पुरुषोत्तम मास शुरू होते ही काशी के पुरुषोत्तम मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़, दिखा आस्था का अद्भुत नजारा

As the Purushottam month began, devotees thronged the Purushottam temple in Kashi, displaying a remarkable display of faith.
वाराणसी: सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पुरुषोत्तम मास इस वर्ष 17 मई से प्रारंभ हो गया है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पवित्र मास लगभग 33 महीनों में एक बार आता है और भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और व्रत करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है. धर्म नगरी काशी में भी पुरुषोत्तम मास को लेकर विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है, गोदौलिया क्षेत्र के हौज कटोरा मोहल्ले स्थित अति प्राचीन पुरुषोत्तम मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है.

भगवान त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में स्थित इस मंदिर का उल्लेख प्राचीन काशी खंड में भी मिलता है, जिससे इसकी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ जाती है. मंदिर में काले पत्थर से निर्मित भगवान हरि विष्णु की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, धार्मिक मान्यता है कि अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास में भगवान पुरुषोत्तम के इस स्वरूप के दर्शन और पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के दुखों से मुक्ति मिलती है.

पुरुषोत्तम मास के अवसर पर मंदिर परिसर और आसपास का इलाका भक्तिमय वातावरण में रंग गया है. मंदिर में भगवान विष्णु को प्रिय माने जाने वाले मालपुए का विशेष भोग लगाया जा रहा है, स्थानीय दुकानों पर भी मालपुओं की मांग बढ़ गई है, मान्यता है कि जैसे भगवान गणेश को मोदक और लड्डू प्रिय हैं, उसी प्रकार भगवान विष्णु को मालपुआ अत्यंत प्रिय माना जाता है. मंदिर में भगवान विष्णु के 33 नामों के साथ 33 मालपुए अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

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मंदिर की दीवारों पर अंकित श्री हरि के 33 नामों का श्रद्धालु विशेष रूप से स्मरण करते हैं, पुरुषोत्तम मास के प्रथम दिन मंदिर में भगवान का भव्य श्रृंगार किया गया और विशेष आरती उतारी गई. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और जयकारों के बीच पूजा-अर्चना में शामिल हुए, मंदिर के पुजारियों और आयोजकों ने श्रद्धालुओं को पुरुषोत्तम मास और इस विशेष पूजन के धार्मिक महत्व की जानकारी भी दी.



