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‘काशी सेवा–पितृ सेवा’ योजना, वरिष्ठ नागरिकों की सेवा से जुड़ेगा सामुदायिक दायित्व...

‘काशी सेवा–पितृ सेवा’ योजना, वरिष्ठ नागरिकों की सेवा से जुड़ेगा सामुदायिक दायित्व...
Jul 10, 2026, 10:39 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : काशी में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘काशी सेवा–पितृ सेवा’ नामक सामुदायिक सेवा क्रियान्वयन तंत्र की नीति रूपरेखा तैयार की गई है. यह व्यवस्था वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम-2007 के तहत संचालित होगी. इसका उद्देश्य अधिनियम के अंतर्गत पारित आदेशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ समाजोपयोगी और सुधारात्मक व्यवस्था विकसित करना है. यह जानकारी एसडीएसम सदर नितिन सिंह ने दी.


KASHI


विभागों को सौंपी जिम्‍मेदारी


बताया कि नीति के अनुसार, सामुदायिक सेवा दंडात्मक नहीं बल्कि सुधारात्मक, व्यावहारिक और गरिमापूर्ण स्वरूप में कराई जाएगी. इसके तहत पर्यवेक्षित अनुशासन के साथ सार्वजनिक उपयोगिता एवं कल्याणकारी गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी. इस योजना के क्रियान्वयन का पर्यवेक्षण जिलाधिकारी, पीठासीन अधिकारी एवं भरण-पोषण अधिकरण करेंगे. नगर निगम अपने जोनल अधिकारियों के माध्यम से नगर एवं सार्वजनिक उपयोगिता से जुड़े कार्यों का संचालन करेगा, जबकि जिला समाज कल्याण विभाग वृद्धाश्रमों एवं अन्य कल्याणकारी संस्थाओं में गतिविधियों का समन्वय करेगा. योजना में नगर निगम के विभिन्न जोन, स्वच्छता प्रभाग, पार्क एवं उद्यान विभाग, वृद्धाश्रम, धर्मशालाएं, वरिष्ठ नागरिक कल्याण संस्थाएं तथा अन्य अधिसूचित सार्वजनिक संस्थाओं को सहभागी बनाया जाएगा.


सामुदायिक सेवा के अंतर्गत सार्वजनिक सड़कों एवं पार्कों की सफाई, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, अपशिष्ट पृथक्करण, नागरिक जागरूकता अभियान, वृद्धाश्रमों में भोजन वितरण, गैर-चिकित्सीय देखभाल, परिसर रखरखाव और अन्य समाजोपयोगी कार्य कराए जा सकेंगे. नीति में सेवा कार्यों को बैच प्रणाली के माध्यम से संचालित करने का प्रावधान किया गया है. नगर निगम से जुड़े कार्य सामान्यतः 10 व्यक्तियों के बैच में, जबकि वृद्धाश्रम एवं अन्य संस्थानों में 3 से 5 व्यक्तियों के छोटे समूहों में कराए जाएंगे. प्रत्येक आदेश में संबंधित व्यक्ति का नाम, कार्यस्थल, प्रतिदिन कार्य के घंटे, प्रति सप्ताह कार्य दिवस तथा कुल अवधि का स्पष्ट उल्लेख होगा. कार्य पूर्ण होने पर पर्यवेक्षण अधिकारी द्वारा प्रमाणन किया जाएगा.



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ड्रेस कोड अनिवार्य


योजना के तहत सामुदायिक सेवा करने वाले व्यक्तियों के लिए मानकीकृत जैकेट और कैप पहनना अनिवार्य होगा, ताकि कार्य की पहचान और पारदर्शिता बनी रहे. प्रारंभिक चरण में 100 जैकेट और 100 कैप उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है. इनके निर्गमन और वापसी का रिकॉर्ड भरण-पोषण अधिकरण द्वारा रखा जाएगा तथा क्षति या गुम होने की स्थिति में निर्धारित अर्थदंड का भी प्रावधान किया गया है. प्रशासन का मानना है कि ‘काशी सेवा–पितृ सेवा’ मॉडल न केवल वरिष्ठ नागरिकों के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता की भावना को भी मजबूत करेगा.

