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अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर वाराणसी की महिलाएं दे रहीं आत्‍मर्निरता की नई मिसाल

अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर वाराणसी की महिलाएं दे रहीं आत्‍मर्निरता की नई मिसाल
Mar 07, 2026, 09:48 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: महिला सशक्‍तीकरण की दिशा में काशी की महिलाएं अग्रसर हैं. इसी परिप्रेक्ष्‍य में महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. मिर्जामुराद क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रही हैं. गैर सरकारी संस्‍था लोक समिति से जुड़ी इन महिलाओं ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और अपने बच्चों को पढ़ाकर अफसर बनाने के संकल्प के साथ ई-रिक्शा चलाने का जिम्‍मा अपने कंधों पर लिया है.


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आराजी लाईन क्षेत्र की सीता, शारदा, अनीता और सुमन ने ई-रिक्शा चालक बनकर यह साबित कर दिया है कि मेहनत और हौसले के बल पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं. उनका यह कदम न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है. इस निर्णय में उनके पति और परिवार के अन्य सदस्यों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है.


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पिलोरी गांव की शारदा ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर बड़े अधिकारी बनें. इसी उद्देश्य से उन्होंने यह काम शुरू किया है और अपनी आय का अधिकांश हिस्सा बच्चों की पढ़ाई में खर्च करेंगी. बेनीपुर गांव की अनीता ने बताया कि घर की आर्थिक तंगी के चलते वह बहुत परेशान थीं, लेकिन लोक समिति स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया.


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शुरू में उन्हें गाड़ी चलाने में डर लगता था, लेकिन अब वह निडरता से गाड़ी चला लेती हैं, जिससे उन्हें बहुत हिम्मत मिली है. हरसोस गांव की सीता ने बताया कि आंगनवाड़ी बच्चों को गाड़ी से खाना पहुंचाने में उन्हें बहुत अच्छा लगता है, जिससे प्रेरित होकर गांव की अन्य महिलाएं भी ई-रिक्शा चलाने के लिए उत्साहित हैं.


ई-रिक्शों के माध्यम से बढ़ी रोजगार


लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने बताया कि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम नागेपुर में कार्यरत सामाजिक संस्था लोक समिति को जोमैटो फीडिंग इंडिया की ओर से चार नए ई-रिक्शा उपहार स्वरूप प्राप्त हुए हैं. इन ई-रिक्शों के माध्यम से जनता रसोई घर में कार्यरत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बेनीपुर और कुरौना सेक्टर के 11 गांवों के 78 आंगनबाड़ी केंद्रों तक प्रतिदिन लगभग 2000 बच्चों के लिए नाश्ता और भोजन पहुंचा रही हैं. उन्होंने बताया कि कुछ माह पूर्व फीडिंग इंडिया के सीईओ अजीत सिंह लोक समिति आश्रम नागेपुर आए थे, जहां उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित कम्यूनिटी किचन के कार्यों की सराहना की थी. उसी दौरान उन्होंने महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था.


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इसके बाद आशा ट्रस्ट और लोक समिति के सहयोग से महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण दिया गया. ग्रामीण क्षेत्र में पहली बार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर बच्चों तक भोजन पहुंचाने का कार्य कर रही हैं. समूह की महिलाओं ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में सहयोग के लिए फीडिंग इंडिया का आभार व्यक्त किया.

