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वाराणसी में जादू टोना के फेर में हुई थी बुजुर्ग की हत्‍या, 24 घंटे में चार आरोपी गिरफ्तार...

वाराणसी में जादू टोना के फेर में हुई थी बुजुर्ग की हत्‍या, 24 घंटे में चार आरोपी गिरफ्तार...
Jun 16, 2026, 11:04 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी: कमिश्नरेट के चौक थाना क्षेत्र के बेनिया मलिन बस्‍ती में राजन (60) की गोली मारकर हत्या के मामले में चार आरोपियों को चौक पुलिस और एसओजी ने गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जादू टोना (ओझाई) के चक्कर में बुजुर्ग की हत्या हुई थी. आरोपियों के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल देशी पिस्टल और दो मोटरसाइकिल बरामद की गई है.गिरफ्तार आरोपियों में विशाल भारतीय उर्फ जानू निवासी बेनियाबाग, विकास विश्वकर्मा उर्फ सोनू निवासी चुरामनपुर थाना लोहता, सुजीत बाल्मिकी निवासी ग्राम मरेठवा पोखरा थाना लोहता और कृष्णा वाल्मिकी निवासी बेनियाबाग शामिल हैं. एडीसीपी काशी जोन वैभव बांगर ने बताया कि पुलिस टीम को उत्‍साहवर्धन के लिए 25 हजार रुपये के पुरस्‍कार की घोषणा की.


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बता दें कि बेनिया मलिन बस्‍ती में 15 जून की देर रात घर के बाहर चारपाई पर सोते समय मिर्जापुर निवासी राजन की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था.

मिर्जापुर के नारायणपुर निवासी राजन अपनी दूसरी पत्नी के बेटे की 20 जून को होने वाली सगाई के लिए पहुंचा था. पहली पत्नी उसके साथ नारायणपुर में रहती है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या के पीछे काला जादू से जुड़ा विवाद कारण बना. आरोपी विशाल ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसके घर में चार -पांच लोगों की अकाल मृत्‍यु हुई थी. इसके पीछे उसने राजन पर काला जादू करने का आरोप लगाया.


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घटना के बाद पुलिस ने कई टीमों का गठन कर जांच शुरू की. सैकडों सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय लोगों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई. जांच के दौरान पुलिस को ऐसे संकेत मिले कि हत्या के पीछे तंत्र-मंत्र और ओझाई से जुड़ा विवाद हो सकता है. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए पुलिस ने घटना के बाद 24 घंटे में चार संदिग्धों को गिरफ्त में लिया. पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस का कहना है कि मामले में यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.

