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चंद्रावती गंगा घाट से जैन सर्किट को मिलेगी विशिष्ट पहचान, अंतिम चरण में करोड़ों रुपए की इको-फ्रेंडली परियोजना

चंद्रावती गंगा घाट से जैन सर्किट को मिलेगी विशिष्ट पहचान, अंतिम चरण में करोड़ों रुपए की इको-फ्रेंडली परियोजना
Mar 23, 2026, 01:28 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: गंगा किनारे बसे वाराणसी के चंद्रावती गांव को जल्द ही विशिष्ट पहचान मिलने जा रही है. उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग जैन सर्किट के तहत यहां 17.06 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक, पर्यावरण के अनुकूल तीन-स्तरीय घाट का निर्माण करा रहा है, जो करीब 99 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है. जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु की जन्मस्थली पर बना 200 मीटर लंबा घाट जल्द ही आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा. जिले के अन्य घाटों की तुलना में अधिक शांत यह स्थल जनपद में पर्यटन को नया आयाम देगा.


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उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार आध्यात्मिक पर्यटन को विस्तार देने में जुटी है. इसी कड़ी में चौबेपुर क्षेत्र के चंद्रावती गंगा घाट परियोजना तेजी से आकार ले रही है. यह प्रयास न केवल अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाएगी, बल्कि सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी दर्शाती है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में वाराणसी में 17.30 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया, जो शहर की बढ़ती वैश्विक पहचान और पर्यटन आकर्षण को दर्शाता है. उम्मीद है आने वाले दिनों में चंद्रावती जैन धर्मावलंबियों को प्रमुखता से आकर्षित करेगा.'


संरचनात्मक कार्य अंतिम चरण में


विकास परियोजना से संबंधित अधिकारियों ने बताया कि वाराणसी में विकसित हो रहे तीन-स्तरीय घाट का संरचनात्मक कार्य पूर्ण हो चुका है. यहां प्रथम और द्वितीय स्तर पूरी तरह तैयार हैं. तृतीय स्तर का प्लेटफॉर्म भी बनकर तैयार हो गया है. हालांकि, फ्लोरिंग और रेलिंग का शेष कार्य जैन श्वेतांबर तीर्थ सोसायटी द्वारा कराया जाएगा.


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कटाव से बचाव और पर्यावरण अनुकूल निर्माण


यह परियोजना कई मायनों में विशिष्ट मानी जा रही है. इसे एक आधुनिक रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया गया है, जो एक ओर घाट किनारे स्थित मंदिर को कटाव से सुरक्षित रखने में सक्षम है, वहीं दूसरी ओर गंगा जल को मंदिर परिसर में प्रवेश करने से भी रोकता है. पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए घाट का निर्माण कम कार्बन फुटप्रिंट वाली तकनीक से किया गया है. विशेष रूप से गैबियन संरचना पर आधारित यह निर्माण भू-जल संतुलन को प्रभावित किए बिना स्थायित्व और पारिस्थितिक संतुलन दोनों को सुनिश्चित करता है.


पर्यटकों की सुविधा का विशेष ध्यान


वाराणसी में विकसित यह नया घाट पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है. पर्यटकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए यहां नवनिर्मित सीढ़ियों के जरिए गंगा तट तक सहज पहुंच सुनिश्चित की गई है. साथ ही, शौचालय, पोर्टेबल चेंजिंग रूम, साइनेज और पार्किंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं. घाट पर हेरिटेज लाइटिंग, पत्थर की बेंच, जालीदार रेलिंग और हरित क्षेत्र इसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं, जिससे यह स्थल पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बनता जा रहा है.


जैन धर्मावलंबियों के लिए है खास


काशी से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित चंद्रावती जैन धर्मावलंबियों के लिए पवित्र स्थल है. यह स्थान जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु के जन्म और उनके जीवन यात्रा से जुड़ा है. यह स्थल उनके च्यवन कल्याणक, जन्म कल्याणक, दीक्षा कल्याणक तथा केवलज्ञान कल्याणक जैसे चार प्रमुख कल्याणकों से संबंधित है. यहां स्थित मंदिर करीब 500 वर्ष से अधिक प्राचीन है. जैन ग्रंथों के अनुसार, भगवान चंद्रप्रभु का जन्म राजा महासेन और रानी लक्ष्मणा देवी के यहां हुआ था. उन्होंने गंगा तट के किनारे नाग वृक्ष के नीचे तपस्या कर केवल ज्ञान प्राप्त किया था.