शारीरिक अक्षमता के बाद समाज में स्‍थान हासिल करने वाली काशी की महिलाओं का सम्‍मान
शारीरिक अक्षमता के बाद समाज में स्‍थान हासिल करने वाली काशी की महिलाओं का सम्‍मान
वाराणसी: काशी विद्यापीठ ब्‍लाक रोड शिवदासपुर स्थित संत नारायण पुनर्वास संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को दिव्यांग होने के बावजूद भी अपने प्रेरणा दायी जीवन से समाज में मिसाल पेश करने वाली काशी की पांच दिव्यांग महिलाओं का सम्मान में किया गया. इन सभी दिव्यांग महिलाओं को अंगवस्त्रं एवं स्मृति चिन्ह देखकर सम्मानित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य दिव्यांग बंधु डॉक्टर उत्तम ओझा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज हमने जिन महिलाओं का सम्मान किया है, निश्चित रूप से इन्होंने समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है.शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद भी इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी लगन मेहनत परिश्रम और निष्ठा के बल पर वह स्थान हासिल किया है जो कि हम सबके लिए एक प्रेरणादाई है. उनके जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए तथा हम सबको समझ ही तो देश हित में कार्य करना चाहिए. कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए डॉ. डीबी मिश्रा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर इन महिलाओं का सम्मान करके हम खुद सम्मानित हो रहे हैं. ऐसी महान विभूतियों का सम्मान करना हम सबके लिए गर्व है और उनकी प्रेरणादाई जीवन से हम सबको प्रेरणा लेनी चाहिए.इन पांच महिलाओं का सम्मान 1. डॉ. मंगला कपूर पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित, भारत में पहली एसिड अटैक की शिकार दिव्यांग महिला एवं राज्य स्तरीय तथा अनेक पुरस्कार प्राप्त उनके जीवन पर फिल्म बन चुकी है. वह बीएचयू में संगीत विभाग की अध्यक्ष भी रहीं.2. आरती टंडन सेवानिवृत शिक्षक 2001 में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यपाल आचार्य विष्णु कांत शास्त्री से सम्मानित, 2005 में राष्ट्रपति अब्दुल एपीजे अब्दुल कलाम से सम्मानित.3. सविता सिंह 2011 में राज्य सरकार से सम्मानित 2015 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित. 2025 में वियतनाम में अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मान से सम्मानित.4. डॉ नीतू टहलनी राज्य पुरस्कार से सम्मानित एवं शिक्षक तथा बीएचयू से हिंदी में डॉक्टरेट.5. जाह्नवी चतुर्वेदी संगीत के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त नाम और छात्र.यह भी पढ़ें: टी20 फाइनल: भारतीय टीम के वर्ल्‍डकप फतह के लिए गंगा पूजन, जीत के लिए की कामनाकार्यक्रम का संचालन राकेश पांडेय द्वारा तथा धन्यवाद ज्ञापन अरविंद चक्रवाल ने किया. इस अवसर पर डॉक्टर संजय चौरसिया, मदन मोहन वर्मा, राजीव टंडन, विभा चतुर्वेदी, डॉक्टर कल्पना दुबे, डॉक्टर डी के मिश्रा,नितिन, आस्था आदि उपस्थित थे.
टी20 फाइनल: भारतीय टीम के वर्ल्‍डकप फतह के लिए गंगा पूजन, जीत के लिए की कामना
टी20 फाइनल: भारतीय टीम के वर्ल्‍डकप फतह के लिए गंगा पूजन, जीत के लिए की कामना
वाराणसी: टी-20 क्रिकेट वर्ल्‍ड कप का खुमार पूरे देश में देखने को मिल रहा है. महादेव की नगरी काशी में इसको लेकर विशेष उत्‍साह देखा जा रहा है. होली के बाद उत्सव का रंग केवल क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूम रहा है. इसी परिप्रेक्ष्‍य में काशी में विभिन्न आयोजनों का सिलसिला जारी है, जिसमें भारत की जीत की कामना की जा रही है. अहमदाबाद में रविवार को होने वाले टी-20 विश्वकप के फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की जीत की कामना के लिए अहिल्याबाई घाट पर लोगों ने बटुकों के संग मां गंगा का विधिपूर्वक पूजन और दुग्‍धाभिषेक किया. बटुकों ने गंगा किनारे बैट, पोस्टर और शंख के साथ भारत की जीत की कामना की. इस अवसर पर सभी भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी गईं.