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राहुल गांधी के बयान पर भाजपाइयों का विरोध प्रदर्शन, फूंका पुतला

राहुल गांधी के बयान पर भाजपाइयों का विरोध प्रदर्शन, फूंका पुतला
May 21, 2026, 07:42 AM
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Posted By Preeti Kumari

BJP workers protest Rahul Gandhi's statement, burn his effigy


वाराणसी: भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा काशी क्षेत्र के उपाध्यक्ष अनूप जायसवाल के नेतृत्व में गुरुवार को वाराणसी में कार्यकर्ताओं ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान के विरोध में प्रदर्शन किया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर नारेबाजी की और जले हुए मोबिल का इस्तेमाल कर राहुल गांधी के पुतले का दहन किया. बता दें कि रायबरेली में राहुल गांधी ने पीएम और गृहमंत्री को गद्दार कहा था.


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प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “चाइना का ये यार है, राहुल गांधी गद्दार है” जैसे नारे लगाते हुए अपने विरोध को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया. भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि राहुल गांधी के हालिया बयान से वे असहमत हैं और इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. इस मौके पर भाजपा नेता अनूप जायसवाल ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार के कारण विपक्ष हताशा में बयानबाजी कर रहा है. उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता ऐसे बयानों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करते रहेंगे.


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कार्यक्रम का नेतृत्व अनूप जायसवाल


कार्यक्रम का नेतृत्व अनूप जायसवाल ने किया, जबकि संचालन चन्द्र विजय सिंह और ओमप्रकाश यादव ‘बाबू’ ने किया. धन्यवाद ज्ञापन कुलदीप वर्मा और मंगलेश जायसवाल ने दिया. विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से गोपालजी जायसवाल, धीरेन्द्र शर्मा, राहुल जी, अखिल वर्मा, शेखर जायसवाल, कन्हैया लाल सेठ, मनीष चौरसिया, सुनील कनौजिया, सिद्धनाथ गौंड, धरमचंद, प्रदीप जायसवाल, अमित, रवि और प्रकाश सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे.


