Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

रमना एसटीपी कर्मी का फंदे पर लटका मिला शव, पुलिस जांच में जुटी

रमना एसटीपी कर्मी का फंदे पर लटका मिला शव, पुलिस जांच में जुटी
Dec 24, 2025, 07:13 AM
|
Posted By Gaandiv

वाराणसी - लंका थाना क्षेत्र अंतर्गत रमना पुलिस चौकी के पास स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में बुधवार की सुबह एक युवक का शव फांसी के फंदे से लटका हुआ मिलने से हडकंप मच गया. मृत युवक की पहचान 24 वर्षीय लव कुश के रूप में हुई है. वह राजातालाब का निवासी बताया गया. लवकुश जलजल विभाग के संविदा चालक के पद पर तैनात था. घटना की जानकारी बुधवार की सुबह गार्ड रंजीत पटेल ने पुलिस और मृतक के स्वजन को दी. सूचना के बाद पहुंची पुलिस जांच में जुट गई. वहीं खबर पाने के बाद पहुंचे परिजनों में मातम पसर गया. उन्‍होंने हत्‍या की आशंका जताते हुए कार्रवाई की मांग की.

मौके से कोई सुसाइड नोट भी नही मिला है. घटना का सबसे दुखद पहलू ये है कि पिछले महीने ही लवकुश का विवाह हुआ था और आज उसका शव फंदे पर लटका मिला. पुलिस प्रारंभिक तौर पर घटना को आत्‍यमहत्‍या मान रही है.


GHFTRHFTH

हालांकि परिजनों ने पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. परिजनों का आरोप है कि लव कुश की हत्या कर शव को फांसी पर लटकाया गया है, ताकि घटना को आत्महत्या का रूप दिया जा सके. बताया जा रहा है कि मंगलवार रात एसटीपी प्लांट के आसपास कुछ युवकों द्वारा पार्टी किए जाने की भी जानकारी सामने आई है. सुबह जब स्थानीय लोगों की नजर फंदे से लटकते शव पर पड़ी तो उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी.

घटना के बाद आक्रोशित परिजन और स्थानीय लोग मौके पर ही धरने पर बैठ गए और पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि जब तक मामले की सच्चाई सामने नहीं आ जाती, वे शव को उठने नहीं देंगे. हालात बिगड़ते देख पुलिस ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया और स्थिति को नियंत्रित किया.


ALSO READ : पुलिस चेकिंग में बड़ी कार्रवाई: 202 किलो चाइनीज मांझे के साथ 6 गिरफ्तार, अभियान जारी


पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है. घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है. पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा. फिलहाल एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.

