वाराणसी में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की निगरानी का विरोध, विपक्षी दलों ने पैदल मार्च कर सौंपा ज्ञापन
वाराणसी : राजनीतिक दलों एवं किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं और नेताओं की कथित व्यक्तिगत निगरानी तथा लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का विपक्षी दलों ने विरोध किया है. कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, भाकपा (माले), राष्ट्रीय जनता दल एवं फॉरवर्ड ब्लॉक सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च कर प्रदर्शन किया. इन दलों ने केंद्र एवं उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विरोध की आवाज को दबाने का आरोप लगाते हुए लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को घेरा.विभिन्न दलों के कार्यकर्ता वाराणसी कचहरी स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा के पास एकत्रित हुए. यहां से कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए पैदल कचहरी पहुंचे. प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति को अपराध नहीं माना जा सकता और सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए. पैदल मार्च के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने एसीएम को पत्रक सौंपकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की निगरानी तत्काल बंद करने तथा इस संबंध में पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की.वक्ताओं ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारें लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत कार्य कर रही हैं. सरकार से सवाल पूछने वाले विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान संगठनों से जुड़े लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों को अपनी बात रखने, सरकार की नीतियों का विरोध करने और शांतिपूर्ण आंदोलन करने का संवैधानिक अधिकार भी शामिल है.वक्ताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है. कार्यकर्ताओं के बैंक अकाउंट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वंश-वृक्ष, व्यवसाय एवं अन्य व्यक्तिगत जानकारियों के संबंध में जानकारी जुटाने के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायतों पर उन्होंने गंभीर चिंता जताई. नेताओं ने कहा कि किसी भी नागरिक की निजी जानकारी प्राप्त करने के लिए स्पष्ट कानूनी आधार, निर्धारित प्रक्रिया और जवाबदेही आवश्यक है. मौखिक आदेशों या अस्पष्ट निर्देशों के आधार पर व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करना नागरिकों के निजता के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े करता है.विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है. विपक्ष को दुश्मन समझकर उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाना लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है. उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में सरकार स्थायी नहीं होती, लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाएं स्थायी होती हैं.नेताओं ने कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, युवाओं के भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जनता जवाब मांग रही है. ऐसे जनसरोकार के सवालों का जवाब देने के बजाय यदि सरकार विरोध की आवाज उठाने वालों की निगरानी और दमन का रास्ता अपनाती है तो इससे लोकतंत्र कमजोर होगा. प्रदर्शन के दौरान कैंट एसीपी, कैंट इंस्पेक्टर सहित भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा. पुलिस की मौजूदगी के बीच प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया और एसीएम को पत्रक सौंपा.ALSO READ : वाराणसी में स्कूल की बदहाली का वीडियो पोस्ट करना पड़ा भारी, आप प्रवक्ता मुकेश सिंह गिरफ्तारविपक्षी दलों ने चेतावनी दी कि यदि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की निगरानी, दबाव और उत्पीड़न की कार्रवाई पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों तथा नागरिकों की निजता की रक्षा के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा.प्रदर्शन में नन्दलाल पटेल, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे, सतनाम सिंह, अनिल कुमार सिंह, वकील अंसारी, राजू राम, लाल बहादुर, संतोष चौरसिया, हसन मेहदी कब्बन, मिठाई लाल, रामकेश यादव, सुरेन्द्र यादव, लालमणि वर्मा, मोबिन अहमद, देवासिष, रामजी सिंह, गौरी शंकर पटेल, वंदना जायसवाल, विनीत चौबे, लक्ष्मण वर्मा, प्रमोद वर्मा, श्यामलाल पटेल, अजय मुखर्जी, विजय देवल, पुलक त्रिपाठी, हिमांशु धनवस्त, आसुतोष पाण्डेय, शिव शंकर मौर्य,शशि सोनकर, राजेश्वर विश्वकर्मा, आनन्द चौबे, मनोज पाण्डेय, गोपाल चौबे,साबिर अली, राजेश्वर विश्वकर्मा, रामजी गुप्ता, कृष्णा गौड़, प्रेमदीप तिवारी, अरविन्द मौर्य समेत कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे.