रमना स्वास्थ्य केन्द्र से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, बच्चों को पिलाई गई ‘दो बूंद जिंदगी की’...

वाराणसी : जिले में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान-2026 का शुभारंभ रविवार को रमना स्वास्थ्य केन्द्र से किया गया.अभियान का उद्घाटन प्रभारी चिकित्सा अधिकारी एवं सीपीआर विशेषज्ञ डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को पोलियो रोधी दवा की ‘दो बूंद जिंदगी की’ पिलाकर किया.इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में अभिभावक और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे.

डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का उद्देश्य देश के प्रत्येक 0 से 5 वर्ष तक के बच्चे को पोलियो से सुरक्षा प्रदान करना है.उन्होंने कहा कि अभियान के पहले दिन यानी 28 जून को सभी स्वास्थ्य केन्द्रों और निर्धारित पोलियो बूथों पर बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जा रही है.वहीं 29 और 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को दवा देंगी, जो किसी कारणवश पोलियो बूथ तक नहीं पहुंच पाएंगे.
उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी बच्चे को नियमित टीकाकरण के तहत पोलियो की सभी खुराकें पहले ही मिल चुकी हैं, तब भी राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के दौरान दी जाने वाली अतिरिक्त खुराक अवश्य दिलाएं.यह अतिरिक्त खुराक बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाती है तथा पोलियो संक्रमण से बचाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
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डॉ. द्विवेदी ने कहा कि पोलियो एक गंभीर बीमारी है, जो बच्चों में स्थायी विकलांगता का कारण बन सकती है और इसका कोई निश्चित उपचार उपलब्ध नहीं है.इसलिए समय-समय पर पोलियो की खुराक पिलाना ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है. उन्होंने सभी अभिभावकों से अपने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को नजदीकी पोलियो बूथ तक लाने और घर-घर आने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीमों का पूरा सहयोग करने की अपील की.
कार्यक्रम के दौरान डॉ. द्विवेदी ने अभियान में जुटे स्वास्थ्य कर्मियों, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उनके समर्पण और मेहनत से ही पोलियो मुक्त भारत का लक्ष्य साकार होगा.स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से अपील की कि कोई भी बच्चा पोलियो की दो बूंद पीने से वंचित न रहे, ताकि आने वाली पीढ़ी को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके.