यूपी का सबसे ठंडा शहर बना 'वाराणसी', आंधी-बारिश का यलो अलर्ट
यूपी का सबसे ठंडा शहर बना 'वाराणसी', आंधी-बारिश का यलो अलर्ट
Varanasi becomes the coldest city in Uttar Pradesh, yellow alert issued for thunderstorm and rainदेशभर में इन दिनों मौसम का मिजाज काफी बदलता नजर आ रहा है. वाराणसी की काशी नगरी लगातार दूसरे दिन भी बारिश और तेज हवा की चपेट में रही. वहीं बुधवार को आई आंधी से शहर अभी तक पूरी तरह उबर नहीं सका है, बीते 36 घंटे में पारा 30.3 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जा सका, बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 30.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 9.9 डिग्री नीचे रहा, वहीं न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस रहा. बनारस का मौसम पूरे प्रदेश में शीतल सुहाना हो गया, मौसम विज्ञान विभाग का पूर्वानुमान है कि अब शुक्रवार से तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि होगी और अगले तीन-चार दिनों में यह 4-5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ेगा. इसके बाद चार या पांच मई के बाद फिर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में बदलाव आएगा और बादल बुन्नी का वातावरण बनेगा, इस तरह अगले सप्ताह में भी लू के प्रचंड कहर से राहत मिलने की पूरी संभावना है.धूल भरी आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना वहीं हवा के झोके इतने तेज थे कि 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रही. बीते 24 घंटे में 11 मिलीमीटर बारिश हुई, वाराणसी में 4 और 5 मई को दोबारा बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है, बिजली चमकने और धूल भरी आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना जताई गई है, 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है, बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे से ही धूप धुंधली होने लगी और 9 बजे तक अंधेरा छा गया, बादलों की गर्जना के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई. बीच-बीच में रुक-रुककर कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होती रही, हालांकि दोपहर में हल्की धूप की भी झलक दिखी, बुधवार को साढ़े तीन बजे के बाद गिरा पारा बृहस्पतिवार को शाम चार बजे तक 28 डिग्री को भी पार नहीं कर सका.109 किमी प्रति घंटा के वेग से आई आंधीजानकारी के मुताबिक, बीते एक दिन पहले 109 किमी प्रति घंटा के वेग से आई आंधी और कुल 11.4 मिमी वर्षा के बाद बीते गुरुवार की सुबह भी तेज गरज के साथ पड़ी हल्की फुहारों ने 0.5 मिमी पानी गिराया. सुबह से दोपहर तक बादलों का साया बना रहा, दोपहर बाद धूप खिली लेकिन उसमें नरमाहट बनी रही, वर्षा के चलते मौसम में पर्याप्त आर्द्रता से तापमान में तेजी से गिरावट आई और 24 घंटे में अधिकतम तापमान ने 11.3 डिग्री सेल्सियस का गोता लगाया. यह सामान्य से लगभग 10 डिग्री नीचे 30.3 डिग्री सेल्सियस पर आ गया. न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस नीचे 22.8 पर रहा और बनारस का मौसम पूरे प्रदेश में शीतल सुहाना हो गया.लू का खतरा अभी टला, पुरवा मजबूतआपको बता दें, इस बिगड़ते मौसम को देखते हुए यूपी के आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में आंधी-तूफान के साथ हुई बारिश से तापमान में 12 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आई है, इससे लू की स्थितियां फिलहाल समाप्त हो गई हैं, उन्होंने बताया कि उत्तरी पाकिस्तान और उससे लगे जम्मू-कश्मीर के आसपास चक्रवात के रूप में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में पुरवा हवा का भी प्रभाव बना हुआ है. मई के शुरुआती 2-3 दिनों में प्रदेश में जारी बेमौसम बारिश में कमी आ सकती है, जिससे तापमान में 4 से 6 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं 4-5 मई को अगले पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से फिर से बारिश बढ़ने और तापमान में गिरावट आने की संभावना है, आगामी सप्ताह में लू से राहत मिलने की उम्मीद है.https://www.youtube.com/watch?v=OxmuubD2ofQ
डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा- फोटोग्राफी में रघु राय जैसी दृष्टि जरूरी
डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा- फोटोग्राफी में रघु राय जैसी दृष्टि जरूरी
Dr. Nagendra Kumar Singh said – Photography requires a vision like Raghu Rai's.वाराणसी: फोटोग्राफी की दुनिया में रघु राय एक कुशल जौहरी की तरह थे. एक रेडियो पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या अच्छी फोटो के लिए महंगे संसाधनों और लेंस की आवश्यकता होती है? इस पर रघु राय ने उत्तर दिया—“अच्छी लिखावट के लिए जरूरी नहीं कि कलम महंगी और सुंदर हो.” ये बातें गुरुवार को महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान और लाला दीनदयाल फोटो आर्ट सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्य वक्ता कला विज्ञ आर. गणेशन ने कही. इस अवसर पर महान फोटोग्राफर पद्मश्री रघु राय और वाराणसी के फोटोग्राफर प्रदीप पांडेय ‘रवि’ को श्रद्धांजलि दी गई. कार्यक्रम की शुरुआत रघु राय और प्रदीप पांडेय ‘रवि’ के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर की गई.रघु राय के चित्रों का एक स्लाइड शो भी प्रस्तुत बीज वक्तव्य लाला दीनदयाल फोटो आर्ट सोसायटी के अध्यक्ष विनय रावल ने दिया. इस दौरान उन्होंने रघु राय के चित्रों का एक स्लाइड शो भी प्रस्तुत किया. मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि फोटोग्राफी के लिए दृष्टि की आवश्यकता होती है. इसी दृष्टि और जुनून ने रघु राय को बुलंदी तक पहुँचाया. कार्यक्रम में मशहूर फोटोग्राफर कृष्ण देव ने कहा कि फोटोग्राफी एक एप्लाइड आर्ट है. रघु राय ने ब्लैक एंड व्हाइट माध्यम से समाज को बहुत सहजता के साथ चित्रित किया, जो सरल और प्रभावशाली हैं.इस मौके पर आनंद बरनवाल ने कहा कि फोटोग्राफर अपने विषय से भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है. किसी भी तस्वीर को कैद करने के लिए उससे जुड़ना और उसके साथ रूबरू होना आवश्यक है. उदाती दादा ने कहा कि फोटोग्राफी का विषय समय और विचार के साथ बदलता रहता है. रघु राय ने आज़ादी की लड़ाई और उसके बाद के दौर को भी अपने लेंस में प्रभावशाली ढंग से कैद किया. वरिष्ठ पत्रकार अजय राय ने कहा कि रघु राय हर तस्वीर में एक जीवंत क्षण (मूवमेंट) को पकड़ते थे. उन्होंने कहा कि एक अच्छा फोटोग्राफर वही होता है, जो बड़ा सोचता है. रघु राय के संदर्भ में उन्होंने बताया कि वे कहा करते थे—“फोटो के लिए मैं बनारस और दिल्ली की गलियों में भटकता रहता हूँ. जो भटकता है, वही पाता है.”"बनारस बना ‘सिटी ऑफ लाइट’"उन्होंने बनारस को ‘सिटी ऑफ लाइट’ भी कहा. अजय राय ने प्रदीप पांडेय ‘रवि’ को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी संवेदनाओं को ‘ग्रे शेड’ की तरह गहन बताया. अपने उद्बोधन में गंगारविंद ने ‘रवि’ के साथ बिताए पलों को भावुक मन से याद किया. वहीं ओ.पी. चौबे ने रघु राय के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे हमेशा गले में कैमरा लटकाए रखते थे और लेंस खुला रखते थे. रघु राय का मानना था कि “100 में से 90 फोटो डिलीट करना सीखिए.”Also Read: वाराणसी में होगा बुद्ध अस्थि अवशेष का दर्शन, धम्‍मयात्रा में विदेशी अनुयायी भी रहेंगे शामिलइस अवसर पर वाराणसी के नामचीन पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने उनसे जुड़ी स्मृतियाँ साझा करते हुए फोटोग्राफी की विभिन्न विधाओं पर चर्चा की और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान रंजन गौंड, डॉ जावेद और रमेश पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम का संचालन गणेश राय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रभा शंकर मिश्रा ने दिया। इस मौके पर वैश्वनी शुक्ला, श्री राम त्रिपाठी, संतोष मिश्रा, रामात्मा श्रीवास्तव, डॉ जिनेश, डॉ मनोहरलाल, डॉ. शिवजी सिंह, नागेंद्र पाठक, अनिरुद्ध पांडेय आदि उपस्थित रहे.https://www.youtube.com/watch?v=NTPQeLUJ9b8&t=2s
