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आठ साल पहले आज ही गैंगवार में ढेर हुआ था रईस बनारसी, वाराणसी से कानपुर तक रहा आतंक का पर्याय

आठ साल पहले आज ही गैंगवार में ढेर हुआ था रईस बनारसी, वाराणसी से कानपुर तक रहा आतंक का पर्याय
Sep 14, 2026, 09:29 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : पूर्वांचल से लेकर कानपुर तक आतंक का पर्याय रहा कुख्‍यात बदमाश रईस अहमद उर्फ रईस सिद्दीकी उर्फ रईस बनारसी 14 सितंबर 2018 को वाराणसी के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के पातालेश्वर मुहल्ले में हुए गैंगवार में ढेर हुआ था. उसी गोलीबारी में कभी उसके गिरोह का सदस्‍य रहा राकेश अग्रहरि भी मारा गया था. दोनों कभी जिगरी दोस्त थे, लेकिन रंगदारी, जमीन की दलाली और वर्चस्व की लड़ाई ने उन्हें एक-दूसरे के खून के प्यासे बना दिया.


रईस का जन्म कानपुर के अनवरगंज इलाके के हीरामन का पुरवा में हुआ था. पिता इश्तियाक राजमिस्त्री थे. आठ भाई-बहनों में सातवें नंबर का रईस सामान्य परिवार से था, लेकिन अपने भाई नौशाद की हत्या ने उसके जीवन की दिशा बदल दी. बदला लेने की कसम खाकर वह वाराणसी के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र स्थित खालिसपुरा में अपनी ननिहाल में आ गया. यहीं से रईस अहमद ‘रईस बनारसी’ बन गया. यहां उसने राकेश अग्रहरि, राजकुमार बिंद उर्फ गुड्डू मामा, बच्चा यादव, अवधेश सिंह, बाले पटेल, पंकज उर्फ नाटे और जावेद खां जैसे साथियों के साथ अपना गिरोह खड़ा किया. मुन्ना बजरंगी से भी उसका संबंध रहा.


2011 में कानपुर में दिनदहाड़े शानू ओलंगा (भाई के कथित हत्यारे) की हत्या कर उसने बदला पूरा किया. इसके बाद लूट, हत्या, रंगदारी और बिहार के मुंगेर से असलहों की तस्करी उसका मुख्य धंधा बन गया. 2007 में पुलिस वर्दी पहनकर वाराणसी के हथुआ मार्केट में बैंक के बाहर पेट्रोल पंप संचालक शम्भूनाथ लाहिड़ी की हत्या जैसे दुर्दांत अपराध में भी उसका नाम दर्ज था. नवंबर, 2015 में रईस का नाम भाजपा पार्षद शिव सेठ की हत्या में भी सामने आया था. मुखबिरी की शक में दशाश्वमेध क्षेत्र में साथी दीपू वर्मा की हत्या में भी शामिल रहा.


वाराणसी और कानपुर में उसके खिलाफ हत्या, लूट और रंगदारी के दर्जनों मामले दर्ज थे. पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम रखा था. जब वह पहली बार पुलिस की गिरफ्त में आया तो उसके पास से पुलिस की वर्दी भी बरामद हुई थी. उसकी पत्‍नी कानपुर की रहने वाली थी. अपनी पत्‍नी के साथ मिलकर उसने एक गंभीर साजिश रची थी. अक्टूबर 2015 में वाराणसी जिला जेल से बरेली शिफ्ट किए जाते समय शाहजहांपुर के पास वह अपनी पत्‍नी की मदद से पुलिस वैन से कूदकर वह फरार हो गया और तीन साल तक पुलिस को चकमा देता रहा. शहर में छिपकर बिल्डरों, डॉक्टरों और व्यापारियों से रंगदारी वसूलता रहा. मोबाइल से परहेज और सतर्कता उसकी खासियत थी.


ALSO READ: चौबेपुर में 2 अज्ञात शव मिलने से सनसनी, पुलिस जांच में जुटी



14 सितंबर 2018 की शाम को प्रभु साहनी की हत्या में राकेश की भूमिका का शक और आपसी विवाद के चलते रईस अपने साथी के साथ राकेश को मारने पहुंचा. क्रॉस फायरिंग में दोनों घायल हुए. रईस को साथी बाइक पर लेकर भाग निकले, लेकिन नई सड़क की लंगड़ा हाफिज मस्जिद के पास वह गिर पड़ा और मस्जिद में ही घायल अवस्था मे घंटो बैठा रहा और लोगो से एक पार्षद को बुलाने की मांग करता रहा. उधर राकेश भी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया.


नई सड़क से काफी देर बाद जब इसको मंडलीय अस्पताल ले जाया गया जहां इसको डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. पहले तो काफी देर तक समझ ही नहीं आया कि मरने वाला कुख्यात बदमाश रईस बनारसी है, बाद में स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की तब स्प्ष्ट हुआ की रईस बनारसी का अंत हो चुका है. रईस बनारसी की कहानी अपराध की दुनिया की उस सच्चाई को दर्शाती है जहां दोस्ती दुश्मनी में बदल जाती है और गोली का जवाब गोली से मिलता है. बनारस से कानपुर तक फैला उसका आतंक गैंगवार में समाप्त हो गया, लेकिन उसकी आपराधिक विरासत पूर्वांचल के अंडरवर्ल्ड की यादों में दर्ज रह गई.

