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बीमार पत्‍नी की BHU अस्‍पताल में मौत, पति का घर में मिला शव, सदमें में परिवार

बीमार पत्‍नी की BHU अस्‍पताल में मौत, पति का घर में मिला शव, सदमें में परिवार
May 25, 2026, 12:24 PM
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Posted By Preeti Kumari

Ailing wife dies at BHU hospital, husband's body found at home, family in shock


वाराणसी: पांडेयपुर-लालपुर थाना क्षेत्र की प्रेमचंद नगर कॉलोनी में रविवार रात एक ही परिवार में हुई दो मौतों से इलाके में मातम पसर गया. घर के बाथरूम में सेवानिवृत्त डाककर्मी हाजी सैयद कासिम अहमद (80) का शव मिला, जबकि उनकी पत्नी सैय्यदा बेगम (75) की बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई. पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है.


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जानकारी के अनुसार प्रेमचंद नगर कॉलोनी निवासी सैय्यदा बेगम लंबे समय से पैरालिसिस से पीड़ित थीं. रविवार दोपहर अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. इसके बाद उनके बेटे अधिवक्ता कमाल जाफरी उन्हें इलाज के लिए पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल लेकर पहुंचे. हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया जहां, इलाज के दौरान देर शाम उनकी मौत हो गई.


पुलिस को मिली मौत की सूचना


इधर घर पर उनके पति हाजी सैयद कासिम अहमद अकेले थे. पत्नी की गंभीर हालत और बाद में मौत की सूचना मिलने के बाद वह गहरे सदमे में आ गए थे. बेटे ने कई बार फोन कर उनका हाल जानने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. रात करीब आठ बजे जब परिजन सैय्यदा बेगम का शव लेकर घर पहुंचे तो मुख्य दरवाजा अंदर से बंद मिला. काफी देर तक आवाज लगाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. इसके बाद स्थानीय लोगों ने डायल 112 पर सूचना दी.


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मौके पर पहुंची पुलिस ने फोरेंसिक और फिंगर प्रिंट टीम को बुलाया. जांच के बाद दरवाजा तुड़वाकर पुलिस अंदर पहुंची तो बाथरूम में सैयद कासिम अहमद अचेत अवस्था में पड़े मिले. उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि पत्नी की मौत के सदमे से उन्हें हृदयाघात आया होगा.


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परिजनों ने की पोस्टमार्टम न कराने की मांग


परिजनों और रिश्तेदारों ने पोस्टमार्टम न कराने की मांग की, लेकिन संदिग्ध परिस्थितियों में सूचना मिलने के कारण पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई. परिवार में एक बेटा और दो विवाहित बेटियां हैं. थाना प्रभारी अजीत कुमार वर्मा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है.

धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
BHU doctor fasts to protest 'distortion' of religious identity, raises questions about faithवाराणसी: धर्म, आस्था और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सहप्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार ने वाराणसी में उपवास शुरू किया है. सर्किट हाउस के समीप चल रहे इस उपवास के माध्यम से उन्होंने धार्मिक प्रतीकों, नामों और स्वरूपों के कथित “विकृतिकरण” तथा आध्यात्मिक भ्रम फैलाने के खिलाफ जनजागरण की जरूरत बताई.डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में भोजन, आचरण और आध्यात्मिक शुद्धता का विशेष महत्व बताया गया है. उनके अनुसार दूषित विचारों और आचरण का प्रभाव समाज की चेतना पर पड़ता है, जिससे धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन भी प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि जब धार्मिक संस्थाओं और परंपराओं में आस्था से इतर विचारधारा का प्रभाव बढ़ता है, तब श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं और भ्रम की स्थिति पैदा होती है.उन्होंने दक्षिण भारत के कुछ राज्यों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण मंदिर व्यवस्थाओं में ऐसे लोगों को स्थान मिला, जिनकी धार्मिक आस्था पर सवाल उठते रहे हैं. डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि इससे आम श्रद्धालु स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है. उन्होंने धार्मिक और पौराणिक पात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म और अधर्म, आदर्श और विरोधी प्रवृत्तियों के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है. उनका कहना है कि यदि इन भेदों को जानबूझकर धुंधला किया जाता है तो समाज की सांस्कृतिक चेतना प्रभावित होती है और नई पीढ़ी भ्रमित हो सकती है.Also Read: नमोघाट हत्‍याकांड पर सामने आया मंत्री रवींद्र जायसवाल का बयान, 5 लाख मुआवजे का एलानतमिलनाडु और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक राजनीति का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाओं और पात्रों की व्याख्या को राजनीतिक या वैचारिक लाभ के लिए बदले जाने के प्रयास हुए हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम को धर्म स्थापना का प्रतीक माना जाता है, जबकि महाभारत के पात्र कर्ण की भूमिका अलग रही है. समाज में कई बार नायक और खलनायक की छवि को मिलाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिससे सही और गलत की समझ कमजोर होती है. डॉ. सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि उनका उपवास किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से है.
नमोघाट हत्‍याकांड पर सामने आया मंत्री रवींद्र जायसवाल का बयान, 5 लाख मुआवजे का एलान
नमोघाट हत्‍याकांड पर सामने आया मंत्री रवींद्र जायसवाल का बयान, 5 लाख मुआवजे का एलान
Minister Ravindra Jaiswal's statement on the Namoghat massacre, announcing a compensation of Rs 5 lakh.वाराणसी: प्रदेश के स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल ने गत् 24 मई को नमो घाट पर स्मार्ट सिटी विभाग द्वारा नियुक्त एजेंसी के गार्ड/बाउंसर कर्मचारी द्वारा एक युवक के साथ की गई अमानवीय मारपीट एवं दुर्व्यवहार के परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो जाने की घटना को संज्ञान लेते हुए गहरी नाराजगी व्यक्त की.उन्होंने अध्यक्ष/मंडलायुक्त, वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड को पत्र लिखकर इस घटना को अत्यंत दुःखद एवं गंभीर बताते हुए कहा है कि यह घटना न केवल मानवता को शर्मसार करने वाली है, बल्कि धार्मिक नगरी वाराणसी की गरिमा एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है.मेंटनेंस करने वाली कंपनी या एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड किया जाए तीर्थयात्रियों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों एवं प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने निर्देशित करते हुए कहा है कि संज्ञान में आया है कि स्मार्ट सिटी द्वारा जिस एजेंसी या कंपनी को घाट का मेंटनेंस के लिए दिया गया है, वह धन उगाही का अड्डा बनाकर तीर्थयात्रियों एवं दर्शनार्थियों से गाली गलौच व मारपीट करते हैं. उन्होंने ऐसी कंपनी या एजेंसी के ऊपर उच्च स्तरीय जांच कराकर उसको ब्लैक लिस्टेड की कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया है.Also Read: खेती से समृद्धि तक: इस नीति से बदल रही वाराणसी के विकास की तस्वीर, वीडीए की पहलइसके साथ ही मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने संबंधित गार्ड/बाउंसर कर्मचारी जिसने तीर्थयात्री को जान से मार दिया उसके ऊपर एफआईआर दर्ज कराकार न्यायोचित एवं कड़ी कार्यवाही करने तथा मृतक तीर्थयात्री के परिजनों को मानवीय संवेदना एवं सहयोग के दृष्टिगत पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराये जाने हेतु भी निर्देशित किया है.
