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लगातार गिर रहा तापमान, दिसंबर में कड़ाके की पड़ेगी ठंड

लगातार गिर रहा तापमान, दिसंबर में  कड़ाके की पड़ेगी ठंड
Nov 27, 2025, 08:49 AM
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Posted By Gaandiv


वाराणसीः जनपद में ठंड ने पिछले तीन दिनों से अपनी पकड़ धीरे-धीरे मजबूत कर ली है. इसके चलते अब धूप निकलने के बावजूद ठंड की सिहरन लोगों को सताने लगी है. दूसरी ओर न्यूनतम तापमान भी लगातार नीचे की ओर रूख करता नजर आ रहा है. पिछले दो दिनों के दौरान यह गिरकर 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. मौसम विभाग के अनुसार यह सामान्य न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री की तुलना में कम है. वहीं जनपद के ग्रामीणों इलाकों में सुबह और रात के वक्त चल रही उत्तर पश्चिम की ठंडी हवाएं मौसम को और ठंडा कर रही हैं, जिसका असर शहर के मौसम पर भी पड़ता जा रहा है और पारा प्रतिदिन नीचे उतर रहा है.


दोपहर बाद ही धूप कर रही असर


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वसे मौसम के रूख को देखते हुए दिन में धूप भी पूरी तरह लोगों को राहत नहीं दे पा रही है. पारा कम होने के चलते दोपहर से पहले धूप की गर्माहट कमजोर पड़ रही है. वहीं मौसम के रूख में बदलाव तथा वायु प्रदूषण के चलते कोहरा का असर दोपहर तक देखा जा सकता है. इसी कड़ी में गुरुवार को कहीं तेज तो कहीं धूप भी आशिंक रूप से बेअसर साबित हो रही है. इसके चलते दिन में हल्की धूप और पांच से आठ किलोमीटर की रफ्तार से चल रही हवा की ठंडक सुबह शाम सर्दी की सिरहन को बढ़ा रही है.

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इसलिए पड़ेगी कड़ाके की ठंड

मौसम विशेषज्ञों की माने तो पिछले कुछ दिनों से हिमालयी क्षेत्र की ओर से आने वाली ठंडी और शुष्क हवाएं तेजी से न्यूनतम तापमान को गिरा रही हैं. इसी प्रवाह के चलते आगामी दिनों में पारा और नीचे जा सकता है. कयास लगाया गया है कि दिसंबर के शुरुआती दिनों में न्यूनतम तापमान पांच डिग्री के करीब पहुंच सकता है, जिससे ठंड कड़ाके की पड़ेगी.



लगातार गिर रहा पारा

पीछे के आंकड़ों पर नजर डालें तो तापमान में गिरावट लगातार जारी है. 22 नवंबर को शहर का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था, जो अगले दिन थोड़ा और कम हो गया. वहीं 24 नवंबर को यह 9.0 डिग्री के आसपास रहा. इसी क्रम में इसकी रफ्तार कर होती रही जिसके चलते यह गुरुवार को 8.0 डिग्री पर पहुंच गई है.वैसे कहा जाए तो लगातार तीन दिन की इस गिरावट साफ संकेत दे रही है कि सर्दी अब पूरी रफ्तार से अपना दायरा बढ़ाएगी.

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बाजारों पर दिख रहा असर

तेजी से बढ़ रही ठंड का असर खासकर ग्रामीण इलाकों के बाजारों पर दिख रहा है. वहीं शहर के दूर दराज बाजारों पर इसकी आंशिक असर देखने को मिल रहा है. शहर का पांडेयपुर, शिवपुर,बाबतपुर, रोहनिया, आशापुर, सारनाथ, लंका, मंडुआडीह, बीएलडब्लू, लोहता आदि इलाकों में शाम होते ही सन्नाटा सा छाने लगा है. उधर नगर के गौदौलिया,पांडेयपुर, अर्दली बाजार, सिगरा, लहुराबीर आदि प्रमुख बाजारों में गर्म कपड़ों की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है. इसके साथ ही कम दामों के स्वेटर, जैकेट और ऊनी वस्त्रों की मांग को देखते हुए कई अस्थायी दुकानें अचानक से बढ़ गई है जो पूरी तरह सजी इन गर्म कपड़ों से भरी है. लोग भी अब सर्दी का रूख देखते हुए अपने को तैयार करना शुरू कर दिया है.

