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प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने देर रात रोप-वे का किया निरीक्षण, गरीबों को बांटे कंबल

प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने देर रात रोप-वे का किया निरीक्षण, गरीबों को बांटे कंबल
Jan 10, 2026, 06:33 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जनपद के प्रभारी सुरेश खन्ना ने शुक्रवार देर रात वाराणसी दौरे के दौरान रोप-वे परियोजना के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया. इंग्लिशिया लाइन क्षेत्र में गरीब एवं असहाय लोगों को कंबल वितरित किया. इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कार्य को सुरक्षात्मक मानकों के साथ शीघ्र पूर्ण कराने पर जोर दिया.


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प्रभारी मंत्री ने मौके पर मौजूद कार्यदाई संस्था के अभियंताओं से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली और सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए. इससे पूर्व, उन्होंने नेहरू मार्केट, इंग्लिशिया लाइन क्षेत्र में गरीब एवं असहाय लोगों को कंबल वितरित कर ठंड से राहत पहुंचाई. साथ ही उन्होंने रेन बसेरा में रह रहे लोगों से बात-चीत कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया.


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प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रेन बसेरा में साफ-सफाई, अलाव और ठंड से बचाव की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं हर हाल में सुनिश्चित की जाएं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ठंड के मौसम में कोई भी गरीब या असहाय व्यक्ति खुले आसमान के नीचे न सोने पाए, ऐसे लोगों को रेन बसेरा में आश्रय उपलब्ध कराया जाए.


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इस अवसर पर विधायक टी. राम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, नगर निगम के अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे.

