‘काशिका–रंग और राग’ से गूंजा काशी का सांस्कृतिक वैभव, राम की शक्तिपूजा ने मोहा मन

वाराणसी : काशी की शाश्वत सांस्कृतिक परंपरा, संगीत, कला और आध्यात्मिक चेतना को नई पीढ़ी एवं देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘काशिका–रंग और राग’ नियमित सांस्कृतिक उत्सव का रविवार को शुभारंभ हुआ। टाउनहॉल स्थित अल्को प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में काशी की साहित्यिक, नाट्य और शास्त्रीय संगीत परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कालजयी काव्यकृति ‘राम की शक्तिपूजा’ पर आधारित एकाग्र नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। प्रस्तुति का निर्देशन व्योमेश शुक्ल ने किया। नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से साहित्य, रंगमंच और काशी की सांस्कृतिक चेतना को प्रभावी ढंग से मंच पर उतारा गया।
इसके पश्चात पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र और स्वरांश मिश्र ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति देकर वातावरण को सुरमय कर दिया। गायन में संवादिनी पर पंडित धर्मनाथ मिश्र और तबले पर राजेश मिश्र ने संगत की। शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति ने श्रोताओं को काशी की समृद्ध संगीत परंपरा से रूबरू कराया।
कार्यक्रम में महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल अतिथि के रूप में मौजूद रहे। महापौर ने कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला, संगीत और आध्यात्मिक चेतना की जीवंत पहचान है। ‘काशिका–रंग और राग’ जैसे आयोजन काशी की समृद्ध विरासत को जन-जन तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
ALSO READ: चाय स्टॉल में घुसकर मारपीट, लूट का आरोप दो दिन पहले दी थी दुकान चलाने के लिए रुपये देने की धमकी
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने कहा कि नगर निगम काशी की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। ऐसे आयोजन काशी की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करने में सहायक होंगे।
आयोजकों के अनुसार, जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद, नगर निगम वाराणसी और नागरी प्रचारिणी सभा के संयुक्त तत्वावधान में शुरू किया गया यह उत्सव काशी की कला, साहित्य और संगीत परंपरा को नियमित मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में कलाकारों, संस्कृति प्रेमियों और गणमान्य लोगों ने उत्सव की सराहना की। संचालन नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ला ने किया।