खेती से समृद्धि तक: इस नीति से बदल रही वाराणसी के विकास की तस्वीर, वीडीए की पहल
खेती से समृद्धि तक: इस नीति से बदल रही वाराणसी के विकास की तस्वीर, वीडीए की पहल
From farming to prosperity: This policy is changing the face of Varanasi's development, an initiative of VDAवाराणसी: विकास प्राधिकरण (VDA) द्वारा आनंद काशी (कल्लीपुर), रुद्र विहार (मढ़नी) एवं स्पोर्ट्स सिटी (गंजारी) जैसी महत्वाकांक्षी टाउनशिप परियोजनाओं के विकास के लिए भूमि पूलिंग नीति को अपनाया गया है. यह नीति किसानों को विकास प्रक्रिया का सहभागी बनाकर शहर के सुनियोजित विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है. भूमि पूलिंग नीति के अंतर्गत 10 एकड़ से कम भूमि देने वाले किसानों को विकसित भूमि का 30 प्रतिशत तथा 10 एकड़ से अधिक भूमि देने वाले किसानों को विकसित भूमि का 50 प्रतिशत वापस किया जाता है.नीति को लेकर कुछ संकोचप्रारंभिक चरण में किसानों में इस नीति को लेकर कुछ संकोच था, लेकिन समय के साथ इसके लाभ समझने के बाद अब बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़ रहे हैं. यह नीति भूमि अधिग्रहण के बजाय किसानों को विकास का भागीदार बनाती है, जिससे सरकार और किसानों दोनों के लिए “विन-विन” स्थिति बनती है. सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसानों की भूमि का भू-उपयोग स्वतः कृषि से आवासीय में परिवर्तित हो जाता है, जिससे उनकी भूमि का मूल्य कई गुना बढ़ जाता है. विकसित भूखंड की कीमत मूल कृषि भूमि की तुलना में कहीं अधिक हो जाती है.भूमि पूलिंग नीति के माध्यम से भूमि अधिग्रहण संबंधी विवादों में कमी आएगी तथा किसानों को उनकी भूमि का दीर्घकालिक और अधिक लाभकारी मूल्य प्राप्त होगा. विकसित क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, विद्युत, पार्क एवं अन्य आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा. यह मॉडल किसानों को केवल मुआवजा प्राप्तकर्ता नहीं, बल्कि शहर के विकास का भागीदार बनाता है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, व्यापार एवं निवेश के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे. वीडीए द्वारा अपनाई गई यह नीति वाराणसी के सुनियोजित, आधुनिक एवं सतत शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.65 किसानों ने की भूमि पूलिंगअब तक विकास प्राधिकरण के साथ लगभग 65 किसानों द्वारा 45 एकड़ भूमि की पूलिंग की जा चुकी है, जो एक सकारात्मक संकेत है. लगातार अधिक किसान भूमि पूलिंग के लिए आगे आ रहे हैं. भूमि पूलिंग के अंतर्गत वीडीए किसानों के साथ पंजीकृत समझौता करता है, जिसके आधार पर आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करने एवं भू-उपयोग परिवर्तन के बाद विकसित भूमि किसानों को वापस की जाती है. कल्लीपुर स्थित आनंद काशी परियोजना में अब तक 32 किसानों द्वारा लगभग 27 एकड़ भूमि की पूलिंग की जा चुकी है. वहीं मढ़नी स्थित रुद्र विहार टाउनशिप में लगभग 33 किसानों द्वारा 18 एकड़ भूमि की पूलिंग की गई है.10 एकड़ से अधिक देने वाले सम्‍मानितकल्लीपुर में सबसे बड़ा भूमि पूलिंग योगदान श्री प्रतीक जैन द्वारा किया गया है, जिन्होंने 10 एकड़ से अधिक भूमि पूलिंग के अंतर्गत दी है. इस सराहनीय पहल के लिए वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजालिंगम द्वारा, वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा की उपस्थिति में, प्रतीक जैन को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया. अब तक वीडीए द्वारा कल्लीपुर क्षेत्र में लगभग संपूर्ण भूमि क्रय प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है तथा मढ़नी क्षेत्र में भी अधिकांश भूमि का क्रय कार्य पूरा किया जा चुका है.Also Read: बीमार पत्‍नी की BHU अस्‍पताल में मौत, पति का घर में मिला शव, सदमें में परिवारकुल मिलाकर 300 एकड़ से अधिक भूमि परियोजनाओं हेतु सुनिश्चित की जा चुकी है. वर्तमान में परियोजनाओं के लिए रेरा पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है. रेरा पंजीकरण पूर्ण होते ही इन टाउनशिप परियोजनाओं को आम जनता के लिए खोला जाएगा. उम्मीद है कि आगामी 6-8 महीनों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकास कार्य पूर्ण कर किसानों को विकसित भूमि वापस कर दी जाएगी.