आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप करने होंगे बदलाव : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी

वाराणसी : मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, शिक्षाशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय ऑनलाइन 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति: उन्मुखीकरण एवं जागरूकता' कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ हुआ. कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप करने होंगे बदलाव.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय समाज के भावी नागरिकों में आवश्यक ज्ञान, कौशल एवं मानवीय मूल्यों को विकसित करने हेतु एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो हमारा मार्गदर्शन करती है. कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि हमारी शैक्षिक गतिविधियों जैसे- पाठ्यक्रम, शिक्षण विधि, अधिगम अनुभव एवं शैक्षिक परिवेश आदि को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार बदलना होगा, तभी हम भारत को आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बना सकते हैं.
प्रथम सत्र में डाइट प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार शुक्ल ने कहा कि हमें अपने शिक्षण अधिगम व्यवस्था में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव करना होगा, तभी वर्तमान शिक्षा नीति का उद्देश्य पूरा होगा. हमें बालक की निहित क्षमता का स्वाभाविक विकास करना होगा, साथ ही शिक्षार्थी की आवश्यकता के अनुसार अपनी व्यवस्था में परिवर्तन लाना होगा.
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द्वितीय सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के प्रो. जे.पी. सिंह ने समग्र एवं बहुविषयक शिक्षा पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति बालक के समग्र विकास पर जोर देती है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा बहुविषयक उपागम को बढ़ावा देने की वकालत करती है. शिक्षा के माध्यम से बच्चे का समग्र विकास होना चाहिए, इसके लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है.
स्वागत भाषण में केंद्र निदेशक प्रो. सुरेंद्र राम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना है.आज भारत अपनी पूरी क्षमता से आगे बढ़ रहा है तथा विश्व में एक शक्तिशाली राष्ट के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें हमारी शिक्षा व्यवस्था का अहम योगदान है. संचालन प्रो. रमाकांत सिंह, तकनीकी सहयोग विनय सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. लालधारी यादव ने किया.



