नमो ब्रिज के नाम से जाना जाएगा काशी में बनने वाला सिग्नेचर ब्रिज, रेल मंत्री ने किया एलान

वाराणसी : देश की दूसरी और उत्तर प्रदेश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन की सौगात देने शनिवार को वाराणसी पहुंचे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ी बात कही है. यहां उन्होंने मॉडल रेलवे स्टेशन के रूप में तैयार किए जा रहे काशी रेलवे स्टेशन और सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण कार्य का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने एलान किया कि सिग्नेचर ब्रिज का नाम नमो ब्रिज रखा जाएगा. रेल मंत्री ने कहा कि पास में ही नमो घाट है और उसके नजदीक से ही यह ब्रिज गुजरने वाला है, इसीलिए इसका नाम नमो ब्रिज रखना उचित होगा.
उन्होंने बताया कि इस ब्रिज के बनने के बाद पूर्वांचल की कनेक्टिविटी और भी मजबूत हो जाएगी. इससे धर्म की नगरी काशी में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर परिवहन की सुविधा मिल पाएगी.
फुटबॉल मैदान की तर्ज पर विकसित होगा काशी स्टेशन
निर्माणाधीन काशी रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के बाद रेल मंत्री ने बताया कि यह रेलवे स्टेशन काशी के महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. यहां कुल 6 प्लेटफार्म बनाए जाएंगे. इसे विकसित करने के साथ ही काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी ध्यान में रखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी. प्लेटफार्म का निर्माण फुटबॉल मैदान की तर्ज पर होगा और इसमें एक साथ 50 हजार लोग खड़े हो पाएंगे. इससे बड़े धार्मिक आयोजनों और पर्वों के दौरान यात्रियों की भीड़ को सुव्यवस्थित ढंग से नियंत्रित करने में काफी मदद मिलेगी.
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि काशी रेलवे स्टेशन के दक्षिणी छोर से बाबा विश्वनाथ धाम की दूरी लगभग 2 किलोमीटर की है. ज्यादातर श्रद्धालु घाटों के सहारे पैदल ही विश्वनाथ धाम निकल पड़ते हैं. काशी में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन पूजन के लिए आते हैं. ऐसे में स्टेशन के विकसित होने से उन्हें आवागमन में सुविधा मिलेगी. उन्होंने बताया कि नमो ब्रिज और काशी रेलवे स्टेशन के निर्माण कार्य पूरा होने के बाद वाराणसी के साथ पूरे पूर्वांचल में परिवहन की व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी. ये दोनों परियोजनाएं काशी और काशी के आसपास के जिलों के विकास में अहम भूमिका निभाएंगी.
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वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात
रेल मंत्री ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को भी काशी के लिए एक बड़ी सौगात बताया है. उन्होंने बताया कि इस ट्रेन को वाराणसी और दिल्ली के बीच रात में चलाया जाएगा और इसी को ध्यान में रखते हुए इसमें अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. यह मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी सुविधाजनक होगी. उन्होंने बताया कि रात के सफर में यात्री परेशान ना हो, इसलिए उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह ट्रेन विशेष रूप से वाराणसी से नई दिल्ली और नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलाई जा रही है. त्यौहार व अन्य अवसरों पर वाराणसी आने और जाने वाले लोगों के लिए यह ट्रेन माइल स्टोन साबित होगी.
यूपी में भी जल्द बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट
यूपी में भी जल्द बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट शुरू होगा. दिल्ली-वाराणसी-गुवाहाटी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पीएम मोदी ने इसके नॉर्दर्न कॉरिडोर को मंजूरी दी है. यह ट्रेन दिल्ली से चलकर आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या होते हुए वाराणसी पहुंचेगी. इसके बाद पटना होते हुए गुवाहाटी तक जाएगी. रेल मंत्री के मुताबिक, कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से आगरा का सफर 59 मिनट, कानपुर का 1 घंटे 45 मिनट और लखनऊ का 2 घंटे 12 मिनट में पूरा होगा. दिल्ली से वाराणसी का सफर 3 घंटे 33 मिनट में पूरा होगा.



