वाराणसी में मां कुष्मांडा का सात दिवसीय श्रृंगार-संगीत महोत्सव शुरू, देशभर के कलाकार करेंगे आराधना

वाराणसी: के दुर्गाकुंड स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में बुधवार से मां कूष्मांडा का वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव धूमधाम से आरंभ हो गया है. यह भव्य आयोजन 26 अगस्त तक सात दिनों तक चलेगा. हर दिन मां कूष्मांडा के एक विशिष्ट रूप का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा और साथ ही देशभर के नामचीन कलाकार संगीत व नृत्य के माध्यम से मां को सुरांजलि अर्पित करेंगे.
आयोजन की खास बातें:

सात दिन, सात रूप, सात रंग
इस बार महोत्सव को एक दिन और बढ़ाकर कुल सात दिन का कर दिया गया है.
आयोजन समिति के प्रमुख महंत पं. कौशलपति द्विवेदी ने मंगलवार को आयोजित प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस सात दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक कलाकार हिस्सा लेंगे, जो प्रतिदिन मां के दरबार में भक्ति संगीत प्रस्तुत करेंगे.
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शास्त्रीय और लोक संगीत का संगम
कार्यक्रम के पहले तीन दिन भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित होंगे जबकि अंतिम चार दिन लोक संगीत की धारा बहेगी. कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रतिदिन संध्या समय होंगी, जहां श्रद्धालुओं का संगम देखने को मिलेगा.
पहले दिन की प्रस्तुतियां:
- पद्मभूषण पं. साजन मिश्रा व उनके पुत्र स्वरांश मिश्रा का शास्त्रीय गायन
- प्रो. राजेश साह का सितार वादन
- पं. देवाशीष डे का खयाल गायन
- कमला शंकर द्वारा हवाई गिटार की सुरमयी प्रस्तुति
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दूसरे दिन की प्रस्तुतियां:
- पद्मश्री पं. रोनू मजूमदार व ऋषिकेश मजूमदार की बांसुरी जुगलबंदी
- विशाल कृष्ण की कथक नृत्य प्रस्तुति.
- तीसरे दिन का शास्त्रीय संगम:
- केडिया बंधु की सितार-सरोद जुगलबंदी
- पं. राजेन्द्र प्रसन्ना व राजेश प्रसन्ना की बांसुरी युगल
- पं. देवव्रत मिश्रा का सितार वादन इसके अतिरिक्त 20 अन्य कलाकारों व 40 सह-कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुतियां
चार दिवसीय लोक संगीत संध्या:
21 अगस्त से शुरू होने वाली लोक संगीत संध्या में देशभर के लोकप्रिय लोक कलाकार भाग लेंगे, जिनमें प्रमुख नाम हैं:
- सांसद व गायक मनोज तिवारी.
- भोजपुरी भजन सम्राट भरत शर्मा व्यास.
- सुप्रसिद्ध लोकगायिका महुआ बनर्जी.
- भोजपुरी युवा स्टार अरविंद अकेला 'कल्लू'.
गोपाल राय, आर्यन बाबू समेत कुल 80 भजन कलाकार मां की महिमा का गुणगान करेंगे.
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श्रद्धालुओं के लिए भक्ति व कला का संगम.
यह सात दिवसीय महोत्सव न केवल भक्ति का अनुपम अवसर है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर ,शास्त्रीय और लोक संगीत का अद्वितीय मंच भी है.
दुर्गा मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है.

श्रृंगार-संगीत महोत्सव में भक्तों को भक्ति, संगीत, कला और आध्यात्म का एक अनूठा अनुभव मिलेगा.
स्थान: दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर, वाराणसी
तारीख: 20 अगस्त से 26 अगस्त 2025
समय: प्रतिदिन संध्या