योगी सरकार और अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के बीच घमासान, धर्मयुद्ध आंदोलन के लिए किया लखनऊ प्रस्‍थान
योगी सरकार और अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के बीच घमासान, धर्मयुद्ध आंदोलन के लिए किया लखनऊ प्रस्‍थान
वाराणसी: गौ प्रतिष्‍ठा को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी से धर्मयुद्ध आंदोलन का शंखनाद किया. अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश सरकार को दी गई 40 दिन की अवधि समाप्त होने से पांच दिन पहले ही आंदोलन की रणनीति के तहत लखनऊ के लिए प्रस्थान किया. बीते शुक्रवार की सुबह केदारघाट स्थित विद्या मठ आश्रम स्थित गौशाला मैं सबसे पहले गौ पूजन किया गया. इसके बाद निकलकर वह पालकी पर सवार हुए और चिंतामणि गणेश मंदिर जा पहुंचे. वहां 11 बटुकों ने मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत और स्वस्तिवाचन किया. मंदिर में गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद वह संकट मोचन हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक और बजरंग बाण का पाठ किया. इसके बाद जयकारों के साथ अपनी वैनिटी वैन में सवार होकर लखनऊ के लिए प्रस्थान किया.जिंदा हिंदू लखनऊ चलेंस्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपने ही वोट से चुनी गई सरकार के सामने गौ रक्षा के लिए धर्म युद्ध करना पड़ रहा है. इस दौरान उनके शिष्यों ने लोगों के बीच एक पंफलेट वितरित किया, जिसमें लिखा था "जिंदा हिंदू लखनऊ चलें". "गौ माता की जय", "शंकराचार्य भगवान की जय", "हर हर महादेव" के उद्घोष के बीच लगभग 20 गाड़ियों के काफिले के साथ उन्होंने लखनऊ के लिए प्रस्थान किया. पत्रकारों द्वारा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान के संदर्भ में पूछे जाने पर कि "गौ माता को कोई खरोच नहीं पहुंचा सकता", स्वामी ने कहा कि यह सही समय है कि जो भी कहना है, वह कह दें. कोई पक्ष में बोलेगा, कोई विपक्ष में, लेकिन जो सच है, वह सभी जानते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जो कालनेमि हैं, वे कुछ नहीं बोलेंगे.यह भी पढ़ें: ईरान को बर्बाद करने में जुटा अमेरिका, आज रात मिसाइल लॉन्चर-फैक्ट्रियां होंगी तबाहसंकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसासंकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण आदि का पाठ कर लखनऊ के धर्म युद्ध यात्रा के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद निकले तो वाराणासी के बाबतपुर मार्ग पर पहुंचने के साथ ही रास्‍ते में जगह- जगह उनका स्वागत भी हो रहा है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह आंदोलन गौ माता की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. उनका मानना है कि गौ माता की सुरक्षा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक है. बता दें कि कांग्रेस और सपा ने भी उनके आंदोलन को समर्थन किया है.शंकराचार्य द्वारा प्रस्तावित सभा कार्यक्रम को अभी तक नहीं मिली है अनुमतिशंकराचार्य के लखनऊ में प्रस्तावित होने वाले सभा कार्यक्रम को अभी तक किसी भी प्रकार के प्रशासनिक अनुमति नहीं मिली है. बावजूद इसके शंकराचार्य कार्यक्रम को लेकर अड़े हुए हैं. उनका मानना है कि जो भी औपचारिकताएं हैं हमने पूरी कर ली है. जो फीस है वह भी हमने जमा कर दिया है. हमें उम्मीद है कि तीन-चार दिनों के अंदर हमें अनुमति मिल जाएगी. वाराणसी प्रशासन से सहयोग के संदर्भ मे बोले शंकराचार्य प्रशासन ने हमें रोक नहीं मतलब यात्रा की अनुमति है. भीड को लेकर के बोले शंकराचार्य मुझे नहीं पता कॉल मेरे साथ है मैं यहां से अकेला निकल रहा हूं जो भी होगा साथ आएगा.
ईरान को बर्बाद करने में जुटा अमेरिका, आज रात मिसाइल लॉन्चर-फैक्ट्रियां होंगी तबाह
ईरान को बर्बाद करने में जुटा अमेरिका, आज रात मिसाइल लॉन्चर-फैक्ट्रियां होंगी तबाह
