अतिक्रमण मुक्त जमीन पर बनेगा 'नमो वन', सारंगतालाब में लगेंगे 40 हजार से ज्यादा पौधे…

वाराणसी : शहरीकरण और विकास की तीव्र रफ्तार के बीच बनारस की लगातार सिमटती हरियाली को बचाने के लिए नगर निगम ने सक्रियता बढ़ा दी है.सड़कों के चौड़ीकरण, निर्माण कार्यों और पेड़ों की कटाई से प्रभावित हुए पर्यावरण संतुलन को बहाल करने के लिए काशी को अब एक बड़े 'ऑक्सीजन हब' के रूप में विकसित किया जा रहा है.
इस क्रम में शनिवार को सारंगनाथ चौराहा स्थित सारंगतालाब की जमीन पर एक नए मियावाकी वन (अर्बन फॉरेस्ट) की शुरुआत हुई है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रेरणा लेते हुए इस अर्बन फॉरेस्ट को 'नमो वन' के रूप में विकसित किया जा रहा है. यहां 40,000 से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. यह शहर का तीसरा मियावाकी वन बनने जा रहा है.

जिस जमीन पर इस विशाल 'नमो वन' को बनाया जा रहा है, उसे हाल ही में निगम प्रशासन द्वारा अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। वन की सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम ने चारों तरफ बाउंड्री वॉल (सुरक्षा दीवार) का निर्माण करा दिया है. पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सेहत और सुविधा के लिए यहाँ जल्द ही सुंदर टहलने का रास्ता और एक ओपन जिम भी बनाया जाएगा.
प्रभारी मंत्री और महापौर ने की शुरुआत
इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना, महापौर अशोक कुमार तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या और कैंट विधानसभा के विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने पौधा रोपकर किया.अभियान के पहले दिन पीपल, पाकड़, जामुन, बरगद, गुलमोहर, अमलताश और मौलश्री समेत कुल 20 विभिन्न प्रजातियों के 501 पौधे रोपे गए.
इस दौरान मुख्य रूप से जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, जोनल अधिकारी कृष्ण चंद्र के साथ-साथ क्षेत्रीय पार्षद बलराम कन्नौजिया, राजकपूर चौधरी, अशोक मौर्या और अन्य अधिकारी मौजूद थे
डोमरी के विश्व रिकॉर्ड के बाद तीसरी बड़ी उपलब्धि
इससे पहले नगर निगम काशी ने डोमरी (सुजाबाद) में करीब 350 बीघा क्षेत्र में मात्र एक घंटे के भीतर 2,51,446 पौधे रोपकर एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया था। डोमरी और कंचनपुर में मियावाकी पद्धति से तैयार हुए वनों की सफलता के बाद अब सारंगतालाब शहर का तीसरा ऐसा क्षेत्र बनने जा रहा है, जिसे 'ग्रीन काशी' अभियान के तहत घने जंगल का रूप दिया जाएगा.
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महापौर ने बताया कि मियावाकी तकनीक से पौधे बेहद तेजी से बढ़ते हैं, जिससे शहर के बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगेगी और निवासियों को शुद्ध हवा मिल सकेगी.और पर्यटक के लिए आकर्षक का केंद्र बनेगी .



