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महिला सशक्तीकरण की दिशा में पहल, जरूरतमंद युवती को दिया गया लैपटॉप...

महिला सशक्तीकरण की दिशा में पहल, जरूरतमंद युवती को दिया गया लैपटॉप...
Jun 16, 2026, 01:44 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने और जरूरतमंद बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की विदिशा शाखा ने एक सराहनीय पहल की. संस्था की ओर से जरूरतमंद और प्रतिभाशाली युवती को उसकी शिक्षा, कार्य और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लैपटॉप भेंट किया गया.


कार्यक्रम के दौरान शाखा की अध्यक्ष सरोज तुलस्यान ने कहा कि यह सहयोग केवल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक युवती के सपनों को नई उड़ान देने और उसके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीक शिक्षा और रोजगार का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में जिन बच्चों और युवाओं के पास संसाधनों की कमी होती है, उनके लिए इस तरह की मदद बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है.


उन्होंने आगे कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं और बेटियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना भी है. पढ़ाई, कौशल विकास और तकनीकी संसाधनों के जरिए महिलाएं अपने जीवन में बड़े बदलाव ला सकती हैं और समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं.


सम्मेलन की सदस्यों ने भी इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया. उनका कहना था कि यदि हर सक्षम व्यक्ति और संस्था इस तरह आगे आए तो कई जरूरतमंद बच्चों और युवाओं का भविष्य संवर सकता है.


ALSO READ : वाराणसी में लाइसेंस प्रक्रिया के विरोध में नाविक समाज ने बुलंद की आवाज, उठाई ये मांग...


इस अवसर पर प्रीति बाजोरिया, मधु तुलसियान, मीनू केजरीवाल, सुगंधा केजरीवाल सहित संस्था की कई सदस्याएं मौजूद रहीं.

