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खाड़ी युद्ध में फंसा बासमती चावल का निर्यात, वरिष्‍ठ कृषि विज्ञानी ने कही बड़ी बात

खाड़ी युद्ध में फंसा बासमती चावल का निर्यात, वरिष्‍ठ कृषि विज्ञानी ने कही बड़ी बात
Mar 09, 2026, 11:41 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के युद्ध के चलते भारत से बासमती चावल का निर्यात फंस गया है. देश के किसानों द्वारा उत्पादित लगभग चार लाख टन बासमती चावल से भरे जहाज समुद्र और विभिन्न बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं. इस स्थिति में शिपिंग कंपनियों ने प्रति कंटेनर लगभग 2000 डॉलर का वार सरचार्ज भी लगा दिया है. एक कंटेनर में औसतन 20 टन चावल लोड होता है. यह चौंकाने वाली जानकारी अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) में आयोजित धान फसल संबंधी दो दिवसीय नीति संवाद में पहुंचे पूसा के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ कृषि विज्ञानी पद्मश्री डा. अशोक कुमार सिंह ने दी.


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खाड़ी देशों में होता है निर्यात


उन्होंने बताया कि भारत से बासमती चावल का सबसे अधिक निर्यात ओमान से सऊदी अरब के बीच पड़ने वाले खाड़ी देशों में होता है. देश के कुल बासमती निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत अकेले ईरान खरीदता है, जबकि खाड़ी देशों का कुल हिस्सा करीब 45 प्रतिशत है. डा. सिंह के अनुसार, भारत हर वर्ष 50 हजार करोड़ रुपये का लगभग 60 लाख टन बासमती चावल निर्यात करता है.


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देश में उत्पादित कुल बासमती का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा निर्यात किया जाता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो देश में बासमती चावल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. इसके साथ ही, अगले सीजन में बासमती की खेती और उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है.


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किसानों के सामने चुनौती


इस संकट के चलते किसानों के सामने आर्थिक चुनौतियाँ उत्पन्न हो गई हैं. बासमती चावल की खेती पर निर्भर किसान अब निर्यात में रुकावट के कारण चिंतित हैं. यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो यह न केवल किसानों के लिए बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर परिणाम ला सकता है.


ईरान युद्ध के कारण बासमती चावल का निर्यात प्रभावित होना एक गंभीर मुद्दा बन गया है, जिसे तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति को सुरक्षित रखा जा सके और बासमती चावल के निर्यात को पुनः सुचारू किया जा सके.

