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बंगाल के रुझानों में भाजपा आगे, सदमें में ममता बनर्जी

बंगाल के रुझानों में भाजपा आगे, सदमें में ममता बनर्जी
May 04, 2026, 07:15 AM
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Posted By Preeti Kumari

BJP ahead in Bengal trends, Mamata Banerjee in shock


बंगाल विधानसभा की कुल 293 सीटों पर दो चरणों में मतदान हुआ था. 23 अप्रैल को पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हुई थी. तो राज्य की बाकी बची 142 विधानसभा सीटों पर दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले गए थे. हालांकि, एक सीट फालता पर 21 मई को फिर वोटिंग होनी है. मतगणना आज सोमवार 4 अप्रैल की सुबह से ही जारी है. मतगणना के शुरुआती रुझानों में भाजपा को बहुमत मिलता दिख रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी भाजपा 185 और टीएमसी 100 सीटों पर आगे चल रही है. अब तक भाजपा को 45%, TMC को 42% वोट मिलते दिख रहे हैं.


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भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी आगे


जानकारी के मुताबकि, भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी आगे चल रही हैं. तो सुवेंदु अधिकारी पीछे चल रहे हैं. मोदी ने जहां झालमुड़ी खाई उस इलाके में भाजपा चारों सीटों पर जबरदस्त पकड़ बनाए हुए है. ये सीटें झाड़ग्राम, बिनपुर, गोपीबल्लभपुर और नयाग्राम हैं. 2021 के मुकाबले इस बार भाजपा का वोट शेयर करीब 6% ज्यादा दिख रहा है, चुनाव आयोग के मुताबिक, अभी तक भाजपा को करीब 45% वोट मिले हैं और पार्टी पिछली बार से 108 सीटें ज्यादा लेकर आती नजर आ रही है. पार्टी की बढ़त को देखते हुए पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में भाजपा कार्यकर्ताओं ने रंग-गुलाल लगाकर ढोल नगाड़ों के साथ जश्न मनाते नजर आ रहे है. दिल्ली में बीजेपी हेडक्वॉर्टर में बैंड बाजा के साथ जश्न मनाया जा रहा है. कोलकाता में बीजेपी दफ्तर के बाहर कार्यकर्ता कमल का फूल लेकर पहुंचा और एक-दूसरे को मिठाई बांटकर खुशी जताई हैं. वहीं भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने कहा, भाजपा को 45% वोट मिले और TMC को 38%, संदेश स्पष्ट है और रुझान भी स्पष्ट है. अब इसी से टीएमसी को अंदाजा लग जाना चाहिए की जीत बीजेपी की ही होने वाली है.


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"कूड़े में मिलीं VVPAT पर्ची मॉक पोल की थीं"


पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बीते रविवार को कूड़े के ढेर में मिलीं VVPAT पर्चियों को लेकर कहा कि, इसकी जांच की जाएगी, कहीं ये पर्चियां मॉक पोल की तो नहीं हैं, इनका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है. गजब की बात तो यह है कि, आरजीकर मेडिकल कॉलेज रेप विक्टिम की मां और BJP उम्मीदवार रत्ना देबनाथ 2763 से ज्यादा वोटों के अंतर से सीट से आगे चल रही हैं. फिलहाल, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के कंट्रोल रूम से पूरे राज्य में मतगणना केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. बता दें, मतगणना के पहले राउंड के बाद काकद्वीप विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार मंतूराम पाखीरा 2,750 वोटों से आगे चल रहे हैं. मतगणना के पहले दौर के अंत में हावड़ा की 181 अमता विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार अमित सामंत 734 वोटों से आगे चल रहे हैं.


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नंदीग्राम से सुवेंदु 3,100 वोटों से आगे


पोस्टल बैलेट में बढ़त बनाने के बाद BJP उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में EVM की गिनती में भी बढ़त बना ली है. पहले राउंड के आखिर में, वह 3,100 वोटों से आगे हैं. तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार पवित्र कर पीछे चल रहे हैं. अब देखने वाली बात यह है कि आखिरकार जीत किसकी होती हैं.


