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महर्षि सुश्रुत: काशी के महान वैद्य जिन्होंने दुनिया को दिया शल्य चिकित्सा का ज्ञान...

Jul 03, 2026, 08:43 AM
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Posted By Niharika.dwivedi

वाराणसी : आज खुद को आधुनिक कहने वाली दुनिया ने जब सर्जरी का नाम भी नहीं सुना था तब काशी की धरती पर महर्षि सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा (सर्जरी) पर ग्रंथ की रचना कर दी. उसमें उल्लेखित चिकित्सा पद्धति इतनी बेहतर थीं कि उनका उपयोग आज भी किया जाता है. इसी वजह से महर्षि सुश्रुत को "शल्य चिकित्सा का जनक" कहा जाता है.


महर्षि सुश्रुत द्वारा रचित सुश्रुत संहिता चिकित्सा विज्ञान का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है. इसमें शरीर की बनावट, शल्य चिकित्सा की विभिन्न विधियों और सैकड़ों चिकित्सा उपकरणों का विस्तार से वर्णन मिलता है. इस ग्रंथ में नाक के पुनर्निर्माण (राइनोप्लास्टी) जैसी जटिल सर्जरी का भी उल्लेख है.


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बीएचयू के आयुर्वेद विभाग के प्रोफेसर लक्ष्मण सिंह बताते हैं कि 2800 साल पहले महर्षि सुश्रुत ने सुश्रुत संहिता की रचना की थी. इस ग्रंथ में केवल सर्जरी ही नहीं, बल्कि शरीर की रचना (एनाटामी), शरीर संरक्षण और आपरेशन की पूरी प्रक्रिया का भी विस्तार से वर्णन किया गया है. उन्होंने बताया कि महर्षि सुश्रुत के गुरु भगवान धन्वंतरि थे, जिनसे उन्होंने शल्य चिकित्सा का ज्ञान प्राप्त किया. सुश्रुत संहिता में शल्य चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया गया है. शल्य क्रिया के लिए सुश्रुत 125 तरह के उपकरणों का प्रयोग करते थे. सुश्रुत ने तीन सौ प्रकार की आपरेशन प्रक्रियाओं की खोज की. सुश्रुत ने कास्मेटिक सर्जरी में विशेष निपुणता हासिल कर ली थी. सुश्रुत नेत्र शल्य चिकित्सा भी करते थे. सुश्रुतसंहिता में मोतियाबिंद के ओपरेशन करने की विधि को विस्तार से बताया गया है. उन्हें शल्य क्रिया द्वारा प्रसव कराने का भी ज्ञान था. सुश्रुत को टूटी हुई हड्डियों का पता लगाने और उनको जोडऩे में विशेषज्ञता प्राप्त थी. शल्य क्रिया के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए वे मद्यपान या विशेष औषधियां देते थे। मद्य संज्ञाहरण का कार्य करता था। इसलिए सुश्रुत को संज्ञाहरण का पितामह भी कहा जाता है. इसके अतिरिक्त सुश्रुत को मधुमेह व मोटापे के रोग की भी विशेष जानकारी थी. इन्होंने शल्य चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेद के अन्य पक्षों जैसे शरीर सरंचना, काय चिकित्सा, बाल रोग, स्त्री रोग, मनोरोग आदि की जानकारी भी दी.


प्रो. लक्ष्मण सिंह ने बताया कि आयुर्वेद में उपचार की दो प्रमुख पद्धतियां बताई गई हैं. आचार्य चरक ने दवाओं के माध्यम से चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाया, जबकि आचार्य सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा को वैज्ञानिक रूप दिया. उस समय जब दुनिया में सर्जरी की शुरुआत भी नहीं हुई थी, तब उन्होंने आपरेशन की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित किया. उन्होंने शल्य चिकित्सा को पूर्वकर्म, प्रधानकर्म और पश्चातकर्म जैसे तीन चरणों में बांटा. पूर्वकर्म में मरीज को आपरेशन के लिए तैयार किया जाता था, प्रधानकर्म में शल्य क्रिया की जाती थी और पश्चातकर्म में मरीज की देखभाल की जाती थी. प्रोफेसर लक्ष्मण सिंह के अनुसार आधुनिक सर्जरी की प्रक्रिया भी काफी हद तक इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित है.


