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चांद पर घर बसाने की तैयारी: IIT BHU ने तैयार की चंद्रमा की मिट्टी, अब होगी धातु निकालने और 3D प्रिंटिंग की रिसर्च

चांद पर घर बसाने की तैयारी: IIT BHU ने तैयार की चंद्रमा की मिट्टी, अब होगी धातु निकालने और 3D प्रिंटिंग की रिसर्च
Aug 05, 2026, 01:16 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी: भारत के 2047 तक चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति के विजन को साकार करने की दिशा में IIT (BHU) के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, संस्थान के शोधकर्ताओं ने चंद्रमा की मिट्टी (लूनर रेजोलिथ) का कृत्रिम नमूना यानी लूनर सिमुलेंट तैयार किया है, इस सिमुलेंट की मदद से अब चंद्रमा की मिट्टी से धातु निकालने और 3D प्रिंटिंग के जरिए ईंट, निर्माण सामग्री तथा अन्य उपयोगी संरचनाएं विकसित करने पर शोध किया जाएगा, इस परियोजना में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भी सहयोग कर रहा है.


मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. के.के. सिंह ने बताया कि भारत का लक्ष्य 2047 तक चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति सुनिश्चित करना है, ऐसे में वहां उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर निर्माण सामग्री तैयार करना बेहद आवश्यक होगा। इसी उद्देश्य से टीम ने चंद्रमा की मिट्टी की रासायनिक और भौतिक विशेषताओं से मेल खाने वाला लूनर सिमुलेंट विकसित किया है.

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उन्होंने बताया कि यह सिमुलेंट अमेरिका के अपोलो-16 मिशन से प्राप्त चंद्र मिट्टी के उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है, इसे विकसित करने में करीब छह से सात महीने का समय लगा। कई बार असफलताओं के बाद प्राकृतिक खनिजों के सही अनुपात का चयन कर ऐसा नमूना तैयार किया गया, जिसकी रासायनिक संरचना और कणों का आकार वास्तविक चंद्र मिट्टी के काफी करीब है.


परियोजना से जुड़ी रिसर्च स्कॉलर रचिता भीम सिंह ने बताया कि चंद्रमा से बड़ी मात्रा में मिट्टी पृथ्वी पर लाना संभव नहीं है, इसलिए पहले उसका कृत्रिम नमूना तैयार किया गया है। अब इसी सिमुलेंट से एल्यूमिनियम, टाइटेनियम जैसे महत्वपूर्ण धातुओं को निकालने पर काम किया जाएगा। इसके लिए लगभग 1200 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर प्रयोग किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले एक से डेढ़ वर्ष में इस दिशा में ठोस परिणाम मिलने की उम्मीद है.


शोधकर्ता अभिषेक सिंह ने बताया कि टीम अब इस सिमुलेंट से 3D प्रिंटिंग के लिए विशेष इंक विकसित कर रही है, शुरुआती नमूने तैयार किए जा चुके हैं, इसके सफल होने के बाद इसी सामग्री से ईंट, जियोपॉलीमर, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे भविष्य में चंद्रमा पर रहने योग्य संरचनाएं बनाई जा सकें.


परियोजना से जुड़े 3D प्रिंटिंग विशेषज्ञ ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती ऐसी इंक तैयार करना थी, जिसे मात्र 200 माइक्रोन की नोजल से नियंत्रित तरीके से बाहर निकाला जा सके। टीम ने नॉन-न्यूटोनियन फ्लूइड आधारित विशेष इंक विकसित कर इस चुनौती का समाधान किया है, भविष्य में इसी तकनीक का उपयोग चंद्रमा पर सीधे निर्माण कार्य के लिए किया जा सकेगा.


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प्रो. के.के. सिंह ने बताया कि इस बहुविषयक परियोजना में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के डॉ. पवन शर्मा 3D प्रिंटिंग तकनीक पर, जबकि केमिकल इंजीनियरिंग की प्रो. उदिता घोष सिमुलेंट की रियोलॉजिकल विशेषताओं पर काम कर रही हैं। तीनों वैज्ञानिक और शोधार्थी मिलकर इस परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं.


वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह शोध सफल रहा तो भविष्य में चंद्रमा पर स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर भवन, उपकरण और अन्य आवश्यक संरचनाएं तैयार की जा सकेंगी। इससे भारत के भावी चंद्र अभियानों को नई तकनीकी मजबूती मिलेगी और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में देश की क्षमता और बढ़ेगी.

नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
वाराणसी : नागपंचमी पर्व को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जैतपुरा स्थित ऐतिहासिक नागकुआं क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर मेला क्षेत्र में सफाई, प्रकाश, जल निकासी और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नागरिक सुविधाओं में किसी भी तरह की कमी न रहे।नगर आयुक्त ने पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए निर्बाध स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए। उन्होंने जलकल और सिविल विभाग के जेई को व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त करने को कहा।ALSO READ: कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथनागकुआं के निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने औसानगंज वार्ड का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सफाई समेत अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नागपंचमी के मेला क्षेत्र और आसपास के वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय पार्षद, जलकल विभाग के जेई, सिविल विभाग के जेई, सफाई निरीक्षक अवनीश दुबे समेत नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
वाराणसीः बीएचयू में पालतू कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल 11 साल के अभिनव से चार दिन बाद रविवार को मिलने प्रो. श्रद्धा सिंह अपने पति के साथ ट्रामा सेंटर पहुंचीं. उन्होंने बच्चे के माता-पिता से हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में कुत्ता नहीं रखने की बात कही. हालांकि बच्चे के माता-पिता ने उनसे नाराजगी जताई. मां ने तो सीधे सवाल कर दिया कि अब क्यों आईं हैं. पिता ने शिकायत किया कि बच्चा अब भी बोल नहीं पा रहा है.ALSO READ: BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकालाप्रोफेसर और उनके पति ने कुत्ते के टीकाकरण का कार्ड दिखाया. साथ ही कहा कि भविष्य में कुत्ता घर में नहीं रखने की बात भी कही। बता दें कि बीते 13 अगस्त की सुबह बीएचयू ट्रामा सेंटर में सीनियर नर्सिंग आफिसर प्रेमाराम दोनों बेटों 11 वर्षीय अभिनव और 13 वर्षीय हर्ष के साथ बीएचयू परिसर में मार्निंग वाक पर निकले थे. वापस लौटने के दौरान कुछ दूर निकल चुके बड़े बेटे को लेने के लिए आगे बढ़ गए. वहीं छोटा बेटा परिसर की ही जोधपुर कालोनी स्थित घर की ओर अकेला जाने लगा. इसी दौरान हिंदी विभाग की प्रो. श्रद्धा सिंह के पालतू कुत्ते ने अभिनव पर हमला कर दिया. वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह से बच्चे को कुत्ते से बचाया. गंभीर हालत में उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया. बच्चे को कुत्ते ने इतनी बुरी तरह से काटा था कि उसके सिर व चेहरे पर 50 टांके लगाने पड़े. वहीं आरोप है कि प्रो. श्रद्धा सिंह बच्चे की मदद करने की बजाय वहां से चली गईं. उन्होंने बच्चे पर कुत्ते द्वारा हमले से भी इनकार किया था. वहीं बीएचयू प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था.
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
वाराणसी : बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के नवनियुक्त प्रभारी पर 11 साल से तैनात केयरटेकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केयर टेकर का आरोप है कि मुझ पर कुछ कर्मचारियों के खिलाफ गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाया गया।केयर टेकर ने दावा किया कि दबाव में काम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 28 जुलाई को कुलपति से शिकायत की। इसके अगले ही दिन मुझे ट्रॉमा सेंटर आने से रोक दिया गया। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी शोकॉज नोटिस के काम से हटा दिया गया।मामले में केयर टेकर ने कुलपति को ई-मेल के जरिए शिकायत करने के साथ सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर प्रभारी बदलाव के लिए आए थे, लेकिन उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाने का आरोपBHU ट्रॉमा सेंटर में 2014 से केयरटेकर के पद पर तैनात सुनील यादव ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है। कहा- 20 जुलाई को नए प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. अजीत कुमार के आने के बाद से मुझे परेशान किया जा रहा था।सुनील ने कहा- कुछ कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखने के लिए मुझ पर दबाव बनाया जा रहा था। लिखना था कि वे समय पर ड्यूटी नहीं आते और काम नहीं करते, जबकि कर्मचारी नियमित रूप से काम कर रहे थे।ALSO READ: बीएचयू शिक्षा संकाय का 109वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गयासुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।सुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।मना किया तो ट्रामा में प्रवेश पर रोक लगा दीसुनील ने बताया कि उन्होंने ऐसा लिखने से इनकार किया तो उन पर दबाव बनाया गया और कहा गया कि वह सौरभ सिंह के आदमी हैं। इसके बाद उन्होंने 28 जुलाई को पत्र के माध्यम से कुलपति से शिकायत की। उनका आरोप है कि 29 जुलाई को जब वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और बताया कि उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।सुनील का कहना है कि उन्हें काम से हटाने से पहले कोई शो-कॉज नोटिस नहीं दिया गया। उन्हें सीधे कहा गया कि वह अगले दिन से काम पर न आएं। उन्होंने इस कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताते हुए मामले में शिकायत की है।सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में शिकायतसुनील यादव ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर ई-मेल के जरिए कुलपति से शिकायत की। इसके बाद जनसुनवाई, सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में वर्चस्व की लड़ाई के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सुनील के मुताबिक, वह 11 साल से काम कर रहे हैं और उन्हें बदले की भावना से हटाया गया है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बना हुआ है।सुनील ने दावा किया कि जब उन्होंने कार्रवाई का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि वीसी ने निर्देश दिया है कि जो भी गलत दिखाई दे, उसे हटा दिया जाए।