आठ साल पहले आज ही गैंगवार में ढेर हुआ था रईस बनारसी, वाराणसी से कानपुर तक रहा आतंक का पर्याय
आठ साल पहले आज ही गैंगवार में ढेर हुआ था रईस बनारसी, वाराणसी से कानपुर तक रहा आतंक का पर्याय
वाराणसी : पूर्वांचल से लेकर कानपुर तक आतंक का पर्याय रहा कुख्‍यात बदमाश रईस अहमद उर्फ रईस सिद्दीकी उर्फ रईस बनारसी 14 सितंबर 2018 को वाराणसी के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के पातालेश्वर मुहल्ले में हुए गैंगवार में ढेर हुआ था. उसी गोलीबारी में कभी उसके गिरोह का सदस्‍य रहा राकेश अग्रहरि भी मारा गया था. दोनों कभी जिगरी दोस्त थे, लेकिन रंगदारी, जमीन की दलाली और वर्चस्व की लड़ाई ने उन्हें एक-दूसरे के खून के प्यासे बना दिया.रईस का जन्म कानपुर के अनवरगंज इलाके के हीरामन का पुरवा में हुआ था. पिता इश्तियाक राजमिस्त्री थे. आठ भाई-बहनों में सातवें नंबर का रईस सामान्य परिवार से था, लेकिन अपने भाई नौशाद की हत्या ने उसके जीवन की दिशा बदल दी. बदला लेने की कसम खाकर वह वाराणसी के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र स्थित खालिसपुरा में अपनी ननिहाल में आ गया. यहीं से रईस अहमद ‘रईस बनारसी’ बन गया. यहां उसने राकेश अग्रहरि, राजकुमार बिंद उर्फ गुड्डू मामा, बच्चा यादव, अवधेश सिंह, बाले पटेल, पंकज उर्फ नाटे और जावेद खां जैसे साथियों के साथ अपना गिरोह खड़ा किया. मुन्ना बजरंगी से भी उसका संबंध रहा.2011 में कानपुर में दिनदहाड़े शानू ओलंगा (भाई के कथित हत्यारे) की हत्या कर उसने बदला पूरा किया. इसके बाद लूट, हत्या, रंगदारी और बिहार के मुंगेर से असलहों की तस्करी उसका मुख्य धंधा बन गया. 2007 में पुलिस वर्दी पहनकर वाराणसी के हथुआ मार्केट में बैंक के बाहर पेट्रोल पंप संचालक शम्भूनाथ लाहिड़ी की हत्या जैसे दुर्दांत अपराध में भी उसका नाम दर्ज था. नवंबर, 2015 में रईस का नाम भाजपा पार्षद शिव सेठ की हत्या में भी सामने आया था. मुखबिरी की शक में दशाश्वमेध क्षेत्र में साथी दीपू वर्मा की हत्या में भी शामिल रहा.वाराणसी और कानपुर में उसके खिलाफ हत्या, लूट और रंगदारी के दर्जनों मामले दर्ज थे. पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम रखा था. जब वह पहली बार पुलिस की गिरफ्त में आया तो उसके पास से पुलिस की वर्दी भी बरामद हुई थी. उसकी पत्‍नी कानपुर की रहने वाली थी. अपनी पत्‍नी के साथ मिलकर उसने एक गंभीर साजिश रची थी. अक्टूबर 2015 में वाराणसी जिला जेल से बरेली शिफ्ट किए जाते समय शाहजहांपुर के पास वह अपनी पत्‍नी की मदद से पुलिस वैन से कूदकर वह फरार हो गया और तीन साल तक पुलिस को चकमा देता रहा. शहर में छिपकर बिल्डरों, डॉक्टरों और व्यापारियों से रंगदारी वसूलता रहा. मोबाइल से परहेज और सतर्कता उसकी खासियत थी.ALSO READ: चौबेपुर में 2 अज्ञात शव मिलने से सनसनी, पुलिस जांच में जुटी14 सितंबर 2018 की शाम को प्रभु साहनी की हत्या में राकेश की भूमिका का शक और आपसी विवाद के चलते रईस अपने साथी के साथ राकेश को मारने पहुंचा. क्रॉस फायरिंग में दोनों घायल हुए. रईस को साथी बाइक पर लेकर भाग निकले, लेकिन नई सड़क की लंगड़ा हाफिज मस्जिद के पास वह गिर पड़ा और मस्जिद में ही घायल अवस्था मे घंटो बैठा रहा और लोगो से एक पार्षद को बुलाने की मांग करता रहा. उधर राकेश भी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया.नई सड़क से काफी देर बाद जब इसको मंडलीय अस्पताल ले जाया गया जहां इसको डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. पहले तो काफी देर तक समझ ही नहीं आया कि मरने वाला कुख्यात बदमाश रईस बनारसी है, बाद में स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की तब स्प्ष्ट हुआ की रईस बनारसी का अंत हो चुका है. रईस बनारसी की कहानी अपराध की दुनिया की उस सच्चाई को दर्शाती है जहां दोस्ती दुश्मनी में बदल जाती है और गोली का जवाब गोली से मिलता है. बनारस से कानपुर तक फैला उसका आतंक गैंगवार में समाप्त हो गया, लेकिन उसकी आपराधिक विरासत पूर्वांचल के अंडरवर्ल्ड की यादों में दर्ज रह गई.
चौबेपुर में 2 अज्ञात शव मिलने से सनसनी, पुलिस जांच में जुटी