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल को लेकर मारामारी, जंग का दिखा असर
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल को लेकर मारामारी, जंग का दिखा असर
अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच चल रहे जंग की वजह से देशभर में पेट्रोल-डीजल से लेकर LPG गैस सिलेंडर की हद से ज्यादा किल्लत बढ़ती जा रही है. भारत के प्रमुख महानगरों में आज शनिवार 4 अप्रैल 2026 को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. पेट्रोल 94 रुपये से 105 रुपये प्रति लीटर और डीजल 82 रुपये से 92 रुपये प्रति लीटर के दायरे में बिक रहा है.देश की राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 94.77 रुपये है. वहीं, यहां डीजल का रेट आज 87.67 रुपये प्रति लीटर है. एक तरफ जहां मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच क्रूड ऑयल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं, ऐसे में कई देशों में पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ा दिए गए हैं. जिसके चलते केंद्र सरकार की ये कोशिश है कि, कीमतों में बढ़ोतरी की मार से लोगों को किस तरह से बचाया जा सकें.शहर पेट्रोल (प्रति लीटर) डीजल (प्रति लीटर)नई दिल्ली 94.77 रुपये 87.67 रुपयेमुंबई 103.54 रुपये 90.03 रुपयेकोलकाता 105.45 रुपये 92.02 रुपयेचेन्नई 100.80 रुपये 92.39 रुपयेबेंगलुरु 102.92 रुपये 90.99 रुपयेपटना 105.18 रुपये 92.04 रुपयेरांची 97.86 रुपये 92.62 रुपयेपोर्ट ब्लेयर 82.46 रुपये 78.05 रुपयेजयपुर 104.88 रुपये 90.36 रुपयेकीमतों में अंतर क्योंभारत में हर राज्य में ईंधन पर VAT (Value Added Tax) अलग-अलग दरों से लगती है इसलिए दोनों शहरों की कीमत में अंतर दिखाई पड़ता है. आप चाहे तो IOCL या HPCL की वेबसाइट पर जाकर अपने शहर का रेट चेक कर सकते हैं.पाकिस्तान में बद से बत्तर हालातपाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 458.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई है. इसमें बीते 3 अप्रैल को सरकार ने 137 रुपये का इजाफा किया था. हालांकि, जनता के भारी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार देर रात को पेट्रोल की कीमत में 80 रुपये कटौती की घोषणा की. इसी के साथ पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 80 रुपये की कटौती के बाद आज 378.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर है. इसी तरह से डीजल की कीमत 520.35 रुपये है. इसमें कोई कटौती नहीं की गई. यह अपने अब तक के हाई लेवल पर है.
घर में लंबे समय तक चावल को ऐसे रखे स्टोर,  नहीं पड़ेगे घुन या कीड़े
घर में लंबे समय तक चावल को ऐसे रखे स्टोर, नहीं पड़ेगे घुन या कीड़े
लाइफस्टाइल: अक्सर लोग अपने घरों में चावल को स्टोर करते है. चावल को स्टोर करना इतना आसान नहीं होता हैु. ये बेहद चुनौतीपूर्ण काम होता है. जी हां, नमी या घुन के कारण अक्सर चावल में काले और सफेद कीड़े लगने लगते हैं. जिससे न सिर्फ स्वाद बिगड़ता है बल्कि अनाज की पौष्टिकता भी खत्म हो जाती है. बाजार में मिलने वाली कीटनाशक गोलियां सेहत के लिए जोखिम भरी हो सकती हैं. लेकिन आप चावल को स्टोर करने के लिए प्राकृतिक तरीका भी आजमा सकते हैं. जिसे लेकर आज हम आपको बताएंगे.घरेलू नुस्खा बहुत से होते है. पर जो हम बताने जा रहे है वो काफी अलग और आसान भी है. इसके लिए आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत भी नहीं है. जो चावल को स्टोर करने में पूरी तरह से सुरक्षित और असरदार है. उनके अनुसार, अगर आप चावल के डिब्बे में तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च को लेयरिंग तरीके से रखते हैं, तो इनकी तीखी गंध कीड़ों को पास फटकने भी नहीं देगी. रसोई में मौजूद इन दोनों चीजों का इस्तेमाल कैसे करना है इसकी सही जानकारी होना भी जरूरी है.एयरटाइट कंटेनर का चुनावचावल को स्टोर करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है, सबसे पहला और जरूरी काम एक सही डिब्बे का चुनाव करना होगा. जो चावल को सुरक्षित रखेगा. हमेशा एक साफ और सूखा एयरटाइट कंटेनर ही लें. अगर डिब्बे में थोड़ी भी नमी होगी, तो कीड़े बहुत जल्दी पनपेंगे. स्टील या अच्छी गुणवत्ता वाले प्लास्टिक के डिब्बे, जिनमें हवा ना आए, चावल स्टोर करके लिए अच्छे माने जाते हैं.तेजपत्ता और लाल मिर्च का मिश्रण​तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च में एक खास तरह की तीखी गंध होती है, जो कीड़ों को नापसंद होती है. लाल मिर्च में मौजूद 'कैप्साइसिन' और तेजपत्ते की खुशबू प्राकृतिक कीटनाशक का काम करती है. यह बिना किसी केमिकल के चावल को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है. इसे इस्तेमाल करने के लिए डिब्बे की तली में सबसे पहले 2-3 तेजपत्ते और 2 सूखी लाल मिर्च रखें.