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बिजली विभाग की लापरवाही, वेतन के लिए भटक रहे कंप्यूटर ऑपरेटर

बिजली विभाग की लापरवाही, वेतन के लिए भटक रहे कंप्यूटर ऑपरेटर
May 27, 2026, 09:19 AM
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Posted By Preeti Kumari

Negligence of electricity department, computer operators wandering for salary


वाराणसी: संविदा कर्मियों के मानदेय को लेकर बिजली विभाग की लापरवाही सामने आई है. पिछले सात महीने से 60 संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर मानदेय के लिए भटक रहे हैं. इसमें सर्किल और डिविजन में पोस्ट किए गए 37 कंप्यूटर ऑपरेटरों को दो महीने और कैश काउंटर पर बैठने वाले 23 ऑपरेटरों को तीन महीने से वेतन नहीं दिया गया. कंप्यूटर ऑपरेटरों का लगभग 11 लाख 89 हजार रुपए रोके रखा गया है.


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सर्विस की लापरवाही से कर्मचारियों को दौड़ना पड़ा


कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति करने वाली फर्म एएल सन्स एसोसिएट और रेखा सिक्यूरिटी सर्विस की लापरवाही के चलते कर्मचारियों को मानदेय के लिए दौड़ना पड़ रहा है. कैश काउंटर कंप्यूटर ऑपरेटर सर्किल प्रथम के चार डिवीजन में तैनात हैं. जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर की सर्किल द्वितीय के डिविजनों और कार्यालय में पोस्टिंग है.


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सर्किल द्वितीय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों का कहना है कि रेखा सिक्यूरिटी सर्विस ने भुगतान के लिए बिल लगा दिया है, लेकिन निर्माण खंड द्वितीय के अधिकारी और लेखाकार बिल दबाए बैठे हैं जबकि कई बार इसकी शिकायत सर्किल 2 के निर्माण खंड प्रमुख वरिष्ठ वीरेंद्र कुमार से की गई.


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इसके बावजूद भी मामले को अनदेखा किया गया. कंप्यूटर ऑपरेटर का आरोप है कि सुविधा शुल्क लेकर कैपिटल और एलऐडटी कंपनी के बिल तुरंत पास कर दिए जा रहे हैं. वहीं सर्किल प्रथम के कैश काउंटर ऑपरेटर ने आरोप लगाया कि मानदेय का भुगतान कराने के लिए प्रमुख वरिष्ठ से कई बार आग्रह किया लेकिन असर नहीं पड़ा. कंप्यूटर ऑपरेटर का कहना है कि 3 महीने से मानदेय और नहीं मिलने से आर्थिक स्थिति खराब हो गई है.

