मणिकर्णिका घाट विवाद पर राजनीति गरम, जिला मुख्यालय पर कांग्रेसियों ने सौंपा ज्ञापन

वाराणसी : मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर कार्रवाई का वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति गरम है. इस मुद्दे को लेकर इंदौर से काशी तक विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं. मां अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े धार्मिक स्थलों और कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच कांग्रेस पार्टी भी खुलकर मैदान में उतर आई है. इसी परिप्रेक्ष्य में शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि वाराणसी में विकास के नाम पर लगातार सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट किया जा रहा है.

कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर सैकड़ों मंदिरों को तोड़ा गया, फिर स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जुड़े सर्वसेवा संघ आश्रम को उजाड़ा गया. अब दालमंडी क्षेत्र, जहां लगभग 10 हजार लोगों की आजीविका जुड़ी है, वहां भी तोड़फोड़ की जा रही है. इसके बाद अब मणिकर्णिका घाट पर मां अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित धार्मिक स्थलों, मूर्तियों और कलाकृतियों को क्षति पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं.
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कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की सच्चाई जनता के सामने लाई जाए. इसके लिए एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल द्वारा स्थल निरीक्षण की मांग की गई है, जिसमें जिला प्रशासन, स्थानीय नागरिक और कांग्रेस प्रतिनिधि शामिल हों. पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो अनशन और फिर आमरण अनशन शुरू करने को बाध्य होंगे. प्रदेश प्रवक्ता संजीव सिंह ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह पारदर्शिता के साथ पूरे मामले की जांच करें. यदि हमारी धरोहर सुरक्षित नहीं की गई तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी, आंदोलन और तेज किया जाएगा.



