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पीएम के काशी दौरे को लेकर 28 और 29 अप्रैल को ट्रैफिक डायवर्जन, प्‍लान देखकर घर से निकलें

पीएम के काशी दौरे को लेकर 28 और 29 अप्रैल को ट्रैफिक डायवर्जन, प्‍लान देखकर घर से निकलें
Apr 27, 2026, 08:15 AM
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Posted By Preeti Kumari

Traffic diversions will be imposed on April 28 and 29 for the PM's visit to Kashi. Check your plan before leaving home.


वाराणसी: प्रधानमंत्री के दो दिवसीय प्रस्‍तावति दौरे को देखते हुए कमिश्‍नरेट पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया है. इसके तहत 28 अप्रैल को शहर में दोपहर 12 बजे से रात 11 बजे तक ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जा रहा है. यातायात प्रशासन ने व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए बसों, चार पहिया और मालवाहक वाहनों के संचालन में कई बदलाव किए हैं. इस बाबत लोगों से सहयोग की भी अपेक्षा की गई है. इसके अलावा ड्रोन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा.


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बसों के लिए डायवर्जन प्लान


प्रयागराज, सोनभद्र और मीरजापुर की ओर से आने वाली बसों को मोहनसराय अंडरपास से मुड़ैला तिराहा तक ही आने दिया जाएगा. जौनपुर की ओर से आने वाली बसें हरहुआ रिंग रोड अंडरपास तक ही संचालित होंगी और काशी कृषक इंटर कालेज में पार्क की जाएंगी. ओवरब्रिज पर इन बसों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. गाजीपुर और आजमगढ़ की ओर से आने वाली बसों को आजमगढ़ रिंग रोड अंडरपास तक ही आने की अनुमति होगी, जहां से उन्हें वापस किया जाएगा. अमरा अखरी अंडरपास और चांदपुर चौराहा से भी सामान्य बसों को कार्यक्रम स्थल की ओर जाने से रोका जाएगा और उन्हें वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया जाएगा.


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चार पहिया और मालवाहक वाहनों के लिए व्यवस्था


प्रधानमंत्री के आगमन से दो घंटे पहले ही बाबतपुर चौकी तिराहा से भारी वाहनों का शहर में प्रवेश रोक दिया जाएगा और उन्हें बड़ागांव की ओर मोड़ा जाएगा. भेलखा हनुमान मंदिर, मुढ़ेला तिराहा, चांदपुर, बऊलिया, लहरतारा, महमूरगंज, भिखारीपुर, नरिया, चितईपुर, सेंट्रल जेल, भोजूबीर और काली माता मंदिर जैसे प्रमुख चौराहों से वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा. इन सभी स्थानों से वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया जाएगा.


कार्यक्रम स्थल बीएलडब्ल्यू क्षेत्र में विशेष व्यवस्था


बरेका परिसर के अंदर भी सिनेमा हॉल तिराहा, सेंट्रल मार्केट, सूर्य सरोवर, डी-05 रेलवे क्रॉसिंग, गोमती मार्केट और इंटर कॉलेज चौराहा समेत कई स्थानों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. कार्यक्रम स्थल की ओर किसी भी प्रकार के वाहन को जाने की अनुमति नहीं होगी.


डायवर्जन के घेरे में रहेगा प्रधानमंत्री दौरे का दूसरा


प्रधानमंत्री दौरे के दूसरे दिन 29 अप्रैल को शहर में व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जाएगा. यातायात पुलिस ने सुरक्षा और सुचारु आवागमन को ध्यान में रखते हुए बसों, भारी वाहनों, चार पहिया, ऑटो और ई-रिक्शा के लिए विशेष रूट प्लान जारी किया है. एडीसीपी अंशुमान मिश्र ने अपील की है, कि जरूरी होने पर ही वीवीआइपी मूवमेंट वाले क्षेत्र में जाएं और ट्रैफिक डायवर्जन का पालन करें.