बरेका में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से पर्यावरण संरक्षण का संदेश, लिया यह संकल्‍प
बरेका में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से पर्यावरण संरक्षण का संदेश, लिया यह संकल्‍प
Message of environmental protection from the campaign “One Tree in the Name of Mother” in Bareka, this pledge was takenवाराणसी: बनारस रेल इंजन कारखाना में 15 मई से 5 जून तक विश्व पर्यावरण दिवस अभियान मनाया जा रहा है. अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन, हरित विकास और स्वच्छ भविष्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इसी क्रम में बुधवार को बरेका पश्चिमी स्वास्थ्य केंद्र परिसर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया.स्वच्छ और स्वस्थ जीवन देने का आधारकार्यक्रम का शुभारंभ बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने पौधरोपण कर किया. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण कर प्रकृति संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में ही सहायक नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं स्वस्थ जीवन देने का आधार भी हैं.“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान मातृत्व, प्रकृति और संवेदनशीलता को जोड़ने वाला प्रेरणादायी प्रयास है. कार्यक्रम में बरेका के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारी परिषद के सदस्यों एवं बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया.Also Read: जर्जर खंभे को बदलने के लिए आनोखा प्रदर्शन, बिजली विभाग कर रहा हादसे का इंतजारइस दौरान उपस्थित लोगों ने हरित एवं स्वच्छ वातावरण बनाए रखने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण का भी संकल्प लिया. अभियान के अंतर्गत बरेका में स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, नुक्कड़ नाटक और जनभागीदारी आधारित कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
जर्जर खंभे को बदलने के लिए आनोखा प्रदर्शन, बिजली विभाग कर रहा हादसे का इंतजार
जर्जर खंभे को बदलने के लिए आनोखा प्रदर्शन, बिजली विभाग कर रहा हादसे का इंतजार
A unique demonstration to replace a dilapidated pole, the electricity department is waiting for an accident.वाराणसी: करौंदी चौराहे के पास धर्मजीत नगर मुख्य मार्ग पर जर्जर बिजली के खंभे को बदलने के लिए अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया. इस दौरान क्षेत्र के लोगों ने बिजली विभाग की लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाते हुए जर्जर खंभे को श्रद्धांजलि दी. प्रदर्शन का नेतृत्‍व कर रहे रघुकुल यथार्थ ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद संबंधित विभाग ने जर्जर खंभे को नहीं बदला है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है.बिजली विभाग की लापरवाही बिजली विभाग की लापरवाही के कारण क्षेत्र के निवासियों में डर और आक्रोश व्याप्त है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही खंभा नहीं बदला गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और बिजली विभाग की होगी. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिजली विभाग को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास होना चाहिए और उन्हें तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए. रघुकुल यथार्थ ने कहा कि यह केवल एक खंभे का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा का प्रश्न है. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और बिजली विभाग ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, तो क्षेत्र के लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे.Also Read: SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, चुनाव आयोग का ये अधिकार हैबता दें कि मंगलवार को लंका स्थित वीटू माल के पास एक जर्जर खंभा ट्रांसफार्मर के साथ गिर गया था. संयोगवश, इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ. प्रदर्शन करने वालों में वैभव विशेन, भोनु, बद्री प्रसाद, अश्वनी, बृजेश, शिवशंकर और रंजीत जैसे स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे. इस प्रकार का अनोखा विरोध प्रदर्शन क्षेत्र के लोगों की एकजुटता और उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूकता को दर्शाता है. स्थानीय निवासियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं.
SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, चुनाव आयोग का ये अधिकार है
SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, चुनाव आयोग का ये अधिकार है
Supreme Court's big decision on SIR, Election Commission has this rightसुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसके तहत बिहार में मतदाता सूचियों का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) शुरू किया गया था. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने यह फैसला दिया है कि एसआईआर प्रक्रिया को केवल इसलिए 'अल्ट्रा वायर्स' (अवैध) करार देकर रद नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मतदाता सूचियों के संशोधन की सामान्य प्रक्रिया से अलग है.SIR को लेकर सीजेआई ने क्या कहाबता दें कि, कोर्ट ने एसआईआर को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया करार दिया और कहा कि, "यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है. 11 दस्तावेजों पर विचार करने और हमारे आदेश के माध्यम से आधार कार्ड को शामिल किए जाने के बाद हम इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि चुनाव द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का समूह मनमाना है.". सीजेआई ने कहा, जिन मामलों में आयोग इस बात से संतुष्ट नहीं होता कि कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने के लिए निर्धारित वैधानिक शर्तों को पूरा करता है, वहां आयोग का यह दायित्व होगा कि वह ऐसे व्यक्ति को कानून के अनुसार निर्णय के लिए केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेज दे.एसआईआर पर कोर्ट ने कहीं ये बड़ी बात एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई में कहा कि, संवैधानिक व्यवस्था और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करने का अधिकार है. बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह बात कही है.Also Read: बिजली विभाग की लापरवाही, वेतन के लिए भटक रहे कंप्यूटर ऑपरेटरबड़ी बात तो यह है कि, कोर्ट का यह मानना है कि, चुनावी प्रक्रिया में लोगों को शामिल करने का फैसला करने की चुनाव आयोग की शक्ति सीमित है, और नामों को हटाने से किसी व्यक्ति का नागरिकता का दर्जा खत्म नहीं हो जाता. तब तक नागरिकता का दर्जा केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही निर्धारित किया जा सकता है