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बीएचयू में ई-बाइक शेयरिंग नेटवर्क की होगी शुरुआत, स्मार्ट सिटी के साथ साझेदारी...
बीएचयू में ई-बाइक शेयरिंग नेटवर्क की होगी शुरुआत, स्मार्ट सिटी के साथ साझेदारी...
वाराणसी : स्वच्छ एवं सतत परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए बीएचयू और वाराणसी स्मार्ट सिटी ने विश्वविद्यालय परिसर में एप-आधारित सार्वजनिक साइकिल एवं ई-बाइक शेयरिंग नेटवर्क स्थापित करने के लिए साझेदारी की है. इस सेवा का संचालन प्रारम्भ होने पर उपयोगकर्ता मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जीपीएस-एनेबल्ड साइकिलों तथा उच्च क्षमता वाली ई-बाइक का उपयोग कर सकेंगे. इस एप्लिकेशन में उपयोगकर्ता-आधारित भुगतान व्यवस्था उपलब्ध होगी, जिसके माध्यम से उपयोग शुल्क का सुविधाजनक भुगतान कर इन साइकिल औऱ ई-बाइक को इस्तेमाल किया जा सकेगा.अगस्त माह के अंत तक प्रारम्भ होने की संभावनायह प्रणाली विश्वविद्यालय परिसर में सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के साथ-साथ उपयोगकर्ताओं को शहर के व्यापक परिवहन नेटवर्क से भी जोड़ेगी. इस सुविधा के अगस्त माह के अंत तक प्रारम्भ होने की संभावना है. परियोजना के अंतर्गत बीएचयू परिसर के विभिन्न रणनीतिक एवं अधिक आवागमन वाले स्थानों पर डॉकिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं. प्रारम्भिक चरण में ई-बाइक तथा पारंपरिक पैडल साइकिलों दोनों की व्यवस्था की जाएगी, जिससे उपयोगकर्ताओं को सुलभ एवं पर्यावरण-अनुकूल आवागमन के विकल्प उपलब्ध होंगे.सुरक्षा एवं कुशल संचालन सुनिश्चित करने के लिए सभी वाहनों को लाइव जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली से लैस किया जाएगा, जिसे शहर के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा. यह पहल सतत् परिवहन को प्रोत्साहित करने, मोटर चालित वाहनों पर निर्भरता कम करने तथा विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और आगंतुकों के बीच स्वस्थ आवागमन की संस्कृति को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी.कुलपति ने कही ये बातसतत् विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा, “काशी हिन्दू विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक विकास और सामुदायिक कल्याण के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध है. वाराणसी स्मार्ट सिटी के साथ यह साझेदारी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के हमारे सतत प्रयासों का एक महत्त्वपूर्ण विस्तार है. इस पहल को लागू करने के लिए वाराणसी स्मार्ट सिटी के साथ सहयोग कर हमें अत्यंत प्रसन्नता है. इससे न केवल परिसर में आवागमन और अधिक सुगम और सुविधाजनक होगा, बल्कि सतत् एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा.”ALSO READ : सीवर,सड़क,पानी की समस्या बन गई बजरंग नगर की पहचान, लोग घर छोड़ने को मजबूर...यह साझा शुरुआत ऐसे वक्त में की जा रही है, जब बीएचयू और वाराणसी नगर निगम के बीच हाल ही में एक व्यापक सहमति की गई है, जिसके अंतर्गत शहरी जीवन को बेहतर बनाने तथा विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, विश्वविद्यालय समुदाय और वाराणसी के नागरिकों को लाभान्वित करने वाली विभिन्न पहलों का विकास किया जाएगा.
सीवर,सड़क,पानी की समस्या बन गई बजरंग नगर की पहचान, लोग घर छोड़ने को मजबूर...
सीवर,सड़क,पानी की समस्या बन गई बजरंग नगर की पहचान, लोग घर छोड़ने को मजबूर...