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बसों व भारी वाहनों पर खास प्रतिबंध


वीवीआईपी के आगमन से दो घंटे पहले बाबतपुर चौकी तिराहा से सभी भारी वाहनों और रोडवेज/प्राइवेट बसों का शहर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. इन्हें बड़ागांव की ओर डायवर्ट किया जाएगा.

बाबतपुर से हरहुआ के बीच बसों और भारी वाहनों को हरहुआ रिंग रोड से परमपुर अंडरपास होते हुए लोहता की ओर भेजा जाएगा, जबकि हरहुआ ओवरब्रिज पर इनका प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा.

अमरा अखरी अंडरपास से बसों को भिखारीपुर की ओर नहीं जाने दिया जाएगा, उन्हें मोहनसराय और डाफी की ओर मोड़ा जाएगा. चांदपुर और बउलिया से भी बसों को फुलवरिया की ओर जाने पर रोक रहेगी.

इसके अलावा पड़ाव से राजघाट की ओर मालवाहक वाहनों का संचालन सुबह 6 से 10 बजे तक पूरी तरह बंद रहेगा.


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शहर के प्रमुख चौराहों पर डायवर्जन


भेलखा हनुमान मंदिर, मुढ़ेला, चांदपुर, बउलिया, मण्डुवाडीह, लहरतारा, महमूरगंज, रथयात्रा, भिखारीपुर, नरिया, चितईपुर, काली माता मंदिर, लकड़ीमंडी, मरीमाई, मलदहिया, पिशाचमोचन, चेतगंज, अमर उजाला, विशेश्वरगंज, मच्छोदरी, भदऊ चुंगी, गोदौलिया और सोनारपुरा समेत दर्जनों प्रमुख स्थानों पर वाहनों का आवागमन वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान प्रतिबंधित रहेगा. इन स्थानों से वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया जाएगा.


बीएलडब्ल्यू क्षेत्र में भी रहेगी सख्ती


पीएम मोदी के आने के स्वागत में किसी भी तरह की कोई चूंक ना हो, इसके लिए बीएलडब्ल्यू परिसर के अंदर सिनेमा हाल तिराहा, सेंट्रल मार्केट, सूर्य सरोवर, डी-05 रेलवे क्रासिंग, गोमती मार्केट और इंटर कालेज चौराहा समेत कई स्थानों पर वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी. कार्यक्रम स्थल की ओर किसी भी वाहन को जाने की अनुमति नहीं होगी.


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ट्रैफिक कंट्रोल रूम नंबर :7839856994