महिला सशक्तीकरण की दिशा में पहल, जरूरतमंद युवती को दिया गया लैपटॉप...
महिला सशक्तीकरण की दिशा में पहल, जरूरतमंद युवती को दिया गया लैपटॉप...
वाराणसी : महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने और जरूरतमंद बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की विदिशा शाखा ने एक सराहनीय पहल की. संस्था की ओर से जरूरतमंद और प्रतिभाशाली युवती को उसकी शिक्षा, कार्य और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लैपटॉप भेंट किया गया.कार्यक्रम के दौरान शाखा की अध्यक्ष सरोज तुलस्यान ने कहा कि यह सहयोग केवल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक युवती के सपनों को नई उड़ान देने और उसके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीक शिक्षा और रोजगार का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में जिन बच्चों और युवाओं के पास संसाधनों की कमी होती है, उनके लिए इस तरह की मदद बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है.उन्होंने आगे कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं और बेटियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना भी है. पढ़ाई, कौशल विकास और तकनीकी संसाधनों के जरिए महिलाएं अपने जीवन में बड़े बदलाव ला सकती हैं और समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं.सम्मेलन की सदस्यों ने भी इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया. उनका कहना था कि यदि हर सक्षम व्यक्ति और संस्था इस तरह आगे आए तो कई जरूरतमंद बच्चों और युवाओं का भविष्य संवर सकता है.ALSO READ : वाराणसी में लाइसेंस प्रक्रिया के विरोध में नाविक समाज ने बुलंद की आवाज, उठाई ये मांग...इस अवसर पर प्रीति बाजोरिया, मधु तुलसियान, मीनू केजरीवाल, सुगंधा केजरीवाल सहित संस्था की कई सदस्याएं मौजूद रहीं.
वाराणसी में लाइसेंस प्रक्रिया के विरोध में नाविक समाज ने बुलंद की आवाज, उठाई ये मांग...
वाराणसी में लाइसेंस प्रक्रिया के विरोध में नाविक समाज ने बुलंद की आवाज, उठाई ये मांग...
वाराणसी : गंगा में नौकायन से जुड़े पारंपरिक नाविकों के अधिकारों और रोजगार को लेकर मंगलवार को दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी के सामने निषाद (नाविक) समाज की एक महाबैठक आयोजित की गई. बैठक में सराय मोहाना, राजघाट, गायघाट, पंचगंगा, दशाश्वमेध, केदार, अस्सी और मदरवा समेत गंगा किनारे बसे विभिन्न क्षेत्रों के सैकड़ों नाविक और निषाद समाज के लोग शामिल हुए.बैठक का मुख्य मुद्दा 'इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (IWAI) द्वारा नावों के लाइसेंस बनाए जाने की प्रस्तावित प्रक्रिया का विरोध रहा. वक्ताओं ने कहा कि निषाद समाज पीढ़ियों से गंगा में नौकायन का कार्य करता आ रहा है और वाराणसी में नावों के लाइसेंस का नवीनीकरण एवं संचालन परंपरागत रूप से नगर निगम के माध्यम से होता रहा है. ऐसे में किसी अन्य संस्था द्वारा लाइसेंस व्यवस्था लागू किए जाने से नाविकों के समक्ष नई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं.लाइसेंस न बनने से बढ़ी परेशानीबैठक में शंभू निषाद ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से नगर निगम द्वारा नावों के नवीनीकरण और नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया बंद है. इसके कारण बड़ी संख्या में नाविकों की नावें बिना लाइसेंस संचालित नहीं हो पा रही हैं, जिससे उनके रोजगार और आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. नाविकों का कहना है कि गंगा पर निर्भर हजारों परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं.नगर निगम से ही लाइसेंस जारी करने की मांगनिषाद समाज ने एक स्वर में कहा कि नावों के लाइसेंस की प्रक्रिया पहले की तरह नगर निगम के माध्यम से ही संचालित की जाए. समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि स्थानीय परिस्थितियों और नाविकों की समस्याओं को नगर निगम बेहतर ढंग से समझता है, इसलिए लाइसेंस व्यवस्था में किसी अन्य एजेंसी का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा.नाविकों के उत्पीड़न का आरोपबैठक में मौजूद नाविकों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि छोटी-छोटी बातों पर नाविकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाते हैं और नावों को सीज कर दिया जाता है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है. समाज ने ऐसी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की.लाइफ जैकेट को लेकर उठाए सवालनाविकों ने कहा कि वे यात्रियों को लाइफ जैकेट उपलब्ध कराते हैं, लेकिन कई यात्री यात्रा के दौरान जैकेट उतार देते हैं या पहनने से इनकार कर देते हैं. इसके बावजूद किसी दुर्घटना या जांच के दौरान पूरी जिम्मेदारी नाविकों पर डाल दी जाती है. बैठक में मांग की गई कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि केवल नाविकों को ही दंडित न किया जाए.क्रूज और नावों के लिए अलग-अलग नियमों का विरोधवक्ताओं ने आरोप लगाया कि छोटे नाविकों के लिए सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता है और उल्लंघन पर भारी चालान व कार्रवाई की जाती है, जबकि बड़े क्रूज जहाजों पर नियमों के पालन में समान कठोरता नहीं दिखाई देती. निषाद समाज ने इसे "दोहरा कानून" बताते हुए सभी के लिए समान नियम लागू करने की मांग की.गोताखोरों को रोजगार देने की मांगबैठक में निषाद समाज के कुशल गोताखोरों को पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन विभागों में रोजगार देने की मांग भी प्रमुखता से उठी. वक्ताओं ने कहा कि गंगा में डूबने या अन्य आपदाओं के समय निषाद समाज के गोताखोर हमेशा प्रशासन की सहायता करते हैं, इसलिए उनके अनुभव और कौशल का उपयोग सरकारी सेवाओं में किया जाना चाहिए.आंदोलन की चेतावनीबैठक के अंत में निषाद समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो समाज व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल लाइसेंस की नहीं, बल्कि हजारों नाविक परिवारों के सम्मान, रोजगार और अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है.ALSO READ : स्लोवाकिया में दिखी ‘काशी’ की झलक: PM मोदी ने ब्रातिस्लावा में वाराणसी थीम कला प्रदर्शनी का किया अवलोकन...बैठक में मौजूद लोगों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया. दशाश्वमेध घाट पर हुई इस महाबैठक ने गंगा किनारे बसे नाविक समाज की समस्याओं और उनकी मांगों को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है.
स्लोवाकिया में दिखी ‘काशी’ की झलक: PM मोदी ने ब्रातिस्लावा में वाराणसी थीम कला प्रदर्शनी का किया अवलोकन...
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वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोवाकिया दौरे के दौरान वाराणसी की सांस्कृतिक छवि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देखने को मिली.प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा स्थित राष्ट्रपति भवन में स्लोवाक राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ वाराणसी थीम पर आधारित एक विशेष कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया.यह अनोखी प्रदर्शनी स्लोवाक कलाकारों द्वारा तैयार की गई थी, जो हाल ही में भारत के प्राचीन शहर वाराणसी की यात्रा से प्रेरित थी. प्रदर्शनी में बनारस के घाट, मंदिर, गलियां, धार्मिक परंपराएं और शहर की आध्यात्मिक ऊर्जा को कलाकृतियों के माध्यम से दर्शाया गया. कलाकारों ने अपनी अलग-अलग कला शैली में काशी की संस्कृति और जीवनशैली को प्रस्तुत करने का प्रयास किया.जानकारी के मुताबिक, यह प्रदर्शनी भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के सहयोग से आयोजित एक विशेष अंतरराष्ट्रीय कला परियोजना का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना था.हाल ही में कुछ स्लोवाक कलाकार वाराणसी आए थे, जहां उन्होंने शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा और उसी अनुभव को अपनी कलाकृतियों में उतारा.ALSO READ : वाराणसी में जादू टोना के फेर में हुई थी बुजुर्ग की हत्‍या, 24 घंटे में चार आरोपी गिरफ्तार...प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कला और संस्कृति लोगों को जोड़ने का एक मजबूत माध्यम है.वहीं राष्ट्रपति पेलेग्रिनी ने भी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया. इस प्रदर्शनी को भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ते सांस्कृतिक रिश्तों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है.