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गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी, नानवेज परोसे जाने का आरोप, केस दर्ज

गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी, नानवेज परोसे जाने का आरोप, केस दर्ज
Mar 17, 2026, 07:56 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: गंगा में नाव पर सवार होकर इफ्तार पार्टी की जा रही है. ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. आरोप है कि वीडियो में युवक नॉनवेज खा रहे हैं, जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है. बताया जा रहा है कि मामले में भारतीय जनता युवा मोर्चा के पदाधिकारी ने तहरीर दी थी. इसके साथ ही पुलिस ने नाव चलाने वाले शख्स पर भी शिकंजा कसा गया है. पुलिस मामले की जांच मं जुट गई है.


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वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल


गंगा नदी में नाव पर सवार होकर कुछ लोगों द्वारा पार्टी की जा रही है. कहने को इफ्तार की बात कही जा रही है लेकिन इसका वीडियो वायरल हुआ है जिसमें आरोप है कि बिरयानी परोसी गई. वायरल वीडियो के आधार पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जयसवाल ने पुलिस में शिकायत की है. रजत का आरोप है कि इफ्तार पार्टी के दौरान नाव पर सवार युवकों ने नॉनवेज खाया और उसकी हड्डियां गंगा नदी में फेंक दी, जिससे धार्मिक आस्था को ठेंस पहुंचाई गई है.


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पुलिस को दी गई तहरीर में रजत ने आरोप लगाया है कि इस इफ्तार पार्टी में बिरयानी खाया गया. उन्होंने कहा कि देश-विदेश से प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और गंगा के जल से आचमन करते हैं. साथ ही आस्था और भाव रखते हैं. इस तरह गंगा नदी में इफ्तार पार्टी कर बिरयानी खाना और उसके अवशेष गंगा में फेंकना निंदनीय कृत है. उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर या कार्य किया गया है और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई है.


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इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा, कई गिरफ्तार


उन्होंने कहा है कि ऐसे लोगों को तुरंत गिरफ्तार करके और नव चालक का चालान करते हुए लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए, ताकि इस तरह के कृत्य दोबारा ना हो सके. तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने बीएनएस की धारा 298, 299, 196(1)(b), 270, 279, 223(b) और जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम 1974 की धारा 24 के तहत मुकदमा दर्ज किया है. इस मामले में पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया है.

