आईआईटी (बीएचयू) और मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के बीच एमओयू, तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान को मिलेगा नया आयाम

वाराणसी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) ने मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के साथ विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में आयोजित समारोह में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में यह समझौता संपन्न हुआ।
एमओयू पर आईआईटी (बीएचयू) की ओर से डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. राजेश कुमार तथा मध्य प्रदेश शासन की ओर से उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस समझौते के तहत मध्य प्रदेश के 30 उच्च शिक्षण संस्थानों को आईआईटी (बीएचयू) की शैक्षणिक विशेषज्ञता, अनुसंधान सुविधाओं और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ मिलेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
दोनों संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0, क्वांटम तकनीक, ड्रोन, स्मार्ट सिटी और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, कार्यशालाएं और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। विद्यार्थियों और शिक्षकों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा।
समझौते के तहत स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी (बीएचयू) के सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआईआईई) के माध्यम से इन्क्यूबेशन, पेटेंट, तकनीकी हस्तांतरण और प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण में सहयोग दिया जाएगा। साथ ही हरित ऊर्जा, हाइड्रोजन तकनीक, बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्मार्ट ग्रिड, नैनो प्रौद्योगिकी और जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान भी किया जाएगा।
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आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पत्रा ने कहा कि यह साझेदारी उच्च शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से विद्यार्थियों और शिक्षकों को नए अवसर मिलेंगे तथा विकसित भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी।
दोनों संस्थानों के बीच यह एमओयू प्रारंभिक रूप से पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा। इसके क्रियान्वयन की निगरानी और समीक्षा के लिए संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। इससे मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान और नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है।