वाराणसी : बजरंग नगर एक समय फल-सब्जी मंडी और दुकानों के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यह इलाका बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है.स्थानीय निवासी बता रहे हैं कि यहां की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग घर ताले लगाकर या बेचकर जा रहे हैं. जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार हैं, वे मजबूरी में यहीं रहने को विवश हैं.सड़कें और सीवर की बदहालीविनय कुमार सिंह के अनुसार मोहल्ले की 10 से ज्यादा गलियों की हालत बेहद खराब है. ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर दोपहिया वाहन चलाना भी मुश्किल हो गया है, चार पहिया वाहनों की तो बात ही छोड़ दें. ऊंचे सीवर चैंबर राहगीरों के लिए बड़े खतरे बन गए हैं.बचाऊलाल विश्वकर्मा ने बताया कि सामान्य दिनों में तो जैसे-तैसे जिंदगी कट जाती है, लेकिन बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए सजा बन जाता है. जलजमाव के कारण लोग घरों में कैद हो जाते हैं और स्थानीय व्यापार पूरी तरह चौपट हो जाता है.मुख्य सीवर लाइन टूटने का मामलागणेश कुमार चौबे और रमेश चौबे ने बताया कि जब लोहता बाजार में मुख्य सड़क बन रही थी, तब लापरवाही के चलते बजरंग नगर की सीवर पाइपलाइन कई जगहों से टूट गई और कनेक्टिविटी बंद हो गई. बाद में विभाग ने मोहल्ले के एक हिस्से में नई पाइपलाइन बिछाई, लेकिन वह भी कम क्षमता की थी और जल्दी चोक हो गई.सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि आधे से ज्यादा मोहल्ला अभी भी सीवर नेटवर्क से वंचित है. गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। ऊंचे सीवर चैंबर आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं. शफीउर्रहमान ने बताया कि बरसात में सीवेज और बारिश का पानी घरों में घुस जाता है. सड़कों पर कूड़ा फेंकने की मजबूरी है क्योंकि सफाईकर्मी भी नियमित नहीं आते.बिजली के लटकते तारों का खतरापवन कुमार चौबे ने बिजली के तारों की समस्या पर ध्यान दिलाया.उन्होंने कहा कि पर्याप्त खंभे न होने से तार लोगों के सिर के ऊपर लटक रहे हैं.कई जगह तार घरों की खिड़कियों और दीवारों से सटकर गुजर रहे हैं.संतोष विश्वकर्मा ने कहा हर पल किसी अनहोनी का डर रहता है.उर्मिला देवी ने बताया कि बरसात में ये लटकते और उलझे तार और भी खतरनाक हो जाते हैं. चिंगारियां निकलने का खतरा बना रहता है.ALSO READ : तेजाबी हमले के दर्द को दिया सुर, काशी की ‘काशी की स्‍वर कोकिला’ को मिला पद्मश्री सम्‍मान...पानी की समस्याजयप्रकाश सिंह ने गर्मी के मौसम में पानी की कमी बताई. पाइपलाइन में प्रेशर इतना कम रहता है कि एक बाल्टी पानी भरने में लंबा इंतजार करना पड़ता है. पवन कुमार चौबे ने कहा कि समस्या सिर्फ प्रेशर की नहीं है, बारिश शुरू होते ही पाइपलाइन का पानी बदबूदार और दूषित हो जाता है, जो पीने लायक तो दूर, किसी काम का भी नहीं रहता.स्थानीय लोग अब प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं.उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सड़क, सीवर, पानी और बिजली की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो यह मोहल्ला जल्द ही पूरी तरह उजड़ सकता है.
तेजाबी हमले के दर्द को दिया सुर,‘काशी की स्‍वर कोकिला’ को मिला पद्मश्री सम्‍मान...
तेजाबी हमले के दर्द को दिया सुर,‘काशी की स्‍वर कोकिला’ को मिला पद्मश्री सम्‍मान...
वाराणसी : वक्‍त है कांटों की सेज तो कभी फूलों का ताज.जी हां, तेजाब हमले ने उनका चेहरा झुलसा दिया था, समाज ने ताने दिए, स्कूल ने ठुकराया और जिंदगी ने बार-बार कठिन इम्तिहान के दौर से गुजारा. वाबजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने दर्द को सुरों में ढाल दिया और आज वही स्‍वर उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री तक ले आए.बात हो रही है भारतीय शास्त्रीय संगीत की वरिष्ठ गायिका और “काशी की लता” के नाम से प्रसिद्ध मंगला कपूर की जिन्‍हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है.