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घर-घर जाकर जनगणना करना हुआ मुश्किल, निजी जानकारी देने में कतरा रहे लोग

घर-घर जाकर जनगणना करना हुआ मुश्किल, निजी जानकारी देने में कतरा रहे लोग
May 29, 2026, 07:49 AM
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Posted By Preeti Kumari

Door-to-door census has become difficult, with people reluctant to provide personal information.


उत्तर-प्रदेश में जनगणना (भवन गणना और मकान सूचीकरण) का पहला चरण 22 मई, 2026 से शुरू होकर 20 जून, 2026 तक चलेगा. इसके लिए 'स्व-गणना' की प्रक्रिया 7 मई से 21 मई 2026 तक चलाई गई थी,जिसमें नागरिकों ने खुद ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपने परिवार का ब्योरा दर्ज कराया था. अब 22 मई से प्रगणक (गणना कर्मी) घर-घर जाकर आंकड़ों का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं. वहीं, वास्तविक जनसंख्या और जातिगत जनगणना का दूसरा चरण अगले साल (2027) आयोजित किया जाएगा.


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शिक्षकों से लोग पूछ रहे अटपटा सवाल


यूपी भर में हो रही जनगणना की स्थिति कुछ खास नहीं, या फिर यूं कहें कि, काफी हद तक ठीक-ठाक चल रही है. जनगणना की ड्यूटी में लगे शिक्षकों को भले ही लोगों से कई तरह के सवाल पूछने का प्रशिक्षण दिया तो गया है, मगर हालात ऐसे कि, उन्हें खुद लोगों के सवालों का जवाब देना पड़ रहा है. जी हां, आम जनता खुद जनगणना टीम से ये पूछ रही हैं कि, जनगणना क्यों कराई जा रही है, इससे क्या होगा, कहीं संपत्ति का ब्योरा जानने के बाद सरकार टैक्स तो नहीं बढ़ाएगी, कार या अनाज जैसी आम जनता की इस निजी जानकारी का क्या किया जाएगा. ऐसे सवालों के बीच शिक्षकों को जनगणना का काम करना काफी मुश्किल हो रहा है. जिस पर इन शिक्षकों का कहना है कि लोग अपने घर की कार, किरायेदार, टीवी, एसी, अनाज आदि जैसे किसी भी तरह की जानकारी देने में काफी हिचकिचा रहे रहे हैं.


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"सरकार उनके साथ खिलवाड़ तो नहीं करेगी"


इसी सिलसिले में वाराणसी में जनगणना कराने को लेकर माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 7500 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है. धूप और बढ़ते तापमान के चलते शिक्षक सुबह और शाम के समय घर-घर जाकर जनगणना करने की अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं. जिसे लेकर शिक्षिका छवि अग्रवाल ने बताया कि, लोगों के घरों पर पहुंचने पर दो तरह के लोग मिल रहे हैं. एक वे, जो बिना सवाल किए जानकारी आसानी से उपलब्ध करा दे रहे हैं, जबकि दूसरे ऐसे हैं जो 33 सवालों का जवाब देने से पहले शिक्षकों से ही दोगुने सवाल पूछने लग रहे हैं.


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काफी समझाने के बाद भी कई लोग संतुष्ट नहीं हो रहे और सही जानकारी देने से काफी हद तक बच रहे हैं. क्योंकि लोगों को लगता है कि उनकी निजी जानकारी को इक्ट्ठा कर कहीं सरकार उनके साथ खिलवाड़ तो नहीं करेगी. क्योंकि आज के समय में एक छोटे से परिवार में भी कूलर ऐसी फ्रिज होता है जो एक गरीब परिवार दिन-रात मेहनत करके अपनी जरूरतों को पूरा करता है, अगर ऐसे में भी सरकार इन सभी चीजों को देख गरीब परिवार के खिलाफ कोई कार्रवाई करवाती है तो जनता इस पर आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेगी.


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सच तो यह है कि जनगणना इसलिए कराई जाती है क्योंकि, देश में नागरिकों की सटीक संख्या, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा और रोजगार के आंकड़े जुटाने के लिए हर 10 साल में जनगणना की जाती है. यह प्रक्रिया सरकार को विकास योजनाएं बनाने, बजट का सही बंटवारा करने और नीतियों को लागू करने में मदद करती है