रोहनिया हाईवे पर फुट ओवरब्रिज निर्माण के चलते घंटों बाधित रहा यातायात, वाहनों की लगी कतार
रोहनिया हाईवे पर फुट ओवरब्रिज निर्माण के चलते घंटों बाधित रहा यातायात, वाहनों की लगी कतार
वाराणसी: रोहनिया के मोहनसराय हाईवे स्थित चौराहे पर पैदल राहगीरों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे फुट ओवर ब्रिज के निर्माण कार्य के दौरान मंगलवार की सुबह यातायात लगभग दो घंटे तक पूरी तरह बाधित रहा. इस दौरान हाईवे और सर्विस रोड पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.रोका गया वाहनों का आवागमन निर्माण एजेंसी की टीम ने भोर से ही तैयारी शुरू कर दी थी. पहले से बगल की जमीन पर लोहे के गटर को दो भागों में वेल्डिंग करके तैयार किया गया था. सुबह करीब 5 बजे से 7 बजे तक चार क्रेन की मदद से इन भारी-भरकम गटरों को हाईवे के दोनों तरफ बने पिलरों पर सेट किया गया. क्रेन से सेटिंग का काम चलने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया था. इस दौरान दोनों तरफ सैकड़ों वाहन खड़े हो गए और यातायात जाम की स्थिति बन गई. राहगीर पैदल चौराहा पार करने में भी दिक्कत महसूस कर रहे थे.लगभग दो घंटे की मेहनत के बाद सफलतापूर्वक गार्डर की सेटिंग पूरी होने के बाद सुबह 7 बजे यातायात को सुचारू रूप से बहाल कर दिया गया. इस फुट ओवर ब्रिज के बनने से मोहनसराय चौराहे पर पैदल यात्रियों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार करने की सुविधा मिलेगी और दुर्घटनाओं की संभावना भी काफी हद तक कम हो जाएगी.यह भी पढ़ें: BHU अस्‍पताल में जूनियर डाक्‍टरों की हड़ताल से तंग हुए मरीज, सीनियरों ने संभाला कामकाजस्थानीय लोगों ने निर्माण टीम की कुशलता की प्रशंसा की, लेकिन साथ ही यातायात बाधित होने के दौरान बेहतर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी की है ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी न हो. रोड पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
 BHU अस्पताल में  जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से तंग हुए मरीज, सीनियरों  से संभाला कामकाज
BHU अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से तंग हुए मरीज, सीनियरों से संभाला कामकाज
वाराणसी: बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में जूनियर डाक्‍टरों (जेआर1) की हड़ताल से कामकाज प्रभावित होने लगा है. जिससे मरीजों और तीतारदारों को इलाज में दुश्‍वारियों का सामना करना पड़ रहा है. जूनियर डाक्टरों ने अपनी हड़ताल का कारण एक महिला रेजिडेंट की आत्महत्या की कोशिश का विरोध बताया है. वहीं सीनियर रेजिडेंट ने मोर्चा संभाला लिया है. वहीं जूनियर डाक्‍टर अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं. धरने पर बैठे डा. अंबुज ने आरोप लगाया कि इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रशासन की ओर से संतोषजनक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक हड़ताल जारी रहेगी.आरोपित चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाईडाक्टरों की प्रमुख मांगों में जूनियर रेजिडेंट्स के लिए निश्चित ड्यूटी आवर तय करना, अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुचारु करना और महिला जूनियर डाक्टर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपित चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है. इस बीच, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज प्रशासन का कहना है कि जांच समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. सर सुंदरलाल अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डाक्टरों की हड़ताल के कारण अस्पताल के करीब 28 वार्डों में तैनात लगभग 85 जूनियर रेजिडेंट्स ने कामकाज ठप कर दिया है, जिससे मरीजों को इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.धरना पर बैठा जूनियर रेजिडेंटों का समूह जूनियर रेजिडेंटों का एक समूह इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मुख्य द्वार पर धरना दे रहा है. उनका कहना है कि प्रशासन को मामले में की गई कार्रवाई को लेकर लिखित रूप से स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. डा. अंबुज ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे. वहीं इस मामले में आईएमएस निदेशक ने कहा है कि पूरे मामले की जांच के लिए गठित कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी.यह भी पढ़ें: BHU में अब चार वर्षीय B.Ed कोर्स, 12वीं के बाद शिक्षक बनने का सुनहरा मौकारिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस स्थिति के चलते मरीजों को इलाज में हो रही परेशानियों को देखते हुए प्रशासन को जल्द से जल्द समाधान निकालने की कोश‍िश कर रहा है. इस हड़ताल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को चुनौती दी है और मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है. हालांकि सीनियर डाक्‍टरों ने कामकाज संभाल रखा है.
BHU में अब चार वर्षीय B.Ed कोर्स, 12वीं के बाद शिक्षक बनने का सुनहरा मौका
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वाराणसी: बीएचयू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों को लागू करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है. शिक्षा संकाय ने शैक्षणिक सत्र 2026-2027 से एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आइटीईपी) अंतर्गत चार वर्षीय बीए बीएड (सेकेंडरी स्टेज) डिग्री कोर्स शुरू करने की घोषणा की है. अब तक की पारंपरिक व्यवस्था में छात्र पहले तीन साल की ग्रेजुएशन (बीए, बीएससी या बीकाम) करते थे और फिर दो साल का बीएड करते, यानी शिक्षक बनने के लिए कुल पांच साल लगते थे लेकिन बीएचयू में शुरू किए जा रहे इस एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के बाद समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा.आठ सेमेस्टर में विभाजित कार्यक्रम यह कार्यक्रम आठ सेमेस्टर में विभाजित किया गया है, जिसमें कुल 180 क्रेडिट होंगे. इस पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ड्यूल-मेजर व्यवस्था है. प्रथम मेजर (शिक्षा) में कुल 96 क्रेडिट होंगे, जो छात्र को पेशेवर शिक्षक के रूप में तैयार करेंगे. द्वितीय मेजर (विषय) में कला या सामाजिक विज्ञान के किसी एक विषय में 84 क्रेडिट अर्जित करने होंगे. यह कार्यक्रम शिक्षा संकाय द्वारा कला और सामाजिक विज्ञान संकाय के सहयोग से संचालित किया जाएगा.शिक्षा संकाय के वरिष्ठ प्रोफेसर सुनील सिंह ने बताया कि अभी तक यह व्यवस्था वसंत कालेज फार विमेन राजघाट और आर्य महिला पीजी कालेज चेतगंज में प्रभावी की जा रही है लेकिन भविष्य की नीतिगत स्थिति के अनुसार मुख्य कैंपस में भी लागू किया जा सकता है. दोनों कालेजों में कुल सौ सीटों पर प्रवेश होगा. खास बात यह है कि विषय संबंधी पाठ्यक्रम वही होंगे, जो विश्वविद्यालय के अन्य स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों में लागू हैं ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता और मानकों में एकरूपता बनी रहे. ऐसे में छात्रों का समय बचेगा, चार साल के भीतर ही स्नातक और बीएड दोनों की डिग्री हासिल कर सकेंगे.यह भी पढ़ें: अस्सी घाट पर गंगा आरती कर्मियों पर हमला, पुलिस ने मुख्य आरोपी को किया गिरफ्तारमल्टीपल एंट्री-एग्जिट की व्यवस्था होगी, इस कोर्स में बीच में पढ़ाई छोड़ने या पुनः जुड़ने का विकल्प भी उपलब्ध होगा, इसे विशेष तौर से माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह अध्यादेश भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन और एनसीटीई के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जो आने वाले समय में देश को उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षक प्रदान करेगा.इस पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका समानांतर ढांचा है, जहां पुराने ढर्रे में छात्र पहले विषय पढ़ते थे और फिर शिक्षण सीखते थे लेकिन विवि का यह नया माडल दोनों को साथ लेकर चलेगा. इस कोर्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि छात्र अपनी विषय विशेषज्ञता व शिक्षक प्रशिक्षण में संतुलन बना सके. इनका विस्तार प्रथम छह सेमेस्टर (तीन वर्ष) तक रहेगा. यानी छात्र अपने चुने हुए विषय (जैसे इतिहास, भूगोल, या राजनीति शास्त्र) की गहराई को शुरुआती तीन सालों में ही आत्मसात कर लेगा. शिक्षा शास्त्र पूरे आठ सेमेस्टर (4 वर्ष) तक चलेगा.