ससुराल में सपरिवार पहुंचे चंद्रमौलीश्वर, बौद्ध परिपथ पर गूंजा हर-हर महादेव

वाराणसी : बाबा विश्वनाथ मंगलवार की शाम अपने ससुराल सारनाथ स्थित सारंगनाथ मंदिर पहुंचे. इस दौरान देवाधिदेव के स्वागत में पूरा क्षेत्र उमड़ पड़ा. चंद्रमौलीश्वर के अलौकिक स्वरूप में सपरिवार महादेव जब सुसज्जित पालकी पर विराजमान होकर बौद्ध परिपथ से निकले तो सनातन की आस्था, जैन परंपरा और बौद्ध संस्कृति एक ही राह पर साथ-साथ चलती दिखाई दी. पालकी में एक ओर महादेव की गोद में प्रथमेश और दूसरी ओर माता पार्वती विराजमान थीं. शंखध्वनि, डमरुओं और शहनाई की गूंज और हर-हर महादेव के जयघोष से सारनाथ का वातावरण भक्तिमय हो उठा.
महादेव के ससुराल आगमन पर स्थानीय भक्तों और तीर्थ पुरोहितों ने ऐसा स्वागत किया, जैसे वर्षों बाद घर आए दामाद के स्वागत में पूरा परिवार पलक-पांवड़े बिछा दे. प्रदोष काल में चंद्रमौलीश्वर को झूले पर विराजमान कराया गया और 501 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर उनका सामूहिक महाभिषेक किया गया.

51 डमरुओं के निनाद के बीच निकली बाबा की पालकी
सारनाथ के गंज क्षेत्र स्थित संकटमोचन मंदिर से दोपहर तीन बजे इस दिव्य यात्रा का शुभारंभ हुआ. इससे पहले शिवांजलि के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने चंद्रमौलीश्वर स्वरूप का विधि-विधान से श्रृंगार किया. महाआरती और विशेष पूजन के बाद काशी विश्वनाथ डमरू दल के मोनू बाबा के नेतृत्व में 51 डमरुओं की गूंज के बीच पालकी यात्रा रवाना हुई. पालकी के साथ पुनीत जेतली ‘पागल बाबा’ छत्र लेकर चल रहे थे, जबकि मनोज शर्मा चंवर डुला रहे थे. मार्ग में श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर पुष्प अर्पित किए और शीश नवाया. सारनाथ पहुंचने पर सामूहिक रुद्राभिषेक पीठम के अध्यक्ष विनोद कुमार शर्मा (एड.)और शिव बारात समिति के महामंत्री दिलीप सिंह और हरीश वालिया ने बाबा की अगवानी की. बाबा की पालकी जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, श्रद्धालुओं की आस्था भी उसके साथ उमड़ती गई.

झूले पर विराजे महादेव, 501 पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक
सारंगनाथ मंदिर पहुंचते ही बाबा के ससुरालवासियों ने उनका परंपरागत भाव से स्वागत किया. प्रदोष की बेला में चंद्रमौलीश्वर को झूले पर विराजमान कराया गया. इसके बाद 501 पार्थिव शिवलिंग बनाए गए. पंचतीर्थ और पंचकूप के पवित्र जल में सर्वौषधि मिश्रित कर इन शिवलिंगों का सामूहिक महाभिषेक किया गया. यह दृश्य श्रद्धा और भावुकता से भरा था. एक ओर झूले पर सपरिवार विराजमान चंद्रमौलीश्वर थे तो दूसरी ओर उनके ससुरालवासी भक्तिभाव से अभिषेक में जुटे थे.
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इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास टेढ़ी नीम से लाई गई नक्काशीदार पालकी रही. चंद्रमौलीश्वर स्वरूप की यह प्रतिमा और पालकी काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं की साक्षी है. कुंभ क्षेत्र में भी इस स्वरूप को ले जाने की परंपरा रही है. महाशिवरात्रि पर महामृत्युंजय मंदिर से निकलने वाली बाबा विश्वनाथ की प्रसिद्ध बारात में भी चंद्रमौलीश्वर स्वरूप विराजमान होते हैं.



