसका मंजर सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तेज रोशनी और धमाकों के बाद उठता धुआं साफ देखा जा सकता है.इस मामले में वेनेजुएला सरकार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि हमले सिर्फ कराकस तक सीमित नहीं थे बल्कि मिरांडा अरागुआ और ला गुएरा राज्यों में भी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है. इसके बाद राष्ट्रपति मादुरो की ओर से देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई और सुरक्षा बलों को पूरी तरह अलर्ट कर दिया गया. वहीं इस हमले का आरोप अमेरिका पर लगाया गया है.
दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे CM योगी, अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था की ली समीक्षा
दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे CM योगी, अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था की ली समीक्षा
वाराणसी : दो दिवसीय दौरे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को वाराणसी पहुंचे. मुख्यमंत्री शाम को बाबतपुर एयरपोर्ट पर पहुंचे और वहां से सीधे सर्किट हाउस पहुंचे. सर्किट हाउस में कुछ देर विश्राम के बाद उन्होंने, शहर के विकास परियोजनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने के लिए उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की.इसके बाद सीएम योगी कालभैरव दर्शन पूजन, काशी विश्वनाथ दर्शन पूजन करेंगे और टाउनहॉल के रैन बसेरे में रहने वालों से मुलाकात करेंगे.यहां कंबल बांटेंगे और भोजन वितरण करेंगे. इसके बाद वे सर्किट हाउस आकर विश्राम करेंगे.अगले दिन, रविवार को सुबह 11 बजे वे संपूर्णानंद नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निरीक्षण करेंगे. इसके बाद सिगरा स्टेडियम में आयोजित 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबाल चैंपियनशिप के उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लेंगे. दोपहर दो बजे वे एयरपोर्ट से लखनऊ के लिए रवाना होंगे.ALSO READ : काशी में वॉलीबॉल का महाकुंभ: 72वीं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे, पीएम मोदी
क्या आपको भी सर्दियों में हो रहा यूरिन इन्फेक्शन, जाने बचाव
क्या आपको भी सर्दियों में हो रहा यूरिन इन्फेक्शन, जाने बचाव
सर्दियों की पहली लहर आते ही हमारे शरीर में कई तरह से बदलाव होने शुरू हो जाते है. हवा में ठंडक बढ़ते ही त्वचा रूखी होती है, होंठ फटते हैं, प्यास कम लगती है और हम धीरे-धीरे गर्म चीज़ों की ओर खिंचने लगते हैं. लेकिन एक बदलाव ऐसा भी है जो ज़्यादातर लोग महसूस करते हैं, फिर भी इसे गंभीरता से लेने के बजाय इसमें लापरवाही बरतनी शुरू कर देते है. अक्सर कुछ लोगों को ठंड भरे मौसम में यूरिन इंफेक्शन की संभावना बढ़ने लगती है, कई लोग इसे ठंड का साधारण असर समझते हैं, पर बात इतनी सी नहीं हैं, क्योंकि कभी-कभी अंदरूनी असर भी काफी गहरा होता हैं.कभी-कबार तो लोगों को यूरिन समस्या काफी होने लगती है, जैसे सर्दियों में बार-बार यूरिन पास करने की इच्छा, जलन, पेशाब में गंध, या निचले पेट में हल्का दर्द महसूस करते हैं, तो यह सिर्फ ठंड की शरारत नहीं है, यह संकेत हो सकता है कि आपका मूत्राशय, गुर्दे या मूत्रमार्ग ठंड की वजह से संवेदनशील हो रहे हैं. आयुर्वेद में इसे एक बेहद दिलचस्प दृष्टिकोण से समझाया गया है — मौसम, दोष और शरीर का संतुलन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं, जैसे-जैसे तापमान गिरता है, वैसे-वैसे वात और कफ दोष अपना प्रभाव बढ़ाते हैं, और यही बदलाव कई बार मूत्र संबंधी समस्यां बनने में जरा भी देर नहीं लगने देता. इसलिए आज हम आपको ये बताएंगे कि ठंड में यूरिन इंफेक्शन से जुड़ी समस्यां क्यों बढ़ने लगती है.ठंड में यूरिन इंफेक्शन क्यों बढ़ता हैसर्दियों में आपका शरीर अपनी गर्मी को बचाने की कोशिश करता है. शरीर की रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ने लगती हैं ताकि गर्मी बाहर न निकले. यही सिकुड़न मूत्रमार्ग और उसके आसपास के हिस्सों को थोड़ा संवेदनशील बनाती है, इससे पेशाब साफ़-साफ़ निकल नहीं पाता और रुकावट जैसी स्थिति बनती है, ऐसी स्थिति में बैक्टीरिया को पनपने का मौका मिल जाता है, जिससे यूरिन समस्या बढ़ती है. सर्दियों में प्यास कम लगना भी एक बड़ी वजह है, पर कुछ भी करके हमें पानी पीते रहना चाहिए, नहीं तो पानी कम पीने से मूत्र अधिक गाढ़ा हो जाता है, जो पेशाब के जरिए बाहर निकलने में दिक्कते पैदा करता है. साथ ही गाढ़ा मूत्र बैक्टीरिया के बढ़ने के लिये उपयुक्त वातावरण बनाता है. इसके अलावा ठंड में लोग अक्सर बाथरूम जाने से भी कतराते हैं, पर ये परिणाम कई बार गंभीर हो जाते हैं.यूरिन इंफेक्शन के लक्षण पहचानेंसर्दियों के मौसम में शरीर कई बार हल्के संकेत भी ज़्यादा स्पष्ट महसूस नहीं होने देता है, ऊपरी तौर पर सब सामान्य लगता है पर मूत्र तंत्र के भीतर छोटे बदलाव शुरू हो चुके होते हैं. इसलिए UTI को जल्दी पहचानना बेहद जरूरी है ताकि संक्रमण गहराने न पाए. अगर आपको पेशाब करने में हल्की जलन महसूस हो या बार-बार पेशाब की इच्छा के बावजूद बहुत कम मूत्र आ रहा हो, तो इसे साधारण ठंड समझकर टालना समझदारी नहीं है, कुछ लोग इसे पानी कम पीने से जोड़ देते हैं, जबकि यह UTI का शुरुआती चरण हो सकता है.सर्दियों में UTI से बचने की ये सावधानियाँसावधानियाँ किसी भी संक्रमण से बचने का सबसे सरल तरीका हैं. सर्दियों में वात और कफ दोनों बढ़ते हैं इसलिए आपको ऐसी आदतें अपनानी चाहिए जो शरीर को गर्म रखें, मूत्रमार्ग को साफ रखें और प्यास की कमी को संतुलित करें. पानी पीने की नियमित आदत बनाएं, पेशाब कभी न रोकें, जननांगों की स्वच्छता पर ध्यान दें, गरम और सुपाच्य भोजन ही खाए, बहुत भारी ऊनी कपड़े कभी-कभी पसीने को रोक देते हैं जिससे क्षेत्र नम होकर बैक्टीरिया के लिये अनुकूल वातावरण बना देता है, इसलिए लेयरिंग करें पर ऐसे कपड़े चुनें जिनसे त्वचा सांस ले सके. इन्हें अपनाकर आप सर्दियों में काफी हद तक UTI से बचाव कर सकते हैं.