Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

31 मार्च को अंतरराज्‍यीय सहयोग सम्मेलन, काशी विश्वनाथ धाम के अध्ययन भ्रमण से शुरूआत

31 मार्च को अंतरराज्‍यीय सहयोग सम्मेलन, काशी विश्वनाथ धाम के अध्ययन भ्रमण से शुरूआत
Mar 30, 2026, 07:41 AM
|
Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार 31 मार्च 2026 को वाराणसी में आयोजित होने वाले “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” के माध्यम से अंतरराज्यीय सहयोग को एक ठोस, परिणामोन्मुख और वैश्विक दृष्टि से जोड़ने की दिशा में निर्णायक पहल करेगी. यह सम्मेलन महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत संवाद के साथ ही ओडीओपी, जीआई टैग, पारंपरिक शिल्प, निर्यात योग्य उत्पादों, निवेश और पर्यटन को एकीकृत करते हुए एक व्यापक आर्थिक इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में कार्य करेगा.


प


मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सक्रिय उपस्थिति इस आयोजन को नीति-निर्माण से आगे बढ़ाकर क्रियान्वयन आधारित सहयोग की दिशा में परिवर्तित करेगी, जिससे दोनों राज्यों के बीच विकास का एक सशक्त और दीर्घकालिक मॉडल विकसित होगा.


अध्ययन भ्रमण से विकसित होगा आधुनिक तीर्थ का दृष्टिकोण


कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से होगी, जहां क्राउड फ्लो डिजाइन, अधोसंरचना लेआउट और तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणालियों का गहन अवलोकन किया जाएगा. यह भ्रमण केवल एक निरीक्षण नहीं होगा, बल्कि आधुनिक शहरी नियोजन और तीर्थस्थल प्रबंधन के सफल मॉडल को समझने का अवसर प्रदान करेगा. इस अनुभव के आधार पर मध्यप्रदेश में धार्मिक स्थलों के विकास, सुविधाओं के विस्तार और व्यवस्थागत सुधार के लिए व्यवहारिक दृष्टिकोण विकसित किया जाएगा, जिससे तीर्थ पर्यटन को अधिक सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाया जा सकेगा.


uiop


निर्यात योग्य उत्पादों को मिलेगा एकीकृत वैश्विक मंच


सम्मेलन में ओडीओपी, जीआई टैग उत्पादों, पारंपरिक शिल्प, कृषि एवं फूड उत्पादों को ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात से जोड़ने पर विशेष फोकस रहेगा. उत्तरप्रदेश की ओडीओपी पहल के अनुभवों और उसके आर्थिक प्रभावों की प्रस्तुति से यह स्पष्ट होगा कि किस प्रकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जा सकता है. इस मंच पर दोनों राज्यों के उत्पादों की विशिष्टताओं को रेखांकित करते हुए उन्हें एक साझा ब्रांडिंग दृष्टिकोण के तहत प्रस्तुत करने की दिशा में विचार-विमर्श होगा, जिससे निर्यात संवर्धन और मूल्य संवर्धन के नए अवसर विकसित होंगे.


एमओयू से सुदृढ़ होगी व्यापार


सम्मेलन में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच एमओयू हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिनके माध्यम से व्यापारिक सहयोग, औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, हस्तशिल्प संवर्धन और पर्यटन क्षेत्र में साझेदारी को औपचारिक रूप दिया जाएगा. यह समझौता केवल दस्तावेजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर लागू करते हुए उद्योगों, उद्यमियों और शिल्पकारों के लिए नए अवसर सृजित किए जाएंगे. ओडीओपी उत्पादों के आदान-प्रदान से स्थानीय उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने और उनकी ब्रांड वैल्यू बढ़ाने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी.


शिल्पकारों को मिलेगा साझा संवाद मंच


यह सम्मेलन उद्योग जगत, निवेशकों, शिल्पकारों, कृषि एवं फूड उत्पादकों और नीति-निर्माताओं को एक व्यापक और समावेशी मंच प्रदान करेगा, जहां वे नीतिगत प्रोत्साहनों, अधोसंरचना विकास, लॉजिस्टिक सपोर्ट और निवेश अवसरों पर गहन चर्चा करेंगे. वस्त्र एवं परिधान, हस्तशिल्प, एमएसएमई, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे विविध क्षेत्रों की सहभागिता इस आयोजन को बहु-आयामी बनाएगी. इससे उद्योग-सरकार समन्वय को मजबूती मिलेगी और निवेश निर्णयों को गति प्रदान करने वाला वातावरण तैयार होगा.


o


प्रदर्शनी से प्रदर्शित होगी मध्यप्रदेश की औद्योगिक और सांस्कृतिक शक्ति


सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के ओडीओपी उत्पादों, जीआई टैग हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्रों, निवेश संभावनाओं, औद्योगिक क्षमताओं और प्रमुख पर्यटन स्थलों को एकीकृत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा. यह प्रदर्शनी केवल प्रदर्शन का माध्यम नहीं होगी, बल्कि निवेशकों और प्रतिभागियों के लिए राज्य की वास्तविक क्षमताओं को समझने और उनसे जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी. इसके माध्यम से मध्यप्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को एक संगठित और प्रभावी रूप में सामने लाया जाएगा.