बरेका में अखिल भारतीय ऑन-द-स्पॉट निबंध प्रतियोगिता का आयोजन, 267 बच्चों ने लिया हिस्सा.
बरेका में अखिल भारतीय ऑन-द-स्पॉट निबंध प्रतियोगिता का आयोजन, 267 बच्चों ने लिया हिस्सा.
वाराणसी: केंद्रीय रेलवे महिला कल्याण संगठन (CRWWCO), नई दिल्ली के निर्देशन में रविवार को रेलवे कर्मचारियों के बच्चों के लिए अखिल भारतीय ऑन-द-स्पॉट निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसी क्रम में बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) महिला कल्याण संगठन की ओर से बाल निकेतन विद्यालय में प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसमें बरेका कर्मचारियों के करीब 267 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।प्रतियोगिता की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निबंध के विषय केंद्रीय रेलवे महिला कल्याण संगठन, नई दिल्ली की ओर से सीलबंद लिफाफे में भेजे गए थे। प्रतियोगिता स्थल पर सुबह 10:30 बजे निर्धारित समय पर बरेका महिला कल्याण संगठन की सचिव एवं वरिष्ठ कार्यकारी सदस्या पूजा मौर्या और सुनीता ने सीलबंद लिफाफा खोला और प्रतिभागियों के लिए विषयों की घोषणा की।प्रतियोगिता में बच्चों को आयु के आधार पर तीन समूहों में बांटा गया था। ग्रुप-1 (6 से 9 वर्ष) के लिए ‘स्वस्थ भोजन/पौष्टिक आहार’ और ‘मेरे कक्षाध्यापक/मेरी कक्षा अध्यापिका’ विषय निर्धारित किए गए। ग्रुप-2 (10 से 12 वर्ष) के बच्चों ने ‘मनोरंजन गतिविधियों का महत्व’ तथा ‘संयुक्त परिवार या एकल परिवार’ विषय पर निबंध लिखा। वहीं ग्रुप-3 (13 से 15 वर्ष) के प्रतिभागियों के लिए ‘देश की बढ़ती जनसंख्या: वरदान या अभिशाप’ और ‘जेन जी’ विषय रखे गए।ALSO READ : अन्विति में ‘रंगों की उड़ान’ ने भरी कल्पनाओं में उड़ान, हिंदी दिवस कार्यक्रम के अतिथि होंगे संजय मिश्रा...बच्चों को निबंध लिखने के लिए दो घंटे का समय दिया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने अपने विचारों को रचनात्मक और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता को लेकर बच्चों में खासा उत्साह और उमंग देखने को मिली।बरेका महिला कल्याण संगठन की सचिव राखी गुप्ता ने कहा कि आरडब्ल्यूडब्ल्यूसीओ के निर्देशन में देशभर में एक ही दिन आयोजित होने वाली यह प्रतियोगिता रेलवे कर्मचारियों के बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देती है। ऐसे आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, लेखन क्षमता, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इस अवसर पर बरेका महिला कल्याण संगठन की सदस्या प्रियंका प्रसाद, मीनाक्षी सिंह, बाल निकेतन की इंचार्ज स्वाति चौधरी एवं पूनम जायसवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
अन्विति में ‘रंगों की उड़ान’ ने भरी कल्पनाओं में उड़ान, हिंदी दिवस कार्यक्रम के अतिथि होंगे संजय मिश्रा...
अन्विति में ‘रंगों की उड़ान’ ने भरी कल्पनाओं में उड़ान, हिंदी दिवस कार्यक्रम के अतिथि होंगे संजय मिश्रा...
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित ‘अन्विति हिंदी सप्ताह’ के पांचवें दिन शनिवार को ‘रंगों की उड़ान’ चित्रकला प्रतियोगिता के साथ कार्यक्रमों की श्रृंखला आगे बढ़ी. जंतु विज्ञान विभाग के एसपीआरसी हाल में आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने शब्दों के बजाय रंगों और रेखाओं के माध्यम से विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण और भविष्य की अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उकेरा.हिंदी प्रकाशन समिति की ओर से आयोजित ‘अन्विति’ के तहत यह पांचवां और अंतिम कार्यक्रम रहा. प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों की कलाकृतियों में वर्ष 2200 का मंगल, ऑक्सीजन सिलेंडरों वाले शहर, हरित गुंबदनुमा आवास, भारतीय ध्वज फहराते अंतरिक्ष यात्री, रोबोट, उड़न तश्तरी, डीएनए की सर्पिल संरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पौधों से भरे बल्ब जैसे विषय देखने को मिले.विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक अवधारणाओं को कला के माध्यम से सहज और रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया. स्वीकृति कुमारी, श्रुति पाठक, अंकिता बिंद, प्राची तिवारी, सत्य राव और वैष्णवी बजाज सहित अनेक विद्यार्थियों की कृतियों में विज्ञान और कल्पना का अनूठा मेल दिखाई दिया.कुछ चित्रों में मंगल ग्रह पर कृषि और मानव बस्तियों की कल्पना की गई तो कुछ में पृथ्वी से दूर भविष्य की काल्पनिक नगरी दिखाई दी. कई चित्रों में तकनीक और प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश दिया गया, जबकि कुछ विद्यार्थियों ने भविष्य की प्रयोगशालाओं और अंतरिक्ष अभियानों को अपनी कला का विषय बनाया.प्रतियोगिता में एक ओर धुएं से घिरे शहर और ऑक्सीजन सिलेंडर नजर आए तो दूसरी ओर हरित आवास और अंतरिक्ष में तैरते यान दिखाई दिए. प्रदूषण और पर्यावरण संकट के बीच हरित भविष्य की कल्पना का यह विरोधाभास प्रतियोगिता की प्रमुख विशेषता रहा.7 सितंबर से शुरू हुआ था ‘अन्विति’ का सफर‘अन्विति हिंदी सप्ताह’ की शुरुआत 7 सितंबर को ‘काव्य सरिता’ से हुई थी। इसके बाद 8 सितंबर को ‘कथा सृजन’, 9 सितंबर को वाद-विवाद प्रतियोगिता और 10 सितंबर को ‘ज्ञान प्रभा’ प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को हिंदी में कविता, कहानी, तर्क-वितर्क और वैज्ञानिक विषयों को अभिव्यक्त करने का मंच मिला।ALSO READ : बनारस की हवा फिर बिगड़ी, 11वें से खिसककर 34वें पायदान पर पहुंची रैंकिंग, विशेषज्ञ ने गिनाए प्रदूषण के कारण...15 सितंबर को संजय मिश्रा के साथ हिंदी दिवस समारोह‘अन्विति’ हिंदी सप्ताह का समापन अब 15 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह के साथ होगा। समारोह का आयोजन महामना हॉल, सेमिनार कॉम्प्लेक्स, विज्ञान संकाय में दोपहर 2:45 बजे किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रख्यात अभिनेता संजय मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।इस अवसर पर ‘अचिंत्य’ पत्रिका की नई कड़ी ‘क्षितिज से परे’ का विमोचन भी प्रस्तावित है। समारोह के साथ ही ‘अन्विति’ के तहत आयोजित विभिन्न साहित्यिक, बौद्धिक और रचनात्मक गतिविधियों का समापन होगा।
बनारस की हवा फिर बिगड़ी, 11वें से खिसककर 34वें पायदान पर पहुंची रैंकिंग, विशेषज्ञ ने गिनाए प्रदूषण के कारण...
बनारस की हवा फिर बिगड़ी, 11वें से खिसककर 34वें पायदान पर पहुंची रैंकिंग, विशेषज्ञ ने गिनाए प्रदूषण के कारण...
वाराणसी : देश के कई शहरों के साथ वाराणसी की हवा की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है। ताजा रैंकिंग में वाराणसी की स्थिति पिछले साल की तुलना में नीचे खिसकी है. शहर के 11वें पायदान से 34वें स्थान पर पहुंचने को पर्यावरण विशेषज्ञ गंभीर संकेत मान रहे हैं. बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या, ट्रैफिक जाम, निर्माण गतिविधियां और कचरे का उचित प्रबंधन नहीं होना वायु प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं.इस संबंध में आईआईटी बीएचयू के केमिकल वैज्ञानिक प्रो. आर.एस. सिंह ने बताया कि किसी भी एयर क्वालिटी रैंकिंग को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि उसका आकलन किस अवधि और किन मानकों के आधार पर किया गया है. रैंकिंग में सार्वजनिक धारणा के साथ-साथ केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों की भी भूमिका होती है. यह भी महत्वपूर्ण है कि आंकड़े वर्ष के किस मौसम के लिए लिए गए हैं.उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर सर्दियों में गंगा के किनारे बसे शहरों में प्रदूषण की स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है. वहीं बारिश के दौरान वातावरण में मौजूद धूल और कई तरह के कण बारिश के साथ नीचे बैठ जाते हैं, जिससे हवा अपेक्षाकृत साफ रहती है. ऐसे में वाराणसी की मौजूदा रैंकिंग को समझने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि इसमें किन महीनों के आंकड़ों को आधार बनाया गया है.बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या बनी चुनौतीप्रो. सिंह के मुताबिक वाराणसी में पर्यटन गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या समेत धार्मिक पर्यटन के चलते शहर में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. पहले से अधिक जनसंख्या घनत्व वाले शहर में लोगों और वाहनों का दबाव बढ़ने से प्रदूषण पर भी असर पड़ता है.