मेटा AI के खिलाफ दर्ज शिकायत, शिव पार्वती विवाह पर गलत जानकारी देने का लगा आरोप
मेटा AI के खिलाफ दर्ज शिकायत, शिव पार्वती विवाह पर गलत जानकारी देने का लगा आरोप
वाराणसी: इंटरनेट नेटवर्किंग साइट मेटा AI के खिलाफ अवर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय की अदालत में प्रकीर्ण वाद दाखिल किया गया है. अदालत ने सारनाथ थाने से रिपोर्ट तलब की है. अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तिथि निर्धारित की गई है. सारनाथ थाना क्षेत्र के तिलमापुर निवासी याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्र के अधिवक्ता ने बताया कि गलत जानकारी देने से जुडा ये देश का पहला मामला है जिसे अदालत तक लाया गया. इसके पहले सुप्रीम कोर्ट में एक मामला मेटा से जुड़ा पहुंचा था जिसमें गोपनीयता भंग करने का आरोप लगा था.मेटा AI की ओर से मांगी माफी नागेश्वर मिश्र का कहना है कि मेटा एआई स्वयं को ऐसा मंच बताता है जिसके पास दुनिया की हर जानकारी है. उन्होंने एआई से कुछ सवाल पूछे, लेकिन उन्हें गलत जानकारी मिली. इस पर उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दी गई जानकारी गलत है और इस पर मुकदमा भी किया जा सकता है. वाद में उल्लेख है कि इस पर मेटा एआई की ओर से माफी मांगते हुए गलती सुधारने और आगे सही जानकारी देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन दोबारा प्रश्न पूछने पर फिर से गलत जानकारी दी गई. क्षुब्ध होकर अदालत में धारा 173 (4) के तहत प्रकीर्ण वाद दाखिल कर दिया.यह भी पढ़ें: संरक्षित पशुओं के मांस की तस्‍करी का आरोप, पुलिस की गिरफ्त में दो गुनहगारमेटा एआई से पूछा शिव पार्वती का विवाह कब हुआसवाल- नागेश्वर मिश्रा ने पूछा कि शिव जी का विवाह किस महीने में हुआ है. मेटा का जवाब- शिव जी का विवाह फाल्गुन महीने में हुआ था. कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. यह दिन भगवान शिव की पूजा और उपासना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.क्यों न मेटा AI पर मुकदमा किया जाएमेटा- मैं अपनी गलती के लिए माफी चाहता हूं. शिव जी का विवाह फाल्गुन महीने में नहीं हुआ था, बल्कि महाशिवरात्रि के दिन हुआ था, जो फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को नहीं, बल्कि माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. लेकिन विवाह की तिथि के बारे में विभिन्न मत हैं और कुछ स्रोतों के अनुसार, शिव जी का विवाह वैशाख महीने में हुआ था.
देश में पहली बार इच्छामृत्यु की मंजूरी, जानें परिजनों ने क्या कहा...
देश में पहली बार इच्छामृत्यु की मंजूरी, जानें परिजनों ने क्या कहा...
Harish Rana: भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की अनुमति दी है. कोर्ट ने 13 साल से ज़्यादा समय से कोमा में 32 साल के हरीश राणा का लाइफ़ सपोर्ट (जीवनरक्षक मशीनें) हटाने की मंज़ूरी दे दी है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले पर फै़सला सुनाया. जानें क्या था कोर्ट का फैसला बता दें कि, इस मामले में कोर्ट ने बड़ा दिल दिखाते हुए एम्स-दिल्ली को यह भी निर्देश दिया है कि लाइफ़ सपोर्ट हटाने के लिए एक ख़ास योजना तैयार की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज़ की गरिमा और सम्मान बना रहे.इतना ही नहीं, हरीश राणा के परिवार ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से साल 2018 के पांच जजों की पीठ के उसके फ़ैसले के आधार पर चिकित्सा सुविधाएं हटाने की मांग की थी. वहीँ, 2018 के फैसले से असाध्य रूप से बीमार मरीज़ों के लिए "पैसिव यूथेनेशिया" (इच्छामृत्यु) को क़ानूनी मान्यता दी थी.हरीश के पिता अशोक का बयान...सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पिता अशोक ने कहा- मैं माननीय न्यायाधीश का धन्यवाद करता हूं. अधिवक्ताओं और डॉक्टरों का भी आभार व्यक्त करता हूं. आज हमें वही फैसला मिला है, जिसकी हम उम्मीद कर रहे थे. मेरी उम्र 62 साल है और मेरी पत्नी करीब 60 साल की है.