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काशी विद्यापीठ दीक्षांत : देशभक्ति गान पर राज्‍यपाल भावुक, जंतर मंतर आंदोलन को लेकर कही ये बात...

काशी विद्यापीठ दीक्षांत : देशभक्ति गान पर राज्‍यपाल भावुक, जंतर मंतर आंदोलन को लेकर कही ये बात...
Jul 28, 2026, 08:10 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में हुआ. समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया. इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों से आए बच्चों का देशभक्ति गीत सुनने के बाद राज्‍यपाल भावुक हो गईं. उन्‍होंने जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को गलत बताते हुए कहा कि नेतृत्वकर्ता सही होना चाहिए. राज्‍यपाल ने कहा कि आपने देखा अभी जंतर मंतर पर आप जैसे ही लोग थे क्या क्या कह रहे थे. आज इन बच्चों ने मेरी आंखें खोल दी. जंतर-मंतर पर जो हुआ, यह हमारे संस्कार नहीं हैं. हमें देश के नेतृत्वकर्ता के रूप में होना चाहिए और उसी की जरूरत है.

MGKVP


राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 53 मेधावियों को 82 पदक दिए. इसके अलावा विवि और महाविद्यालयों के 63184 विद्यार्थियों को उपाधियां भी दी गईं. इस दौरान मेधावियों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी. देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई श्रीधर राव को उनके समाज में किए गए बेहतर सेवा कार्य के लिए मानद डीलिट की उपाधि प्रदान की गई. समारोह का ऑनलाइन प्रसारण विद्यापीठ की वेबसाइट से किया गया. इस वर्ष का दीक्षांत समारोह "विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला" विषय पर आयोजित किया गया. समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की जबकि मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी, सीएमडी, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई रहे. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. पदक पाने वाले मेधावियों ने जमकर सेल्फीबाजी की.

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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्‍यागी ने मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल तथा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर है. कहा कि इस वर्ष के दीक्षांत समारोह का विषय "एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत-2047 की आधारशिला" है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.


कहा कि महात्मा गांधी की प्रेरणा से 105 वर्ष पूर्व स्थापित यह ऐतिहासिक विश्वविद्यालय शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के अपने उद्देश्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है. कुलाधिपति के मार्गदर्शन और नेतृत्व से विश्वविद्यालय को लगातार नई दिशा और प्रेरणा मिलती रही है व उनके अध्यक्षीय आशीर्वचनों से विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय परिवार को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्राप्त होगी. काशी विद्यापीठ में नए पाठ्यक्रमों, शोध और डिजिटल कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, डिजिटल और अवसंरचनात्मक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान ने बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में एमए इन हिंदू स्टडीज जैसे नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं. वहीं, शोध विकास संस्थान के माध्यम से एप्लाइड एआई एवं शोध विकास से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित अध्ययन को विशेष रूप से शामिल किया गया है.

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कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के समग्र पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूल लागू किए जा चुके हैं. इससे प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्र सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ी है. साथ ही प्रशासन और शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के तहत परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है. काशी विद्यापीठ उत्तर प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है. इस केंद्र के माध्यम से शिक्षकों के क्षमता संवर्धन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं, शोध परियोजनाएं और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. छात्रावासों के उन्नयन, परिसर विकास और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.


वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में हुआ. समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया. इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों से आए बच्चों का देशभक्ति गीत सुनने के बाद राज्‍यपाल भावुक हो गईं. उन्‍होंने जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को गलत बताते हुए कहा कि नेतृत्वकर्ता सही होना चाहिए. राज्‍यपाल ने कहा कि आपने देखा अभी जंतर मंतर पर आप जैसे ही लोग थे क्या क्या कह रहे थे. आज इन बच्चों ने मेरी आंखें खोल दी. जंतर-मंतर पर जो हुआ, यह हमारे संस्कार नहीं हैं. हमें देश के नेतृत्वकर्ता के रूप में होना चाहिए और उसी की जरूरत है.


राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 53 मेधावियों को 82 पदक दिए. इसके अलावा विवि और महाविद्यालयों के 63184 विद्यार्थियों को उपाधियां भी दी गईं. इस दौरान मेधावियों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी. देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई श्रीधर राव को उनके समाज में किए गए बेहतर सेवा कार्य के लिए मानद डीलिट की उपाधि प्रदान की गई. समारोह का ऑनलाइन प्रसारण विद्यापीठ की वेबसाइट से किया गया. इस वर्ष का दीक्षांत समारोह "विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला" विषय पर आयोजित किया गया. समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की जबकि मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी, सीएमडी, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई रहे. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. पदक पाने वाले मेधावियों ने जमकर सेल्फीबाजी की.


महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्‍यागी ने मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल तथा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर है. कहा कि इस वर्ष के दीक्षांत समारोह का विषय "एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत-2047 की आधारशिला" है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.


कहा कि महात्मा गांधी की प्रेरणा से 105 वर्ष पूर्व स्थापित यह ऐतिहासिक विश्वविद्यालय शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के अपने उद्देश्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है. कुलाधिपति के मार्गदर्शन और नेतृत्व से विश्वविद्यालय को लगातार नई दिशा और प्रेरणा मिलती रही है व उनके अध्यक्षीय आशीर्वचनों से विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय परिवार को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्राप्त होगी. काशी विद्यापीठ में नए पाठ्यक्रमों, शोध और डिजिटल कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, डिजिटल और अवसंरचनात्मक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान ने बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में एमए इन हिंदू स्टडीज जैसे नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं. वहीं, शोध विकास संस्थान के माध्यम से एप्लाइड एआई एवं शोध विकास से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित अध्ययन को विशेष रूप से शामिल किया गया है.



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कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के समग्र पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूल लागू किए जा चुके हैं. इससे प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्र सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ी है. साथ ही प्रशासन और शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के तहत परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है. काशी विद्यापीठ उत्तर प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है. इस केंद्र के माध्यम से शिक्षकों के क्षमता संवर्धन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं, शोध परियोजनाएं और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. छात्रावासों के उन्नयन, परिसर विकास और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.

नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
वाराणसी: नशामुक्त भारत अभियान के तहत रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में ‘संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के जरिए युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त भारत का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।मालवीय भवन प्रांगण से कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल रैली को रवाना किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, NSS स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा न केवल स्वयं नशे से बचें, बल्कि अपने आसपास के लोगों और समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।also read: विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलकसाइकिल रैली में शामिल प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत का संदेश लोगों तक पहुंचाया और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। रैली के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम का समन्वयन काशी हिंदू विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीना ने किया। आयोजन में विश्वविद्यालय परिवार के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
वाराणसी: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आदिवासी परिवार, बरेका के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता की आकर्षक झलक देखने को मिली।शाम चार बजे बरेका सेंट जॉन स्कूल, गेट संख्या-2 से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कुंदन तिराहा और सूर्य सरोवर मार्ग होते हुए इंटर कॉलेज चौराहे पहुंची। यहां भगवान गौतम बुद्ध, जननायक बिरसा मुंडा और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद शोभायात्रा पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी पहुंचकर संपन्न हुई।शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए। रंग-बिरंगे परिधानों के साथ पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। रास्ते में स्थानीय लोगों ने भी शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में आदिवासी समाज की विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वक्ताओं ने आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपराओं और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।also read: श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपीलकार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजन में बरेका के अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिजन, आदिवासी महिला समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।इस अवसर पर सहायक कार्मिक अधिकारी (कर्मशाला) पीयूष मिंज, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार, आरपीएफ इंस्पेक्टर प्रमोद लकड़ा, पूर्व संयुक्त सचिव बरेका अमर सिंह, कालू मांझी सहित आदिवासी परिवार बरेका के सुदर्शन उरांव, दिलीप तिर्की, सुचित कुजूर, अजय कुमार तिर्की, संजीवन तिर्की और अजय तिग्गा मौजूद रहे। वहीं आदिवासी महिला समिति की सपना टोप्पो, तारा मैरी मिंज, प्रेमा लिली टोप्पो, अनुपमा और बंदना बारला सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
वाराणसी: श्रावण माह में रोहनिया क्षेत्र स्थित भास्करा पोखरा में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए पुलिस की ओर से लगातार जागरूक किया जा रहा है।एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने भास्करा पोखरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे निर्धारित और सुरक्षित स्थान पर ही स्नान करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु किसी भी स्थिति में गहरे पानी में न जाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी न करें।also read: आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडीएसीपी ने खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें और स्नान के दौरान उन पर लगातार नजर बनाए रखें। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।पुलिस प्रशासन की ओर से श्रावण माह के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें और धार्मिक आस्था के साथ अपनी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक सहयोग और सतर्कता से ही श्रावण माह के आयोजनों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।