काशी के इस आयोजन में बटुकों ने एकजुट होकर क्रिकेट के प्रति अपने प्रेम और समर्थन का प्रदर्शन किया. गंगा के तट पर बटुकों ने अपने हाथों में बैट और पोस्टर लेकर भारत की जीत के लिए प्रार्थना की, जिससे यह संदेश गया कि काशी के लोग अपने देश के खिलाड़ियों के प्रति कितने समर्पित हैं.यह भी पढ़ें: वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में कवरेज को लेकर हंगामा, गार्ड और मीडिया कर्मियों के बीच झड़पइस आयोजन में शामिल बटुकों ने गंगा में स्नान करने के बाद पूजा की और सभी ने मिलकर भारत की विजय की कामना की. इस प्रकार के आयोजनों से न केवल खेल के प्रति लोगों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि भारत में माहौल भी बनाता है. काशी में क्रिकेट के प्रति यह जुनून दर्शाता है कि कैसे खेल ने लोगों को एकजुट किया है और उन्हें एक साझा लक्ष्य की ओर प्रेरित किया है.टी-20 विश्वकप का फाइनल मुकाबलाटी-20 विश्वकप का यह फाइनल मुकाबला भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण होगा. काशी के लोग इस मैच को लेकर बेहद उत्साहित हैं और सभी की यही कामना है कि भारत इस मुकाबले में विजय प्राप्त करे. बटुकों की यह पूजा और अभिषेक इस बात का प्रमाण है कि काशी के लोग अपने देश के खिलाड़ियों के प्रति कितने समर्पित हैं और वे उनकी सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.
वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में कवरेज को लेकर हंगामा, गार्ड और मीडिया कर्मियों के बीच झड़प
वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में कवरेज को लेकर हंगामा, गार्ड और मीडिया कर्मियों के बीच झड़प
वाराणसी: दर्जनों वाहनों में सवार होकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायी 11 मार्च को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विद्या मठ से रवाना हुए. लखनऊ प्रस्थान करने से पहले उन्होंने वाराणसी के प्राचीन संकट मोचन हनुमान मंदिर पहुंचकर प्रभु श्रीराम और संकट मोचन बाबा का दर्शन-पूजन किया. शंकराचार्य के मंदिर पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी कवरेज के लिए मंदिर परिसर में पहुंच गए. भीड होने के कारण गहमागहमी के बीच कवरेज को लेकर मीडिया कर्मियों और मंदिर परिसर में तैनात सुरक्षा गार्ड के बीच कहासुनी शुरू हो गई. मीडिया कर्मी कवरेज की अनुमति और व्यवस्था को लेकर बात कर रहे थे, तभी विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ समय के लिए अफरा तफरी जैसी स्थिति बन गई.मामला गाली गलौच तक पहुंच गया. मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार तीखी बहस के दौरान एक गार्ड ने एक वरिष्ठ पत्रकार की ओर हाथ उठाकर हमाला करने की कोशिश भी की. घटना के दौरान कुछ तीखे शब्द भी बोले गए. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.यह भी पढ़ें: पूर्वांचल समेत वाराणसी में मौसम का रुख बदला, गर्मी का दिखने लगा असरVVIP लोगों को मोबाइल फोन के संग मंदिर परिसर में एंट्रीबताया जा रहा है कि मंदिर परिसर में कई बार वीवीआईपी लोगों को मोबाइल फोन और कैमरे के साथ अंदर जाने की अनुमति दी जाती है, लेकिन इस बार मीडिया कर्मियों को कवरेज से रोके जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पत्रकारों का कहना है कि जब भी मंदिर के महंत जी से जुड़ी कोई खबर होती है तो मीडिया को अंदर बुलाकर सम्मानपूर्वक कवरेज कराया जाता है, लेकिन इस बार मीडिया के साथ हुआ व्यवहार समझ से परे है. घटना के बाद पत्रकारों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि वीवीआईपी लोगों को अंदर मोबाइल और कैमरे की अनुमति मिल जाती है, तो फिर मीडिया कर्मियों को कवरेज से रोकने और इस तरह का व्यवहार करने की क्या वजह थी.इस पूरे मामले के बाद पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. हालांकि बाद में स्थिति को शांत करा दिया गया और शंकराचार्य ने दर्शन-पूजन के बाद लखनऊ के लिए प्रस्थान कर दिया. मंदिर प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. इस संबंध में पूछे जाने पर मंदिर प्रशासन मुंह खोलने से कतराता रहा.