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहा जंग का आज आठवां दिन है. ये लड़ाई किसी भी हाल में रूकने का नाम नहीं ले रहा है. इसी बीच अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने आज शनिवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा है कि आज रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा. इसी के आगे उन्होंने ये भी कहा कि, इस हमले का मकसद ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को भारी नुकसान पहुंचाना है. इस कार्रवाई से ईरान की मिसाइल क्षमता को काफी हद तक कमजोर किया जाएगा. इससे भी खास बात तो यह है कि, भारत का हमसफर कहलाने वाला रूस इस जंग के बीच ईरान को खुफिया मदद देने में लगा हुआ है, वो भी बंद दरवाजे के पीछे से ये सहायता दी जा रही है.इजराइल ने किया मेहराबाद एयरपोर्ट पर हवाई हमला दरअसल, बीते शुक्रवार की देर रात को इजराइल ने तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट पर हवाई हमला किया था, जिसके चलते भयंकर आग और धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया. वहीं, इस जंग में अमेरिका और इजराइल को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए रूस द्वारा ईरान की मदद की जा रही है. इसी सिलसिले में मॉस्को ने ईरान को मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य विमानों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई है.रूस की राजधानी मॉस्कों ने ईरान को मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य विमानों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई है. वॉशिंगटन पोस्ट ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि, रूस इस जंग से निपटने के लिए ईरान को ऐसी टारगेटिंग इंटेलिजेंस दे रहा है, जिससे वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों को आसानी से निशाना बना सके.यह भी पढ़ें: नेपाल के चुनावी नतीजों ने केपी ओली की बढ़ाई बीपी, बालेन शाह ने मारी बाजीभारत ने की ईरान की मदद ईरान का एक युद्धपोत जिसका नाम IRIS है, लावन भारत के कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है. इन्हीं सब दिक्कतों की वजह से ईरान ने 28 फरवरी को तकनीकी खराबी आने के बाद भारत से मदद मांगी थी. जिसे स्वीकार करते हुए भारत ने 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति दी और इसके बाद 4 मार्च को यह बंदरगाह पर ईरान की मदद के लिए जा पहुंचा. जहाज के 183 क्रू मेंबर फिलहाल कोच्चि में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं. IRIS नाम का लावन युद्धपोत हाल ही में भारत में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 और मिलान 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था, जो 15 से 25 फरवरी के बीच आयोजित हुए थे. इससे पहले अमेरिका ने भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS लावन देना को श्रीलंका के पास हमला कर उसे डुबों दिया था. इस हमले में लगभग 87 ईरानी नौसैनिकों की जान चली गई है.इजराइल को हथियार दें रहा अमेरिका बताया रहा है कि, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग में इजराइल को लगभग 151.8 मिलियन डॉलर के हथियार अमेरिका देने को तैयार है, क्योंकि अमेरिका ईरान को बर्बाद करने के लिए इजराइल का साथ देने में जरा भी चूकना नहीं चाहता है. इतना ही नहीं इसी बर्बादी के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुजतबा को उनका उत्तराधिकारी मानने से इनकार तक कर दिया था. ये वहीं अमेरिका है जिसकी वजह से US-इजराइल हमलों में ईरान में 1332 लोगों की मौत हो चुकी है. साथ ही ईरान में 1300 हमले, 14 मेडिकल सेंटरों को निशाना बनाया गया है. ईरान के हालात इतने बद से बत्तर हो चुके है कि कई जगहों पर पानी-बिजली की सप्लाई तक ठप हो चुकी है. ऐसे में दावा किया जा रहा है कि, ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चर भी तबाह हुए है. जिससे ईरान को भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है, इस नुकसान को लेकर ईरान का कहना है कि, कुवैत-बहरीन और UAE में 20 अमेरिकी बेस को नुकसान पहुंचा है.ईरान को बर्बाद करने में लगे ट्रम्पअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान की तबाही के लिए जमीनी स्तर पर अपने अमेरिकी सैनिकों को भेजने की फिराक में हैं. यह जानकारी कई सूत्रों के हवाले से दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के सहयोगियों और रिपब्लिकन नेताओं के साथ हुई बातचीत में युद्ध के बाद ईरान के भविष्य को लेकर अपनी योजनाओं की पोल खोली, जहां इन योजनाओं में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तेल के क्षेत्र में सहयोग की संभावना की बात कही है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प बड़े पैमाने पर जमीनी हमला करने की योजना पर चर्चा करने के बजाय वह सीमित संख्या में अपने अमेरिकी सैनिकों को विशेष रणनीतिक मिशनों के लिए भेजने का विचार कर रहे हैं. हालांकि, अभी तक इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी तरह का कोई भी आधिकारिक निर्णय नहीं किया है.
