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चार धाम यात्रा से पहले बर्फबारी ने दी दस्तक, टेंशन में श्रद्धालु

चार धाम यात्रा से पहले बर्फबारी ने दी दस्तक, टेंशन में श्रद्धालु
Mar 24, 2026, 07:28 AM
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Posted By Preeti Kumari

उत्तराखंड के मार्च के महीने में बारिश और बर्फबारी ने श्रद्धालुओं की मुसीबत बढ़ा दी है. लेकिन एक ओर बर्फबारी पर्यटकों के चेहरे खिले हुए हैं. बर्फ देखकर खुश हैं और जमकर मौज-मस्ती कर रहे हैं. मगर बहुत से श्रद्धालु टेंशन ये सोचकर टेंशन में है कि कि चार धाम यानी कि गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब की यात्रा की तैयारी कर रहे हैं. दरअसल, 19 अप्रैल से उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू होने जा रही है.


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श्रद्धालुओं को काफी परेशानी उठानी पड़ सकती


इन जगहों पर सड़क, बिजली, पानी, हॉस्पिटल और होटल-रेस्टोरेंट, ढाबे में मरम्मत का काम होना है, लेकिन भारी बर्फबारी के चलते यह सब काम रुका हुआ है. ऐसे में अगर सही समय पर सड़क, बिजली से लेकर पानी का काम-काज पूरा नहीं हुआ तो श्रद्धालुओं को काफी परेशानी उठानी पड़ सकती है. हालांकि, चार धाम यात्रा को ध्यान में रखकर प्रशासन जल्द से जल्द कार्यों को पूरा करने में लगे हुए है.


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वहीं बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण का काम चल रहा है. उसके काम पर भी बर्फबारी का सीधा असर पड़ा है. वहां पर पिछले एक हफ्ते से काम रुका हुआ है, इसकी वजह भारी बर्फबारी है. बता दें कि 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे. वहीं 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे. इसके साथ ही 23 को हेमकुंड साहिब के भी कपाट खोले जाएंगे.


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हेमकुंड साहिब में लाखों यात्री दर्शन को पहुंचते


चारों धामों और हेमकुंड साहिब में हर साल लाखों यात्री दर्शन करने पहुंचते हैं, उत्तराखंड की चार धाम यात्रा राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार भी है. साथ ही स्थानीय लोगों के लिए यह उनकी आर्थिकी से सीधे जुड़ा हुआ है, क्योंकि 6 महीने ही चार धाम के कपाट खुलते हैं और 6 महीने शीतकाल के लिए बंद हो जाते हैं. इसलिए जब भी 6 महीने के लिए कपाट खुलने होते हैं तो व्यापारी और स्थानीय लोग इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं. लेकिन मार्च के महीने में दो बार जबरदस्त बर्फबारी हुई है, जिसकी वजह से न सिर्फ स्थानीय व्यापारियों बल्कि आम लोगों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. क्योंकि चार धाम यात्रा शुरू होने से पहले तमाम स्थानीय व्यापारी अपनी दुकानों, होटल ,ढाबों और रिसॉर्ट के लिए सामान लेकर जाते हैं. लेकिन लगातार बर्फबारी के चलते रास्ते बंद है. जिसकी वजह से वह अपना सामान नहीं ला पा रहे हैं.


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बर्फबारी ने केदारनाथ में रोका पुनर्निर्माण का काम


दूसरी तरफ केदारनाथ धाम में भी जबरदस्त बर्फबारी हुई है. केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण का काम चल रहा है. ऐसे में वहां पर मार्च के महीने में दो बार जबरदस्त बर्फबारी होने की वजह से काम बिल्कुल रुका हुआ है. कई तस्वीरों में मौजूद पुलिसकर्मी वहां पर बर्फ हटाते हुए साफ देखे जा सकते हैं. बर्फ इतनी ज्यादा है कि फिलहाल वहां पर काम करना बहुत मुश्किल है. केदारनाथ धाम में 2013 में आई आपदा के बाद वहां लगातार पुनर्निर्माण का काम चल रहा है और काफी हद तक फेज वन का काम पूरा हो चुका है. लेकिन लगातार हो रही बर्फबारी ने फिलहाल वहां काम में बाधा पैदा की हुई है.

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वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में रविवार को संस्थापक राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई. इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने पंत प्रशासनिक भवन में उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए. साथ ही महात्मा गांधी एवं डॉ. भगवान दास के चित्रों पर भी पुष्प अर्पित कर नमन किया.इसके बाद शिक्षा शास्त्र विभाग में स्थापित बाबू शिव प्रसाद गुप्त की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई. विश्वविद्यालय परिसर में उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए. वक्ताओं ने कहा कि बाबू शिव प्रसाद गुप्त का जीवन त्याग, समर्पण और देशसेवा की प्रेरणा देता है.कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी के प्रतिनिधि प्रो. सुधीर कुमार शुक्ल ने कहा कि काशी विद्यापीठ की स्थापना देश को शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की गई थी और आज भी यह अपने मूल उद्देश्यों पर आगे बढ़ रहा है.ALSO READ:नमो घाट की दुकान में लगी आग ने उजागर की सुरक्षा में बड़ी चूक, फायर सेफ्टी इंतजामों पर उठे सवाल...कार्यक्रम में कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. रमाकांत सिंह, मुख्य गृहपति डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह, कुलपति के पीएस प्रमोद कुमार सहित शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.
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वाराणसी: नमो घाट फेस-2 पर शनिवार देर रात एक फास्ट फूड की दुकान में लगी आग ने घाट पर मौजूद दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना भले ही समय रहते नियंत्रित हो गई, लेकिन इसने यह साफ कर दिया कि भीड़भाड़ वाले इस पर्यटन स्थल पर आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं.जानकारी के मुताबिक चंदौली निवासी आरएन तिवारी की “तीखी तेवर” नाम से संचालित दुकान में कर्मचारी रात में बचा हुआ इडली-सांभर गर्म कर रहा था. इसी दौरान गैस सिलेंडर के रेगुलेटर में अचानक आग लग गई. देखते ही देखते आग ने फाइबर से बनी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया. मौके पर मौजूद दुकानदारों और कर्मचारियों ने बाल्टियों से पानी डालकर आग पर काबू पाया.इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन दुकान में रखा सामान जलकर खाक हो गया.दुकान संचालक के अनुसार करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है.घटना के बाद नमो घाट पर बनी दुकानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था चर्चा का विषय बन गई है. स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत यहां एल्यूमिनियम शीट, लोहे की पाइप, फाइबर और लकड़ी जैसी हल्की सामग्री से 80 से अधिक दुकानें बनाई गई हैं. हर दिन यहां हजारों पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं, लेकिन अधिकांश दुकानों में आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण मौजूद नहीं हैं.शनिवार की रात आग बुझाने के दौरान भी अग्निशमन यंत्रों की गैरमौजूदगी साफ दिखी.यदि आग ने विकराल रूप ले लिया होता या सिलेंडर फट जाता, तो कई दुकानों तक इसकी चपेट पहुंच सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था.स्थानीय लोगों का कहना है कि नमो घाट जैसे संवेदनशील और व्यस्त स्थल पर नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाना चाहिए. साथ ही सभी दुकानों में अग्निशमन यंत्र अनिवार्य किए जाएं और कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए.ALSO READ : रमना स्वास्थ्य केन्द्र से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, बच्चों को पिलाई गई ‘दो बूंद जिंदगी की’...यह घटना प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है. लोगों का मानना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय अभी से सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर उन्हें मजबूत किया जाना जरूरी है, ताकि भविष्य में जन-धन के नुकसान से बचा जा सके.