चौबेपुर में 2 अज्ञात शव मिलने से सनसनी, पुलिस जांच में जुटी
वाराणसी : चौबेपुर क्षेत्र में बीते दिनों अलग अलग स्थानों पर दो अज्ञात शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई. दोनों मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है. पहला शव ढकवा गावं में गौरी शंकर महादेव मंदिर के पास गंगा किनारे मिला. ग्रामीणों के सुचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. हालांकि मृतक की पहचान नहीं हो पाई है. व्यक्ति की उम्र 55 वर्ष बतायी गयी है. पुलिस लगातार मृतक की पहचान की कोशिश में जुटी है वही आसपास के लोगो से पूछताछ कर शव की पहचान करने की कोशिश कर रही है.वहीं दूसरा शव रजवाड़ी रेलवे लाइन के पास झाड़ियों में मिला यह शव करीब 30 वर्षीय युवक का बताया जा रहा है, रेलवे लाइन के पास अज्ञात शव की जानकारी मिलने पर घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. जितने मुंह उतनी बातें होती रहीं. युवक के हाथ पर रोहित राधिक गुदा हुआ है. घटना की सुचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाया, और आवश्यक करवाई शुरू की. ALSO READ: रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना : 1274 छात्राओं ने कराया पंजीकरण, एसेसरीज भी मिलेगीफिलहाल पुलिस ने दोनों शवो को मर्चरी में रखवा दिया है. थाना प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार शर्मा ने बताय है कि अभी दोनों शवो कि पहचान नहीं हो पाई है. पुलिस आसपास के लोगों और सम्बंधित क्षेत्रो से संपर्क करने कि लगातार कोशिश कर रही है. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम जांच के बाद ही मौत कि स्थिति सामने आ पायेगी. पुलिस ने आसपास के लोगों से शवों की शिनाख्‍त कराने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली.
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना : 1274 छात्राओं ने कराया पंजीकरण, एसेसरीज भी मिलेगी
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना : 1274 छात्राओं ने कराया पंजीकरण, एसेसरीज भी मिलेगी
वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए कुल 1274 छात्राओं ने पंजीकरण कराया. सहायक कुलसचिव एवं योजना के नोडल अधिकारी अरिन्दम श्रीवास्तव ने बताया कि 1248 छात्राओं का आधार वेरिफिकेशन कार्य हुआ है. वहीं, 1274 छात्राओं का पंजीकरण सत्‍यापित किया गया है. मुफ्त स्‍कूटी के संग एसेसरीज को भी दिया जाएगा.दरअसल, प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार छात्राओं को जनवरी तक स्कूटी देने की तैयारी है. स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड जारी की है. चयनित कंपनी को सिर्फ 100 दिनों में स्कूटी आपूर्ति करनी होगी. उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर अंत तक खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी की है. उसके बाद 100 दिन सप्लाई में लगेगा. इस लिहाज से जनवरी तक छात्राओं को स्कूटी मिलने की उम्मीद है. खास बात यह है कि स्कूटियों की डिलीवरी प्रदेश के सभी 75 जिला/मंडल मुख्यालयों पर की जाएगी.ALSO READ : शास्त्रार्थ महाविद्यालय में हिंदी दिवस पर आयोजन, संस्कृत के साथ हिंदी को भी बताया सहज और मधुर भाषाप्रत्येक स्थान पर कितनी स्कूटी भेजी जाएंगी, इसकी जानकारी खरीद आदेश के समय देंगे. इस बीच छात्राओं की चयन सूची भी तैयार हो जाएगी. हालांकि अधिकारियों ने स्कूटी की संख्या 25 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने का प्रावधान रखा है, ताकि यदि लाभार्थियों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त वाहनों की सप्लाई में किसी तरह की कोई परेशानी न होने पाए. यही नहीं यह संख्या आवश्यकता पड़ने पर और 25 फीसदी से भी अधिक बढ़ या घट सकती है. स्कूटी खरीद के लिए विक्रेताओं से 21 सितंबर को 12 बजे से ऑनलाइन बैठक होगी.सभी स्कूटी के साथ एक आईएस 4151:2015 मानक का हेलमेट और चार लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा. स्कूटी के साथ कई एक्सेसरीज जैसे गार्ड किट, ग्रिप कवर, किक रबर, सीट कवर समेत अन्य वस्तुंए भी अनिवार्य है. स्कूटी BS6, ऑटोमैटिक और ट्यूबलेस टायर वाला होगा.