श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर: बाबा दरबार में आज से स्पर्श दर्शन पर रोक, 3 जनवरी तक व्यवस्था लागू

वाराणसी- श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में 25 दिसम्बर से 3 जनवरी तक स्पर्श दर्शन पर रोक लगाई गई है, नए साल पर आने वाले श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है, मंदिर प्रशासन ने भक्तों के लिए स्पर्श दर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है, भीड़ कम होने पर ही आगे का फैसला लिया जाएगा. बतादें कि शीतावकाश और क्रिसमस के कारण छुट्टियां चल रही हैं. इस वजह से मंदिर में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ सकती है.

मंदिर न्यास की ओर से बुधवार रात जारी एक सूचना में स्पष्ट किया गया है, कि धाम में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ हो रही है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ये रोक लगाई गई है. उधर, मंदिर के नंदू फारिया मार्ग पर गेट के पास नया परमानेंट चेकिंग पॉइंट बनाया जा रहा है.
मंदिर प्रशासन के द्वारा श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रवेश द्वार पर फुटफॉल काउंट भी लगाया गया है, यह मशीन मंदिर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की गिनती करेगी.
ऐसे होते हैं स्पर्श दर्शन
काशी विश्वनाथ मंदिर में स्पर्श दर्शन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. इसमें भक्त सीधे गर्भगृह के भीतर जाकर ज्योतिर्लिंग को स्पर्श कर सकते हैं. स्पर्श दर्शन यानी किसी देवी – देवता की पवित्र मूर्ति, या उनसे जुड़ी चीजों को छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना. जहां हम साधारण दर्शन में हम केवल आंखों से देखते हैं, लेकिन स्पर्श दर्शन के दौरान श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के शिवलिंग को छू सकते हैं अपना सिर वहां रख सकते हैं. और जल व बेलपत्र सीधे अर्पित कर सकते हैं. इसलिए स्पर्श दर्शन भक्तों के लिए बहुत ही भावुक पल होता है. सामान्य दिनों में स्पर्श दर्शन के लिए समय निर्धारित होता है, लेकिन भीड़ बढ़ने पर सुरक्षा और व्यवस्था के कारण इसे रोक दिया जाता है. अब झांकी दर्शन हो सकेंगे.
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अब ऐसे होंगे दर्शन
स्पर्श दर्शन पर रोक लगने के बाद अब श्रद्धालु केवल झांकी दर्शन ही कर पाएंगे. भक्तों को गर्भगृह के बाहर चौखट से ही बाबा के दर्शन करने होंगे. इससे कतारें लगातार चलती रहती हैं और कम समय में अधिक लोग दर्शन कर पाते हैं.