प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने ने किया ओपन-स्पेस ग्रुप प्रदर्शनी का उद्घाटन
प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने ने किया ओपन-स्पेस ग्रुप प्रदर्शनी का उद्घाटन
वाराणसी : ललित कला काशी 'वर्थ एंड वरशिप' (Worth and Worship) प्रदर्शनी पेश कर रहा है।ललित कला काशी 15 से 17 जुलाई, 2026 तक वाराणसी के ऐतिहासिक घाटों पर "वर्थ एंड वरशिप" नाम की एक ओपन-स्पेस ग्रुप प्रदर्शनी आयोजित की गई है। डॉ. प्रियंका चंद्रा द्वारा क्यूरेट की गई इस अनोखी आउटडोर प्रदर्शनी में दस अवॉर्ड-प्राप्त कलाकार शामिल हैं: सिद्धार्थ, रामकुमार माहेश्वरी, आशिमा मेहरोत्रा, अनिल कुमार पटेल, स्वाति रंजन, दीपशिखा वर्मा, स्वाति झा, शालिनी सिंह, रितेक राज और सूरज वर्मा।इसका भव्य उद्घाटन आज 15 जुलाई को शाम 6 बजे सुबह-ए-बनारस घाट पर मुख्य अतिथि प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने की। इसके बाद यह प्रदर्शनी लोगों तक पहुँचने के लिए तुलसी, आदिनाथ, चेत सिंह और अस्सी घाटों पर जाएगी।ALSO READ: चाय की दुकान पर बिक रही थी अवैध शराब और बीयर, सिगरा पुलिस के छापे में भंडाफोड़पवित्र गंगा के किनारे, यह एग्ज़िबिशन दस आर्टिस्ट को दुनियावी लालच ("वर्थ") और भगवान की भक्ति ("वर्शिप") के बीच की पतली लाइन को समझने के लिए एक साथ लाती है, जो कुछ समय के लिए और हमेशा रहने वाले के बीच इंसानी संघर्ष को दिखाती है।
चाय की दुकान पर बिक रही थी अवैध शराब और बीयर, सिगरा पुलिस के छापे में भंडाफोड़
चाय की दुकान पर बिक रही थी अवैध शराब और बीयर, सिगरा पुलिस के छापे में भंडाफोड़
वाराणसी: सिगरा थाना क्षेत्र के विजयनगरम मार्केट में संचालित एक चाय की दुकान पर अवैध रूप से शराब और बीयर की बिक्री किए जाने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर सिगरा पुलिस ने छापेमारी कर दुकान से बड़ी मात्रा में शराब और बीयर बरामद की तथा अवैध कारोबार का भंडाफोड़ कर दिया।पुलिस के अनुसार, लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि चाय की दुकान की आड़ में चोरी-छिपे शराब और बीयर बेची जा रही है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान दुकान से विभिन्न ब्रांड की शराब और बीयर की बोतलें बरामद हुईं।ALSO READ: बरेका में नराकास की छमाही बैठक, हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार पर मंथनपुलिस ने मौके से दुकान संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बरामद शराब और बीयर को जब्त कर लिया गया है। मामले में आबकारी अधिनियम समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।सिगरा पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बरेका में नराकास की छमाही बैठक, हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार पर मंथन
बरेका में नराकास की छमाही बैठक, हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार पर मंथन
वाराणसी: बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में बुधवार को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), वाराणसी की छमाही बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नराकास के अध्यक्ष एवं बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने की, जिसमें नगर के 60 से अधिक केंद्रीय कार्यालयों के प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन, नवाचार और डिजिटल माध्यमों में इसके बढ़ते उपयोग पर व्यापक चर्चा की।बैठक में महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने कहा कि राजभाषा हिंदी केवल कार्यालयी भाषा नहीं, बल्कि प्रशासन और आमजन के बीच संवाद का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने सदस्य कार्यालयों से हिंदी को सरल, प्रभावी और तकनीक-सम्मत बनाकर अधिकाधिक प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रसिद्ध कथन "निज भाषा उन्नति अहै" का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।इस दौरान नराकास, वाराणसी की पत्रिका 'बनारस दर्पण' तथा आईआईटी-बीएचयू की राजभाषा पत्रिका 'अभ्युदय' का लोकार्पण भी किया गया। बैठक में पिछली कार्यवृत्त की पुष्टि, निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा तथा विभिन्न सदस्य कार्यालयों की राजभाषा संबंधी प्रगति और उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने अपने संस्थानों में हिंदी के प्रचार-प्रसार और नवाचारों से जुड़े अनुभव भी साझा किए।ALSO READ: पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह एक और मामले में बरी, 36 साल पुराने प्रकरण का पटाक्षेपपूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी के मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन ने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता जनता से उसके जुड़ाव पर निर्भर करती है और हिंदी इस जुड़ाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। वहीं गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के सहायक निदेशक (कार्यान्वयन) अजय कुमार चौधरी ने राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी के बढ़ते उपयोग तथा सदस्य कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।बैठक में बरेका के उप महाप्रबंधक सागर, प्राचार्य प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र सुभाष चंद्र यादव सहित अनेक अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन नराकास के सदस्य सचिव एवं वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी यथार्थ पाण्डेय ने किया तथा अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।