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BHU में PHD प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, साल में दो बार होगा दाखिला
BHU में PHD प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, साल में दो बार होगा दाखिला
Major changes in BHU's PhD admission process, admissions will be done twice a yearवाराणसी: बीएचयू की विद्वत परिषद की बैठक में अहम प्रस्‍ताव सामने आए. कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई इस बैठक में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और विद्यार्थी‑अनुकूल बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए. बैठक में प्रवेश प्रक्रिया को वर्ष में दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई. कुलपति ने कहा कि पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी तथा पेशेवर ढंग से संपन्न कराना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है और इस संबंध में विश्वविद्यालय निरंतर प्रयासरत है.पारित प्रस्ताव के अंतर्गत सभी विभागों को यह स्वतंत्रता दी जाएगी कि वे पीएचडी प्रवेश हेतु साक्षात्कार से पहले यदि आवश्यकता हो तो, स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित कर सकें. अभी तक सभी अर्ह अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जा सकता है. अब विभाग यह तय कर सकेंगे कि एक स्क्रीनिंग टेस्ट के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जाए.इस स्क्रीनिंग परीक्षा के स्वरूप तथा अन्य पक्षों पर निर्णय विश्वविद्यालय स्तर की एक समिति करेगी, जिसके गठन को विद्वत परिषद् द्वारा मंजूरी प्रदान कर दी गई है. एक अन्य प्रस्ताव के अनुसार अब पीएचडी प्रवेश के लिए विभागों में मुख्य विषय और संबद्ध विषयों की एक समावेशित मेरिट सूची तैयार की जाएगी. इस सूची में स्थान पाने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित विभाग में प्रवेश प्रदान किया जाएगा.ऐसा करने से मुख्य विषय तथा संबद्ध विषय का भेद समाप्त हो सकेगा, प्रवेश प्रक्रिया की जटिलता को दूर करने में मदद मिलेगी. विद्वत परिषद ने मुख्य परिसर, महिला महाविद्यालय, दक्षिणी परिसर, संबद्ध महाविद्यालय आदि सभी को मिलाकर आरक्षित सीटों की गणना विभाग की कुल सीटों के आधार पर करने, सभी श्रेणियों की सीटों की सूचना प्रवेश पूर्व ही अभ्यर्थियों देने तथा इसके बाद संबंधित इकाइयों में आरक्षित श्रेणियों के अभ्यर्थियों का आवंटन उसी श्रेणी के अनुरूप करने का भी प्रस्ताव पारित किया, ताकि किसी भी वर्ग के अभ्यर्थी को हानि न हो और प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़े.यह भी पढ़ें: राहुल गांधी के बयान पर भाजपाइयों का विरोध प्रदर्शन, फूंका पुतलाइस बैठक में लिए गए निर्णयों से देश भर से प्रतिभावान विद्यार्थी विश्वविद्यालय की ओर तो आकर्षित होंगे ही, साथ ही प्रवेश प्रक्रिया को समयबद्ध तरीक़े से अल्प अवधि में पूर्ण भी किया जा सकेगा. पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया समय से पूरा होने से शैक्षणिक कैलेंडर का प्रभावी रूप से संचालन संभव हो सकेगा और विद्यार्थियों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा.https://www.youtube.com/watch?v=ywDGTZkXzk8
राहुल गांधी के बयान पर भाजपाइयों का विरोध प्रदर्शन, फूंका पुतला
राहुल गांधी के बयान पर भाजपाइयों का विरोध प्रदर्शन, फूंका पुतला
BJP workers protest Rahul Gandhi's statement, burn his effigyवाराणसी: भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा काशी क्षेत्र के उपाध्यक्ष अनूप जायसवाल के नेतृत्व में गुरुवार को वाराणसी में कार्यकर्ताओं ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान के विरोध में प्रदर्शन किया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर नारेबाजी की और जले हुए मोबिल का इस्तेमाल कर राहुल गांधी के पुतले का दहन किया. बता दें कि रायबरेली में राहुल गांधी ने पीएम और गृहमंत्री को गद्दार कहा था.प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “चाइना का ये यार है, राहुल गांधी गद्दार है” जैसे नारे लगाते हुए अपने विरोध को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया. भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि राहुल गांधी के हालिया बयान से वे असहमत हैं और इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. इस मौके पर भाजपा नेता अनूप जायसवाल ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार के कारण विपक्ष हताशा में बयानबाजी कर रहा है. उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता ऐसे बयानों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करते रहेंगे.कार्यक्रम का नेतृत्व अनूप जायसवाल कार्यक्रम का नेतृत्व अनूप जायसवाल ने किया, जबकि संचालन चन्द्र विजय सिंह और ओमप्रकाश यादव ‘बाबू’ ने किया. धन्यवाद ज्ञापन कुलदीप वर्मा और मंगलेश जायसवाल ने दिया. विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से गोपालजी जायसवाल, धीरेन्द्र शर्मा, राहुल जी, अखिल वर्मा, शेखर जायसवाल, कन्हैया लाल सेठ, मनीष चौरसिया, सुनील कनौजिया, सिद्धनाथ गौंड, धरमचंद, प्रदीप जायसवाल, अमित, रवि और प्रकाश सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे.https://www.youtube.com/watch?v=ywDGTZkXzk8
आपस में भिड़े डोनाल्ड ट्रंप-नेतन्याहू! इजरायल बोला- हमला नहीं रुकना चाहिए
आपस में भिड़े डोनाल्ड ट्रंप-नेतन्याहू! इजरायल बोला- हमला नहीं रुकना चाहिए
Donald Trump and Netanyahu clashed, Israel said, "The attacks must not stop."ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद अब खुलकर सामने आ चुका है. जी हां, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई फोन कॉल काफी तनावपूर्ण रही. क्योंकि, इन दोनों नेताओं के बीच विवाद इस बात को लेकर था कि ईरान पर एक बार फिर से सैन्य हमला किया जाए या बातचीत के जरिए समझौते की कोशिश करनी चाहिए.मकसद अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की जमीन तैयार करनाएक रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ईरान की सैन्य क्षमता और उसके अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से कमजोर करने के लिए दोबारा से हमला शुरू करना चाहते हैं. अमेरिकी वेबसाइट Axios ने सूत्रों के हवाले से ये दावा किया कि, फोन कॉल के बाद नेतन्याहू बेहद नाराज और बेचैन नजर आए. रिपोर्ट में यहां तक कि उन्होंने ये भी कहा कि, "उनके बालों में आग लगी हुई थी", यानी वह बेहद गुस्से और तनाव में नजर आ रहे थे.दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ये कहा था कि, उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित हमले को फिलहाल टाल दिया है. कतर, UAE और दूसरे अरब देशों ने अमेरिका से तनाव कम करने की अपील की थी, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई को रोक दी गई. इसके साथ ही पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में एक नया शांति प्रस्ताव भी तैयार किया गया है, जिसका मकसद अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की जमीन तैयार करना है.मध्यस्थ देश 'लेटर ऑफ इंटेंट तैयार' कर रहे!सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू से बातचीत में कहा कि मध्यस्थ देश एक "लेटर ऑफ इंटेंट" तैयार कर रहे हैं, जिस पर अमेरिका और ईरान हस्ताक्षर कर सकते हैं. इस प्रस्ताव के तहत 30 दिनों तक बातचीत चलेगी, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. हालांकि, इजरायल इस पूरी प्रक्रिया को लेकर काफी संशय में है. CNN रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सरकार के अंदर एक बड़ा वर्ग मानता है कि ईरान जानबूझकर बातचीत को लंबा खींच रहा है और इस दौरान अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है.यही वजह है कि इजरायल फिर से सैन्य कार्रवाई के पक्ष में दिख रहा है. ट्रंप ने हालांकि यह भी कहा कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका दोबारा युद्ध का रास्ता अपना सकता है. उन्होंने कहा, "सब कुछ अब सीमा रेखा पर खड़ा है. अगर सही जवाब नहीं मिला तो हालात बहुत तेजी से बदल सकते हैं."यह भी पढ़ें: भीषण गर्मी के बीच चल रही गर्म हवाएं, तप रही दिल्लीउधर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह अपने 14-सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर ही बातचीत आगे बढ़ाएगा. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वार्ता जारी है, लेकिन अभी किसी समझौते पर पहुंचना आसान नहीं दिख रहा. ऐसे में साफ है कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल फिलहाल एक ही पेज पर नजर नहीं आ रहे. एक तरफ ट्रंप कूटनीति को मौका देना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ नेतन्याहू मानते हैं कि ईरान पर दबाव बनाए रखने का सबसे असरदार तरीका सैन्य कार्रवाई ही है.https://www.youtube.com/watch?v=ywDGTZkXzk8