काशी में विशेष तांत्रिक पूजन और हवन, इन देवी देवताओं का हो रहा आह्वान

वाराणसी : धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में पौष मास की पूर्णिमा से चैत्र माह की पूर्णिमा तक विशेष तांत्रिक पूजन और हवन का आयोजन किया जा रहा है. जनवरी के पहले सप्ताह से हरिश्चंद्र घाट पर यह पूजन 90 दिनों तक चलेगा. इसमें महाश्मशान घाट पर रहने वाले अघोरी मार्तंड भैरव, गायत्री और मां चामुंडा का आवाहन करेंगे. इस पूजन में भगवान शिव के 28वें स्वरूप एवं तंत्र विद्या के देवता लकुलीश का विशेष पूजन होगा. महाश्मशान हरिश्चंद्र घाट पर स्थित अघोरपीठ पर पौष मास की पूर्णिमा से प्रारंभ है.
अग्नि कुंड में आहुति दे रहे

इस तंत्र विद्या के पूजन का अनुष्ठान गुरु अघोराचार्य कपाली बाबा महाराज ने लिया है. जबकि पूजन ब्रह्महिष्ठा भैरव स्वामी आश्रम ट्रस्ट के सानिध्य में संपन्न हो रहा है. पूजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं साधक सहभागिता कर भगवान की कृपा प्राप्त कर अपने आध्यात्मिक उत्थान का लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
इस अनुष्ठान की विशेष व्यवस्था के अंतर्गत दिवस काल में शिव पंचाक्षरी मंत्र का जप एवं रुद्र गायत्री हवन संपन्न किया जा रहा है. वहीं रात 12:00 बजे से भोर 5:00 बजे तक महाश्मशान के अघोरी तंत्र-मंत्र की साधना से अग्नि कुंड में आहुति दे रहे हैं. इस अनुष्ठान में प्रमुख रूप से संचालक रामकृष्ण भैरव, सार्थक बाबा, ओपी राय, आशीष सिंह, अशोक सिंह, दिव्यांशु सिंह, शशांक श्रीवास्तव, भैरव देवदत्त शर्मा, राजकुमार बाबा एवं बांके सिंह सहित अन्य साधक शामिल हैं.
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महादेव के 28वें स्वरूप के पूजन से मिलती है तंत्र और श्मशान भय से मुक्ति
भगवान शिव के 28वें स्वरूप लकुलीश के पूजन से साधक को तंत्र-भय, श्मशान भय, मृत्यु भय एवं रोग से मुक्ति मिलती है. अघोराचार्य कपाली बाबा महाराज ने बताया कि अघोर परंपरा में गुरु को शिव का स्वरूप माना गया है. लकुलीश पूजन से गुरु तत्व प्रबल होता है. मन की चंचलता, भय, क्रोध और मोह घटते हैं, जिससे साधना दीर्घकाल तक चल पाती है. नकारात्मक शक्तियां ऊपरी बाधाएं और तांत्रिक प्रभाव शांत होते हैं.



