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सावन में खिल उठी फूल मंडी, फूलों के कारोबार से जुड़े 500 किसान परिवार की बढ़ी आय...

सावन में खिल उठी फूल मंडी, फूलों के कारोबार से जुड़े 500 किसान परिवार की बढ़ी आय...
Jul 30, 2026, 02:53 PM
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Posted By Prashant Sharma

वाराणसी:सावन की शुरुआत के साथ ही बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पूरी तरह शिवमय हो गई है। काशी विश्वनाथ मंदिर समेत शहर के छोटे-बड़े सभी शिवालयों में फूलों और विशेष मालाओं से भव्य श्रृंगार किया जा रहा है। बाबा भोलेनाथ को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, मदार और नीलकंठ की मालाओं की मांग बढ़ने से बनारस की सबसे पुरानी बांसफाटक फूल मंडी में कारोबार दोगुना हो गया है।


सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए सुगंधित फूल, मालाएं और पूजन सामग्री की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इसका सीधा असर फूल कारोबार पर देखने को मिल रहा है। बांसफाटक स्थित फूल मंडी सुबह से देर रात तक ग्राहकों से गुलजार है।


फूल मंडी के संचालक एकांश अग्रवाल ने बताया कि सावन शुरू होने से पहले ही मंदिरों के श्रृंगार की एडवांस बुकिंग शुरू हो जाती है। केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल के कई जिलों से भी विशेषकर सावन के सोमवार के लिए मालाओं और फूलों के ऑर्डर आते हैं।


उन्होंने बताया कि कछवा, सारनाथ, चिरईगांव, संदहा, जालूपुरा और भगवानपुर समेत आसपास के गांवों से किसान अपने खेतों और बगीचों के फूल लेकर मंडी पहुंचते हैं। पूरा परिवार मिलकर मालाएं तैयार करता है और उन्हें बेचकर आजीविका चलाता है। इस मंडी से करीब 200 से 300 परिवार जुड़े हुए हैं। सावन में प्रतिदिन चार से पांच क्विंटल बेलपत्र की बिक्री हो जाती है।Flower


इस बार लगातार गर्मी और बारिश के कारण फूलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। जो फूल तैयार हो रहे हैं, वे भी जल्दी खराब हो रहे हैं। उत्पादन कम और मांग अधिक होने से फूलों और विशेष मालाओं के दामों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है।


आम दिनों में 50 से 60 रुपये में बिकने वाली मदार की माला सावन में 100 से 120 रुपये प्रति पीस बिक रही है। धतूरा 500 से 600 रुपये, बेलपत्र 250 से 300 रुपये प्रति किलो, जबकि सामान्य दिनों में 20 रुपये की नीलकंठ माला अब 50 से 80 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गई है। छोटी फूल मालाएं भी 30 से 50 रुपये प्रति पीस बिक रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि मौसम की स्थिति ऐसी ही रही तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।


फूल व्यापारी सुनील गुप्ता ने बताया कि बांसफाटक मंडी काशी की सबसे पुरानी फूल मंडी है। यहां बनने वाली पारंपरिक मालाएं अन्य कहीं आसानी से नहीं मिलतीं। वाराणसी के प्रमुख मंदिरों—काशी विश्वनाथ, संकट मोचन, दुर्गाकुंड, महामृत्युंजय समेत कई प्रमुख शिवालयों में इसी मंडी से फूल और मालाएं भेजी जाती हैं। यहां सभी धर्मों के लोग अपनी-अपनी आस्था के अनुसार फूल और मालाएं खरीदने आते हैं। उन्होंने कहा कि इस मंडी से कई परिवार तीन पीढ़ियों से जुड़े हैं और सावन का महीना उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण सीजन होता है।


किसान जितेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि मंडी से जुड़े लगभग 20 प्रतिशत किसान पंचकोशी क्षेत्र से आते हैं और कई परिवार पिछले 70 वर्षों से इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। एक गजरा या विशेष माला तैयार करने में तीन से चार घंटे का समय लगता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान के लिए मालाएं तैयार करते हैं और फिर उन्हें बेचने के लिए मंडी लेकर आते हैं।Flower


सावन की शुरुआत के साथ काशी की फूल मंडी एक बार फिर आस्था और आजीविका का बड़ा केंद्र बन गई है। एक ओर जहां शिवभक्त बाबा के श्रृंगार के लिए विशेष फूल और मालाएं खरीद रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों किसान और फूल कारोबारियों के परिवारों की रोजी-रोटी भी इसी कारोबार पर निर्भर है। मौसम की मार से उत्पादन भले प्रभावित हुआ हो, लेकिन श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के चलते फूलों की मांग लगातार बनी हुई है। व्यापारियों का मानना है कि सावन के आगामी सोमवारों में मांग और बढ़ेगी, जिससे फूलों का कारोबार भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
वाराणसी: नशामुक्त भारत अभियान के तहत रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में ‘संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के जरिए युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त भारत का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।मालवीय भवन प्रांगण से कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल रैली को रवाना किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, NSS स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा न केवल स्वयं नशे से बचें, बल्कि अपने आसपास के लोगों और समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।also read: विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलकसाइकिल रैली में शामिल प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत का संदेश लोगों तक पहुंचाया और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। रैली के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम का समन्वयन काशी हिंदू विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीना ने किया। आयोजन में विश्वविद्यालय परिवार के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
वाराणसी: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आदिवासी परिवार, बरेका के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता की आकर्षक झलक देखने को मिली।शाम चार बजे बरेका सेंट जॉन स्कूल, गेट संख्या-2 से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कुंदन तिराहा और सूर्य सरोवर मार्ग होते हुए इंटर कॉलेज चौराहे पहुंची। यहां भगवान गौतम बुद्ध, जननायक बिरसा मुंडा और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद शोभायात्रा पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी पहुंचकर संपन्न हुई।शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए। रंग-बिरंगे परिधानों के साथ पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। रास्ते में स्थानीय लोगों ने भी शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में आदिवासी समाज की विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वक्ताओं ने आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपराओं और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।also read: श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपीलकार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजन में बरेका के अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिजन, आदिवासी महिला समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।इस अवसर पर सहायक कार्मिक अधिकारी (कर्मशाला) पीयूष मिंज, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार, आरपीएफ इंस्पेक्टर प्रमोद लकड़ा, पूर्व संयुक्त सचिव बरेका अमर सिंह, कालू मांझी सहित आदिवासी परिवार बरेका के सुदर्शन उरांव, दिलीप तिर्की, सुचित कुजूर, अजय कुमार तिर्की, संजीवन तिर्की और अजय तिग्गा मौजूद रहे। वहीं आदिवासी महिला समिति की सपना टोप्पो, तारा मैरी मिंज, प्रेमा लिली टोप्पो, अनुपमा और बंदना बारला सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
वाराणसी: श्रावण माह में रोहनिया क्षेत्र स्थित भास्करा पोखरा में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए पुलिस की ओर से लगातार जागरूक किया जा रहा है।एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने भास्करा पोखरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे निर्धारित और सुरक्षित स्थान पर ही स्नान करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु किसी भी स्थिति में गहरे पानी में न जाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी न करें।also read: आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडीएसीपी ने खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें और स्नान के दौरान उन पर लगातार नजर बनाए रखें। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।पुलिस प्रशासन की ओर से श्रावण माह के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें और धार्मिक आस्था के साथ अपनी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक सहयोग और सतर्कता से ही श्रावण माह के आयोजनों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।