BHU में 40 साल बाद लौटा ‘आसमान का क्लासरूम, अब एक महीने में समझ सकेंगे खगोलीय विज्ञान...

वाराणसी:काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में करीब 40 साल बाद अत्याधुनिक डिजिटल तारामंडल (प्लैनेटेरियम) की स्थापना की गई है, BHU का ज्योतिष विभाग अब आधुनिक और वैदिक खगोल विज्ञान के समन्वय का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. नई तकनीक की मदद से छात्र अब ग्रहों की चाल, सूर्य की स्थिति, ग्रहण और अन्य आकाशीय घटनाओं को वास्तविक अनुभव के साथ समझ सकेंगे.
परियोजना निदेशक प्रोफेसर शत्रुघ्न त्रिपाठी ने बताया कि जनवरी 2026 में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना की शुरुआत हुई थी. इसके तहत तीन प्रकार के यंत्र लगाए जाने हैं. फिलहाल डिजिटल तारामंडल स्थापित हो चुका है, जबकि अगले सप्ताह तक अत्याधुनिक टेलीस्कोप भी स्थापित कर दिया जाएगा..इसके बाद पारंपरिक खगोलीय यंत्रों का निर्माण किया जाएगा.
6 महीने का पाठ अब 1 महीने में
प्रो. त्रिपाठी के अनुसार, पहले “गोल परिभाषा” जैसे जटिल खगोलीय अध्याय को पढ़ाने में करीब छह महीने लग जाते थे, लेकिन अब डिजिटल तकनीक की मदद से छात्र इसे सिर्फ एक महीने में आसानी से समझ पा रहे हैं. तारामंडल में ग्रहों की स्थिति और आकाशीय घटनाओं को लाइव विजुअल के जरिए दिखाया जाएगा.
त्योहारों की तिथियों का भ्रम होगा खत्म
BHU के ज्योतिष विभाग ने देशभर के ज्योतिषाचार्यों के साथ मिलकर त्योहारों की अलग-अलग तिथियों को लेकर होने वाले विवाद को खत्म करने की दिशा में भी पहल शुरू की है. विभाग का कहना है कि आधुनिक उपकरणों की मदद से तैयार पंचांग अधिक सटीक और वैज्ञानिक होंगे.
आधुनिक तकनीक से मिलेगा वास्तविक अनुभव
डिजिटल तारामंडल में विशेष सॉफ्टवेयर और ऑप्टिकल प्रोजेक्टर का उपयोग किया जा रहा है. इसके जरिए दुनिया के किसी भी स्थान और किसी भी समय की आकाशीय स्थिति को डोम स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जा सकता है. “स्टार बॉल” तकनीक छात्रों को वास्तविक रात के आकाश जैसा अनुभव देगी.
विज्ञान और संस्कृति दोनों संकायों को मिलेगा लाभ
यह सुविधा केवल ज्योतिष विभाग तक सीमित नहीं रहेगी. संस्कृति और विज्ञान दोनों संकायों के छात्र इसका लाभ उठा सकेंगे. भौतिकी विभाग के प्रोफेसर अमित कुमार पाठक भी छात्रों के साथ इस परियोजना से जुड़े हुए हैं. विभाग जल्द ही खगोलीय विज्ञान से जुड़ा डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की तैयारी कर रहा है.
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1918 से जुड़ा है विभाग का गौरवशाली इतिहास
गौरतलब है कि BHU के ज्योतिष विभाग की स्थापना 1918 में Madan Mohan Malaviya ने प्राचीन और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के समन्वय के उद्देश्य से की थी. 1982 से 1985 के बीच विभाग में एक लघु तारामंडल स्थापित किया गया था, लेकिन समय के साथ वह तकनीकी रूप से अप्रासंगिक हो गया. अब नई वेधशाला और आधुनिक तारामंडल के जरिए BHU अंतरिक्ष विज्ञान और वैदिक ज्योतिष के शोध को नई दिशा देने जा रहा है.