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उन्होंने बताया कि महर्षि सुश्रुत ने घाव सिलने की कई तकनीकों का भी वर्णन किया है. उस समय धागों के अलावा पेड़ों के रेशों और विशेष परिस्थितियों में चींटियों की मदद से भी घाव बंद किए जाते थे. यह उस दौर की उन्नत शल्य चिकित्सा का प्रमाण है.


इतिहास विभाग के प्रोफेसर डा. विनोद जायसवाल बाताते हैं कि वाराणसी में चिकित्सा शिक्षा की समृद्ध परंपरा रही है. महर्षि सुश्रुत की रचना सुश्रुत संहिता इस बात का महत्वपूर्ण प्रमाण है कि उस समय भारत में चिकित्सा और सर्जरी का ज्ञान काफी विकसित था. उन्होंने बताया कि महर्षि सुश्रुत का जन्म वर्तमान उत्तर प्रदेश के कन्नौज में हुआ था. लेकिन उन्होंने अपनी कर्मभूमि काशी को बनाया. यहां उन्होंने हिंदू धर्म में चिकित्सा और आयुर्वेद का देवता माने जाने वाले भगवान धनवंतरि से चिकित्सा और शल्य विद्या का ज्ञान प्राप्त किया और आगे चलकर शल्य चिकित्सा को नई दिशा दी.


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महर्षि सुश्रुत का जीवन औषधि और चिकित्सा ज्ञान को समर्पित था. उन्होंने चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर शल्य चिकित्सा को व्यवस्थित रूप दिया, जिसका प्रभाव आज भी चिकित्सा विज्ञान में देखा जा सकता है.


महर्षि सुश्रुत ने सर्जरी के अलग-अलग प्रकार के बारे में भी बताया है जिसमे.


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छेदन: सटीक कट लगाकर शरीर को कम नुकसान पहुंचाकर प्रभावित अंग को निकालना.

भेदन: प्रभावित टिश्यू या बाहरी वस्तु (पस या रक्त) को बाहर निकालना.

लेखन: प्रभावित टिश्यू, गंदगी या बाहरी वस्तु को बाल की जड़ की तरफ खुरचकर उतारना.


वेधन: संक्रमित फ्लूइड या टॉक्सिन को छेद करके बाहर निकालना.

एष्यन: बाडी के अंदर के प्रभावित हिस्से या कैविटी का पता करने के लिए सर्जरी करना.

आह्यन: बाहरी या दूषित चीज से होने वाली बाधा को बाहर निकालना.


विश्राव्यन: सूजन कम करने या रिकवरी तेज करने के लिए तरल को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालना.


सीव्यन - धागे और सुई की मदद से खुले जख्म को बंद करना.


महर्षि सुश्रुत बताए गए सर्जिकल टूल


सर्जरी के लिए 101 औजारों को 6 प्रकार में किया विभाजित


स्वस्तिक यंत्र (चिमटी या क्रास आकार के 24 टूल)


संदंश यंत्र (पकड़ने वाली चिमटी वाले 2 टूल) ताल यंत्र (चम्मच या प्लेट के आकार वाले 2 टूल)


नाड़ी यंत्र (खोखली नलिकाओं वाले 20 टूल) शलाका यंत्र (छड़ के आकार वाले 28 टूल) उपयंत्र (रस्सी, धागे, कपड़े जैसे 25 टूल)


इसके अलावा उन्होंने 20 पैने औजार तैयार किये इसमे मुख्य हैं.


मण्डलाग्र (गोल सिरे वाला चाकू)


उत्पलपत्र (कमल की पंखुडी की तर पतला चाकू)


अर्धधार (एक तरफ धार वाला चाकू), नखशस्त्र (नाखून के आकार का चाकू)


मुद्रिका (अंगूठी के आकार का चाकू)


करपत्र (हड्डियों को काटने वाली आरी)


शरारिमूख (एक तरह की कैंची)

