Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

वाराणसी में मां कुष्मांडा का सात दिवसीय श्रृंगार-संगीत महोत्सव शुरू, देशभर के कलाकार करेंगे आराधना

  वाराणसी में मां कुष्मांडा का सात दिवसीय श्रृंगार-संगीत महोत्सव शुरू, देशभर के कलाकार करेंगे आराधना
Aug 20, 2025, 12:37 PM
|
Posted By Gaandiv

वाराणसी: के दुर्गाकुंड स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में बुधवार से मां कूष्मांडा का वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव धूमधाम से आरंभ हो गया है. यह भव्य आयोजन 26 अगस्त तक सात दिनों तक चलेगा. हर दिन मां कूष्मांडा के एक विशिष्ट रूप का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा और साथ ही देशभर के नामचीन कलाकार संगीत व नृत्य के माध्यम से मां को सुरांजलि अर्पित करेंगे.


आयोजन की खास बातें:


सात दिन, सात रूप, सात रंग


इस बार महोत्सव को एक दिन और बढ़ाकर कुल सात दिन का कर दिया गया है.

आयोजन समिति के प्रमुख महंत पं. कौशलपति द्विवेदी ने मंगलवार को आयोजित प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस सात दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक कलाकार हिस्सा लेंगे, जो प्रतिदिन मां के दरबार में भक्ति संगीत प्रस्तुत करेंगे.


Also read:वाराणसी के पहलवान की मिर्जापुर में गूंज, अयोध्या के परमिन्दर को दी पटखनी




शास्त्रीय और लोक संगीत का संगम


कार्यक्रम के पहले तीन दिन भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित होंगे जबकि अंतिम चार दिन लोक संगीत की धारा बहेगी. कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रतिदिन संध्या समय होंगी, जहां श्रद्धालुओं का संगम देखने को मिलेगा.


पहले दिन की प्रस्तुतियां:


  1. पद्मभूषण पं. साजन मिश्रा व उनके पुत्र स्वरांश मिश्रा का शास्त्रीय गायन

  2. प्रो. राजेश साह का सितार वादन

  3. पं. देवाशीष डे का खयाल गायन

  4. कमला शंकर द्वारा हवाई गिटार की सुरमयी प्रस्तुति


Also read: स्मार्ट सिटी : वाराणसी में जल्द ही अंडरग्राउंड होंगे बिजली के तार, सर्वे शुरू



दूसरे दिन की प्रस्तुतियां:


  1. पद्मश्री पं. रोनू मजूमदार व ऋषिकेश मजूमदार की बांसुरी जुगलबंदी

  2. विशाल कृष्ण की कथक नृत्य प्रस्तुति.
  3. तीसरे दिन का शास्त्रीय संगम:

  4. केडिया बंधु की सितार-सरोद जुगलबंदी

  5. पं. राजेन्द्र प्रसन्ना व राजेश प्रसन्ना की बांसुरी युगल

  6. पं. देवव्रत मिश्रा का सितार वादन इसके अतिरिक्त 20 अन्य कलाकारों व 40 सह-कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुतियां


चार दिवसीय लोक संगीत संध्या:


21 अगस्त से शुरू होने वाली लोक संगीत संध्या में देशभर के लोकप्रिय लोक कलाकार भाग लेंगे, जिनमें प्रमुख नाम हैं:


  1. सांसद व गायक मनोज तिवारी.

  2. भोजपुरी भजन सम्राट भरत शर्मा व्यास.

  3. सुप्रसिद्ध लोकगायिका महुआ बनर्जी.

  4. भोजपुरी युवा स्टार अरविंद अकेला 'कल्लू'.

गोपाल राय, आर्यन बाबू समेत कुल 80 भजन कलाकार मां की महिमा का गुणगान करेंगे.


Also read:जिला पंचायत वाराणसी में निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया पर छाया विवाद, जांच के आदेश



श्रद्धालुओं के लिए भक्ति व कला का संगम.


यह सात दिवसीय महोत्सव न केवल भक्ति का अनुपम अवसर है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर ,शास्त्रीय और लोक संगीत का अद्वितीय मंच भी है.

दुर्गा मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है.


श्रृंगार-संगीत महोत्सव में भक्तों को भक्ति, संगीत, कला और आध्यात्म का एक अनूठा अनुभव मिलेगा.

स्थान: दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर, वाराणसी

तारीख: 20 अगस्त से 26 अगस्त 2025

समय: प्रतिदिन संध्या

गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।