लेयरिंग तकनीककुसुम भट्ट एक विशेष लेयरिंग तकनीक की सलाह देती हैं. डिब्बे को एक साथ पूरा न भरें. सबसे पहले तली में मसाले डालें, फिर डिब्बे को आधा चावल से भरें. इसके बाद बीच में फिर से 2 तेजपत्ते और 2 सूखी लाल मिर्च डालें. आखिरी में बाकी चावल भरकर ऊपर से फिर से मसाले रखें. इस तरह मसालों की खुशबू पूरे डिब्बे में समान रूप से फैल जाती है.नमी से बचाव चावल में कीड़े लगने का मुख्य कारण नमी होती है. चावल को स्टोर करने से पहले सुनिश्चित कर लें कि वे पूरी तरह सूखे हुए हों, अगर संभव हो, तो चावल को डिब्बे में भरने से पहले एक दिन की धूप दिखा दें. इसके अलावा, जिस जगह पर आप डिब्बा रख रहे हैं, वह जगह भी सूखी और ठंडी होनी चाहिए, सिंक के पास या गीली जगहों पर अनाज रखने से बचें.प्राकृतिक गंध का प्रभावबाजार में मिलने वाली कीटनाशक गोलियां चावल के स्वाद को प्रभावित कर सकती हैं और धोने के बाद भी उनका अंश रह सकता है. ऐसे में तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च प्राकृतिक हैं. इनकी गंध से कीड़े तो दूर रहते हैं, लेकिन पकाते समय चावल के स्वाद या सुगंध पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है.खराब होने से चावल को ऐसे बचाए भले ही आपने मसाले डाल दिए हों, लेकिन हर 15-20 दिनों में एक बार चावल के डिब्बे को खोलकर जरूर चेक करें. अगर आपको लगे कि लाल मिर्च का रंग बहुत हल्का पड़ गया है या तेजपत्ते की खुशबू खत्म हो गई है, तो उन्हें बदलकर नए मसाले डाल दें. समय-समय पर चावल को ऊपर-नीचे करने से हवा का संचार बना रहता है और अनाज ताजा रहता है.
गुमशुदा पायलट के तलाश में ईरान और अमेरिका की होड़
गुमशुदा पायलट के तलाश में ईरान और अमेरिका की होड़
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जबरदस्त युद्ध छिड़ा हुआ है. अमेरिका ने ईरान से इस कदर दुश्मनी निभा रखी है मानों, युद्ध को समाप्त करने की तमन्ना ही खत्म हो चुकी है. पायलटों की तलाश में ईरान के खिलाफ अमेरिका अब सर्च ऑपरेशन भी चलाने को तैयार बैठा है. ये वहीं अभियान है जिसमें एक अमेरिकी अधिकारी ने लड़ाकू विमान को मार गिराने की पुष्टि की है.जाने क्या है पूरा मामला दरअसल, कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के खिलाफ युद्ध जारी है. जिसमें दोनों देशों की सेनाएं लापता हुए एक अमेरिकी पायलट को तलाशने में जुटी हैं. लेकिन गजब की बात तो यह है कि इस खोज में तलाश कम और एक-दूसरें को पछाड़ने की होड़ ज्यादा नजर आ रही हैं. ईरानी अधिकारियों ने लोगों से अपील कर कहा कि, वे अमेरिकी पायलट को खोजने में उनकी मदद करें. ताकि हम डोनाल्ड ट्रंप को उनके किये का पछतावा और सबक सिखाने में कोई कसर बाकी ना रखे. उधर अमेरिका ने भी अपने पायलट की खोजबीन शुरू कर दी है.ईरानी हमले की चपेट में अमेरिकी सेना के दो हेलिकॉप्टरईरान में चल रहे जंग के बीच अमेरिकी सेना को उस वक्त एक बड़ा झटका लगा, जब ईरान की तरफ से चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना के दो हेलिकॉप्टर ईरानी हमले की चपेट में आ गए. ये हेलिकॉप्टर एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के गिराए जाने के बाद से उसके गुमशुदा हुए पायलटों की तलाश में लगे हुए थे. हालांकि, अमेरिका ने अपने एक पायलट का रेस्क्यू सफलतापूर्वक कर लिया है.लेकिन दूसरा पायलट अब भी लापता है. उसकी तलाश के लिए अमेरिकी सेना रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की कार्रवाई में जुटी हुई है.एक ओर जहां अमेरिका अपने दूसरे पायलट को सुरक्षित लाने में जुटा हुआ है तो ईरान के सैनिक भी इस मंशा से उसे खोजने में लगे हुए है कि ट्रंप कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकें. वहीं ईरान की रेवॉल्यूशनरी गार्ड कोर ने कहा कि देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में जहां अमेरिकी विमान गिरा, उस इलाके को खंगाला जा रहा है. खबरों के मुताबिक, ईरानी सेना ने इस गुमशुदा पायलट को खोजने पर इनाम की भी घोषणा की है.कुवैत के दावे को ईरान ने किया झूठा साबित अमेरिकी सेनिक की खोजबीन के बीच अमेरिका ने ईरान के एक बड़े पुल को नष्ट कर दिया है, इससे भी ट्रंप को संतुष्टि नहीं मिली तो ईरान के नागरिक सुविधाओं और बिजली संयंत्रों पर हमला करने का संकल्प ले बैठे. ईरान ने इसे युद्ध अपराध बताते हुए पलटवार किया, जिस पर कुवैत ने कहा है कि ईरान ने एक वॉटर प्लांट को निशाना बनाते हुए एक तेल रिफाइनरी पर हमला किया है, जिसके चलते अन्य खाड़ी देशों को उस हमले का सामना करना पड़ रहा है. कुवैत के इस दावे को झूठा साबित कर दिया है.यह भी पढ़ें: पूर्वांचल के तीसरे बड़े एयरपोर्ट के निर्माण का मार्ग प्रशस्‍त, करोड़ों रुपये जारीवहीं, ईरान ने बीते शुक्रवार को इजरायल पर भी मिसाइल हमले किए हैं. ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने ईरान से जीत की घोषणा करने की अपील करते हुए इसको समाप्त करने को कहा है. दुख की बात तो यह है कि अब तक इस युद्ध में कम से कम 2,076 लोग मारे गए हैं. इनमें 26,500 घायल हुए हैं.