नमो घाट की दुकान में लगी आग ने उजागर की सुरक्षा में बड़ी चूक, फायर सेफ्टी इंतजामों पर उठे सवाल...

वाराणसी: नमो घाट फेस-2 पर शनिवार देर रात एक फास्ट फूड की दुकान में लगी आग ने घाट पर मौजूद दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना भले ही समय रहते नियंत्रित हो गई, लेकिन इसने यह साफ कर दिया कि भीड़भाड़ वाले इस पर्यटन स्थल पर आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं.
जानकारी के मुताबिक चंदौली निवासी आरएन तिवारी की “तीखी तेवर” नाम से संचालित दुकान में कर्मचारी रात में बचा हुआ इडली-सांभर गर्म कर रहा था. इसी दौरान गैस सिलेंडर के रेगुलेटर में अचानक आग लग गई. देखते ही देखते आग ने फाइबर से बनी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया. मौके पर मौजूद दुकानदारों और कर्मचारियों ने बाल्टियों से पानी डालकर आग पर काबू पाया.
इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन दुकान में रखा सामान जलकर खाक हो गया.दुकान संचालक के अनुसार करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है.
घटना के बाद नमो घाट पर बनी दुकानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था चर्चा का विषय बन गई है. स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत यहां एल्यूमिनियम शीट, लोहे की पाइप, फाइबर और लकड़ी जैसी हल्की सामग्री से 80 से अधिक दुकानें बनाई गई हैं. हर दिन यहां हजारों पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं, लेकिन अधिकांश दुकानों में आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण मौजूद नहीं हैं.
शनिवार की रात आग बुझाने के दौरान भी अग्निशमन यंत्रों की गैरमौजूदगी साफ दिखी.यदि आग ने विकराल रूप ले लिया होता या सिलेंडर फट जाता, तो कई दुकानों तक इसकी चपेट पहुंच सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था.
स्थानीय लोगों का कहना है कि नमो घाट जैसे संवेदनशील और व्यस्त स्थल पर नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाना चाहिए. साथ ही सभी दुकानों में अग्निशमन यंत्र अनिवार्य किए जाएं और कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए.
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यह घटना प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है. लोगों का मानना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय अभी से सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर उन्हें मजबूत किया जाना जरूरी है, ताकि भविष्य में जन-धन के नुकसान से बचा जा सके.



