पोखरा बन गया सिगरा स्टेडियम का स्विमिंग पूल
वाराणसीः हेडिंग पढ़कर आपको थोड़ा अचरज हो रहा होगा और सोच भी रहे होंगे कि करोड़ों की लागत से बना पूल पोखरा कैसे बन सकता है लेकिन सच यही है. जिस तरह के पोखरे का पानी को बदले जाने और साफ करने का कोई इंतजाम नहीं होता इस समय सिगरा स्टेडियम के स्विमिंग पूल का पानी भी साफ नहीं होने की वजह से गंदा, मटमैला हो गया है औऱ इसमें काई जम गई है. विडंबना यह है कि खिलाड़ी इसमें अभ्यास करने को मजबूर हैं और गंदे पानी की वजह से बीमार भी हो रहे हैं.
गंदे पानी की वजह से प्रभावित हो रहा खिलाड़ियों का अभ्यास
तैराकी को अपना करियर बनाने की चाह लेकर प्रतिदिन 80 खिलाड़ी सिगरा स्टेडियम पहुंचते रहे हैं. बड़े पूल के गंदे पानी की वजह से उसमें अभ्यास नहीं कर पाते हैं. कंप्टीशन के समय मजूबरी में अभ्यास करना पड़ता है तो उन्हें बीमारी का डर सताता है. आल वेदर नहीं होने की वजह से स्विमिंग पूल का संचालन अप्रैल से सितंबर माह तक ही हो पाता है. इसके बीच भी गंदे पानी की वजह से खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित होता है. विडंबना देखिए सिगरा स्टेडियम के स्विमिंग पूल के फिल्टर प्लांट को संचालित करने के लिए कर्मचारी की कमी है. नौ महीने पहले तक एक टेक्नीशियन यहां तैनात था लेकिन उसे हटा दिया गया था. कुछ माह पूर्व तक स्विमिंग पूल के रखरखाव की जिम्मेदारी उसका निर्माण करने वाली कंपनी ने किया लेकिन उसके बाद उसे उसकी हालत पर छोड़ दिया.

दो महीने से पूल में जमा है गंदा पानी
स्विमिंग पूल की सफाई दो महीनों से नहीं हुई है. इसके पानी बदला गया न हीं तल पर जमे बालू को हटाया गया है. नियमों के मुताबिक पूल के तल में जमी हुई गंदगी को साफ़ करने के लिए सप्ताह में एक या दो बार अंडरवाटर वैक्यूम का इस्तेमाल करना चाहिए. शैवाल और गंदगी को दीवारों पर जमने से रोकने के लिए दीवारों और सीढ़ियों को हफ़्ते में एक बार जरूर ब्रश करना चाहिए. पूल टेस्ट किट के माध्यम से पानी के pH और क्लोरीन स्तर की जांच करनी चाहिए. पानी में बैक्टीरिया और कार्बनिक अशुद्धियों को नष्ट करने के लिए सप्ताह में एक बार chlorine shock का उपयोग करना चाहिए. पूल के मुख्य फ़िल्टर को हर चार से छह से सप्ताह में खोलकर अच्छी तरह साफ करना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर पूल के पानी में TDS का स्तर 2,500 पीपीएम से अधिक हो जाता है. इसकी वजह से पूल का नुकसान होता है साथ ही तैराकों की त्वचा में चिपचिपापन, सूखापन या आंखों में जलन जैसी असहजता महसूस होने लगती है. स्विमिंग पूल में बार-बार काई जमने लगती है. पानी धूंधला, मटमैला हो जाता है.

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तैराकी में मिलते हैं सबसे अधिक मेडल
वाराणसी में तैराकी में बहुत संभावना है. यहां नदियों में तैराकी सीखने वाले स्विमिंग पूल में प्रशिक्षण प्राप्त करके खिलाड़ी के तौर पर तैयार होते हैं. इन खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिले तो ओलंपिक में भारत को मेडल दिला सकते हैं. ओलिपिंक में सबसे अधिक मेडल वाले खेलों में तैराकी शामिल है. बीते पेरिस ओलिपिंक में तैराकी में 35 इवेंट्स आयोजित किए गए थे. इन सभी स्पर्धाओं में प्रत्येक (गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज) मेडल मिलाकर कुल 105 पदक दांव पर होते हैं. ये 35 इवेंट्स पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अलग-अलग और एक मिक्स्ड (पुरुष-महिला) रिले रेस में विभाजित होते हैं.
सिर्फ हो रही कागजी कार्रवाई 66782 स्कवायर मीटर एरिया में 320 करोड़ रुपये की लागत से सिगरा के संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम पुर्नविकास किया गया है. इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 में की थी. मार्च 2023 मार्च में प्रधानमंत्री ने लगभग 120 करोड़ रुपए से तैयार फर्स्ट फेज का उद्घाटन किया. इसमें मल्टी स्टोरी स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाया गया जिसमें इंडोर स्विमिंग पूल भी था. 20 अक्टूबर 2024 को पीएम मोदी ने दूसरे और तीसरे फेज, जिसकी लागत लगभग 200 करोड़ रुपये थी का उद्घाटन कर दिया. स्विमिंग पूल की सफाई का मुद्दा गांडीव डिजिटल ने पहले भी उठाया था. स्विमिंग पूल के रखरखाव की जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी की है. उस वक्त स्मार्ट सिटी की ओऱ से बताया गया था सारी व्यवस्था जल्द दुरुस्त हो जाएगी लेकिन हुआ कुछ भी नहीं. वहीं क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी नवीन कुमार सिंह का कहना है कि स्विमिंग पूल की देख-रेख स्मार्ट सिटी करता है. उसे पत्र लिखा गया है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.