होर्मुज बना 'Strait Of Trump'! अमेरिका की इस हरकत से छिड़ा विवाद
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Hormuz becomes the 'Strait of Trump'! This US move sparks controversyमध्य पूर्व में चल रहे ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच कुछ ऐसा कर दिया गया है, जिसे देख हर कोई हैरान है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आज गुरुवार को अपने सोशल मीडिया ट्रूथ पर एक पोस्ट शेयर की है जो स्टेट ऑफ होर्मुज की है. जिसमें ये साफ देखा जा सकता है कि, इस तस्वीर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर स्ट्रेट ऑफ ट्रंप कर दिया गया है. जी हां, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य का नया नामकरण करते हुए इसे ट्रंप जलडमरूमध्य बताया है. ट्रंप ने एक पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए ये बड़ा दावा किया है्. उनके इस पोस्ट से ऐसा माना जा रहा है कि, ट्रंप एक नया विवाद छेड़ने के मूड में नजर आ रहे हैं.जानिए क्या है मामला दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम बदलकर ट्रंप जलडमरूमध्य कर दिया है. ऐसे में हैरानी इस बात की है कि, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर साझा एक पोस्ट को री-पोस्ट किया, जिसमें होर्मुज की तस्वीर को ट्रंप जलडमरूमध्य दिखाया तो है, मगर जिस यूजर की पोस्ट को ट्रंप ने री-पोस्ट किया है, वह पोस्ट ही वहां से गायब है. ये काफी आश्चर्य की बात है. पश्चिम एशिया संकट के चलते पहले से ही चर्चाओं में छाया होर्मुज जलडमरूमध्य अब एक बड़ा विवाद का मुद्दा बनता नजर आ रहा है. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने बीते बुधवार को ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को शानदार रणनीति बताते हुए कहा कि, तेहरान को हार माननी ही पड़ेगी. जब तक कि वह अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नहीं छोड़ देता, तब तक कोई समझौता नहीं हो सकता है. मालूम हो कि, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी कर इस समुद्री रास्ते को और भी खतरनाक बना दिया है.ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का जाने क्या है मामला जानकारी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान की खाड़ी के बीच में स्थित दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन समुद्री मार्गों में से एक है, जिसके चलते इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है. दुनिया का करीब 20-30 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है, मगर ईरान ने अमेरिका और इस्राइल युद्ध के चलते ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई और दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आया है.Also Read: विवाद के चक्कर में युवक ने खुद को मारी गोली, तीन दिन बाद पुलिस को मिली सूचनाअब अमेरिका ने भी होर्मुज की नाकाबंदी कर दी है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. इन सभी के पीछे का सबसे बड़ा राज यह है कि, अप्रैल 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज में नौसैनिक नाकाबंदी कर ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाया है, इसका उद्देश्य परमाणु मुद्दों पर बातचीत के लिए ईरान को मजबूर करना, तेल निर्यात रोकना और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अमेरिकी प्रभुत्व बनाए रखना है, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा मार्ग है.https://www.youtube.com/watch?v=dDM6bqR657U