रमना में प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क के संबंध में बैठक

वाराणसी। हथकरघा एवं वस्त्र विभाग, उत्तर प्रदेश विभाग द्वारा वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में दिनांक को 10 जनवरी, 2026 रमना, वाराणसी में प्रस्तावित सिल्क पार्क के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता हथकरघा एवं वस्त्रोधोग विभाग, उत्तर प्रदेश के आयुक्त एवं निदेशक, कानपुर द्वारा की गई। कार्यक्रम में वाराणसी मंडल के आयुक्त, जिलाधिकारी वाराणसी, संयुक्त आयुक्त हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग कानपुर, सहायक आयुक्त हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, संयुक्त आयुक्त उद्योग तथा विभिन्न वस्त्र संगठनों के प्रमुख एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान आयुक्त एवं निदेशक, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग ने सभी हितधारकों से संवाद किया तथा उनके द्वारा उठाए गए प्रश्नों एवं सुझावों का संतोषजनक उत्तर दिया। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी बात रखी।
भारतीय उद्योग संगठन (IIA) के प्रतिनिधि आर के चौधरी ने वस्त्र नीति-2022 से संबंधित लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया तथा लघु उद्योग प्राधिकरण की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में लगभग 97 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग हैं, जिनमें से 87 प्रतिशत सूक्ष्म इकाइयाँ हैं। स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधि राजेश भाटिया ने सिल्क पार्क में कॉरुगेटेड बॉक्स फैक्ट्री की स्थापना का सुझाव दिया ताकि उत्पादों की पैकेजिंग आकर्षक बनाई जा सके। बनारसी वस्त्रोद्योग संघ के प्रतिनिधि देवेंद्र मोहन पाठक ने वाराणसी में टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाने के लिए आभार व्यक्त किया। एस०एन०डी० के प्रतिनिधि भरत शाह ने शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया ताकि उद्योग शीघ्र प्रारंभ किया जा सके। पूर्वांचल उद्योग निर्यात संघ के प्रतिनिधि श्री अमिताभ ने अपने 25 वर्षों के निर्यात अनुभव के आधार पर सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया तथा हथकरघा एवं वस्त्र दोनों को समान रूप से शामिल किए जाने की मांग रखी।

बनारसी वस्त्रोद्योग संघ द्वारा एक PPT की प्रस्तुति की गई जिसमें विभिन्न मांगें और प्रश्न शामिल थे जैसे कि पार्क के प्रारंभ की समय-सीमा, भूमि आवंटन का आकार, शेड की ऊँचाई, बहुमंजिला भवन की अनुमति, भुगतान की प्रक्रिया, रोजगार लक्ष्य, उच्च गति वाली मशीनों की अनुमति, जीएसटी की व्यवस्था, सीएनजी उपलब्धता आदि। लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि श्री राजेश सिंह ने सिल्क स्टोरेज सुविधा एवं नकली धागे पर नियंत्रण का सुझाव दिया। सहकार भारती के प्रतिनिधि शैलेश सिंह ने नई पीढ़ी को हथकरघा उद्योग से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया तथा पार्क में जरी उद्योग, अनुसंधान एवं विकास केंद्र (R&D Centre) तथा प्राकृतिक रेशों के उपयोग की अनुशंसा की। हिंदू बुनकर कल्याण समिति के मनोज कुमार ने कढ़ाई इकाई स्थापित करने का सुझाव दिया।
