काशी विद्यापीठ दीक्षांत : देशभक्ति गान पर राज्यपाल भावुक, जंतर मंतर आंदोलन को लेकर कही ये बात...

वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में हुआ. समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया. इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों से आए बच्चों का देशभक्ति गीत सुनने के बाद राज्यपाल भावुक हो गईं. उन्होंने जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को गलत बताते हुए कहा कि नेतृत्वकर्ता सही होना चाहिए. राज्यपाल ने कहा कि आपने देखा अभी जंतर मंतर पर आप जैसे ही लोग थे क्या क्या कह रहे थे. आज इन बच्चों ने मेरी आंखें खोल दी. जंतर-मंतर पर जो हुआ, यह हमारे संस्कार नहीं हैं. हमें देश के नेतृत्वकर्ता के रूप में होना चाहिए और उसी की जरूरत है.

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 53 मेधावियों को 82 पदक दिए. इसके अलावा विवि और महाविद्यालयों के 63184 विद्यार्थियों को उपाधियां भी दी गईं. इस दौरान मेधावियों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी. देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई श्रीधर राव को उनके समाज में किए गए बेहतर सेवा कार्य के लिए मानद डीलिट की उपाधि प्रदान की गई. समारोह का ऑनलाइन प्रसारण विद्यापीठ की वेबसाइट से किया गया. इस वर्ष का दीक्षांत समारोह "विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला" विषय पर आयोजित किया गया. समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की जबकि मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी, सीएमडी, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई रहे. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. पदक पाने वाले मेधावियों ने जमकर सेल्फीबाजी की.

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल तथा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर है. कहा कि इस वर्ष के दीक्षांत समारोह का विषय "एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत-2047 की आधारशिला" है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.
कहा कि महात्मा गांधी की प्रेरणा से 105 वर्ष पूर्व स्थापित यह ऐतिहासिक विश्वविद्यालय शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के अपने उद्देश्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है. कुलाधिपति के मार्गदर्शन और नेतृत्व से विश्वविद्यालय को लगातार नई दिशा और प्रेरणा मिलती रही है व उनके अध्यक्षीय आशीर्वचनों से विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय परिवार को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्राप्त होगी. काशी विद्यापीठ में नए पाठ्यक्रमों, शोध और डिजिटल कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, डिजिटल और अवसंरचनात्मक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान ने बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में एमए इन हिंदू स्टडीज जैसे नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं. वहीं, शोध विकास संस्थान के माध्यम से एप्लाइड एआई एवं शोध विकास से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित अध्ययन को विशेष रूप से शामिल किया गया है.

कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के समग्र पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूल लागू किए जा चुके हैं. इससे प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्र सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ी है. साथ ही प्रशासन और शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के तहत परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है. काशी विद्यापीठ उत्तर प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है. इस केंद्र के माध्यम से शिक्षकों के क्षमता संवर्धन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं, शोध परियोजनाएं और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. छात्रावासों के उन्नयन, परिसर विकास और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.
वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में हुआ. समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया. इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों से आए बच्चों का देशभक्ति गीत सुनने के बाद राज्यपाल भावुक हो गईं. उन्होंने जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को गलत बताते हुए कहा कि नेतृत्वकर्ता सही होना चाहिए. राज्यपाल ने कहा कि आपने देखा अभी जंतर मंतर पर आप जैसे ही लोग थे क्या क्या कह रहे थे. आज इन बच्चों ने मेरी आंखें खोल दी. जंतर-मंतर पर जो हुआ, यह हमारे संस्कार नहीं हैं. हमें देश के नेतृत्वकर्ता के रूप में होना चाहिए और उसी की जरूरत है.
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 53 मेधावियों को 82 पदक दिए. इसके अलावा विवि और महाविद्यालयों के 63184 विद्यार्थियों को उपाधियां भी दी गईं. इस दौरान मेधावियों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी. देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई श्रीधर राव को उनके समाज में किए गए बेहतर सेवा कार्य के लिए मानद डीलिट की उपाधि प्रदान की गई. समारोह का ऑनलाइन प्रसारण विद्यापीठ की वेबसाइट से किया गया. इस वर्ष का दीक्षांत समारोह "विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला" विषय पर आयोजित किया गया. समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की जबकि मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी, सीएमडी, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई रहे. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. पदक पाने वाले मेधावियों ने जमकर सेल्फीबाजी की.
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल तथा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर है. कहा कि इस वर्ष के दीक्षांत समारोह का विषय "एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत-2047 की आधारशिला" है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.
कहा कि महात्मा गांधी की प्रेरणा से 105 वर्ष पूर्व स्थापित यह ऐतिहासिक विश्वविद्यालय शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के अपने उद्देश्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है. कुलाधिपति के मार्गदर्शन और नेतृत्व से विश्वविद्यालय को लगातार नई दिशा और प्रेरणा मिलती रही है व उनके अध्यक्षीय आशीर्वचनों से विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय परिवार को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्राप्त होगी. काशी विद्यापीठ में नए पाठ्यक्रमों, शोध और डिजिटल कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, डिजिटल और अवसंरचनात्मक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान ने बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में एमए इन हिंदू स्टडीज जैसे नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं. वहीं, शोध विकास संस्थान के माध्यम से एप्लाइड एआई एवं शोध विकास से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित अध्ययन को विशेष रूप से शामिल किया गया है.
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कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के समग्र पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूल लागू किए जा चुके हैं. इससे प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्र सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ी है. साथ ही प्रशासन और शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के तहत परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है. काशी विद्यापीठ उत्तर प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है. इस केंद्र के माध्यम से शिक्षकों के क्षमता संवर्धन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं, शोध परियोजनाएं और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. छात्रावासों के उन्नयन, परिसर विकास और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.



