‘काशी सेवा–पितृ सेवा’ योजना, वरिष्ठ नागरिकों की सेवा से जुड़ेगा सामुदायिक दायित्व...

वाराणसी : काशी में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘काशी सेवा–पितृ सेवा’ नामक सामुदायिक सेवा क्रियान्वयन तंत्र की नीति रूपरेखा तैयार की गई है. यह व्यवस्था वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम-2007 के तहत संचालित होगी. इसका उद्देश्य अधिनियम के अंतर्गत पारित आदेशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ समाजोपयोगी और सुधारात्मक व्यवस्था विकसित करना है. यह जानकारी एसडीएसम सदर नितिन सिंह ने दी.

विभागों को सौंपी जिम्मेदारी
बताया कि नीति के अनुसार, सामुदायिक सेवा दंडात्मक नहीं बल्कि सुधारात्मक, व्यावहारिक और गरिमापूर्ण स्वरूप में कराई जाएगी. इसके तहत पर्यवेक्षित अनुशासन के साथ सार्वजनिक उपयोगिता एवं कल्याणकारी गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी. इस योजना के क्रियान्वयन का पर्यवेक्षण जिलाधिकारी, पीठासीन अधिकारी एवं भरण-पोषण अधिकरण करेंगे. नगर निगम अपने जोनल अधिकारियों के माध्यम से नगर एवं सार्वजनिक उपयोगिता से जुड़े कार्यों का संचालन करेगा, जबकि जिला समाज कल्याण विभाग वृद्धाश्रमों एवं अन्य कल्याणकारी संस्थाओं में गतिविधियों का समन्वय करेगा. योजना में नगर निगम के विभिन्न जोन, स्वच्छता प्रभाग, पार्क एवं उद्यान विभाग, वृद्धाश्रम, धर्मशालाएं, वरिष्ठ नागरिक कल्याण संस्थाएं तथा अन्य अधिसूचित सार्वजनिक संस्थाओं को सहभागी बनाया जाएगा.
सामुदायिक सेवा के अंतर्गत सार्वजनिक सड़कों एवं पार्कों की सफाई, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, अपशिष्ट पृथक्करण, नागरिक जागरूकता अभियान, वृद्धाश्रमों में भोजन वितरण, गैर-चिकित्सीय देखभाल, परिसर रखरखाव और अन्य समाजोपयोगी कार्य कराए जा सकेंगे. नीति में सेवा कार्यों को बैच प्रणाली के माध्यम से संचालित करने का प्रावधान किया गया है. नगर निगम से जुड़े कार्य सामान्यतः 10 व्यक्तियों के बैच में, जबकि वृद्धाश्रम एवं अन्य संस्थानों में 3 से 5 व्यक्तियों के छोटे समूहों में कराए जाएंगे. प्रत्येक आदेश में संबंधित व्यक्ति का नाम, कार्यस्थल, प्रतिदिन कार्य के घंटे, प्रति सप्ताह कार्य दिवस तथा कुल अवधि का स्पष्ट उल्लेख होगा. कार्य पूर्ण होने पर पर्यवेक्षण अधिकारी द्वारा प्रमाणन किया जाएगा.
ALSO READ:ट्रांसफार्मर पोल में उतरे करंट की चपेट में आने से गाय की मौत, लापरवाही का आरोप...
ड्रेस कोड अनिवार्य
योजना के तहत सामुदायिक सेवा करने वाले व्यक्तियों के लिए मानकीकृत जैकेट और कैप पहनना अनिवार्य होगा, ताकि कार्य की पहचान और पारदर्शिता बनी रहे. प्रारंभिक चरण में 100 जैकेट और 100 कैप उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है. इनके निर्गमन और वापसी का रिकॉर्ड भरण-पोषण अधिकरण द्वारा रखा जाएगा तथा क्षति या गुम होने की स्थिति में निर्धारित अर्थदंड का भी प्रावधान किया गया है. प्रशासन का मानना है कि ‘काशी सेवा–पितृ सेवा’ मॉडल न केवल वरिष्ठ नागरिकों के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता की भावना को भी मजबूत करेगा.



