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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन आज, इन मंत्रों के साथ करें कलश स्थापना

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन आज, इन मंत्रों के साथ करें कलश स्थापना
Mar 19, 2026, 06:32 AM
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Posted By Preeti Kumari

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज यानी 19 मार्च से शुरू हो चुका है. यह नौ दिनों का त्योहार मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का दिन माना जाता है. इस दौरान भक्त पूरे श्रद्धा भाव के साथ माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा-अराधना करते है. जहां सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना यानी कलश स्थापना के साथ की जाती है. मान्यता है कि कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा का घर में आगमन होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कलश स्थापना का शुभ समय, सही तरीका, साथ ही जानेंगे कलश स्थापना करते समय किन मंत्रों का जाप करना चाहिए.


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कलश स्थापना का समय


पंचांग के अनुसार, 19 मार्च को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 52 मिनट तक है. यदि किसी कारणवश इस समय पूजा करना संभव न हो, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में भी यह शुभ कार्य किया जा सकता है. अभिजीत मुहूर्त दोपहर, 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा.


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कैसे करें कलश स्थापना


पूजा की शुरुआत हमेशा भगवान गणेश के ध्यान से करनी चाहिए. ऐसा माना जाता है कि बिना गणेश जी की पूजा के कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता.सबसे पहले पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें. इसके साथ 'ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।' मंत्र का जाप करना चाहिए. कलश स्थापना करने के लिए हल्दी से अष्टदल बनाएं. इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं.


यह भी पढ़ें: दिल्ली के इस इमारत में भीषण आग, नौ लोगों को रेस्क्यू करने में जुटी फायर ब्रिगेड


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जौ को समृद्धि और उन्नति का प्रतीक माना जाता है. अब एक कलश लें, उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और मौली बांधें. कलश में स्वच्छ जल भरकर उसमें गंगाजल की कुछ बूंदें डालें. साथ ही सिक्का, हल्दी, सुपारी, अक्षत, पान, फूल और इलायची भी डालें.इसके ऊपर आम के पत्ते रखें और फिर लाल चुनरी में लिपटा नारियल कलश पर स्थापित करें. यही कलश मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है.


कलश स्थापना करते हुए करें इन मंत्रों का जाप


ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः, मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः


ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः


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मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः


कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा,


ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदो ह्यथर्वणः

महाकाल वाट्सग्रुप का एडमिन गिरफ्तार, हार्स रेसिंग बेटिंग से जुड़ा कनेक्शन
महाकाल वाट्सग्रुप का एडमिन गिरफ्तार, हार्स रेसिंग बेटिंग से जुड़ा कनेक्शन
वाराणसी: साइबर अपराध पर पुलिस का प्रहार जारी है. इसी क्रम में हॉर्स रेसिंग बेटिंग एप के आरोपी महाकाल वाट्सएप ग्रुप के एडमिन राघवेंद्र सिंह को साइबर सेल ने सारनाथ थाना क्षेत्र के तिलमापुर से गिरफ्तार किया. महाकाल और एके रेसिंग वाट्सएप ग्रुप से ऑनलाइन जुए का खेल चला रहा था. मुंबई, दिल्ली तक हॉर्स रेसिंग बेटिंग के तार जुड़े हैं. आरोपी राघवेंद्र के चचेरे भाई मनोज, अजय वाधवानी, पवन शर्मा और एक अन्य की गिरफ्तारी के लिए साइबर सेल की टीम दबिश दे रही है.साइबर सेल और प्रतिबिंब पोर्टल के प्रभारी हिमांशु त्रिपाठी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी राघवेंद्र सिंह गाजीपुर के बासूचक रामपुर मांझा का मूल निवासी है और तिलमापुर में रहता है. पूछताछ में बताया कि हॉर्स रेसिंग में बेटिंग करवाता हूं. वाट्सएप ग्रुप बना रखा है. लोग वीडियो यू-ट्यूब से देखकर संपर्क करते हैं, जिन्हें एक वाट्सएप ग्रुप में जोड़कर भारत में डेली होने वाले हार्स रेस की बोर्ड की फोटो ग्रुप में डालकर लोगों से बेटिंग के लिए कहा जाता है.यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन आज, इन मंत्रों के साथ करें कलश स्थापनाबेटिंग करने वाले चचेरे बड़े भाई मनोज कुमार सिंह के बैंक खाते में पैसे भेजते थे. यूपीआई के जरिये रकम को निकाल लेता था. पैसे लगाने वाले अपना घोड़ा चुनकर बेट लगाते थे. रिजल्ट आने पर जीते लोगों का पैसा वापस कर देते हैं और जो लोग हार जाते हैं उनका पैसा रख लेते हैं. रेस कोर्स के रिजल्ट indiarace.com नामक वेबसाइट पर देख लेते हैं.एक व्यक्ति को बोर्ड भेजा जाताआरोपी राघवेंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि पिछले एक साल से महाकाल ग्रुप से जुड़ा था. एक मोबाइल नंबर से एक व्यक्ति को बोर्ड भेजा जाता है. जिसे ग्रुप में फारवर्ड कर देते हैं. पीड़ित अमोल ने भी वाट्सएप ग्रुप में जुड़कर बेटिंग किया था. उसने चालाकी से बेट जीतने वालों की फोटो अपने वाट्सएप पर लगाकर जीत की रकम खाते में ले ली.गोवा में ली ट्रेनिंगगोवा में कर्मा ग्रुप में नौकरी के दौरान मैनेजर अजव वाधवानी के साथ मुंबई आवाजाही करता था. उसके साथ रेसकोर्स भी जाता था. यही से हॉर्स रेसिंग का आइडिया मिला. कोविड के समय व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें अजय वाधवानी के माध्यम से जुड़ गया था, हॉर्स रेस पर पैसा लगाया था. वहीं से जानकारी हुई. एके रेसिंग ग्रुप 2020 में बनाया गया था, पिछले 2 महीने से देख रहा हूं. बेटिंग में पवन शर्मा के कहने पर लगाया. पवन शर्मा के बताए गए अकाउंट में आगे भेजकर बेटिंग में लगा देता था.
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन आज, इन मंत्रों के साथ करें कलश स्थापना
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन आज, इन मंत्रों के साथ करें कलश स्थापना
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज यानी 19 मार्च से शुरू हो चुका है. यह नौ दिनों का त्योहार मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का दिन माना जाता है. इस दौरान भक्त पूरे श्रद्धा भाव के साथ माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा-अराधना करते है. जहां सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना यानी कलश स्थापना के साथ की जाती है. मान्यता है कि कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा का घर में आगमन होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कलश स्थापना का शुभ समय, सही तरीका, साथ ही जानेंगे कलश स्थापना करते समय किन मंत्रों का जाप करना चाहिए.कलश स्थापना का समय पंचांग के अनुसार, 19 मार्च को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 52 मिनट तक है. यदि किसी कारणवश इस समय पूजा करना संभव न हो, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में भी यह शुभ कार्य किया जा सकता है. अभिजीत मुहूर्त दोपहर, 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा.कैसे करें कलश स्थापनापूजा की शुरुआत हमेशा भगवान गणेश के ध्यान से करनी चाहिए. ऐसा माना जाता है कि बिना गणेश जी की पूजा के कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता.सबसे पहले पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें. इसके साथ 'ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।' मंत्र का जाप करना चाहिए. कलश स्थापना करने के लिए हल्दी से अष्टदल बनाएं. इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं.यह भी पढ़ें: दिल्ली के इस इमारत में भीषण आग, नौ लोगों को रेस्क्यू करने में जुटी फायर ब्रिगेडजौ को समृद्धि और उन्नति का प्रतीक माना जाता है. अब एक कलश लें, उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और मौली बांधें. कलश में स्वच्छ जल भरकर उसमें गंगाजल की कुछ बूंदें डालें. साथ ही सिक्का, हल्दी, सुपारी, अक्षत, पान, फूल और इलायची भी डालें.इसके ऊपर आम के पत्ते रखें और फिर लाल चुनरी में लिपटा नारियल कलश पर स्थापित करें. यही कलश मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है.कलश स्थापना करते हुए करें इन मंत्रों का जाप ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः, मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताःॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितःमूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताःकुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा,ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदो ह्यथर्वणः
हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ आज से, इस साल 12 नहीं 13 महीने...
हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ आज से, इस साल 12 नहीं 13 महीने...
हिन्दू नववर्ष: भारत में आज से हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो चुकी है.पूरे देश में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ लोग नववर्ष का स्वागत कर रहे हैं.मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हो रही है, वहीं घर-घर में मंगलकामनाओं के साथ नए साल की शुरुआत की जा रही है.हिंदू नववर्ष केवल एक कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर चलने वाली जीवन शैली का प्रतीक है.इस समय प्रकृति भी नए रूप में दिखाई देती है.पतझड़ के बाद वृक्ष अपने पुराने पत्तों को त्याग देते हैं और वसंत ऋतु में नई कोपलें जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती हैं.इसी तरह यह नववर्ष भी हमें पुरानी नकारात्मकताओं को छोड़कर सकारात्मक सोच और नए उत्साह के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है. अगर आर्थिक दृष्टि से देखें, तो इस पर्व का बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी खासा प्रभाव पड़ता है. नववर्ष के मौके पर लोग नए वस्त्र, आभूषण, वाहन और घरेलू सामान की खरीदारी करते हैं, जिससे बाजार में रौनक बढ़ जाती है.मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजन...मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के चलते फूल विक्रेताओं, मिठाई दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को विशेष लाभ मिलता है.इसके अलावा, कृषि प्रधान समाज में यह समय नई फसलों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है.इस तरह हिंदू नववर्ष आस्था के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाला पर्व है, जो समाज को सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से जोड़ने का काम करता है.शुक्ल योग-उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में हिन्दू नववर्ष 2083 का शुभारंभहिन्दू नववर्ष 2083 का शुभारंभ शुक्ल योग और उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है. आज शुक्ल योग प्रात:काल से लेकर देर रात 01:17 ए एम तक है. वहीं उत्तरभाद्रपद नक्षत्र भी प्रात:काल से लेकर कल 04:05 ए एम तक है. उसके बाद से रेवती नक्षत्र है.ALSO READ : स्कूल संचालक के साथ जमकर मारपीट, अटेंडेंस को लेकर छिड़ा विवादहिन्दू नववर्ष 2083 में 12 नहीं 13 महीनेइस बार हिन्दू नववर्ष में 12 की जगह पर 13 महीने होंगे. ज्येष्ठ माह में एक अधिकमास जुड़ जाएगा, इसकी वजह से 12 के स्थान पर 13 महीने होंगे. अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. यह जिस माह के साथ जुड़ता है, उसमें कृष्ण पक्ष के बाद अधिक मास का शुक्ल पक्ष 15 तिथियों तक होता है.