नेपाल के चुनावी नतीजों ने केपी ओली की बढ़ाई बीपी,  बालेन शाह ने मारी बाजी
नेपाल के चुनावी नतीजों ने केपी ओली की बढ़ाई बीपी, बालेन शाह ने मारी बाजी
नेपाल में बीते गुरुवार को हुए राष्ट्रीय चुनाव के बाद से वोटों की गिनती आज सुबह से शुरू हो चुकी है. पिछले साल हुए Gen-Z हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद से यह देश में पहला आम चुनाव हुआ है. जो 77 सतहत्तर जिलों में 23 हजार केंद्रों पर मतदान हुआ, इसके आने वाले नतीजों पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई है. ये वहीं विरोध प्रदर्शन है जिसके चलते पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गठबंधन सरकार गिर गई थी. बता दें, नेपाल में हुए आम चुनावों में लगभग 60 प्रतिशत वोटिंग हुई है. चुनाव में पूर्व पीएम केपी शर्मी ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल यानि (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) सीपीएन (यूएमएल), शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस और पुष्प दहल प्रजंड की CPN (माओइस्ट सेंटर) के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला है. जहां बालेन शाह की पार्टी आरएसपी ने 69 उनहत्तर सीटों से ज्यादा की बढ़त बनाती नजर आ रही है. वहीं केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन यूएमएल केवल 5 सीटों पर आगे चल रही है.बालेन शाह की सुनामी के आगे बिखरे ओलीवहीं, नेपाली कांग्रेस भी 5 सीटों पर ही अपनी बढ़त बनाए हुए है. तो वहीं, नेपाली कम्‍युनिस्‍ट पार्टी 3 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. केपी ओली खुद भी बालेन शाह की सुनामी के आगे पिछड़ते ही जा रहे हैं. काठमांडू के मेयर रह चुके पूर्व रैपर बालेंद्र शाह यानि (बालेन) करीब 6100 (इकसठ) सौ वोटों से ओली से आगे चल रहे हैं. बालेन की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी भी इस चुनावी मैदान में हुंकार भरती नजर आई हैं. युवाओं में बेहद लोकप्रिय बालेन नेपाल के पुराने दिग्गजों को कड़ी चुनौती दे रहे हैं.49 (उनचास) साल के गगन थापा भी प्रधानमंत्री बनने की रेस में हैं. वह नेपाली कांग्रेस में टूट के बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी के नए प्रमुख हैं. आपको बता दें, बलेंद्र शाह यानि (बालेन शाह) नेपाल के एक प्रमुख युवा राजनेता, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और पूर्व रैपर हैं, जिन्होंने मई 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के 15वें मेयर के रूप में चुनाव जीतकर इतिहास रचा था. लेकिन इस साल जनवरी 2026 में मेयर पद से इस्तीफा देने के बाद से वह अब 2026 के आम चुनावों के लिए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानि(RSP) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चर्चा में हैं.यह भी पढ़े: इंग्लैंड के वेलिंगबोरो के मेयर की महापौर से शिष्टाचार भेंट, शहरी विकास पर हुई चर्चागजब की बात तो यह है कि, नेपाल में राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी बंपर जीत की ओर बढ़ रही है. Gen-Z के फेवरेट बालेंद्र शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली को काफी पीछे छोड़ दिया है. कोसी, मदेश, बागमती, लुंबीनी लगभग सभी प्रांतों में राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी बढ़त बनाए हुए है. बता दें. मतगणना शुरू होने के 24 घंटे के भीतर सीधे 165 सीटों (एफपीटीपी) के परिणाम जारी करने का दावा किया है. नेपाल के आम चुनाव के शुरुआती रुझान सियासी समीकरण बदलने के संकेत दे रहे हैं। शुरुआती आंकड़ों में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी पारंपरिक दलों को कड़ी चुनौती देती दिख रही है। करीब 60 फीसदी मतदान के बीच केपी शर्मा ओली और गगन थापा जैसे बड़े नेता भी चुनावी मैदान में हैं। इस चुनाव में भ्रष्टाचार और सिस्टम में बदलाव सबसे बड़े मुद्दों के तौर पर उभरकर सामने आए हैं