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169 साल पहले 282 सैनिकों के साथ हुई बर्बरता को 12 साल पहले जान सकी दुनिया...
169 साल पहले 282 सैनिकों के साथ हुई बर्बरता को 12 साल पहले जान सकी दुनिया...
वाराणसी: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों की बर्बरता का शिकार बने 282 भारतीय सैनिकों का अंतिम संस्कार अब काशी में किया जाएगा. उनकी अस्थियों को मोक्ष दिलाने के उद्देश्य से उनके संभावित वंशज भी इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे. 169 वर्ष पहले हुई इस घटना की जानकारी दुनिया को करीब 12 वर्ष पहले मिली, जबकि वैज्ञानिक शोध और डीएनए परीक्षण के जरिए इन शहीदों की पहचान संभव हो सकी.पंजाब के अमृतसर जिले के अजनाला में वर्ष 2014 में एक कुएं से 282 मानव कंकाल मिले थे. शुरुआत में माना गया कि ये 1947 के विभाजन के दौरान मारे गए लोगों के अवशेष हैं. लेकिन काशी हिंदू विश्वविद्यालय, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट, सीसीएमबी हैदराबाद समेत देश-विदेश के वैज्ञानिकों की टीम ने डीएनए और आइसोटोप अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला कि ये 1857 में शहीद हुए बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सैनिक थे, जिनकी जड़ें गंगा घाटी यानी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से जुड़ी थीं.एक किताब से खुला इतिहास का राज.पंजाब के इतिहासकार एवं शोधकर्ता सुरिंदर कोचर को अंग्रेज अधिकारी फ्रेडरिक हेनरी कूपर की पुस्तक "क्राइसिस इन पंजाब: फ्रॉम 10 मई अनटिल फॉल ऑफ दिल्ली" मिली. इसमें लिखा था कि मियां मीर में तैनात बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की 26वीं रेजीमेंट के सैनिकों ने 1857 में विद्रोह कर दिया था. अंग्रेजों ने 218 सैनिकों को रावी नदी के किनारे गोली मार दी, जबकि 282 सैनिकों को अजनाला लाकर 237 को गोली मारने के बाद 45 सैनिकों को जिंदा कुएं में फेंक दिया और मिट्टी-चूने से कुएं को बंद कर दिया. बाद में उस स्थान पर गुरुद्वारा बना दिया गया. वर्ष 2014 में उसी कुएं की खुदाई के दौरान ये कंकाल मिले.डीएनए जांच से मिली पहचानपंजाब विश्वविद्यालय के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के डॉ. जे.एस. सहरावत के नेतृत्व में बीएचयू, बीरबल साहनी संस्थान और सीसीएमबी के वैज्ञानिकों ने डीएनए और आइसोटोप अध्ययन किया. दोनों अध्ययनों ने पुष्टि की कि ये सैनिक पंजाब के नहीं बल्कि गंगा घाटी क्षेत्र के निवासी थे. इस घटना को दुनिया की सबसे जघन्य ऐतिहासिक घटनाओं में भी गिना जाता है.दक्षिण भारत से आए संभावित वंशजडीएनए सैंपल देने वाराणसी पहुंचे कृतेश तिवारी, जो वर्तमान में दक्षिण भारत के संथूर कस्बे में रहते हैं, बताते हैं कि उनके पूर्वजों का मानना रहा है कि उनका परिवार अजनाला में शहीद हुए सैनिकों का वंशज है. इसी दावे की पुष्टि के लिए उन्होंने qअपना डीएनए सैंपल दिया है. उनका कहना है कि यदि वैज्ञानिक जांच में यह साबित होता है कि उनका परिवार उन्हीं सैनिकों का वंशज है, तो यह उनके लिए गर्व और भावनात्मक संतोष का विषय होगा.2022 से जारी है शोधडॉ. ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं कि वर्ष 2022 से उनकी टीम अजनाला के 282 शहीद सैनिकों पर शोध कर रही है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में कुएं से मिले कंकालों के अध्ययन से पता चला कि इनमें बड़ी संख्या में गंगा घाटी के लोग थे, जिनमें कई कान्यकुब्ज ब्राह्मण भी शामिल थे। समय के साथ इनके कई परिवार दक्षिण भारत के संथूर क्षेत्र में जाकर बस गए.ALSO READ: रथयात्रा मेला प्लास्टिक मुक्त घोषित, पॉलीथिन इस्तेमाल करने वालों पर नगर निगम की कार्रवाईडॉ. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि जब इस शोध को प्रकाशित किया गया तो कनाडा से समीर पांडेय नामक व्यक्ति का फोन आया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में लगभग सात पीढ़ी पहले एक सदस्य लापता हो गए थे, जो 1857 में उसी बटालियन में कार्यरत थे और संभवतः अजनाला नरसंहार के शिकार हुए. इसके बाद संभावित वंशजों की तलाश शुरू की गई.उन्होंने कहा कि डीएनए परीक्षण के जरिए वंशजों की पहचान सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है. शोध पूरा होने के बाद अजनाला से मिले सभी शहीद सैनिकों की अस्थियों का काशी में पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा, ताकि 169 साल बाद उन्हें सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई मिल सके.
