बीएचयू के चिकित्सकों की बड़ी उपलब्धि, पहले आयुर्वेदिक N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल से डिमेंशिया उपचार पर नई उम्मीद...

वाराणसी : बीएचयू के चिकित्सक वैज्ञानिकों ने आयुर्वेद के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने विश्व का पहला प्रकाशित आयुर्वेदिक N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया है. यह अध्ययन डिमेंशिया की शुरुआती अवस्था माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (MCI) से पीड़ित एक मरीज पर किया गया.
N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल एक ऐसी वैज्ञानिक पद्धति है, जिसमें किसी दवा या उपचार के प्रभाव का परीक्षण केवल एक मरीज पर किया जाता है. इसमें मरीज स्वयं ही अपना नियंत्रण (कंट्रोल) होता है और अलग-अलग समय पर उपचार के प्रभाव का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है. आयुर्वेद जैसी व्यक्ति केंद्रित चिकित्सा पद्धति के मूल्यांकन के लिए इसे उपयोगी माना जा रहा है.

करीब 14 महीनों तक चले इस अध्ययन में आयुर्वेद की पारंपरिक औषधि 'कल्याणक घृत' का मूल्यांकन किया गया. बेयसियन सांख्यिकीय विश्लेषण के आधार पर मरीज की स्मृति, सोचने-समझने की क्षमता, दैनिक कार्य करने की क्षमता और अवसाद के लक्षणों में सुधार के संकेत मिले. शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह अध्ययन केवल एक मरीज पर आधारित है, इसलिए इसे सभी मरीजों पर समान रूप से लागू नहीं माना जा सकता. उन्होंने यह भी सलाह दी कि किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन केवल प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख और परामर्श में ही किया जाना चाहिए.
शोध के अनुसार, कल्याणक घृत आयुर्वेद का एक बहु-औषधीय योग है, जिसमें हरड़, आंवला, बहेड़ा, हल्दी, जटामांसी, देवदार, चंदन सहित कई औषधीय द्रव्यों का उपयोग किया जाता है. आयुर्वेद में इसे स्मृति, बुद्धि और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है.
यह अध्ययन बीएचयू के आयुर्वेद, चिकित्सा एवं विज्ञान संकायों के विशेषज्ञों के संयुक्त सहयोग से पूरा किया गया. शोध हाल ही में जर्नल ऑफ एथ्नोफार्माकोलॉजी में प्रकाशित हुआ है.
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शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में यदि ऐसे और N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल किए जाते हैं, तो आयुर्वेदिक उपचारों के वैज्ञानिक प्रमाण और अधिक मजबूत हो सकेंगे तथा व्यक्तिकेंद्रित चिकित्सा पद्धति को वैज्ञानिक आधार मिलेगा.