उन्होंने कहा कि वाहनों से होने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है. वाराणसी में लगातार बढ़ता ट्रैफिक और जाम स्थिति को और गंभीर बनाता है. जाम में वाहन लंबे समय तक धीमी गति से चलते या खड़े रहते हैं, जिससे ईंधन की खपत और प्रदूषक उत्सर्जन दोनों बढ़ते हैं. वाहनों से निकलने वाले विभिन्न प्रदूषक हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं.निर्माण कार्यों से बढ़ता पार्टिकुलेट प्रदूषणशहर में लगातार चल रहे निर्माण कार्य भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं. विशेषज्ञ के अनुसार निर्माण स्थलों पर सीमेंट, बालू और अन्य सामग्री का इस्तेमाल होता है. यदि इनका उचित तरीके से भंडारण और प्रबंधन नहीं किया जाता तो धूल के महीन कण हवा में फैल जाते है. यही पार्टिकुलेट मैटर वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण घटकों में शामिल है.प्लास्टिक प्रदूषण भी बन रहा गंभीर खतराप्रो. आर.एस. सिंह ने प्लास्टिक प्रदूषण को भी गंभीर समस्या बताया. उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण केवल पानी या मिट्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव हवा पर भी पड़ रहा है. वाहनों के टायर सड़क पर घिसते हैं, जिससे प्लास्टिक आधारित सूक्ष्म कण पर्यावरण में पहुंच सकते हैं.उन्होंने शहर के कचरा डंपिंग यार्ड का उदाहरण देते हुए बताया कि लंबे समय तक खुले में पड़े प्लास्टिक के टुकड़े धीरे-धीरे छोटे होते जाते हैं और माइक्रोप्लास्टिक में बदल सकते हैं. ये सूक्ष्म कण पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं और इनके प्रभाव को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.घरों में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी प्रदूषण का कारणप्रो. सिंह के अनुसार घरों में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद भी ऐसे रसायन छोड़ सकते हैं जो प्रदूषण में योगदान करते हैं. पेंट और उसमें इस्तेमाल होने वाले सॉल्वेंट से निकलने वाले वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों को प्रदूषण के कई ऐसे स्रोतों की जानकारी नहीं होती, जिनका सामना वे रोजाना करते हैं.उन्होंने जल प्रदूषण के संदर्भ में दवाओं के अवशेषों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक कई दवाएं शरीर में पूरी तरह मेटाबोलाइज नहीं होतीं और सीवेज के माध्यम से जल स्रोतों तक पहुंच सकती हैं। यानी प्रदूषण केवल हवा की समस्या नहीं है, बल्कि हवा, पानी और मिट्टी—तीनों स्तरों पर इसके प्रभाव को समझने की जरूरत है.15-25 साल बाद स्थिति और भयावह होने की आशंकाप्रो. सिंह ने चेतावनी दी कि यदि प्रदूषण को लेकर समाज में जागरूकता नहीं बढ़ाई गई और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले 15 से 25 वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है.ALSO READ : बीएचयू में स्वरचित हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता, 20 प्रतिभागियों ने रचनाओं से हिंदी और काशी का किया गुणगानपहली कक्षा से बच्चों को दी जाए प्रदूषण की जानकारीप्रदूषण की रोकथाम के उपायों पर उन्होंने सबसे पहले जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया. उनका कहना है कि बच्चों को कम उम्र से ही प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में बताया जाना चाहिए. कक्षा एक से ही पर्यावरण और प्रदूषण से जुड़े विषयों को व्यवहारिक तरीके से समझाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी प्रदूषण को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानकर अपनी भी जिम्मेदारी समझे.विशेषज्ञ का संदेश साफ है—शहर की हवा केवल मौसम से नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली, ट्रैफिक, निर्माण, कचरा प्रबंधन और जागरूकता से भी तय होती है. ऐसे में वाराणसी की गिरती रैंकिंग को महज आंकड़ा मानने के बजाय प्रदूषण के स्रोतों पर तत्काल काम करने की जरूरत है.