MoRTH और IIT वाराणसी के बीच साझेदारी हुई मजबूत, मंत्रालय के अधिकारियों ने की समीक्षा
Partnership between MoRTH and IIT Varanasi strengthened, reviewed by Ministry officials
वाराणसी: भारत की सड़क एवं राजमार्ग अवसंरचना को अधिक आधुनिक, सुरक्षित एवं सतत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), भारत सरकार के महानिदेशक (सड़क विकास) एवं विशेष सचिव विनय कुमार राजावत के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (BHU) वाराणसी का दौरा किया. यह दौरा मंत्रालय एवं संस्थान के बीच परिवहन अनुसंधान और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के क्षेत्र में गहराते सहयोग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है.

दौरे के दौरान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संस्थान के संकाय सदस्यों के बीच भारत के राजमार्ग क्षेत्र के भविष्य को लेकर विस्तृत तकनीकी चर्चा हुई. प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान में संचालित एवं पूर्ण हो चुकी विभिन्न शोध परियोजनाओं तथा मंत्रालय की प्राथमिकताओं से जुड़े नए शोध प्रस्तावों की समीक्षा की. विशेष सचिव विनय कुमार राजावत ने इन शोध कार्यों को देश के महत्वाकांक्षी राजमार्ग विस्तार एवं आधुनिकीकरण कार्यक्रमों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक बताया.
MoRTH चेयर प्रोफेसर प्रो. अंकित गुप्ता ने बताया कि IIT (BHU) में परिवहन एवं राजमार्ग अनुसंधान के अंतर्गत एलाइन्मेंट ऑप्टिमाइजेशन, सतत निर्माण तकनीक, उन्नत पेवमेंट डिजाइन, पर्यावरणीय पहलू, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (ITS), सड़क सुरक्षा विश्लेषण तथा लाइफ-साइकिल परफॉर्मेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है. संस्थान का शोध कार्य देश में विकसित किए जा रहे ग्रीनफील्ड एवं हाई-स्पीड कॉरिडोरों की योजना एवं क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है.
समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर
दौरे का एक प्रमुख आकर्षण IIT (BHU) वाराणसी और बिटुमेन फोरम के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर रहा. यह समझौता IIT (BHU) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा, अधिष्ठाता (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. राजेश कुमार, MoRTH चेयर प्रोफेसर प्रो. अंकित गुप्ता, अन्य वरिष्ठ संकाय सदस्यों तथा खिलेश श्रीवास्तव के प्रतिनिधित्व में MoRTH प्रतिनिधिमंडल,की उपस्थिति में संपन्न हुआ. यह समझौता बिटुमिनस मटेरियल्स एवं पेवमेंट इंजीनियरिंग के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को बढ़ावा देगा, जो उच्च गुणवत्ता एवं टिकाऊ राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान की उन्नत परिवहन अनुसंधान प्रयोगशालाओं का भी अवलोकन किया तथा पेवमेंट इंजीनियरिंग, राजमार्ग योजना, सतत परिवहन सामग्री, ITS अनुप्रयोगों एवं डेटा आधारित सड़क सुरक्षा प्रणालियों पर चल रहे शोध कार्यों की समीक्षा की. अधिकारियों ने संस्थान में हो रहे शोध कार्यों की गुणवत्ता, गहराई एवं नीति-निर्माण में उनकी उपयोगिता की सराहना करते हुए IIT (BHU) वाराणसी को देश के अग्रणी परिवहन अनुसंधान केंद्रों में से एक बताया.
इस अवसर पर प्रो. अंकित गुप्ता ने कहा कि IIT (BHU) और MoRTH के बीच यह सहयोग भारत के परिवहन क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत साझेदारियों में से एक बनने जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, स्वदेशी नवाचार एवं विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग समाधानों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सुरक्षित सड़कें, अधिक टिकाऊ पेवमेंट, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम एवं हरित राजमार्ग कॉरिडोर विकसित करना है.
प्रो. गुप्ता ने आगे बताया कि दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालिक सहयोग के लिए एक विस्तृत रोडमैप पर सहमति बनी है. इसके अंतर्गत ग्रीनफील्ड हाईवे एवं बिटुमिनस पेवमेंट टेक्नोलॉजी पर संयुक्त शोध परियोजनाएं, राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं हेतु परामर्श सेवाएं, निरंतर ज्ञान-विनिमय मंच, मंत्रालय के अधिकारियों एवं अभियंताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय दिशानिर्देशों एवं तकनीकी मानकों का संयुक्त विकास शामिल है.

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संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस अवसर पर भारत में सुरक्षित, स्मार्ट एवं सतत सड़क अवसंरचना के विकास के लिए MoRTH के साथ मिलकर कार्य करने की संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान हुई सार्थक चर्चाएं एवं संस्थागत समझौते IIT (BHU) और MoRTH के बीच सहयोग के एक नए एवं सशक्त अध्याय की शुरुआत हैं, जो भारतमाला परियोजना, पीएम गति शक्ति तथा राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रमों के तहत देश के सड़क अवसंरचना विकास में दीर्घकालिक योगदान देंगे.