रथयात्रा मेला प्लास्टिक मुक्त घोषित, पॉलीथिन इस्तेमाल करने वालों पर नगर निगम की कार्रवाई
रथयात्रा मेला प्लास्टिक मुक्त घोषित, पॉलीथिन इस्तेमाल करने वालों पर नगर निगम की कार्रवाई
वाराणसी: ऐतिहासिक तीन दिवसीय रथयात्रा मेले को नगर निगम ने प्लास्टिक (पॉलीथिन) मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। मेले में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने व्यापक तैयारियां की हैं। साथ ही प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग करने वाले दुकानदारों के खिलाफ अभियान चलाकर चालान और जुर्माने की कार्रवाई भी की जा रही है।नगर निगम के अनुसार पूरे मेला क्षेत्र में 24 घंटे तीन शिफ्टों में विशेष सफाई व्यवस्था लागू की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके। निगम की टीमें स्थायी और अस्थायी दुकानदारों से संपर्क कर उन्हें दुकान के सामने डस्टबिन रखना, प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग न करना और ग्राहकों को केवल कपड़े के थैले उपलब्ध कराने के निर्देश दे रही हैं।नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ मौके पर चालान कर जुर्माना वसूला जा रहा है। वहीं, जोनल स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में आईसी एक्टिविटी टीम लाउडस्पीकर के जरिए दुकानदारों और श्रद्धालुओं को सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने के लिए जागरूक कर रही है।ALSO READ: वाराणसी की 30 महिलाएं बनी 'सोलर दीदी', नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरेइसके अलावा मेला क्षेत्र में "स्वच्छ काशी, सुंदर काशी" और "थैला अपना साथ लाएं, प्लास्टिक को दूर भगाएं" जैसे संदेशों वाले पोस्टर भी लगाए गए हैं। नगर निगम ने सभी श्रद्धालुओं और व्यापारियों से प्लास्टिक मुक्त रथयात्रा मेला बनाने में सहयोग की अपील की है।
वाराणसी की 30 महिलाएं बनी 'सोलर दीदी', नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरे
वाराणसी की 30 महिलाएं बनी 'सोलर दीदी', नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरे
वाराणसी : भारत सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत संचालित 'सोलर दीदी' अभियान के तहत वाराणसी में 30 महिलाओं को रोजगार प्रदान किया गया. आर्क सूर्य शक्ति प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आयोजित चयन एवं नियुक्ति कार्यक्रम में चयनित महिलाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए. साथ ही उन्हें सौर ऊर्जा से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण, कार्य प्रणाली और जनजागरूकता अभियान से जुड़ी जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई.कार्यक्रम में आर्क सूर्य शक्ति प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अभिषेक सिंह 'चंचल' ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है. 'सोलर दीदी' अभियान महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका भी प्रदान कर रहा है. चयनित महिलाएं अब लोगों को योजना की जानकारी देंगी और सोलर संयंत्र लगाने के लिए प्रेरित करेंगी.अभिषेक सिंह ने बताया कि आर्क परिवार फाउंडेशन समाज सेवा के अपने संकल्प के तहत सौर ऊर्जा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का कार्य लगातार कर रहा है. संस्था ऐसे परिवारों तक पहुंच रही है, जो जानकारी के अभाव या आर्थिक कारणों से सोलर संयंत्र नहीं लगवा पा रहे हैं. फाउंडेशन उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, सरकारी सब्सिडी, बैंक ऋण और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी देने के साथ आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराता है. जरूरतमंद परिवारों को संस्था अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग भी प्रदान करती है.ALSO READ: कैंट स्टेशन के बाहर महिलाओं से अश्लील हरकत, एंटी रोमियो टीम ने दो युवकों को किया गिरफ्तारउन्होंने कहा कि फाउंडेशन कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से उद्योग जगत को भी स्वच्छ ऊर्जा अभियान से जोड़ने का प्रयास कर रहा है. उनका मानना है कि सरकार, उद्योग, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही भारत ऊर्जा आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार राष्ट्र बन सकता है. उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा अपनाना केवल बिजली बिल कम करने का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी भी है.