वाराणसी में वकीलों का डीएम पोर्टिको के पास विरोध प्रदर्शन, उठाई यह मांग

वाराणसी : निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर अधिवक्ताओं व जनसंगठनों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. वाराणसी में कलेक्ट्रेट स्थित डीएम पोर्टिको के पास वकीलों ने हाथों में तख्तियां और बैनर-पोस्टर लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया तथा उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की.
अधिवक्ता विनोद शुक्ला के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में वकीलों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया. मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद शुक्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि साजिश के तहत देश भर के लगभग 13.5 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं. वकीलों का कहना था कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस पद पर बने रहेंगे, तब तक देश व प्रदेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव होना मुमकिन नहीं है. इसलिए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त का पद छोड़ना अनिवार्य हो गया है.
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उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
अधिवक्ताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराए जाने की जोरदार वकालत की. उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के नाम काटने के इस कृत्य में शामिल मुख्य चुनाव आयुक्त समेत सभी दोषी अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त वैधानिक व कानूनी कार्रवाई की जाए. प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली में संसद से निर्वाचन सदन तक निकाले गए विरोध मार्च और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख का खुला समर्थन किया. वकीलों ने कहा कि जब-जब भारतीय लोकतंत्र पर कोई आंच आई है, तब-तब देश के सजग नागरिकों और जननायकों ने सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ी है. वकीलों ने चेताया कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक उनका यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा. वकीलों ने अंत में कहा कि देश की जागरूक जनता अब इस चुनावी धांधली को समझ चुकी है और न्याय मिलने तक कचहरी से लेकर सड़क तक संघर्ष का सिलसिला जारी रहेगा.



