प्रधानमंत्री के काशी आगमन पर कांग्रेस उठायेगी जनसमस्याओं की आवाज, महानगर ने DM को भेजा पत्र

Congress will raise public concerns on the Prime Minister's arrival in Kashi; the city sent a letter to the DM.
वाराणसी: काशी के सांसद नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित वाराणसी दौरे को लेकर कांग्रेस ने जनहित के मुद्दों पर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक हस्तक्षेप किया है. कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे ने जिला अधिकारी को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का समय मांगा है, ताकि वाराणसी की जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों और स्थानीय समस्याओं को सीधे प्रधानमंत्री के समक्ष रखा जा सके. जिसे लेकर महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे का कहना है कि, नरेंद्र मोदी वाराणसी से तीसरी बार सांसद चुने गये हैं, इसलिए काशी की जनता के प्रति उनका संवैधानिक, नैतिक और लोकतांत्रिक दायित्व है कि वे केवल सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से भी संवाद करने की जिम्मेदारी बनती हैं. लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को सुनना लोकतंत्र को मजबूत करता है और जनसमस्याओं के समाधान का रास्ता खोलता है.

"काशी राजनीतिक मंच नहीं, लोगों की आस्था"
भोले बाबा की नगरी काशी केवल राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, रोजगार, संस्कृति, व्यापार और संघर्ष का शहर भी है. यदि प्रधानमंत्री मोदी वास्तव में काशी के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हें उन मुद्दों को भी सुनना चाहिए, जो आम जनता रोज झेल रही है.
जनहित में कांग्रेस की दस सूत्रीय मांगें इस प्रकार हैं
प्रीपेड बिजली मीटर से जनता को राहत मिले
प्रीपेड बिजली मीटर व्यवस्था से गरीब, मध्यम वर्ग और आम उपभोक्ता परेशान हैं, बार-बार रिचार्ज, अचानक बिजली कटौती और तकनीकी खामियों से जनता त्रस्त है. इस व्यवस्था को वापस लिया जाए या व्यापक सुधार किया जाए.
दालमंडी क्षेत्र में विस्थापन रोका जाए
दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित कार्यवाहियों के नाम पर लगभग दस हजार परिवारों, दुकानदारों और व्यापारियों के सामने जीविका का संकट खड़ा है. कांग्रेस ने मांग की कि बिना पुनर्वास और सहमति किसी भी परिवार को उजाड़ा न जाए.

काशीवासियों के लिए बाबा विश्वनाथ के दर्शन का समय बढ़ाया जाए
स्थानीय नागरिकों को बाबा विश्वनाथ के दर्शन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, काशीवासियों के लिए सुगम दर्शन की समय सीमा बढ़ाई जाए, ताकि स्थानीय श्रद्धालुओं को सम्मानजनक रूप से बाबा के दर्शन पूजन की सुविधा मिल सके.
युवाओं के लिए रोजगार
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में आज भी युवा रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं, वाराणसी में बड़े उद्योग, फैक्टरी और निवेश लाकर युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए.
एसआईआर के नाम पर काटे गए जायज नाम बहाल हों
विभिन्न प्रक्रियाओं के नाम पर पात्र लोगों के नाम सूचियों से हटाए जा रहे हैं, कांग्रेस ने मांग की कि सभी वैध और पात्र नागरिकों के नाम तत्काल बहाल किए जाएं.
विकास के नाम पर धरोहरों को उजाड़ना बंद हो
काशी की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक धरोहरों से है. विकास परियोजनाओं के नाम पर पुराने मोहल्लों, ऐतिहासिक भवनों और सांस्कृतिक स्थलों को नष्ट करना बंद किया जाए.
बुनकरों का पलायन रोका जाए
बनारस की पहचान बनारसी साड़ी और बुनकर समाज से है, बढ़ती लागत, घटते काम और सरकारी उपेक्षा के कारण बुनकर पलायन को मजबूर हैं. विशेष आर्थिक पैकेज और संरक्षण योजना लागू की जाए.
अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट और कैशलेस चिकित्सा लागू हो
वकीलों की सुरक्षा के लिए अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए तथा आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाए.
रामनगर पालिका पूर्ववत बहाल हो
रामनगर क्षेत्र की स्थानीय नगर पालिका व्यवस्था को पूर्व की भांति बहाल किया जाए ताकि नागरिक सुविधाएं सुचारु रूप से मिल सकें.
बीएचयू के संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित कर उनके भविष्य और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
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आपको बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल देश के प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि काशी के सांसद भी हैं. वाराणसी की जनता ने उन्हें प्रतिनिधित्व का अधिकार दिया है. ऐसे में उनका दायित्व है कि, वे विपक्ष की बात भी सुनें. इसलिए कांग्रेस पार्टी का मानना है कि काशी के सांसद होने के नाते पीएम मोदी लोकतंत्र में संवाद जरूरी करें, अहंकार नहीं, यदि काशी के सांसद काशी की पीड़ा नहीं सुनेंगे, तो फिर कौन सुनेगा?हम संवाद चाहते हैं समाधान चाहते हैं, इसलिए जिला अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री समय मांगा गया है, ताकि काशी की जनता की समस्याओं को सीधे उनके सामने रखा जा सके. उम्मीद है कि पीएम मोदी विपक्ष की लोकतांत्रिक भूमिका का सम्मान करते हुए प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय देंगे और काशीवासियों की समस्याओं पर ठोस निर्णय भी लेगें.