हमने अदालत का रुख तब किया था, जब हमें एहसास हुआ कि हमारे बेटे की स्थिति असाध्य और लाइलाज है. कोई भी माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा नहीं चाहेंगे, लेकिन मजबूरी में हमें यह फैसला लेना पड़ा. हम पिछले तीन साल से इस मामले को लेकर अदालत में प्रयास कर रहे थे. अब उसे एम्स ले जाया जाएगा.ALSO READ : मौसम विभाग ने मार्च में कोहरा पड़ने की बताई वजह, बारिश के बन रहे आसारपैसिव यूथेनेशिया क्या है?पैसिव यूथेनेशिया यानी अगर कोई मरीज़ सालों साल बिस्तर पर है, कोमा में है और उसके ठीक होने की संभावना पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है और वो सिर्फ़ लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम पर ज़िंदा है तो उसका लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम हटाया जा सकता है.साल 2011 में 'पैसिव यूथेनेशिया' के हक़ में फैसला गौरतलब है कि, इससे पहले साल 2011 में मुंबई के केईएम अस्पताल की पूर्व नर्स अरुणा शानबाग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ये फ़ैसला सुनाया था. साल 1973 में सोहनलाल नाम के वॉर्ड बॉय ने अरुणा से बलात्कार की कोशिश की थी जिसमे उसने अरुणा का गला दबाया था और उसके बाद वह 42 साल तक कोमा में रहीं. वहीँ, साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी कि अरुणा की स्थिति को देखते हुए उन्हें इच्छा मृत्यु दी जाए. लेकिन कोर्ट ने ये अनुमति तो नहीं दी पर 'पैसिव यूथेनेशिया' के हक़ में फ़ैसला लिया.ALSO READ : संरक्षित पशुओं के मांस की तस्‍करी का आरोप, पुलिस की गिरफ्त में दो गुनहगारदेश में कब- कब मांगी गई इच्छामृत्यु साल 2001 (बीके पिल्लई): में केरल हाईकोर्ट ने असाध्य रोग से पीड़ित पिल्लई की याचिका खारिज कर दी थी जिन्होंने इच्छामृत्यु के लिए याचिका दायर की थी.साल 2005 (मोहम्मद युनूस अंसारी): ओडिशा के व्यक्ति ने असाध्य रोग से पीड़ित चार बच्चों के लिए राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अपील की थी., लेकिन याचिका ख़ारिज कर दी गई थी.साल 2004 (वेंकटेश) : हैदराबाद के 25 वर्षीय व्यक्ति ने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के कारण इच्छामृत्यु और अंगदान की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था.साल 2005 (तारकेश्वर सिन्हा): पटना के निवासी ने कोमा में पत्नी कंचनदेवी के लिए दया मृत्यु की मांग की थी.साल 2011 ( अरुणा शानबाग): इस मामले में अरुणा 42 वर्षों तक कोमा में रहीं. नर्स अरुणा शानबाग की दोस्त ने याचिका दायर की थी. कोर्ट ने उन्हें मौत तो नहीं दी, लेकिन पैसिव यूथेनेशिया के हल में फैसला दिया.
संरक्षित पशुओं के मांस की तस्‍करी का आरोप, पुलिस की गिरफ्त में दो गुनहगार
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वाराणसी: लंका चौराहे के पास बुधवार की रात ई-रिक्शा चालक समेत दो युवकों को लंका पुलिस ने पशुओं के मांस की तस्करी के आरोप में हिरासत में लिया. पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है. हालांकि पुलिस का कहना है कि ई रिक्‍शा पर लदी बोरियों में हड्डियां मिली हैं. इसकी जांच कराई जा रही है कि हड्डियां जानवर की हैं या किसी अन्‍य की. मामला संदिग्‍ध है इसलिए पुलिस सरगर्मी से जांच कर रही है.ई-रिक्शा से दुर्गंध महसूसदेवरिया के रहने वाले सत्यम पांडेय ने पुलिस को बताया कि वह दुर्गाकुंड के मानस नगर कालोनी में रहते हैं और फास्ट फूड का व्यापार करते हैं. रात 10 बजे के बाद वह बाइक से लंका की ओर जा रहे थे तो उन्हें एक ई-रिक्शा से बहुत दुर्गंध महसूस हुई. चालक से पूछा कि बोरे में क्या है, जो कि इतना दुर्गंध उठ रहा है. रिक्शा चालक ने जवाब दिया कि मुर्गी का चारा है.यह भी पढ़ें: योगी सरकार के शर्तनामा ने धर्मयुद्ध का मार्ग किया प्रशस्‍त- स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंदसत्यम ने पुलिस को बताया कि उन्हे विश्वास नहीं हुआ और ई-रिक्शा को रूकवाना चाहा. इस पर चालक रफ्तार तेज कर भागने लगा. इस बीच उसे लंका चौराहे के पास पकड़ा. बोरे की तलाशी ली तो पशुओं की हड्डी और मांस निकला. तभी दोनों युवकों को ई-रिक्शा समेत पकड़ा गया. इस दौरान सडक पर अफरा तफरी की स्थिति बन गई.हड्डी बरामद लंका इंस्पेक्टर राजकुमार ने बताया कि हड्डी बरामद हुई है, जिसकी जांच लैब से कराई जाएगी. दोनों युवकों ने पूछताछ में बताया कि भैंस की हड्डी है, जो कि पुरानी है, कीड़े पड़ गए थे तो उन्हें फेंकने के लिए जा रहे थे.