यह भी पढ़ें: खड़े ट्रेलर में बकरी से लदे DCM ने मारी टक्‍कर, हादसे में चालक की मौत


जॉइंट आर्टिजन वर्कशॉप में चंदेरी और महेश्वरी शिल्पकार बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ मिलकर साझा ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और “गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर” की अवधारणा को आगे बढ़ाएंगे. यह पहल पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने और शिल्पकारों को प्रत्यक्ष बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी. इससे न केवल हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी, बल्कि कारीगरों की आय और आजीविका के अवसर भी सुदृढ़ होंगे.


धार्मिक पर्यटन को नई गति देगा काशी-उज्जैन-चित्रकूट सर्किट


टूरिज्म राउंड टेबल में काशी-उज्जैन-चित्रकूट धार्मिक पर्यटन सर्किट को संयुक्त पर्यटन उत्पाद के रूप में विकसित करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा. इस पहल में टूर ऑपरेटर्स और आईआरसीटीसी जैसे प्रमुख हितधारकों की सहभागिता से एक संरचित और समन्वित पर्यटन मॉडल विकसित करने पर जोर रहेगा. इससे धार्मिक पर्यटन को अधिक व्यवस्थित, सुगम और आकर्षक बनाया जा सकेगा, जिससे दोनों राज्यों में पर्यटकों की संख्या और ठहराव अवधि में वृद्धि होगी.


k


निवेश, निर्यात और संतुलित विकास की दिशा में निर्णायक पहल


यह सम्मेलन निवेश आकर्षण, निर्यात संवर्धन, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए क्षेत्रीय विकास का एक सशक्त मॉडल प्रस्तुत करेगा. “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” के माध्यम से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच सहयोग को एक स्थायी, व्यावहारिक और परिणामदायी स्वरूप मिलेगा, जो दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा.

ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
वाराणसी। बालू परिवहन में ओवरलोडिंग और बिना आवश्यक वैध दस्तावेजों के वाहनों के संचालन को लेकर बनारस ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने प्रशासन और खनन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र सौंपकर ओवरलोड एवं बिना आवश्यक आईएसटीपी/वैध कागजात के बालू परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने की मांग की।एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले प्रशासन की ओर से ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहनों को पकड़ा गया और कार्रवाई की गई। अभियान का असर यह रहा कि कुछ समय तक ओवरलोड बालू वाहनों का संचालन काफी हद तक नियंत्रित रहा, लेकिन कार्रवाई की गति धीमी पड़ने के बाद एक बार फिर ऐसे वाहनों के संचालन की शिकायतें सामने आने लगी हैं।ओवरलोडिंग से वैध ट्रक ऑपरेटरों को नुकसानएसोसिएशन के संरक्षक विजय सिंह ने कहा कि ओवरलोडिंग का सीधा असर निर्धारित क्षमता के अनुसार वाहन चलाने वाले ट्रक मालिकों पर पड़ रहा है। वैध तरीके से क्षमता के अनुरूप बालू परिवहन करने वाले वाहन संचालकों की लागत अधिक आती है, जबकि ओवरलोड वाहन कम लागत में अधिक माल पहुंचाकर अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। इससे नियमों का पालन करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है।एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व की तरह नियमित और प्रभावी अभियान चलाया जाए तथा बालू लदे प्रत्येक वाहन के भार और दस्तावेजों की जांच सुनिश्चित की जाए।सड़क क्षति और राजस्व नुकसान की भी जताई आशंकाट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने कहा कि ओवरलोडिंग का असर केवल परिवहन कारोबार तक सीमित नहीं है। क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले भारी वाहनों से सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सड़कें समय से पहले क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। वहीं, नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बालू मंडी से जुड़े व्यापारियों ने ओवरलोडिंग के मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद प्रशासन और खनन विभाग से प्रभावी कार्रवाई के लिए पत्र सौंपने का निर्णय लिया गया।ALSO READ: BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरीमिलीभगत के आरोपों की जांच की मांगएसोसिएशन से जुड़े कुछ ऑपरेटरों ने ओवरलोड वाहनों को कथित रूप से पास कराने में बालू माफिया और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने प्रशासन से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आरोप गलत पाए जाएं तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह, संरक्षक विजय सिंह, उपाध्यक्ष कुंवर सिंह, राकेश सिंह, नीतेश सिंह, महामंत्री आनंद भूषण सिंह, उपमहामंत्री शुभांशु सिंह, मंत्री मुकुंद सिंह, धर्मेंद्र यादव, जितेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी अजित कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष अनुराग सिंह (गुड्डू सिंह), सचिव दीपू यादव समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरी
BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरी
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मालवीय भवन में रविवार को गीता समिति की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘रविवासरीय गीता प्रवचन’ का सत्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन प्रत्येक रविवार की तरह सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक किया जाएगा और पूरे शैक्षणिक सत्र में इसकी निरंतरता बनी रहेगी।कार्यक्रम की शुरुआत वेद विभाग के विद्यार्थियों के वैदिक मंगलाचरण से हुई। इसके बाद संगीत एवं मंच कला संकाय के विद्यार्थियों ने कुलगीत एवं भजन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के उस विचार को प्रमुखता से रेखांकित किया गया, जिसमें शिक्षा के उद्देश्य को केवल बौद्धिक विकास तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों में नैतिक और आध्यात्मिक चेतना के विकास पर जोर दिया गया था।इस अवसर पर प्रो. हृदयरंजन शर्मा ने कहा कि महामना मालवीय का विश्वास था कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक जीवन-मूल्यों और सिद्धांतों से उनका परिचय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने विश्वविद्यालय में रविवासरीय गीता प्रवचन की परंपरा शुरू की थी।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए BHU के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति विद्यार्थियों में रुचि बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि नवप्रवेशी विद्यार्थियों के इंडक्शन कार्यक्रम में भी गीता से संबंधित आयोजन शामिल किए जाएं, ताकि विद्यार्थियों में प्रारंभ से ही भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति जुड़ाव विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि गीता के माध्यम से मन को संस्कारित करने और जीवन-मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास जरूरी है।मालवीय भवन के मानित निदेशक प्रो. पतंजलि मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती भौतिक प्रतिस्पर्धा और तनाव के कारण व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में गीता के संदेश और जीवन-दर्शन की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।गीता समिति के सचिव प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा का अमूल्य ग्रंथ है, जो मनुष्य को कर्तव्य, आत्मसंयम और सदाचार का मार्ग दिखाता है। उन्होंने बताया कि महामना ने विश्वविद्यालय परिवार से प्रत्येक रविवार डेढ़ घंटे का ‘समय-दान’ गीता प्रवचन में शामिल होने के लिए अपनी गुरु-दक्षिणा के रूप में देने की अपील की थी।