वाराणसी में लाइसेंस प्रक्रिया के विरोध में नाविक समाज ने बुलंद की आवाज, उठाई ये मांग...
वाराणसी में लाइसेंस प्रक्रिया के विरोध में नाविक समाज ने बुलंद की आवाज, उठाई ये मांग...
वाराणसी : गंगा में नौकायन से जुड़े पारंपरिक नाविकों के अधिकारों और रोजगार को लेकर मंगलवार को दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी के सामने निषाद (नाविक) समाज की एक महाबैठक आयोजित की गई. बैठक में सराय मोहाना, राजघाट, गायघाट, पंचगंगा, दशाश्वमेध, केदार, अस्सी और मदरवा समेत गंगा किनारे बसे विभिन्न क्षेत्रों के सैकड़ों नाविक और निषाद समाज के लोग शामिल हुए.बैठक का मुख्य मुद्दा 'इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (IWAI) द्वारा नावों के लाइसेंस बनाए जाने की प्रस्तावित प्रक्रिया का विरोध रहा. वक्ताओं ने कहा कि निषाद समाज पीढ़ियों से गंगा में नौकायन का कार्य करता आ रहा है और वाराणसी में नावों के लाइसेंस का नवीनीकरण एवं संचालन परंपरागत रूप से नगर निगम के माध्यम से होता रहा है. ऐसे में किसी अन्य संस्था द्वारा लाइसेंस व्यवस्था लागू किए जाने से नाविकों के समक्ष नई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं.लाइसेंस न बनने से बढ़ी परेशानीबैठक में शंभू निषाद ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से नगर निगम द्वारा नावों के नवीनीकरण और नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया बंद है. इसके कारण बड़ी संख्या में नाविकों की नावें बिना लाइसेंस संचालित नहीं हो पा रही हैं, जिससे उनके रोजगार और आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. नाविकों का कहना है कि गंगा पर निर्भर हजारों परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं.नगर निगम से ही लाइसेंस जारी करने की मांगनिषाद समाज ने एक स्वर में कहा कि नावों के लाइसेंस की प्रक्रिया पहले की तरह नगर निगम के माध्यम से ही संचालित की जाए. समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि स्थानीय परिस्थितियों और नाविकों की समस्याओं को नगर निगम बेहतर ढंग से समझता है, इसलिए लाइसेंस व्यवस्था में किसी अन्य एजेंसी का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा.नाविकों के उत्पीड़न का आरोपबैठक में मौजूद नाविकों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि छोटी-छोटी बातों पर नाविकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाते हैं और नावों को सीज कर दिया जाता है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है. समाज ने ऐसी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की.लाइफ जैकेट को लेकर उठाए सवालनाविकों ने कहा कि वे यात्रियों को लाइफ जैकेट उपलब्ध कराते हैं, लेकिन कई यात्री यात्रा के दौरान जैकेट उतार देते हैं या पहनने से इनकार कर देते हैं. इसके बावजूद किसी दुर्घटना या जांच के दौरान पूरी जिम्मेदारी नाविकों पर डाल दी जाती है. बैठक में मांग की गई कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि केवल नाविकों को ही दंडित न किया जाए.क्रूज और नावों के लिए अलग-अलग नियमों का विरोधवक्ताओं ने आरोप लगाया कि छोटे नाविकों के लिए सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता है और उल्लंघन पर भारी चालान व कार्रवाई की जाती है, जबकि बड़े क्रूज जहाजों पर नियमों के पालन में समान कठोरता नहीं दिखाई देती. निषाद समाज ने इसे "दोहरा कानून" बताते हुए सभी के लिए समान नियम लागू करने की मांग की.गोताखोरों को रोजगार देने की मांगबैठक में निषाद समाज के कुशल गोताखोरों को पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन विभागों में रोजगार देने की मांग भी प्रमुखता से उठी. वक्ताओं ने कहा कि गंगा में डूबने या अन्य आपदाओं के समय निषाद समाज के गोताखोर हमेशा प्रशासन की सहायता करते हैं, इसलिए उनके अनुभव और कौशल का उपयोग सरकारी सेवाओं में किया जाना चाहिए.आंदोलन की चेतावनीबैठक के अंत में निषाद समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो समाज व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल लाइसेंस की नहीं, बल्कि हजारों नाविक परिवारों के सम्मान, रोजगार और अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है.ALSO READ : स्लोवाकिया में दिखी ‘काशी’ की झलक: PM मोदी ने ब्रातिस्लावा में वाराणसी थीम कला प्रदर्शनी का किया अवलोकन...बैठक में मौजूद लोगों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया. दशाश्वमेध घाट पर हुई इस महाबैठक ने गंगा किनारे बसे नाविक समाज की समस्याओं और उनकी मांगों को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है.
स्लोवाकिया में दिखी ‘काशी’ की झलक: PM मोदी ने ब्रातिस्लावा में वाराणसी थीम कला प्रदर्शनी का किया अवलोकन...
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वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोवाकिया दौरे के दौरान वाराणसी की सांस्कृतिक छवि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देखने को मिली.प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा स्थित राष्ट्रपति भवन में स्लोवाक राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ वाराणसी थीम पर आधारित एक विशेष कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया.यह अनोखी प्रदर्शनी स्लोवाक कलाकारों द्वारा तैयार की गई थी, जो हाल ही में भारत के प्राचीन शहर वाराणसी की यात्रा से प्रेरित थी. प्रदर्शनी में बनारस के घाट, मंदिर, गलियां, धार्मिक परंपराएं और शहर की आध्यात्मिक ऊर्जा को कलाकृतियों के माध्यम से दर्शाया गया. कलाकारों ने अपनी अलग-अलग कला शैली में काशी की संस्कृति और जीवनशैली को प्रस्तुत करने का प्रयास किया.जानकारी के मुताबिक, यह प्रदर्शनी भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के सहयोग से आयोजित एक विशेष अंतरराष्ट्रीय कला परियोजना का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना था.हाल ही में कुछ स्लोवाक कलाकार वाराणसी आए थे, जहां उन्होंने शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा और उसी अनुभव को अपनी कलाकृतियों में उतारा.ALSO READ : वाराणसी में जादू टोना के फेर में हुई थी बुजुर्ग की हत्‍या, 24 घंटे में चार आरोपी गिरफ्तार...प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कला और संस्कृति लोगों को जोड़ने का एक मजबूत माध्यम है.वहीं राष्ट्रपति पेलेग्रिनी ने भी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया. इस प्रदर्शनी को भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ते सांस्कृतिक रिश्तों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है.
वंदे भारत में गूंजा जीवन बचाने का संदेश, यात्रियों को सिखाई सीपीआर की जीवनरक्षक कला...
वंदे भारत में गूंजा जीवन बचाने का संदेश, यात्रियों को सिखाई सीपीआर की जीवनरक्षक कला...
वाराणसी : देश की अत्याधुनिक एवं प्रतिष्ठित वंदे भारत एक्सप्रेस में उस समय एक अनूठा और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब राजकीय चिकित्सा अधिकारी एवं प्रख्यात सीपीआर विशेषज्ञ डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने यात्रियों को जीवनरक्षक तकनीक सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण प्रदान किया. इस अभिनव पहल का उद्देश्य आम नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में किसी भी व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए सक्षम बनाना था.प्रशिक्षण के दौरान डॉ. द्विवेदी ने हृदयाघात, अचानक बेहोशी तथा श्वास रुकने जैसी गंभीर परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के महत्व को समझाते हुए सीपीआर की बारीकियों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया. उन्होंने बताया कि हृदय गति रुकने के बाद शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और सही तकनीक से दिया गया सीपीआर किसी व्यक्ति को नया जीवन प्रदान कर सकता है. यात्रियों ने पूरे उत्साह एवं रुचि के साथ प्रशिक्षण में भाग लिया तथा जीवनरक्षक तकनीकों को सीखकर इसे अत्यंत उपयोगी एवं समाजोपयोगी पहल बताया. कई यात्रियों ने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल ज्ञानवर्धक है, बल्कि किसी आपात स्थिति में किसी की जान बचाने का आत्मविश्वास भी प्रदान करता है.ALSO READ : वाराणसी में जादू टोना के फेर में हुई थी बुजुर्ग की हत्‍या, 24 घंटे में चार आरोपी गिरफ्तार...डॉ. द्विवेदी ने कहा कि “सीपीआर केवल एक चिकित्सा तकनीक नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा का एक सशक्त माध्यम है. यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसकी मूलभूत जानकारी प्राप्त कर ले, तो असंख्य लोगों का जीवन बचाया जा सकता है.” चलती ट्रेन में आयोजित यह अनूठा जन-जागरूकता अभियान यात्रियों के लिए यादगार अनुभव साबित हुआ तथा स्वास्थ्य जागरूकता और जनसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सराहा गया.