नरहरि जयंती पर स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान ने किया निःशुल्क फलाहारी प्रसाद वितरण
नरहरि जयंती पर स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान ने किया निःशुल्क फलाहारी प्रसाद वितरण
वाराणसी. संत शिरोमणि नरहरि जी के जन्मोत्सव के अवसर पर सोमवार को स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान के महिला प्रकोष्ठ की ओर से निःशुल्क फलाहारी प्रसाद वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गोविंदपुरा मोड़ चौराहे पर हुए आयोजन में श्रद्धालुओं, राहगीरों और स्थानीय लोगों को प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया।फलाहारी प्रसाद में साबूदाना, आलू, फल और अन्य व्रत सामग्री शामिल रही। आयोजन के दौरान लोगों को प्रसाद वितरित करने के साथ संत नरहरि महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। सेवा कार्य में महिला प्रकोष्ठ के सदस्यों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ सेवा भावना भी देखने को मिली।ALSO READ : लंबित प्रवेश प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग को लेकर छात्रों ने बीएचयू प्रशासन को सौंपा ज्ञापनकार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष सरिता सर्राफ माधवी मिश्रा, शिखा शर्मा, प्रेमासेठ, सुनीता सोनी, कनक वर्मा, संगीता, सुनीता, विभा किरण वर्मा, सुनीता बेबी, श्रवण सेठ, विशाल सेठ, अरविंद सेठ, रवि सर्राफ, ईश्वर चंद वर्मा, कमल सेठ, विष्णुदयाल सेठ, रॉनिक वर्मा, आनंद वर्मा, संजय सर्राफ, सुनील सेठ, मनु सेठ, तन्नू सेठ और विवेक समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
लंबित प्रवेश प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग को लेकर छात्रों ने बीएचयू प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
लंबित प्रवेश प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग को लेकर छात्रों ने बीएचयू प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी. काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के छात्रों ने पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया में हो रहे विलंब को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने सत्र 2025-26 के कई पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की प्रवेश एवं काउंसलिंग प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं होने पर चिंता जताई। उनका कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया लंबित होने से विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है।छात्रों ने कुलसचिव को सौंपे ज्ञापन में मांग की कि सत्र 2025-26 की लंबित प्रवेश और काउंसलिंग प्रक्रिया तत्काल पूरी कर इसकी आधिकारिक सूचना जारी की जाए। साथ ही सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया भी बिना विलंब समयबद्ध तरीके से शुरू करने की मांग की गई।छात्रों ने नियमित पाठ्यक्रमों की तर्ज पर पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में बीएचयू से परास्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थियों को वरीयता देने और उनके लिए सीटें आरक्षित करने की भी मांग रखी।ALSO READ : जॉय ऑफ फ्रीडम’ प्रदर्शनी में तस्वीरों में दिखे आजादी के विविध रंगज्ञापन प्राप्त करने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुना। प्रशासन की ओर से छात्रहित को ध्यान में रखते हुए मामले का शीघ्र और सकारात्मक निस्तारण करने का आश्वासन दिया गया।छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि निर्धारित समयसीमा में प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो वे आगे आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे। ज्ञापन देने वालों में आशुतोष कुमार शुक्ला, अमन मौर्या, विभांशु, अविनाश, चंदू, अभिषेक और आकाश सिंह शामिल रहे।
‘जॉय ऑफ फ्रीडम’ प्रदर्शनी में तस्वीरों में दिखे आजादी के विविध रंग
‘जॉय ऑफ फ्रीडम’ प्रदर्शनी में तस्वीरों में दिखे आजादी के विविध रंग
वाराणसी. आजादी की भावना और उसके विविध आयामों को तस्वीरों के जरिए अभिव्यक्त करते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सिटी डेलिगेसी स्थित कलासूत्र आर्ट स्टूडियो एंड गैलरी में सोमवार को ‘जॉय ऑफ फ्रीडम’ फोटोग्राफी प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रदर्शनी में बीएचयू के विद्यार्थियों ने फोटोग्राफी के माध्यम से आजादी को अपने-अपने नजरिए से प्रस्तुत किया है।प्रदर्शनी के लिए 130 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 65 विद्यार्थियों की तस्वीरों का चयन किया गया। प्रदर्शित तस्वीरों में आजादी के साथ भारतीय जीवन, संस्कृति, प्रकृति, समाज और मानवीय संवेदनाओं के विविध पहलुओं को रचनात्मक ढंग से उकेरा गया है। तस्वीरें आजादी को देखने और समझने के अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं।प्रदर्शनी में पूर्व में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के 10 सर्वश्रेष्ठ चयनित चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया है। इन चित्रों में स्वतंत्रता की भावना और विद्यार्थियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न रंग देखने को मिलते हैं।प्रदर्शनी का उद्घाटन बीएचयू के दृश्य कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. उत्तमा दीक्षित ने किया। उन्होंने प्रदर्शनी की थीम की सराहना करते हुए विद्यार्थियों की रचनात्मकता की प्रशंसा की। प्रसिद्ध फोटोग्राफर मनीष खत्री मुख्य अतिथि और छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।ALSO READ : भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री जगदीश पटेल का काशी में भव्य स्वागत, बाबा विश्वनाथ का लिया आशीर्वादइस दौरान अतिथियों ने प्रदर्शित तस्वीरों का अवलोकन किया और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। प्रो. रंजन कुमार सिंह और मनीष खत्री ने विद्यार्थियों की प्रतिभा को सामने लाने वाली सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। डॉ. सुनील चौधरी और डॉ. (मेजर) रुबीर समेत अन्य निर्णायकों ने फोटोग्राफ का मूल्यांकन किया।सिटी डेलिगेसीज के वार्डन प्रो. ललित मोहन अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का समन्वय नॉर्थ डेलिगेसी, सिटी डेलिगेसीज के वार्डन डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और कला प्रेमी मौजूद रहे।‘जॉय ऑफ फ्रीडम’ प्रदर्शनी 24 से 31 अगस्त 2026 तक आयोजित की जा रही है। दर्शक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक कलासूत्र आर्ट स्टूडियो एंड गैलरी में प्रदर्शनी देख सकते हैं।