जिस काढ़ा से स्वस्थ होते हैं भगवान जगन्नाथ उसे लेने अस्पताल से पहुंचे रहे तीमारदार...

वाराणसी : जिस काढ़े से भगवान जगन्नाथ स्वस्थ हो सकते हैं उससे बीमार इंसान क्यों नहीं सेहतमंद हो सकता है. इसी सोच के साथ अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती अपने स्वजन के लिए प्रसाद के रूप में काढ़ा लेने तीमारदार अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंच रहे हैं. उनकी लंबी कतार ईश्वर के प्रति उनकी आस्था को प्रदर्शित करती है. आस्थावानों की इस भीड़ में चंदौली, गाजीपुर, भदोही, जौनपुर सहित आसपास के कई जिलों के लोग शामिल रहते हैं.
अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में भगवान के स्वास्थ्य लाभ के लिए अर्पित किए जाने वाले पारंपरिक औषधीय काढ़े के प्रसाद के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास लगातार बढ़ रहा है. अब केवल स्थानीय भक्त ही नहीं, बल्कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन भी अपने प्रियजनों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर मंदिर पहुंच रहे हैं. बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन भगवान का काढ़ा प्रसाद लेने मंदिर पहुंचे. मंडलीय अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों ने भी मंदिर पहुंचकर काढ़ा प्रसाद ग्रहण किया और मरीज के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की.
धार्मिक परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का लगभग 16 घंटे तक महाअभिषेक किया जाता है. मान्यता है कि इसके बाद तीनों विग्रह अस्वस्थ हो जाते हैं और स्वास्थ्य लाभ के लिए अनवसर काल में एकांतवास करते हैं. इसी दौरान उन्हें प्रतिदिन औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़े का भोग लगाया जाता है.
ALSO READ:नौकरी पाने का सुनहरा मौका, युवाओं को रोजगार देने आ रहीं दस कंपनियां...
इन दिनों मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को प्रतिदिन औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़े का भोग लगाया जा रहा है. भगवान को 14 जुलाई तक प्रतिदिन काढ़े का भोग अर्पित किया जाएगा. इसके बाद 16 जुलाई से लक्खा मेला में शामिल काशी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा का शुभारंभ होगा. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक काढ़ा रूपी प्रसाद को ग्रहण करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है और रोगमुक्ति की कामना पूर्ण होती है.
मंदिर के प्रधान पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि प्रतिदिन दोपहर करीब तीन बजे पारंपरिक विधि से लकड़ी के चूल्हे पर लौंग, इलायची, काली मिर्च सहित विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों से काढ़ा तैयार किया जाता है. विधि-विधान से भगवान को भोग लगाने के बाद शाम चार बजे से श्रद्धालुओं में इसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है.



