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वाराणसी के वीकेएम में होटल को लेकर विवाद, सियासत गरम

वाराणसी के वीकेएम में होटल को लेकर विवाद, सियासत गरम
Feb 17, 2026, 07:07 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : रथयात्रा - गुरुबाग रोड पर डेढ़ सौ साल पुराने थियोसोफिकल सोसाइटी की एक प्रॉपर्टी को दयाल ग्रुप को लीज पर देने पर विवाद गहरा गया है. इस मसले को समाजवादी पार्टी के विधायक ओमप्रकाश सिंह ने विधानसभा में उठा इसे सियासी रूप दे दिया है. यह प्रॉपर्टी थियोसोफिकल सोसाइटी इंडियन सेक्शन की है, जो ऐतिहासिक महत्व की है और बीएचयू से जुड़े पुराने छात्रों और बौद्धिक वर्ग में इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता है. काशी के लोगों ने कहा, 'बीएचयू की स्थापना में एनी बेसेंट की महत्वपूर्ण भूमिका और उनकी ही विरासत को खत्म किया जा रहा है.


दरअसल, इसी सोसायटी ने 16 बिस्वा जमीन दयाल ग्रुप को 30 साल के लिए लीज पर दे दी है. यहां दयाल ग्रुप की ओर से 65 कमरों वाला थ्री स्टार होटल पिछले नौ महीनों से बन रहा है. अभी निर्माण कार्य पूरा होने में साल भर और लगेगा. खुद को इस होटल के केयर टेकर बताने वाले जुगनू सिंह ने बताया कि ये निर्माण सोसाइटी और दयाल ग्रुप के बीच हुए समझौते के बाद हो रहा है. सोसाइटी की जमीन हमने लीज पर ली है और वीडीए द्वारा अप्रूवल मिलने के बाद ही हमने निर्माण कार्य शुरू कराया.


लोगों को कहना है कि सरकार एक तरफ शिक्षा को बढावा दे रही तो दूसरी ओर पर भी काट रही है. बसंत महिला कॉलेज में इस जमीन का एक हिस्सा होटल निर्माण के लिए तीस वर्षों की लीज पर दिए जाने से स्थानीय नागरिकों, शिक्षाविदों और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़े पूर्व छात्रों में नाराजगी है. यह जमीन गर्ल्स हॉस्टल के बगल में स्थित है और पहले इसे शैक्षणिक उपयोग से जुड़ा माना जाता रहा है.



बसंत कन्या महाविद्यालय और उसकी पृष्ठभूमि


बसंत कन्या इंटर कॉलेज और बसंत कन्या महाविद्यालय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान हैं. इनकी स्थापना उन्नीस सौ चौवन में डॉ रोहित मेहता ने की थी. एनी बेसेंट के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने महिलाओं की शिक्षा को सेवा का माध्यम मानते हुए इन संस्थानों की नींव रखी. यह महाविद्यालय बेसेंट एजुकेशन फेलोशिप द्वारा संचालित है और कमच्छा स्थित थियोसोफिकल सोसाइटी परिसर में स्थित है. इसी परिसर से सटी जमीन पर होटल निर्माण शुरू हुआ है जिसे लेकर असहमति सामने आ रही है.


स्थानीय अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है कि गर्ल्स हॉस्टल के पास व्यावसायिक होटल का निर्माण सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं है. बीएचयू के पूर्व छात्र और समाजवादी नेता कुंवर सुरेश सिंह ने ऐलान किया है कि 21 फरवरी को होटल निर्माण के विरोध में धरना दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा.


संस्था का पक्ष और आधिकारिक बयान


थियोसोफिकल सोसाइटी के सचिव शशिनंदन राजदर ने कहा कि जिस भूमि पर होटल का निर्माण हो रहा है वह संस्था की संपत्ति है और नियमानुसार उसे तीस वर्षों की लीज पर दिया गया है. उन्होंने बताया कि पूर्व में भी इस स्थान पर व्यावसायिक गतिविधियां हो चुकी हैं और इससे संस्था को अतिरिक्त आय प्राप्त होती रही है. उनके अनुसार इस आय से संस्था द्वारा संचालित शैक्षणिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलती है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होटल का संचालन शैक्षणिक संस्थानों और छात्रावासों से अलग दायरे में होगा और किसी भी प्रकार से छात्रों की गतिविधियों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा.


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रोपवे परियोजना के लिए दी गई भूमि का संदर्भ


संस्था की ओर से यह भी बताया गया कि इससे पहले वाराणसी के हित में रोपवे स्टेशन के लिए भी भूमि दी गई थी. उनका कहना है कि होटल के लिए जमीन लीज पर देने का उद्देश्य केवल आय का स्रोत बढ़ाना है ताकि शिक्षा और अध्यात्म से जुड़ी संस्थाओं का संचालन बिना बाधा के किया जा सके. फिलहाल इस पूरे मामले पर शहर के शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों की निगाहें टिकी हुई हैं और आने वाले दिनों में विरोध का स्वर और तेज होने की संभावना जताई जा रही है.

संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता संकल्प अभियान, घाट पर गूंजा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा...
संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता संकल्प अभियान, घाट पर गूंजा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा...
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में गुरु पूर्णिमा से चल रहे राष्ट्रव्यापी 'समरसता संकल्प अभियान' के तहत मंगलवार को संत रविदास घाट पर नमामि गंगे द्वारा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. हाथों में संत रविदास के संदेश लिखी तख्तियां और कठौती में गंगाजल लेकर उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता, आंतरिक पवित्रता, सच्चे कर्म और मानवता का संदेश दिया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. उत्तम ओझा ने संत रविदास के विचारों को आज भी समाज के लिए प्रासंगिक बताते हुए उनके समरसता और नैतिक जीवन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया.वहीं नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' केवल एक कथन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सदाचार और समानता का जीवन-दर्शन है. इस अवसर पर पुष्पलता वर्मा, विशाल केसरी, दिनेश कुमार सिंह, सतवंत भारती, रवि निषाद, संजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे.बता दें कि शिरोमणी गुरु रविदास जी के 650वें जयंती वर्ष पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा 29 जुलाई गुरु पुर्णिमा से लेकर 20 फरवरी माघी पुर्णिमा तक देशभर में विविध आयोजन किए जा रहे हैं. भाजपा देशभर में "संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास सामाजिक समरसता अभियान" चलाएगी. अभियान का उद्देश्य गुरु रविदास के समरसता, कर्मयोग, भक्ति और सामाजिक सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है. अभियान पांच चरणों में संचालित होगा. प्रथम चरण के तहत 29 जुलाई को गुरु रविदास की जन्मस्थली एवं स्मारक पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा जन्मस्थली मंदिर के महंत संत निरंजन दास महाराज सहित अनेक संत एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे.इससे पहले 28 जुलाई को देशभर से आने वाले कार्यकर्ताओं की टोलियां गुरु रविदास स्मारक स्थल पर पवित्र मिट्टी का पूजन कर 131 कलश तैयार करेंगी. इसके बाद स्मारक स्थल से गुरु रविदास जन्मस्थली मंदिर तक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी, जहां सभी कलशों का विधिवत पूजन होगा.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।