अहं त्यागकर विनम्रता और आत्मसंयम से जीवन जीने का संदेशकार्यक्रम के मुख्य अतिथि सद्गुरु माधव प्रियदास जी, अध्यक्ष, स्वामीनारायण गुरुकुल, गुजरात, अहमदाबाद ने गीता के अध्ययन, मनन और उसके अनुसार जीवन जीने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अहं की भावना का त्याग कर विनम्रता और आत्मसंयम के साथ जीवन जीने का सुझाव दिया।उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बाहरी ज्ञान से परिचित कराना नहीं, बल्कि व्यक्ति को उस ज्ञान को ग्रहण करने योग्य बनाना भी है। भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार त्रिविक्रम ने तीन पगों में समस्त ब्रह्मांड को नाप लिया, उसी प्रकार गीता जैसे विराट विषय को सीमित शब्दों में समेटना कठिन है। उन्होंने कहा कि किसी विषय को समझे बिना उसका सही विवेचन संभव नहीं है, इसलिए गीता के संदेश को समझने और जीवन में उतारने की आवश्यकता है।कार्यक्रम का संचालन भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शारदिंदु कुमार त्रिपाठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन गीता समिति की संयुक्त सचिव प्रो. सुमन जैन ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गंभीर हादसे के बाद BHU छात्र के इलाज में देरी का आरोप, छात्रों ने की निष्पक्ष जांच की मांग....
गंभीर हादसे के बाद BHU छात्र के इलाज में देरी का आरोप, छात्रों ने की निष्पक्ष जांच की मांग....
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के बिरला ‘C’ छात्रावास के एमए फ्रेंच द्वितीय वर्ष के छात्र राम के साथ शनिवार देर रात गंभीर दुर्घटना हो गई। घायल अवस्था में छात्र को तत्काल बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। छात्रावास के विद्यार्थियों ने ट्रॉमा सेंटर में उपचार में कथित देरी और अस्पताल कर्मियों व प्रॉक्टोरियल अधिकारियों पर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं।छात्रों के मुताबिक, दुर्घटना के बाद राम को रात करीब 12 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्हें तत्काल आवश्यक प्राथमिक उपचार नहीं मिला। आरोप है कि उनके गंभीर घाव पर कई घंटों तक टांके नहीं लगाए गए और उपचार की प्रक्रिया में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई।सुबह घायल छात्र का हाल जानने और उपचार में मदद के लिए बिरला ‘C’ छात्रावास के कई छात्र ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल कर्मियों से तत्काल इलाज शुरू करने का आग्रह किया, लेकिन इस दौरान कुछ सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। छात्रों ने दावा किया कि उन्हें धमकी भरे लहजे में कहा गया कि इलाज नहीं करेंगे, जो करना है कर लें।छात्रों के अनुसार, दुर्घटना के करीब 12 घंटे बाद लगातार मांग और चिकित्सकों से हस्तक्षेप की अपील के बाद राम का उपचार शुरू हुआ। बाद में उसके गंभीर घाव पर 29 टांके लगाए गए। छात्रों ने उपचार में हुई इस कथित देरी को गंभीर मामला बताते हुए पूरी मेडिकल टाइमलाइन और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।प्रॉक्टोरियल अधिकारियों पर भी लगाए आरोपमामले की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल अधिकारी मौके पर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि स्थिति को शांत करने और उनकी बात सुनने के बजाय अधिकारियों ने उनसे कथित तौर पर अभद्र भाषा में बात की। छात्रों ने धक्का-मुक्की और हाथापाई जैसी स्थिति उत्पन्न होने का भी आरोप लगाया है।छात्रों का यह भी दावा है कि घायल छात्र राम के लिए कथित रूप से असंवेदनशील भाषा का इस्तेमाल किया गया और उसे ‘लावारिस’ कहकर संबोधित किया गया। इसको लेकर छात्रों ने नाराजगी जताई है।छात्रों के मुताबिक, जब उन्होंने उपचार में देरी और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारियों से सवाल किए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी दौरान पुलिस को मौके पर बुलाया गया। छात्रों का आरोप है कि बाद में घटना को इस तरह पेश करने का प्रयास किया गया कि छात्रों ने प्रॉक्टर के साथ मारपीट की। छात्र समुदाय ने इस आरोप को गलत बताते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।उपचार पूरा होने से पहले डिस्चार्ज करने का आरोपछात्रों ने आरोप लगाया कि घायल राम को उचित उपचार पूरा हुए बिना डिस्चार्ज करने का प्रयास भी किया गया। विरोध के बाद उन्हें दोबारा भर्ती किया गया। छात्रों के अनुसार, उन्हें बताया गया कि करीब तीन बजे चिकित्सक उपलब्ध होंगे।प्रशासनिक वार्डन ने संभाली स्थितिघटना के दौरान तनाव बढ़ने पर प्रशासनिक वार्डन मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और पूरे मामले को अपने संज्ञान में लिया। इसके बाद छात्रों को छात्रावास वापस भेजा गया, ताकि अस्पताल परिसर में तनाव कम हो और घायल छात्र के उपचार पर ध्यान दिया जा सके।छात्र समुदाय ने प्रशासनिक वार्डन की पहल को सकारात्मक कदम बताते हुए मामले में आगे निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।ALSO READ: रामनगर पुलिस ने साइबर ठगों के चंगुल से वापस कराए 97 हजार रुपयेछात्रों की प्रमुख मांगेंछात्रों ने राम के उपचार में हुई कथित देरी और लापरवाही की स्वतंत्र जांच, दुर्घटना से उपचार शुरू होने तक की मेडिकल टाइमलाइन व अस्पताल रिकॉर्ड की जांच, अस्पताल कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के कथित दुर्व्यवहार की जांच तथा प्रॉक्टोरियल अधिकारियों और छात्रों के बीच हुई कथित धक्का-मुक्की की निष्पक्ष जांच की मांग की है।इसके अलावा छात्रों ने घायल विद्यार्थी को उसकी स्थिति के अनुरूप पूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और भविष्य में किसी भी घायल छात्र को समय पर प्राथमिक उपचार सुनिश्चित करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि घायल विद्यार्थी के उचित उपचार और सम्मान की रक्षा करना है।