यह सम्मान केवल उनकी संगीत साधना का नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस, आत्मविश्वास और संघर्ष का भी सम्मान है जिसने उन्हें लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बना दिया. यह सम्मान पाकर भावुक हुई मंगला कपूर ने कहा, “मैं अपनी खुशी को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती. मेरे जैसी महिला के लिए पद्मश्री तक पहुंचना कितना कठिन रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने हर मुश्किल समय में मेरा साथ दिया.”12 साल की उम्र में बदल गई पूरी जिंदगीउनकी जिंदगी का सबसे भयावह अध्याय तब शुरू हुआ जब वह मात्र 12 वर्ष की थीं. पारिवारिक व्यावसायिक रंजिश के चलते उन पर तेजाब से हमला कराया गया. जांच में सामने आया कि इस साजिश को घर के एक नौकर के माध्यम से अंजाम दिया गया था. इस हमले ने न केवल उनका चेहरा और शरीर बुरी तरह झुलसाया बल्कि अगले छह वर्षों तक अस्पताल, ऑपरेशन थिएटर और इलाज ही उनकी दुनिया बन गए. शारीरिक पीड़ा से भी अधिक उन्हें मानसिक और सामाजिक पीड़ा ने तोड़ा. आज भी उस घटना को याद करते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं. “जब भी उस दिन को याद करती हूं, आंखों में आंसू आ जाते हैं और पूरा शरीर सिहर उठता है.”जख्म केवल शरीर पर नहीं, आत्मा पर भी लगेएसिड अटैक के बाद समाज का व्यवहार उनके लिए दूसरी बड़ी परीक्षा बन गया. कई लोगों ने सहानुभूति देने के बजाय उन्हें ही दोषी मानने जैसा व्यवहार किया. लगातार सर्जरी के बाद जब उनका चेहरा कुछ सामान्य हुआ तो पिता ने उन्हें दोबारा स्कूल भेजा, लेकिन वहां भी उन्हें संवेदनशीलता नहीं मिली. आठवीं कक्षा में सहपाठियों ने उनका मजाक उड़ाया। यह घटना उनके लिए असहनीय साबित हुई.“मैं पसीने से भीगकर वहीं गिर पड़ी. उसके बाद फिर कभी स्कूल जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई.” बाद में उन्होंने घर से ही पढ़ाई जारी रखी और बारहवीं तक की शिक्षा पूरी की. इस पूरे संघर्ष में उनके पिता उनका सबसे बड़ा संबल बने. उन्होंने बेटी को हमेशा यह विश्वास दिलाया कि इस हादसे में उसकी कोई गलती नहीं थी.37 सर्जरी… फिर भी नहीं टूटी उम्‍मीदअब तक मंगला कपूर 37 बड़ी सर्जरी करवा चुकी हैं. दर्द, इलाज और सामाजिक उपेक्षा के लंबे दौर के बावजूद उन्होंने जीवन से समझौता नहीं किया. उन्होंने संगीत को अपना सहारा बनाया. उनके लिए संगीत केवल कला नहीं रहा, बल्कि जीवन को दोबारा जीने की वजह बन गया. “संगीत ने मुझे जीने की नई ऊर्जा दी. आत्मविश्वास लौटाया. मेरे लिए संगीत ही संजीवनी और उम्‍मीद बनी.”मंदिर के भजन से शुरू हुआ सुनहरे सफर का पहला सुरकॉलेज के दिनों में एक मंदिर में भजन गाते समय पहली बार लोगों ने उनकी आवाज की असाधारण मिठास को महसूस किया. उनकी गायकी ने श्रोताओं को इतना प्रभावित किया कि धीरे-धीरे उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतिष्ठित मंचों पर आमंत्रित किया जाने लगा. समय के साथ उनकी पहचान उनके चेहरे से नहीं, बल्कि उनकी आवाज से बनने लगी. यही आवाज उन्हें देशभर के प्रतिष्ठित संगीत समारोहों तक ले गई और वह भारतीय शास्त्रीय संगीत की सम्मानित हस्ती बन गईं.ALSO READ : गंगा में नाव पर नानवेज पार्टी करने वाले पांच आरोपियों को मिली जमानत...तीन दशक तक बीएचयू में तैयार की संगीत की नई पीढ़ीग्वालियर घराने की सुप्रसिद्ध गायिका मंगला कपूर ने वर्ष 1989 में बीएचयू के संगीत विभाग में अध्यापन कार्य शुरू किया. लगभग 30 वर्षों तक उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी. शिक्षण के साथ-साथ उन्होंने देशभर के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. संगीत के अलावा वह दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए भी लगातार कार्य करती रही हैं और लेखन के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही हैं.