कंक्रीट मिक्सर की चपेट में आने से साइकिल सवार व्‍यक्ति की मौत, चालक वाहन समेत फरार
कंक्रीट मिक्सर की चपेट में आने से साइकिल सवार व्‍यक्ति की मौत, चालक वाहन समेत फरार
वाराणसी : जिले के चोलापुर थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में साइकिल सवार व्यक्ति की जान चली गई. घटना आजमगढ़ हाईवे स्थित दानगंज बाजार के पास हुई, जहां संतुलन बिगडने के कारण साइकिल से गिरने पर तेज रफ्तार कंक्रीट मिक्सर वाहन की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई. हादसे के समय साइकिल पर पीछे बैठा उसका रिश्तेदार समय रहते कूद गया, जिससे उसकी जान बच गई. दुर्घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया. पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है. हादसे की खबर लगते ही मृतक के परिवार में मातम पसर गया.पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान चोलापुर क्षेत्र के जैरामपुर सरैया निवासी नखरु राजभर उर्फ कल्लू (45 वर्ष) के रूप में हुई है. बताया गया कि वह अपने ससुराल पहाड़पुर गांव आए हुए थे. गुरुवार सुबह वह अपने एक रिश्तेदार के साथ साइकिल से दानगंज बाजार किसी जरूरी काम से जा रहे थे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बाजार के समीप पहुंचते ही किसी कारणवश साइकिल का संतुलन बिगड़ गया और दोनों सड़क पर गिर पड़े. पीछे बैठा रिश्तेदार तुरंत उछलकर सड़क से हट गया, लेकिन नखरु राजभर संभल नहीं सके और सड़क पर ही गिर गए. उसी दौरान वाराणसी की ओर से आजमगढ़ जा रहा कंक्रीट मिक्सर वाहन उनके ऊपर से गुजर गया. टक्कर और वाहन की चपेट में आने से उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई.ALSO READ: पंच सम्मेलन : नरेगा में बंदरबांट, वर्तमान योजना में ग्रामों के बुनियादी विकास पर जोरहादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई. स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी. सूचना के बाद चोलापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के बाद चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया. घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. फुटेज के आधार पर वाहन और उसके चालक की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं. मामले में आगे की जांच जारी है. मृतक नखरु राजभर अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य बताए जा रहे हैं. वह ठेला चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे. परिवार में उनकी पत्नी पुम्मी देवी, तीन बेटे और एक बेटी हैं. हादसे की खबर मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया.
पंच सम्मेलन : नरेगा में बंदरबांट, वर्तमान योजना में ग्रामों के बुनियादी विकास पर जोर
पंच सम्मेलन : नरेगा में बंदरबांट, वर्तमान योजना में ग्रामों के बुनियादी विकास पर जोर
वाराणसी : ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार तथा ग्राम्य विकास विभाग उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को रूद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में विकसित भारत जी राम जी अधिनियम, 2025 के तहत पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया. पंच सम्मेलन को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सम्बोधित करते हुए कहा कि पंच सम्मेलन में चार राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार तथा झारखंड के पंचायत प्रमुखों को शामिल किया गया है. उन्होंने कहा आने वाला समय भारत का है तथा उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत का है. विकसित भारत जी राम जी कानून को बनाने हेतु जब संसद में प्रस्ताव रखा गया तो विपक्ष ने विरोध जरूर किया लेकिन जब उन्होंने इसके उद्देश्यों को जान लिया तब उन्होंने सांकेतिक विरोध किया. ग्रामीणों के स्वरूप को बदलने में पुरानी नरेगा योजना में केवल पैसे की बंदरबांट थी लेकिन वर्तमान योजना में ग्रामों के बुनियादी विकास समेत विकसित पंचायत पर कार्य किया गया है.