बुनकर स्टूडियो के श्री यासीन अंसारी ने सिल्क उत्पादों में पॉलीस्टर के उपयोग पर प्रतिबंध एवं केवल प्राकृतिक यार्न (लिनन/कॉटन) के उपयोग का सुझाव दिया। उन्होंने प्रिंटिंग एवं कढ़ाई को मूल्य संवर्धन परियोजनाओं में सम्मिलित करने की अनुशंसा की। बनारसी वस्त्रोद्योग बुनकर संघ के राकेश कांत राय ने जिपर, बटन एवं संबद्ध उद्योगों को पार्क में शामिल करने, आवासीय व छात्रावास सुविधाएं, छोटे आकार की डाइंग इकाइयां तथा यार्न बैंक स्थापित करने की मांग की। होली वीव के प्रतिनिधि उमंग जी ने हथकरघा एवं वस्त्र दोनों को समान प्राथमिकता देने तथा पार्क से सरकारी क्रय सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। रिलायंस के प्रतिनिधि ने वस्त्र उत्पादन बढ़ाने व उसे परिधान निर्माण से जोड़ने तथा सिंगल विंडो सुविधा उपलब्ध कराने पर बल दिया। रीधी जी ने आधुनिक कपड़ों के उपयोग की अनुशंसा की।
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इस अवसर पर जिलाधिकारी वाराणसी सत्येंद्र कुमार द्वारा अवगत कराया गया कि विकास प्राधिकरण द्वारा जो जमीन अधिग्रहित की जाएगी उसमे से कुछ जमीन को परिवर्तित कर उद्योग हेतु उपलब्ध कराया जाएगा। रॉ मटेरियल बैंक एवं यार्न बैंक की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। निफ्ट एवं भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ रिसर्च एवं डेवलपमेंट का कार्य कार्य जाए। बुनकर सेवा केंद्र को उसी परिसर में स्थापित किया जाए जिससे बुनकरों को लाभ मिले साथ ही जरी एवं इंब्राइडरी उद्योग की स्थापना की जाए तथा प्रोसेसिंग यूनिट डाईंग यूनिट की भी स्थापना हो, टेक्सटाइल पार्क की ब्रांडिंग कराई जाय। सिल्क उत्पादों की प्रमाणीकरण के लिए सिल्क मार्क एवं जी०आई० टैग लगाएं जाए। बनारसी साड़ी के लिए एक ऐसा प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाय जहाँ उत्पादन एवं विपणन साथ-साथ हो रहा हो जिससे खरीदार को ओरिजन हैण्डलूम उत्पादो के प्रति आश्वश्त हो सके उनका हैण्डलूम पर विश्वास बना रहें और जो प्रमाणित हो। साथ ही प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री का बहुत बहुत धन्यवाद की प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्क में पहला वाराणसी जनपद में स्थापित होगा ।
मंडलायुक्त वाराणसी एस राजलिंगम ने भी अवगत कराया कि टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के सम्बन्ध में लगभग दो वर्ष पूर्व पीयूष गोयल कैबिनेट मंत्री भारत सरकार ने अपने विचार रखे थे की टेक्सटाइल पार्क की स्थापना वाराणसी में की जाय जिसके लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया था। बनारसी ब्राण्ड को प्रमोट किया जाय। टी०एफ०सी० में भी दरी उत्पादन का डेमो प्रदर्शित किया गया है उसी की भाँति बनारसी साड़ी का उत्पादन का डेमो किया जाये तथा साड़ी व्यापारियों से भी अनुरोध किया कि टी०एफ०सी० में अपनी दुकाने लगाकर प्रदर्शन एवं बिकी करें। आयुक्त एवं निदेशक, हथकरघा एवं वस्त्र विभाग, उत्तर प्रदेश कानपुर ने विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए हितधारकों को विभागीय सहयोग का आश्वासन दिया तथा टेक्निकल टेक्सटाइल की भी पालिसी से भी लाभान्वित कराया जाये। निट्रा द्वारा फिजीबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है तथा डी०पी०आर० भी 90 दिनों के भीतर तैयार होकर प्राप्त हो जायेगा लगभग 01 वर्ष में टेक्सटाइल पार्क को प्रारम्भ कर दिया जायेगा।
वाराणसी की खोई हुयी साख एवं विरासत को पुनः सवारा जायेगा तथा जिलाधिकारी एवं मण्डलायुक्त सहित समस्त उद्यमियों का धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद प्रस्ताव में पी०सी० ठाकुर, संयुक्त आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग द्वारा समस्त अधिकारियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद व्यक्त किया तथा अरुण कुमार कुरील, सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं उनके पूरी टीम को बैठक को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने हेतु धन्यवाद दिया।



