वाराणसी में जनसमस्या से परेशान महिलाओं ने किया गली जाम, लगाए लापरवाही के आरोप...

वाराणसी : भेलूपुर थाना क्षेत्र के भदैनी इलाके में मंगलवार को जलभराव और दूषित पेयजल की समस्या से त्रस्त महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा. वर्षों से चली आ रही समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर स्थानीय महिलाओं ने गली जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान महिलाएं अपने घरों में आ रहे गंदे पानी को बोतलों में भरकर सड़क पर पहुंचीं और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की.
प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना था कि भदैनी क्षेत्र में लंबे समय से सीवर और जलनिकासी की समस्या बनी हुई है. हल्की बारिश के बाद भी गलियों में पानी भर जाता है, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है. इतना ही नहीं, कई घरों में पेयजल की पाइपलाइन से गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है. इस पानी का उपयोग पीने या घरेलू कार्यों में करना संभव नहीं है, जिससे स्थानीय लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

महिलाओं ने आरोप लगाया कि इस संबंध में कई बार क्षेत्रीय पार्षद और नगर निगम के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला. उनका कहना था कि वर्षों से समस्या जस की तस बनी हुई है और किसी भी स्तर पर स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि गंदे पानी और जलभराव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है.
ALSO READ : एक ही परिवार के मतदाताओं का न हो विभाजन, डीएम ने मतदेय स्थलों के संशोधन के संबंध में की बैठक...
विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने साफ कहा कि यदि जल्द ही जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगी. उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए. प्रदर्शन में शामिल स्थानीय निवासी बबिता ने बताया कि उनके मोहल्ले के लोग कई वर्षों से इस समस्या को झेल रहे हैं. उन्होंने कहा कि घरों में गंदा पानी आ रहा है, गलियों में हमेशा जलभराव रहता है और शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो स्थानीय लोग बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे.