दवाई, कमाई तथा पढ़ाई की चिंताइस योजना में दवाई, कमाई तथा पढ़ाई की भविष्य की चिंताओं को सम्मिलित किया गया है. इस योजना में पीएम गतिशक्ति को शामिल करते हुए कार्यों के डुप्लीकेसी को रोका गया है. सरकार का लगातार ध्यान विकसित भारत के तरफ है. उन्होंने सभी से लक्ष्य तय करके कार्य करने हेतु प्रेरित किया. कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने प्रयासों से 25 करोड़ से ज्यादे लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया. उन्होंने पिछली सरकारों के बिना लक्ष्य के विजन को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जितने पीएम आवास वर्तमान सरकार में बने उतने आज तक पिछली सरकारों में कभी नहीं बने. आज भूखे पेट कोई नहीं सोता सभी को अन्न योजना से लाभान्वित किया गया है.यूपी में महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना करेगी सशक्‍तइलाज के अभाव में किसी को जीवन नहीं खोना पड़ेगा, आयुष्मान योजना से इलाज की व्यवस्था की गई है. उन्होंने सभी पंचायत प्रमुखों से कहा कि आप ऐसा कार्य करें की जिसके ऊपर आप हाथ रखें वहीं प्रधान बने जो की केवल आपके किए कार्यों से तय होगा. उत्तर प्रदेश में एक बड़ी योजना महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना शुरू करने जा रहे हैं. महिला सशक्तिकरण के तरफ हमारा लगातार ध्यान होना चाहिए ताकि आधी आबादी सशक्त हो. परिवारों का ही विकास विकसित भारत का विकास है. हमारा उद्देश्य लगातार जनता की सेवा करना रहा है. कार्य योजना पक्ष - विपक्ष सभी बैठकर बनाएं. 30 लाख से ग्रामों में समूह की फैक्ट्री बनाने का भी कार्य होगा. प्रशासनिक मद छह प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत किया गया है. गांवों के विकास का दूरगामी रोडमैप आप विकसित करें. गांव छोड़कर कोई शहर नहीं जाए हम इसपर लगातार कार्य करें.गांवों के विकास के लिए सरकार दृढ़ संकल्पितअनेकों योजनाएं गांवों के विकास को लाने हेतु सरकार दृढ़ संकल्पित है. ये सरकार न खाऊंगा न खाने दूंगा पर कार्य कर रही है. गांवों का सर्वांगीण विकास हो यही हमारा लक्ष्य है. उन्होंने वाराणसी में एलिवेटेड सड़कें बनाने हेतु कैबिनेट की मंजूरी एवं 25 हजार करोड़ की धनराशि आवंटित होने पर भी सभी को बधाई दी. उपमुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि विकसित भारत तभी संभव है जब विकसित उत्तर प्रदेश विकसित होगा. आज गुंडे उत्तर प्रदेश छोड़कर भाग चुके हैं. आज देश नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है, गरीबों के अन्याय को रोका गया. जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने को भी उन्होंने सरकार की उपलब्धियों में रेखांकित किया.जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास के अगले पच्चीस वर्षों का विकास शामिलकेंद्र सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यों पर भी सभी का ध्यान खींचा. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार का तीसरा सबसे बड़ा मंत्रालय ग्रामीण विकास है. जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास के अगले पच्चीस वर्षों के विकास को शामिल किया गया है. उन्होंने प्रधानों से मजबूत ग्रामीण विकास की नींव रखने की अपेक्षा की. उन्होंने मनरेगा योजना को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि नरेगा योजना के तहत प्रतिवर्ष एक ही गड्ढे को बार - बार न खोदें बल्कि वर्तमान योजना से मजबूत विकसित पंचायत के तरफ बढ़ें. हमारा यह सामूहिक प्रयास हो कि समूहों के रोजगार को मार्केट देने के तरफ कार्य करें. लगातार सरस मेलों का आयोजन होना चाहिए. वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल में 23 करोड़ बैंक खाते खोलने का कार्य किया है. पंद्रह साल पहले से वर्तमान काशी में अकल्पनीय, अतुलनीय, अविश्वस्नीय कार्य हुए हैं. विश्वनाथ कारीडोर बनने के बाद काशी की दिशा बदल गई है. काशी की पूरी व्यवस्था की बदलने का कार्य हुआ है. सड़कें, एयर कनेक्टिविटी भी उच्च स्तर पर विकसित हुए हैं.रोजगार की 100 दिन की गारंटी अब 125 दिनआयुक्त ग्राम्य विकास जी एस प्रियदर्शी ने कहा कि एक जुलाई 2026 को लागू किए गए कानून के तहत प्रथम पंच सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. इसके तहत पंचायत अध्यक्षों से सीधे वार्ता की जाएगी. उन्होंने बताया अब रोजगार की 100 दिन की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है जिसके तहत बुनियादी रोजगार को भी इसमें सम्मिलित किया गया है.संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास भारत सरकार सुश्री रोहिणी आर जी ने कहा कि देश के स्तर पर प्रथम सम्मेलन वाराणसी में आयोजित हो रहा है जिसमें मै सभी अतिथियों का स्वागत करती हूं. सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, बिहार तथा झारखंड से भारी संख्या में पंचायत प्रमुखों को शामिल किया गया है. विकसित भारत जी राम जी अधिनियम एक जुलाई से देश के 2.8 लाख ग्रामों में एक साथ लागू किया गया जिसमें ये प्रावधान किया गया कि श्रमिकों को एक दिन भी बिना रोजगार के न बैठना पड़े इसकी व्यवस्था इसमें की गई है. आगे जाकर पंचायत की यह जिम्मेदारी है कि हम पंचायत को विकसित बनाने के प्रावधान बनाएं. उन्होंने बताया कि पिछले दो सप्ताह में दो करोड़ से ज्यादे रोजगार सृजित किए गए हैं.ALSO READ: जमीन और मकान के नाम पर पुलिसकर्मियों से लाखों की धोखाधड़ी, मां और बेटों पर केस दर्जकार्यक्रम में प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश सरकार में उप मुख्यमंत्री एवं मंत्री ग्राम्य विकास केशव प्रसाद मौर्य, केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पूनम मौर्य, सदस्य विधान परिषद राय धर्मेंद्र सिंह, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास भारत सरकार सुश्री रोहिणी आर, आयुक्त ग्रामीण विकास विभाग उत्तर प्रदेश जी एस प्रियदर्शी, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार, डीसी एनआरएलएम पवन सिंह समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा भारी संख्या में पंचायत प्रमुख शामिल रहे.
जमीन और मकान के नाम पर पुलिसकर्मियों से लाखों की धोखाधड़ी, मां और बेटों पर केस दर्ज
जमीन और मकान के नाम पर पुलिसकर्मियों से लाखों की धोखाधड़ी, मां और बेटों पर केस दर्ज
वाराणसी : जमीन और मकान दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में मां और बेटों ने पुलिसकर्मियों को भी नहीं छोड़ा. पीडित पुलिसकर्मियों ने लालपुर-पांडेयपुर थाने में 20.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए हैं. पुलिस की शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है वह बेहद हेरान करने वाला है. आरोपी जमीन कारोबारियों ने पिछले 24 महीनों के भीतर 10 से ज्यादा पुलिसवालों से करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है. पुलिस सूत्रों का मानना है कि यदि पूरी कड़ियां जोड़ी जाएं, तो यह महाघोटाला 5 से 10 करोड़ रुपये के बीच पहुंच सकता है.लालपुर-पांडेयपुर पुलिस ने पीड़ितों की तहरीर पर मुख्य आरोपी और जमीन कारोबारी गौरव गुप्ता, उसके सगे भाई दीपक गुप्ता, मां कस्तूरी देवी (निवासी: अशोक विहार कॉलोनी) सहित अन्य सहयोगियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है. इस गिरोह के चंगुल में सिर्फ पुलिसवाले ही नहीं, बल्कि कचहरी के पेशकार और मुंशी भी फंस चुके हैं.ALSO READ: जीएसटी की डिप्‍टी कमिश्‍नर 50 हजार रश्वित लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, महिला दरोगा से उलझी...पर्यटक थाने में तैनात सिपाही विशाल कुमार ने आरोप लगाया कि साल 2024 में आरोपियों ने उन्हें एक मकान दिलाने के नाम पर 13 लाख रुपये हड़प लिए. लंबे समय बाद भी जब रजिस्ट्री नहीं हुई और विशाल ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी. पीड़ित की शिकायत पर मंगलवार को पुलिस ने मामला दर्ज किया. कैंट थाने में तैनात और मूल रूप से गोंडा के रहने वाले आरक्षी भवन कुमार ने भी साल 2024 में जमीन खरीदने के लिए गौरव गुप्ता से संपर्क किया था. आरोपियों ने झांसे में लेकर उनसे 7.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली. यह पहली बार नहीं है जब इस जालसाज परिवार पर केस दर्ज हुआ है. इससे पहले भी इनके खिलाफ शहर के अन्य थानों में मामले दर्ज हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और जल्द ही इन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.